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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

मुकुटधर पाण्डेय

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मुकुटधर पाण्डेय 1895 9 30 {६ नवम्बर १९८९} {छत्तीसगढ़ राज्य के रायगढ़ जिला, छत्तीसगढ़ के एक छोटे से मोहल्ले बैकुंठपुर में।} लेखक, निबंधकार, विद्वान, कवि भारतीय छायावाद और अन्य निबंध (१९८३) पद्मश्री मुकुटधर पाण्डेय (१८९५ - ६ नवम्बर १९८९) हिन्दी कवि थे। वे छायावाद के जनक माने जाते हैं। परिचय उनका जन्म छत्तीसगढ़ राज्य के बिलासपुर जिले के एक छोटे से गाँव बालपुर में ३० सितम्बर सन् १८९५ ई० को हुआ।Chhattisgarh Pre. B.Ed. Examination http://books.google.co.in/books?id=wBxi6BRZMWsC&pg=RA1-PA43 लाल जैन उपकार प्रकाशन २०१२ 9788174829344 21 फ़रवरी 2014 https://web.archive.org/web/20140301193957/http://books.google.co.in/books?id=wBxi6BRZMWsC&pg=RA1-PA43 1 मार्च 2014 live वे अपने आठ भाईयों में सबसे छोटे थे। इनकी प्रारंभिक शिक्षा गाँव में ही हुई। इनके पिता पं.चिंतामणी पाण्डेय संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान थे और भाइयों में पं० लोचन प्रसाद पाण्डेय जैसे हिन्दी के ख्यात साहित्यकार थे। बाल्‍यकाल में ही पिता की मृत्यु हो जाने पर बालक मुकुटधर पाण्डेय के मन में गहरा प्रभाव पड़ा किन्तु वे अपनी सृजनशीलता से विमुख नहीं हुए। उनका निधन ६ नवम्बर १९८९ को हुआ। साहित्यिक अवदान सन् १९०९ में १४ वर्ष की उम्र में उनकी पहली कविता आगरा से प्रकाशित होने वाली पत्रिका 'स्वदेश बांधव' में प्रकाशित हुई एवं सन् १९१९ में उनका पहला कविता संग्रह ‘पूजा के फूल’ प्रकाशित हुआ। देश की सभी प्रमुख पत्रिकाओं में लगातार लिखते हुए मुकुटधर पाण्डेय ने हिन्दी पद्य के साथ-साथ हिन्दी गद्य के विकास में भी अपना अहम योग दिया। पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित अनेक लेखों व कविताओं के साथ ही उनकी पुस्तकाकार रूप में प्रकाशित कृतियाँ इस प्रकार हैं – ‘पूजाफूल (१९१६), शैलबाला (१९१६), लच्छमा (अनूदित उपन्यास, १९१७), परिश्रम (निबंध, १९१७), हृदयदान (१९१८), मामा (१९१८), छायावाद और अन्य निबंध (१९८३), स्मृतिपुंज (१९८३), विश्वबोध (१९८४), छायावाद और श्रेष्ठ निबंध (१९८४), मेघदूत (छत्तीसगढ़ी अनुवाद, १९८४) आदि प्रमुख हैं। रचनाएं पूजाफूल (१९१६), शैलबाला (१९१६), लच्छमा (अनूदित उपन्यास, १९१७), परिश्रम (निबंध, १९१७), हृदयदान (१९१८), मामा (१९१८), छायावाद और अन्य निबंध (१९८३), स्मृतिपुंज (१९८३), विश्वबोध (१९८४), छायावाद और श्रेष्ठ निबंध (१९८४), मेघदूत (छत्तीसगढ़ी अनुवाद, १९८४) छायावाद के प्रवर्तक पुरस्कार हिन्‍दी के विकास में योगदान के लिये इन्हें विभिन्न अलंकरण एवं सम्मान प्रदान किये गये। भारत सरकार द्वारा इन्हें सन् १९७६ में `पद्म श्री’ से नवाजा गया। पं० रविशंकर विश्‍वविद्यालय द्वारा भी इन्हें मानद डी लिट की उपाधि प्रदान की गई। सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ छायावाद के मुकुट : संजीव तिवारी का आलेख श्रेणी:छत्तीसगढ़ का साहित्य श्रेणी:छत्तीसगढ़ के हिंदी साहित्यकार श्रेणी:पद्मश्री प्राप्तकर्ता श्रेणी:हिन्दी कवि श्रेणी:हिन्दी लेखक श्रेणी:हिन्दी निबन्धकार श्रेणी:साहित्यकार श्रेणी:भारतीय कवि श्रेणी:1895 में जन्मे लोग श्रेणी:१९८९ में निधन श्रेणी:छत्तीसगढ़ के लोग