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इन्द्रवर्मन प्रथम
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इन्द्रवर्मन् I राजा पृथ्वीन्द्रवर्मन यशोवर्मन प्रथम I पृथ्वीन्द्रवर्मन पृथ्वीन्द्रदेवी
इन्द्रवर्मन् १ (ឥន្រ្ទវរ្ម័នទី១) खमेर साम्राज्य के एक शासक थे। जिन्होंने हरिहरलया के बीच ८७७/७८ और ८८९/८९० राज्य किया
इन्द्रवर्मन् के पूर्वजों
प्राह कोह् मंदिर के शिलालेख के अनुसार पवित्रा पर अंकित सोमवार,२५ जनवरी ८८० सदी (नींव दसता ७१३ एBhattacharya, 2009, pp. 25-41 तीन जोड़े मंदिरों के मिनार तीन मृतक राजा और उनकी रानियों के लिए उनके द्वारा बनाया गया था जो की एक रूप में "स्मारक मंदिर" के रूप में देखा जा सकता है जो की शिलालेख के रूप में दरवाजे के चोखट में अंकित है। मध्य मिनार जयवर्मन द्वितीय और उनकी रानी धरनिन्द्ररादेवी को सम्रपित किया गया है। उन्हें उनके मरणोपरांत नाम परमेशवरा के नाम से जाना जाता है। (K. 320a),Pou, 2002, pp. 55-57 उत्तरी छोर वाला रूूूूद्रवर्मन और उनकी पत्नी राजेन्द्रादेवी (के३१८ए) उनके नाना और नानी,और दक्षिणी मिनार पृथ्वेन्द्रवर्मन (पृथ्वेन्द्रशवरा) और पृथ्वेन्द्रदेवी के नाम समर्पित किया।(३१५ए) (७१३बी)
इन्द्रवर्मन् प्रथम कि पत्नी, इन्द्रादेवी शम्भूपुरा,व्यधापुरा, और अनन्दितापुरा राज परिवार की वंशज थी (फुनान) 110-111 ्
पृथ्वीन्द्रवर्मन और रूद्रवर्मन
वास्तव में ९ वीं सदी में राजाओं के पारम्परिक उत्तराधिकार Coedès George George Coedès Walter F. Vella trans.Susan Brown Cowing The Indianized States of Southeast Asia 1968 University of Hawaii Press 978-0-8248-0368-1110–111,last page fold-out विवादित था। कुछ पुरालेखवेत्ता जिनमें कमलेश्वर भट्टाचार्य और कार्ल-हाइ्न्ज गोलजियो शामिल हैं। जयवर्मन तृतीय के काल में अल्प गतिविधि और अभिलेखो की अनुपस्थिति में और प्राह को के समर्पित मिनार तथा रोलुओस में पायी गई संस्कृत लेखों के वर्णन से ज्ञात होता है कि उनके और इन्द्रवर्मन् के बीच दो और राजा रूद्रवर्मन और पृथ्वेन्द्रवर्मन हुए हैं।.http://www.khmerstudies.org/publications/siksacakr/no2/consideration.pdf Considerations on the Chronology and History of 9th Century Cambodia Golzio Karl-Heinz Center for Khmer Studies - Siksacakr No 2 https://web.archive.org/web/20080820165858/http://khmerstudies.org/publications/siksacakr/no2/consideration.pdf 20 August 2008 dead 2009-11-24
लोलइ शिलालेख के अनुसार K 324 के इन्द्रवर्मन् के उत्तराधिकारी यशोवर्मन, दिनांक ८ जुलाई ८९३ सदी, रूद्रवर्मन उनकी माँ धरनेन्द्रदेवी, के छोटे भाई थे जयावर्मन द्वितीय की रानी व पत्नी और जयावर्मन तृतीय की माँ जिसेके बारे में अपने बाकांग शिलालेख इन्द्रवर्मन् उल्लेख के तहत अपने मरणोपरांत नाम विष्णुलोक में K 826 छंद XXX, दिनांक ८८१/८२ सदी.Bhattacharya, 2009, p. 58
इंद्रवरामन के स्मारक और सार्वजनिक इमारतें
८०० सदी में जयवर्मन द्वितीय खमेर साम्रजय के संस्थापक माने जाते हैं। लेकिन इन्द्रवर्मन् प्रथम को श्रेय जाता है जिन्होने भवन निर्माण के कार्य में प्रगति की तथा आने वाले अंगकोरीयन राजा उनका अनुसरण करे की नीव रखी। राजा ने अपने प्रथम कार्य में चावल की खेती के लिए नहरों का जाल बिछाया। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक बड़ा बांध जिसमें वर्षा में बरसात का पानी भरकर सुखे के समय उसे धीरे धीरे नहरों के एक जाल में छोड़ा जाये।
उत्तराधिकार
इन्द्रवर्मन प्रथम 889 में मारे गये मरणोपरांत इशवरालोका, नाम प्राप्त किया और बेटे यशोवर्मन उनके उत्तराधिकारी बनें I I.:111
नोट
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सन्दर्भ
Bhattacharya Kamaleswar in collaboration with Karl-Heinz Golzio A Selection of Sanskrit Inscriptions from Cambodia 2009 Center for Khmer Studies 9789995051075 Bhatta2009
Higham Charles Charles Higham (archaeologist) The Civilization of Angkor 2001 Phoenix 1-84212-584-2 Higham2001
Saveros Pou Saveros Pou Nouvelles inscriptions du Cambodge Tome II et III French 2002 EFEO Paris 2-85539-617-4 Pou2002
पहले सेPṛthivīndravarman सम्राट के अंगकोर877-889/90सफल रहा द्वाराYaśovarman मैं
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