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411 समाचार
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हिन्दी विज्ञान साहित्य परिषद

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उल्लेखनीय नहीं। हिन्दी विज्ञान साहित्य परिषद मुम्बई का गठन भाभा परमाणु अनुसन्धान केन्द्र एवं टाटा मूलभूत अनुसन्धान संस्थान में कार्यरत कुछ वैज्ञानिकों एवं इंजीनियरों के सामूहिक प्रयास से पूर्व सन् 1968 में हुआ था। इसका गठन राष्ट्रभाषा प्रेम, जनसामान्य तक वैज्ञानिक साहित्य को पहुंचाने, वैज्ञानिक साहित्य की रचना तथा प्रसार के काम को सुसंगठित रूप में चलाने के उद्देश्य से हुआ था। 'परिषद' की गतिविधियों में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण एवं सतत् कार्य इसकी त्रैमासिक हिन्दी विज्ञान पत्रिका 'वैज्ञानिक' का निरंतर प्रकाशन रहा है। यही कारण है कि परिषद के विकास और प्रतिष्ठा का इतिहास 'वैज्ञानिक' पत्रिका के प्रकाशन से अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है। इसके अतिरिक्त, वैज्ञानिक शब्दावली निर्माण, विज्ञान साहित्य के अनुवाद, पुस्तकों का प्रकाशन, विज्ञान व्याख्यान एवं वार्ताओं का आयोजन, विज्ञान लेख प्रतियोगिताएँ तथा विभिन्न विज्ञान गोष्ठियों के माध्यम से परिषद ने हिन्दी में विज्ञान के प्रचार-प्रसार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इन विविध गतिविधियों ने परिषद को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान और सम्मान दिलाया है। समाज एवं राष्ट्र के समग्र उत्थान के लिए यह आवश्यक है कि प्रबुद्ध वर्ग, चिंतक, दार्शनिक, वैज्ञानिक समुदाय तथा सामान्य जन के मध्य विचारों और ज्ञान का प्रभावी आदान-प्रदान हो। इस संदर्भ में वैज्ञानिकों का दायित्व और भी महत्त्वपूर्ण हो जाता है। उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे अपने वैज्ञानिक ज्ञान एवं अनुसंधान के निष्कर्षों को सरल, सहज और जनसुलभ भाषा में समाज तक पहुँचाएँ, ताकि लोगों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास हो तथा वे अंधविश्वासों, रूढ़िगत मान्यताओं और मिथ्या धारणाओं से मुक्त होकर तर्कसंगत एवं विवेकपूर्ण सोच को अपनाएँ। इसके लिए केवल ज्ञानार्जन ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसका प्रभावी विज्ञान संचार भी उतना ही आवश्यक है। [विज्ञान संचार] ऐसी सरल और सहज भाषा में होना चाहिए, जिसे समाज का प्रत्येक वर्ग आसानी से समझ सके और अपने जीवन में उसका लाभ उठा सके। महावीर प्रसाद द्विवेदी ने भी कहा है कि "ज्ञान, विज्ञान, धर्म एवं राजनीति की भाषा सदैव लोकभाषा ही होनी चाहिये।" इसी मूल विचारधारा को लेकर विज्ञान और तकनीकी के प्रमुख केन्द्र भाभा परमाणु अनुसन्धान केन्द्र में सन 1968 में हिन्दी विज्ञान साहित्य परिषद की स्थापना की गई। परिषद् का मुख्य उद्देश्य हिन्दी में वैज्ञानिक साहित्य की रचना एवं प्रसार रहा और इसे पूरा करने के लिए परिषद ने पुस्तक प्रकाशन, विज्ञान वार्ताएं, शब्द संग्रह निर्माण, अनुवाद कार्य, विज्ञान संगोष्ठियां, लेख प्रतियोगिताओं जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। इन सभी गतिविधियों का परिणाम है कि आज यह परिषद देश की अग्रणीय संस्थाओं में से एक है। परिषद की गतिविधियों में सबसे मुख्य एवं स्थाई गतिविधि त्रैमासिक पत्रिका 'वैज्ञानिक' अनवरत प्रकाशन रही है। वैज्ञानिक का परिचय अंक 1969 में प्रकाशित हुआ था। वैज्ञानिक चिन्तन हिन्दी में प्रारम्भ हो, एक उच्च स्तरीय लेखों की पत्रिका पाठकों को मिले तथा विज्ञान में रुचि रखने वाले लेखकों को एक मंच मिले, इत्यादि विचार 'वैज्ञानिक प्रकाशन में के प्रेरणा स्रोत रहे हैं। वैज्ञानिक में प्रकाशित लेख विज्ञान की सभी शाखाओं से लिए जाते हैं जिनमें विशेषज्ञ अपने नवीनतम शोध की जानकारी सभी पाठकों तक पहुंचाते हैं। विषय विशेष पर नवीनतम एवं पूर्ण जानकारी देने के उद्देश्य से वैज्ञानिकों के विशेषांको को प्रकाशित करने की शुरुआत सन् 1972 में की गई। पिछले वर्षों में विभिन्न विषयों पर विशेषांक निकाले जा चुके हैं। जिनमें कृषि विज्ञान, खगोल भौतिकी, शरीर विज्ञान, पदार्थ विज्ञान, ध्रुव रिएक्टर, रेडियो-रसायन, सुरक्षा, पर्यावरण प्रदूषण, भारतीय विज्ञान की भावी दिशाएं, लेसर जैसे उपयोगी तथा आधुनिक विषय है।है। उद्देश्य 1. हिन्दी में वैज्ञानिक साहित्य का लेखन,प्रचारएवं प्रसार 2. वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावलियों का सृजन एवं प्रकाशन 3. महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साहित्य को अर्जित कर उसका हिंदी अनुवाद 4. समान उद्देश्य एवं विचारधारा वाली अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर कार्य करना 5. केंद्र एवं राज्य सरकारों को हिंदी में वैज्ञानिक पुस्तकें प्रकाशित करने में सहायता प्रदान करना 6. विभिन्न वैज्ञानिक एवं तकनीकी विषयों पर वार्ता, संगोष्ठी का आयोजन 7. विभिन्न शैक्षणिक पुस्तकालयों को हिंदी में विज्ञान की पुस्तकें प्रदान किना 8. वैज्ञानिक पत्रिका / वैज्ञानिक साहित्य का संवर्धन एवं प्रकाशन करना 9. परिषद की क्रियाकलापों की जानकारी हेतु सामयिक पत्र / पत्रिका का प्रकाशन 10. विद्यार्थियों के लिए विज्ञान प्रश्न मंचों का आयोजन कार्यालय पंजीकृत पता : हिन्दी-विज्ञान साहित्य परिषद, सूचना प्रभाग, सेंट्रल कॉम्प्लेक्स, भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र, मुम्बई - 400 085 पत्राचार :अध्यक्ष, डॉ. कुलवंत सिंह,हिंदी विज्ञान साहित्य परिषद,लोढ़ा अमारा, कोलशेट रोड, ठाणे कार्यकारिणी समिति अध्यक्ष: डॉ. कुलवंत सिंह उपाध्यक्ष: श्री दीनानाथ सिंह सचिव: श्री शैलेन्द्र कुमार सिंह कोषाध्यक्ष: श्री राकेश कुमार सिंह सह-सचिव: डॉ. डेझी जोसेफ संयुक्त कोषाध्यक्ष: डॉ. धनकुमार महिलांग सदस्य: श्री संजय कुमार जैन, श्री प्रमोद कुमार मिश्र, श्रीमती ज्योति दिवान, डॉ. मनप्रीत कौर बसन, श्री धर्मराज मौर्य,श्री बिनोद कुमार, श्री शिवदास महतो, डॉ. पीयूष गोयल सहयोजित सदस्य : श्री सत्य बाबू सेट्टी, श्री नरेंद्र करनानी वैज्ञानिक परामर्श मंडल: डॉ. आनंद कुमार शर्मा: डॉ. आनंद कुमार शर्मा इसरो के पूर्व विशिष्ट वैज्ञानिक हैं. 1984 में दिल्ली विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट प्राप्त की. 1985 में इसरो उपग्रह केंद्र में शामिल हुए और 31 अगस्त, 2019 को सेवानिवृत्त हुए. 2016 से 2019 तक वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ न्यूक्लियर ऑपरेटर्स-WANO, लंदन की वाह्य सलाहकार समिति में सदस्य के रूप में कार्य किया है. कई अकादमिक निकायों के फेलो हैं और अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित हैं. श्री वीरभद्र नगर, मारातहल्ली, बैंगलोर-560037 प्रोफेसर रमेश सोमवंशी: पूर्व इमेरिटस प्रोफेसर, भाकृअप-भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली. एमवीएससी, पीएचडी, एफआरसीवीएस (उप्साला, स्वीडन), डीआईसीवीपी, पशु रोग विशेषज्ञ, मानद सचिव, डॉ. सी.एम. सिंह एंडोमेंट ट्रस्ट, पूर्व कार्यवाहक संयुक्त निदेशक, CADRAD, पूर्व प्रमुख, पैथोलॉजी विभाग, भूतपूर्व आईसीएआर-नेशनल फेलो, भूतपूर्व आईसीएआर-एमेरिटस प्रोफेसर, भूतपूर्व आईसीएआर-एमेरिटस वैज्ञानिक और भूतपूर्व अध्यक्ष, आईएवीपी, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर, बरेली- 243122 डॉ. राघवेंद्र तिवारी: पूर्व निदेशक, पदार्थ ग्रुप, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, मुंबई. ज़िरकोनियम और नायोबियम मिश्र धातुओं में फेज़-परिवर्तन, उच्च तापमान पर संरचनात्मक अनुप्रयोगों के लिए नए मिश्र धातुओं का विकास, मिश्र धातुओं में संरचना-गुण संबंध, संरचना संबंधी फेज़-परिवर्तन; विशेष रूप से ओमेगा फेज़-परिवर्तन. डॉ. प्रेमचंद्र स्वर्णकार: पेशे से एक चिकित्सक (एम.बी.बी.एस., एम.डी.), समाजसेवी. विगत 35 वर्षों से जनोपयोगी चिकित्सा विज्ञान के विभिन्न विषयों पर हिंदी में लेखन. वैज्ञानिक एवं स्वास्थ्य संबंधी 2000 से अधिक आलेख प्रकाशित. 45 पुस्तकें प्रकाशित. लेखन कार्य के लिए डॉ. मेघनाद साहा, आर्यभट, विज्ञान-भूषण, राजभाषा-गौरव सहित 14 राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित. तीन सम्मान भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदत्त. डॉ. श्रीमती अर्चना शर्मा: पूर्व निदेशक, बीटीडीजी, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, मुंबई विशेषज्ञता - उच्च वोल्टेज, स्पंदित शक्ति प्रौद्योगिकी, इन्सुलेशन इंजीनियरिंग, चुंबकीय पल्स संपीडन, विद्युत चुम्बकीय पल्स वेडिंग। वोल्टेज, करंट और चुंबकीय क्षेत्र माप के लिए माइक्रोसेकंड से नैनोसेकंड शासन में स्पंदित निदान। एक्सेल, कोएक्सियल और रिफ्लेक्स ट्रायोड. डॉ. कृष्ण कुमार मिश्र: पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर, होमी भाभा सेंटर फॉर साइंस एजुकेशन, टीआईएफआर, मुंबई. सदस्य, राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी. 12 से अधिक हिंदी में लोकप्रिय विज्ञान पुस्तकें प्रकाशित. शिक्षा भूषण सम्मान, होमी जहांगीर भाभा पुरस्कार, आत्माराम पुरस्कार, के.एन. भाल नमित पुरस्कार, राजभाषा गौरव पुरस्कार, शताब्दी सम्मान इत्यादि अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित. डॉ. सूर्यकांत गुप्ता: औद्योगिक प्लाज्मा प्रौद्योगिकी- सुविधा केंद्र, प्लाज्मा अनुसंधान संस्थान, गांधीनगर, गुजरात. विशेषज्ञ: जल उपचार के लिए पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकी, प्लाज्मा प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, उच्च वोल्टेज इंजीनियरिंग, इंस्ट्रुमेंटेशन और नियंत्रण इंजीनियरिंग, सिस्टम ऑटोमेशन, स्पंदित पावर सप्लाई. एमएस [इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार]- डीएवीवी इंदौर; पीएचडी- जल उपचार हेतु प्लाज्मा प्रौद्योगिकी, KIT, जर्मनी; शिक्षा उत्कृष्टता पुरस्कार, हिंदीसेवी पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ पेपर प्रस्तुति पुरस्कार वैज्ञानिक : सम्पादन मंडल डॉ. कुलवंत सिंह (मुख्य संपादक): वैज्ञानिक अधिकारी H, पदार्थ विज्ञान प्रभाग, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, मुंबई-400085, प्रोफेसर, होमी भाभा राष्ट्रीय संस्थान, मुंबई – 400094 डॉ. प्रदीप कुमार मुख़र्जी: डॉ. मुख़र्जी दिल्ली यूनिवर्सिटी में भौतिकी के प्रोफेसर रहे हैं, एक वरिष्ठ विज्ञान संचारक हैं। श्रीमती ज्योति दिवान: वैज्ञानिक अधिकारी G, अपशिष्ट प्रबंधन प्रभाग, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, मुंबई डॉ. अतुल कुमार अग्रवाल : पूर्व मुख्य वैज्ञानिक, सीएसआईआर- केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान, रुड़की समन्वयक, ‘जिज्ञासा: विद्यार्थी-वैज्ञानिक संयोजन कार्यक्रम’ अध्यक्ष, सीबीआरआई प्रकाशन समूह श्री नरेंद्र कुमार करनानी: सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, मुंबई, फैलो, इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर, गोवंडी, मुंबई - 400088 डॉ. पीयूष गोयल: पूर्व वैज्ञानिक, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, नई दिल्ली जैवप्रौद्योगिकी अनुसंधान क्षेत्रों एवं गतिविधियों में सहयोग। विभिन्न वैज्ञानिक समुदायों के सदस्य, वैज्ञानिक वार्ताओं के साथ प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में हिंदी और अंग्रेजी में अनेक शोध और वैज्ञानिक लेख प्रकाशित। डॉ. श्यामाश्री घोष: वैज्ञानिक अधिकारी G, स्कूल ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेज, नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस एडुकेशन रिसर्च (NISER), भुबनेश्वर,ओडिशा 752050 सन्दर्भ इन्हें भी देखें विज्ञान संचार बाहरी कड़ियाँ हिन्दी विज्ञान साहित्य परिषद का जालघर वैज्ञानिक अप्रैल-जून 2022 अंक वैज्ञानिक जनवरी-मार्च 2026 अंक वैज्ञानिक अक्टूबर-दिसंबर 2024 अंक वैज्ञानिक अप्रैल-जून 2024 अंक वैज्ञानिक जनवरी-मार्च 2024 अंक वैज्ञानिक अक्टूबर-दिसंबर 2021 अंक वैज्ञानिक अक्टूबर-दिसंबर 2023 वैज्ञानिक अक्टूबर-दिसंबर 2022 वैज्ञानिक अप्रैल-जून 2023 वैज्ञानिक जनवरी-मार्च 2025 वैज्ञानिक जुलाई-सितंबर 2022 वैज्ञानिक जुलाई-सितंबर 2024 श्रेणी:हिन्दी