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411 समाचार
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भक्ति संगीत

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भक्ति संगीत भारतीय संगीत परंपरा का एक प्रमुख अंग हैhttps://ignca.gov.in/coilnet/brij605.htm Brij - Braj Kala Env Sanskriti - Bhakti Sangeet Ka Charmotkarsh CIL ignca.gov.in hi 2025-09-15, जो ईश्वर, देवी-देवताओं या गुरु के प्रति भक्ति और समर्पण की भावना प्रकट करता है। यह संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि आध्यात्मिक साधना का भी माध्यम माना जाता है। उत्पत्ति और विकास भक्ति संगीत की जड़ें भारत की प्राचीन वैदिक और उपनिषदकालीन परंपराओं में पाई जाती हैं। मध्यकालीन भक्ति आंदोलन के समय कबीर, सूरदास, तुलसीदास, मीराबाई और गुरुनानक जैसे संतों ने इसे लोकप्रिय बनाया। इनके रचित पद, भजन और कीर्तन आज भी गाए जाते हैं। विशेषताएँ इसमें प्रायः सरल भाषा का प्रयोग होता है ताकि सामान्य जन आसानी से समझ और गा सकें। राग-रागिनियों का प्रयोग होते हुए भी इसका मूल उद्देश्य भावाभिव्यक्ति है। श्रोताओं और गायक के बीच सामूहिकता और आध्यात्मिक अनुभव की भावना प्रबल रहती है। रूप और शैलियाँ भजन – भगवान के स्तुति गीत। कीर्तन – सामूहिक गान, प्रायः वाद्ययंत्रों के साथ। अभंग – महाराष्ट्र की संत परंपरा में गाए जाने वाले भक्ति गीत। गुरबानी संगीत – सिख गुरुओं की वाणी पर आधारित। आधुनिक युग में भक्ति संगीत आधुनिक समय में भक्ति संगीत केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रहा। यह टीवी, रेडियो, यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्मों के माध्यम से पूरे विश्व में सुना जाता है। कई प्रसिद्ध गायक और साधु-संत इसे अपनी शैली में प्रस्तुत करते हैं। प्रभाव भक्ति संगीत ने भारतीय समाज में न केवल आध्यात्मिक चेतना जगाई बल्कि हिंदी, अवधी, ब्रज, पंजाबी, मराठी, तमिल और अन्य भाषाओं के साहित्य को भी समृद्ध किया। यह भी देखें भजन कीर्तन भक्ति आंदोलन सन्दर्भ