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आघातवर्धनीयता
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right|thumb|300px|सोने की पन्नी, उसके आघातवर्धनीयता के गुण के कारण ही सम्भव हो पाती है।
किसी पदार्थ को दबाने पर (या संपीडक प्रतिबल की स्थिति में) विकृत होकर दाब के लम्बवत दिशा में फैलने का गुण आघातवर्धनीयता (Malleability) कहलाता है। आघातवर्धनीय पदार्थों को हथौड़े से पीटकर या बेलकर (रोलिंग करके) आसानी से चपटा किया जा सकता है। धातुएँ प्रायः आघातवर्धनीय हैं। सोना, लोहा, अलुमिनियम, ताँबा, पीतल, चाँदी, सीसा आदि आघातवर्धनीय हैं। आधुनिक आवर्त सारणी के १ से १२ तक के समूहों के तत्त्व आघातवर्ध्य हैं।
इन्हें भी देखें
तन्यता
भंगुरता
श्रेणी:पदार्थ के गुण