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411 समाचार
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अलेक्ज़ेंडर प्रथम

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अलेक्सांदर प्रथम सितंबर 2026 अलेक्ज़ेंडर प्रथम (रूसी: Александр I Павлович; जन्म: 23 दिसंबर 1777 – मृत्यु: 1 दिसंबर 1825) रूस के सम्राट थे। वे 23 मार्च 1801 से अपनी मृत्यु तक रूसी साम्राज्य पर शासन करते रहे। उन्हें अलेक्ज़ेंडर द ब्लेस्ड (धन्य अलेक्ज़ेंडर) भी कहा जाता है। वे सम्राट पॉल प्रथम के ज्येष्ठ पुत्र और महारानी कैथरीन महान के पोते थे। उनके लंबे शासनकाल में रूस ने नेपोलियन बोनापार्ट के खिलाफ निर्णायक भूमिका निभाई और यूरोपीय राजनीति में एक महान शक्ति के रूप में स्थापित हो गया। प्रारंभिक जीवन और शिक्षा अलेक्ज़ेंडर का जन्म सेंट पीटर्सबर्ग के शीतकालीन महल में हुआ था। उनकी दादी कैथरीन महान ने उनकी परवरिश पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने फ्रांसीसी भाषा, साहित्य, इतिहास और प्रबुद्धता के विचारों की शिक्षा दी। उनके मुख्य शिक्षक स्विस दार्शनिक फ्रेडरिक सीज़र ला हार्प थे, जिन्होंने उनमें उदारवादी और मानवीय विचारों को विकसित किया। युवावस्था में अलेक्ज़ेंडर अत्यंत आकर्षक व्यक्तित्व वाले, संवेदनशील और सुधारवादी विचारों वाले युवक थे। वे रूस में दास प्रथा समाप्त करने, शिक्षा फैलाने और प्रशासन को आधुनिक बनाने के सपने देखते थे। लेकिन उनके पिता पॉल प्रथम के कठोर और मनमौजी शासन ने उनके मन पर गहरा प्रभाव डाला। सिंहासनारोहण 23 मार्च 1801 की रात को पॉल प्रथम की हत्या कर दी गई। अलेक्ज़ेंडर को तत्काल सिंहासन सौंप दिया गया। कई इतिहासकारों का मानना है कि वे इस षड्यंत्र की जानकारी रखते थे, यद्यपि सीधे भाग नहीं लिया था। सिंहासन संभालते ही उन्होंने उदारवादी कदम उठाए। राजनीतिक बंदियों को रिहा किया, सेंसरशिप को ढीला किया और कुलीन वर्ग के अधिकारों की रक्षा का आश्वासन दिया। घरेलू सुधार शासन के प्रारंभिक वर्षों में अलेक्ज़ेंडर ने कई महत्वपूर्ण सुधार किए। उन्होंने मिखाइल स्पेरांस्की जैसे योग्य सलाहकारों की नियुक्ति की। शिक्षा के क्षेत्र में बड़े परिवर्तन हुए। कई नए विश्वविद्यालय स्थापित किए गए, विद्यालयों का जाल बिछाया गया और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विशेष समितियाँ बनाई गईं। कानून व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के प्रयास भी हुए। हालाँकि दास प्रथा (सर्फडम) को पूरी तरह समाप्त करने का साहस वे नहीं दिखा सके, फिर भी कुछ क्षेत्रों में किसानों की स्थिति सुधारने के छोटे-मोटे कदम उठाए गए। बाद के वर्षों में वे अधिक रूढ़िवादी हो गए और रहस्यवादी धार्मिक विचारों की ओर मुड़ गए। नेपोलियन युद्ध और 1812 का महान देशभक्ति युद्ध अलेक्ज़ेंडर के शासनकाल की सबसे महत्वपूर्ण घटना नेपोलियन के साथ संघर्ष थी। शुरुआत में रूस और फ्रांस के बीच तिलसिट की संधि हुई, लेकिन बाद में संबंध बिगड़ते गए। 1812 में नेपोलियन ने विशाल सेना लेकर रूस पर आक्रमण किया। इस युद्ध को रूसी इतिहास में “देशभक्ति युद्ध” कहा जाता है। रूसी सेना ने कुशलतापूर्वक पीछे हटने की रणनीति अपनाई। मास्को तक नेपोलियन पहुँचा, लेकिन शहर में भीषण आग लग गई और कठोर रूसी सर्दी ने फ्रांसीसी सेना को बर्बाद कर दिया। अलेक्ज़ेंडर ने युद्ध को अंत तक जारी रखा और यूरोपीय सहयोगियों के साथ मिलकर नेपोलियन की अंतिम हार सुनिश्चित की। वियना कांग्रेस और पवित्र गठबंधन 1814-1815 में वियना कांग्रेस में अलेक्ज़ेंडर ने प्रमुख भूमिका निभाई। उन्होंने यूरोप में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए पवित्र गठबंधन (होली अलायंस) की नींव रखी। रूस, ऑस्ट्रिया और प्रशिया इस गठबंधन के मुख्य सदस्य बने। इस दौरान रूसी साम्राज्य की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा चरम पर पहुँच गई। अंतिम वर्ष और मृत्यु बाद के वर्षों में अलेक्ज़ेंडर अत्यधिक धार्मिक और अंतर्मुखी हो गए। उन्होंने सैन्य बस्तियों की स्थापना की, जो जनता में बहुत अलोकप्रिय साबित हुईं। 1825 में वे दक्षिणी रूस की यात्रा पर निकले। 1 दिसंबर 1825 को टैगानरोग में अचानक उनकी मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु को लेकर कई रहस्यमय अफवाहें उड़ीं, जिनमें यह भी शामिल था कि वे मरे नहीं बल्कि संन्यासी बनकर चले गए। लेकिन अधिकांश इतिहासकार उनकी प्राकृतिक मृत्यु को स्वीकार करते हैं। ऐतिहासिक महत्व और विरासत अलेक्ज़ेंडर प्रथम रूसी इतिहास के सबसे जटिल और प्रभावशाली शासकों में से एक हैं। शुरुआती उदारवादी आदर्शों और बाद के रूढ़िवादी रुख ने उनके व्यक्तित्व को रहस्यमय बना दिया। नेपोलियन के खिलाफ विजय ने रूस को यूरोप की महाशक्ति बना दिया। उनके शासनकाल में रूसी साम्राज्य का भौगोलिक विस्तार भी हुआ। आज भी उन्हें नेपोलियन विजेता और यूरोपीय शांति के निर्माता के रूप में याद किया जाता है। उनकी नीतियाँ, युद्ध और सुधार आज भी इतिहासकारों के अध्ययन का विषय हैं।thumb|280px|अलेक्ज़ेंडर प्रथम का चित्र इन्हें भी देखें नेपोलियन बोनापार्ट वियना कांग्रेस सन्दर्भ श्रेणी:रूस के सम्राट श्रेणी:रोमानोव वंश श्रेणी:19वीं शताब्दी के शासक श्रेणी:नेपोलियन युद्ध