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बिश्नोई
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बिश्नोई अथवा विश्नोई पश्चिमी थार रेगिस्तान और भारत के उत्तरी राज्यों में पाया जाने वाला एक समुदाय है। इस समुदाय का प्रमुख धार्मिक स्थान मुकाम हैं।जाम्भोजी,विष्णोई संप्रदाय और साहित्य माहेश्वरी डाॅ हीरालाल के आर पब्लिशरस 1911 जयपुर 511,512,529,530,532,537,533,612,613,515 समसुदीन, आंछरे हजूरी, पदम भगत तेली, एकजी हजूरी, अमियादीन, जोधो रायका, लालचंद नाई, आसानंद भाट, कोन्होजी बारहठ,दीन मोहम्मद,रायचंद सुथार,कुलचंद अग्रवाल इत्यादि प्रमुख संत थे जिन्होंने विष्नोइ संप्रदाय अंगीकार किया था। इस समुदाय के संस्थापक जाम्भोजी महाराज है। जाम्भोजी महाराज द्वारा बताये 29 नियमों का पालन करने वाला बिश्नोई है। "बिश्नोई" शब्द की उत्पति 20(बीस)+9(नौ) = बिश्नोई से हुई है। कई मान्यताओं के अनुसार श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान विष्णु के अवतार माने गए है इनसे बना 'विष्णोई' शब्द कालातंर में परिवर्तित होकर विश्नोई या बिश्नोई हो गया। अधिकांश बिश्नोई जाटhttps://www.bbc.com/hindi/india-43654515https://hinduland.in/bishnoi-caste/ जातियों से उत्पन्न है।www.google.com/amp/s/www.hindustantimes.com/punjab/bishnoi-faces-bumpy-ride-in-jat-vs-non-jat-contest/story-O67GzOTye68l3Af2h99d3L_amp.html
बिश्नोई पश्चिमी भारत राजस्थान मुख्य:राजस्थान,हरियाणाअन्य:पंजाब,उत्तर प्रदेश,मध्य प्रदेश,उत्तराखंड हिन्दी राजस्थानी पंजाबी मारवाड़ी ब्रजभाषा हरयाणवी राजस्थानी हिंदू thumb|250px|मुक्तिधाम मुकाम, राजस्थान के बीकानेर जिले के नोखा में बिश्नोई समाज का मुख्य मंदिर। गुरु जम्भेश्वर भारत "विष्णु-विष्णु तू भण रे प्राणी" बीकानेर
खेजड़ी के हरे वृक्षों की रक्षा करने के लिए अमृता देवी बिश्नोई के नेतृत्व में 363 बिश्नोईयों ने अपने प्राण न्यौछावर कर दिये थे।https://m.patrika.com/amp-news/jodhpur-news/khejarli-mela-in-jodhpur-1-5065337/ पेड़ों की रक्षार्थ 363 शहीदों की स्मृति में मनाया जा रहा खेजड़ली का पर्यावरण मेला, पत्रिका ने निभाई जिम्मेदारी bhati Harshwardhan Patrika News hi 2020-04-21 https://web.archive.org/web/20191014133038/https://m.patrika.com/amp-news/jodhpur-news/khejarli-mela-in-jodhpur-1-5065337/ 14 अक्तूबर 2019 dead बिश्नोई विशुद्ध शाकाहारी होते हैं। बिश्नोई विशुद्ध शाकाहारी एवं वन्यजीवों पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला समुदाय हैं।बिश्नोई समुदाय के लोग ज्यादातर किसान खेती पशुपालन करते हैं।A Glossary of the Tribes and Castes of the Punjab and North-West Frontier Province: A.-K https://books.google.com/books?id=LPsvytmN3mUC&pg=PA114 1997 Atlantic Publishers & Dist 978-81-85297-69-9 114– 20 अप्रैल 2020 https://web.archive.org/web/20140107181632/http://books.google.com/books?id=LPsvytmN3mUC 7 जनवरी 2014 live
बिश्नोई समाज की पर्यावरण संरक्षण और वन एवं वन्य जीव संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका है।Ed. K.R. Gupta Klaus Bosselmann & Prasenjit Maiti Global Environment Probles And Policies Vol# 4 https://books.google.com/books?id=-PYO0UWQpIAC&pg=PA31 April 2008 Atlantic Publishers & Dist 978-81-269-0848-6 31– इनके द्वारा प्रकृति और वन्य जीवों को बचाने के लिए संघर्ष के कई उदाहरण मिलते हैं और इन्होने अखिल भारतीय जीव रक्षा बिश्नोई महासभा की स्थापना की है।Pankaj Jain Dharma and Ecology of Hindu Communities: Sustenance and Sustainability https://books.google.com/books?id=VYcGDAAAQBAJ&pg=PA69 22 April 2016 Routledge 978-1-317-15160-9 69–70।वन वन्य जीवों के संरक्षण के लिए बिश्नोई टाईगर फोर्स संस्था बनाईं गई हैं जो चौबिसों घंटे वन्यजीवों की शिकार कि घटनाओं के विरूद्ध कार्यवाही करती हैं शिकारीयोंं को घटनास्थल से पकड़ने वन्य विभाग पुलिस के सुपुर्द करने के अलावा कोर्ट में शिकारीयों के विरुद्ध पैरवी करती हैं l
इतिहास
सम्वत् 1542 तक गुरु जाम्भोजी की कीर्ति चारों और फेल गई थी और इसी साल राजस्थान में भयंकर अकाल पड़ा जिसमें जाम्भोजी महाराज ने अकाल पीडि़तों की अन्न व धन्न से भरपूर सहायता की। सम्वत् 1542 की कार्तिक बदी 8 को जांभोजी महाराज ने एक विराट यज्ञ का आयोजन समराथल धोरे पर कियाश्रीकृष्ण बिश्नोई Biśnoī dharma-saṃskāra https://books.google.com/books?id=VQMcAAAAIAAJ 1991 Dhoka Dhorā Prakāśana 36 और 29 नियमों की दीक्षा एवं पाहल देकर बिश्नोई समुदाय की स्थापना की। बिश्नोई समुदाय में दीक्षित होने वाले अधिकांश व्यक्ति जाट जाति के थे।
www.google.com/amp/s/www.hindustantimes.com/punjab/bishnoi-faces-bumpy-ride-in-jat-vs-non-jat-contest/story-O67GzOTye68l3Af2h99d3L_amp.html
खेजड़ली बलिदान
thumb|250px|खेजड़ली बलिदान स्मारक, जोधपुर।
खेजड़ली बलिदान 12 सितंबर सन् -1730 में जोधपुर के निकट खेजड़ली ग्राम में अमृता देवी बिश्नोई के नेतृत्व में हरे खेजड़ी के वृक्षों को काटने से बचाने के लिए बिश्नोई धर्म के 363 लोगों ने चौरासी गांवों सेआकर पेड़ों से चिपक कर अपने प्राणों का बलिदान दिया।मारवाड़ केअभय सिंह महाराजा के द्वारा मेहरानगढ़ फोर्ट में फूल महल बनाए जाने हेतु खेजड़ी के हरे पेड़ काटने केआदेश दीवान गिरधर दास भंडारी द्वाराअनुपालन कराने में मारवाड़ के महाराजा के सैनिकों द्वारा निर्दोष बिश्नोई धर्म के लोगों का हत्याकांड किया कारित गया।Banavārī Lāla Sahū Paryāvaraṇa saṃrakshaṇa evaṃ Khejaṛalī balidāna https://books.google.com/books?id=TtXaAAAAMAAJ 2002 Bodhi Prakāśana
यह विश्व भर में हरे वृक्षों को बचाने के लिए अद्वितीय और सर्वोच्च बलिदान है!!
इन्हें भी देखें
गुरु जम्भेश्वर (जाम्भोजी महाराज)
मुकाम
समराथल
जाम्भोलाव धाम
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सन्दर्भ
श्रेणी:राजस्थान के मंदिर
श्रेणी:हिन्दू मन्दिर
श्रेणी:बिश्नोई
श्रेणी:राजस्थान के सामाजिक समुदाय
श्रेणी:भारतीय उपनाम
श्रेणी:हरियाणा के सामाजिक समुदाय
श्रेणी:मध्य प्रदेश के सामाजिक समुदाय
श्रेणी:राजस्थान के सामाजिक समुदाय
श्रेणी:उत्तर प्रदेश के सामाजिक समुदाय