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डैमोक्लॉइड
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डैमोक्लॉइड (Damocloid) खगोल विज्ञान में सौर मंडल के लघु-ग्रहों या क्षुद्रग्रहों का एक विशिष्ट और दुर्लभ वर्ग है। इन पिंडों की मुख्य पहचान यह है कि इनकी कक्षाएँ 'हैली-प्रकार के धूमकेतुओं' और 'लंबे समय तक परिक्रमा करने वाले धूमकेतुओं' के समान अत्यधिक अंडाकार और झुकी हुई होती हैं।"A first look at the Damocloids"अगस्त 2026 InternetArchiveBot
हालाँकि, जब ये पिंड सूर्य के करीब (उपसौर) आते हैं, तो वे वास्तविक धूमकेतुओं की तरह कोई गैस, धूल का 'कोमा' या चमकती हुई पूंछ नहीं दिखाते हैं। इस समूह का नाम इसके प्रोटोटाइप पिंड, 5335 डैमोक्लेस के नाम पर रखा गया है, जिसे 1991 में ऑस्ट्रेलियाई खगोलशास्त्री रॉबर्ट एच. मैकनॉट ने खोजा था।Jewitt David A first look at the Damocloid asteroids The Astronomical Journal 129 1 2005 530-538 10.1086/426328
खगोल भौतिकीविदों का सबसे पुख्ता सिद्धांत यह है कि डैमोक्लॉइड वास्तव में मृत धूमकेतु या सुप्त धूमकेतु हैं।
जब 'ओर्ट बादल' या बाहरी सौर मंडल का कोई धूमकेतु बार-बार सूर्य के करीब से गुजरता है, तो अत्यधिक सौर विकिरण के कारण उसकी सतह पर मौजूद सारी 'वाष्पशील सामग्री' पिघलकर अंतरिक्ष में उड़ जाती है। लाखों वर्षों के बाद, जब यह सारी बर्फ समाप्त हो जाती है, तो केवल एक गहरा, चट्टानी और धूल भरा आंतरिक कोर बच जाता है। यही मृत और सूखा कोर डैमोक्लॉइड कहलाता है। चूंकि इन पर अब कोई बर्फ नहीं बची है, इसलिए सूर्य के करीब आने पर भी इनमें कोई पूंछ नहीं बनती।Fernández Julio A. Sosa Andrea Gallardo Tabaré Brunner Julián The Damocloids: An updating of their dynamical status Planetary and Space Science 118 2015 14-23
डैमोक्लॉइड्स की कक्षाएँ सामान्य क्षुद्रग्रहों (जैसे मुख्य बेल्ट क्षुद्रग्रहों) से पूरी तरह भिन्न होती हैं:
अत्यधिक उत्केंद्रता: इनकी कक्षा बहुत अधिक अंडाकार होती है। इनका 'उपसौर' अक्सर मंगल या बृहस्पति की कक्षा के पास होता है, जबकि इनका 'अपसौर' (सूर्य से सबसे दूर का बिंदु) अरुण या वरुण की कक्षा से भी बाहर तक फैला होता है।
उच्च झुकाव: सामान्य ग्रह सौर मंडल के एक समतल में परिक्रमा करते हैं, लेकिन डैमोक्लॉइड्स की कक्षाएँ इस समतल के सापेक्ष बहुत अधिक झुकी होती हैं (अक्सर 90° तक)।
प्रतिगामी कक्षाएँ: कई डैमोक्लॉइड्स 'प्रतिगामी' कक्षा में सूर्य की परिक्रमा करते हैं। इसका अर्थ है कि वे ग्रहों के घूमने की दिशा के विपरीत (उल्टी दिशा में) चक्कर लगाते हैं। उदाहरण के लिए, डैमोक्लॉइड 20461 डियोरेट्सा की कक्षा उल्टी है, इसीलिए इसका नाम 'Asteroid' (क्षुद्रग्रह) की स्पेलिंग को उल्टा लिखकर रखा गया है।Nakamura Tsuko Yoshikawa Makoto Earth-crossing asteroids and dormant comets Publications of the Astronomical Society of Japan 50 1998 477-481"The DAMOCLOIDS"अगस्त 2026 InternetArchiveBot "JPL Small-Body Database Search Engine: asteroids and T-Jupiter"
अपने धूमकेतु मूल के कारण, डैमोक्लॉइड्स सौर मंडल के कुछ सबसे गहरे रंग के पिंड हैं। इनकी सतह की 'परावर्तकता' अत्यंत कम होती है (आमतौर पर 0.02 से 0.04 के बीच), जिसका अर्थ है कि वे अपने ऊपर पड़ने वाले प्रकाश का केवल 2% से 4% ही वापस परावर्तित करते हैं। यह उन्हें कोयले से भी अधिक काला बनाता है। इनका रंग आमतौर पर लाल या गहरा भूरा होता है, जो सतह पर मौजूद जटिल कार्बनिक यौगिकों का संकेत देता है।"SDSS photometry of asteroids in cometary orbits"
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
नासा (NASA) - क्षुद्रग्रह और धूमकेतु अन्वेषण
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