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सूर्य ग्रहण
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कुछ प्रचारक सामग्री बीच में हो सकती है अप्रैल 2012
चन्द्रमा जब सूर्य को पूर्ण रूप से आच्छादित कर लेता है तो उसे कि 1999 के सूर्य ग्रहण में देखा गया। इसके अन्तिम छोर (लाल रंग में) पर सौर ज्वाला अथवा विस्तृत कॉरोना तन्तु देखे जा सकते हैं।308px|पूर्ण सूर्य ग्रहणx154px|वलयाकार सूर्य ग्रहणx154px|आंशिक सूर्य ग्रहण वलयाकार सूर्य ग्रहण (बायें) तब दिखाई देता है जब चन्द्रमा सूर्य को पूरी तरह एक साथ नहीं आच्छादित कर पाता। (जैसा= 20 मई 2012 के सूर्य ग्रहण में देखा गया।) आंशिक सूर्य ग्रहण की स्थिति में चन्द्रमा द्वारा सूर्य का कोई एक हिस्सा आवरित किया जाता है (23 अक्टूबर 2014 का सूर्य ग्रहण)।
सूर्य ग्रहण एक तरह का ग्रहण है जब चन्द्रमा, पृथ्वी और सूर्य के मध्य से होकर गुजरता है तथा पृथ्वी से देखने पर सूर्य पूर्ण अथवा आंशिक रूप से चन्द्रमा द्वारा आच्छादित होता है।
भौतिक विज्ञान की दृष्टि से जब सूर्य व पृथ्वी के बीच में चन्द्रमा आ जाता है तो चन्द्रमा के पीछे सूर्य का बिम्ब कुछ समय के लिए ढक जाता है, इसी घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। पृथ्वी सूरज की परिक्रमा करती है और चाँद पृथ्वी की। कभी-कभी चाँद, सूरज और धरती के बीच आ जाता है। फिर वह सूरज की कुछ या सारी रोशनी रोक लेता है जिससे धरती पर साया फैल जाता है। इस घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। यह घटना सदा सर्वदा अमावस्या को ही होती है।https://economictimes.indiatimes.com/hindi/news/solar-eclipse-2019-begins-clear-skies-allow-enthralling-view/articleshow/72973979.cms?from=mdr साल का सबसे बड़ा सूर्य ग्रहण शुरू, जानिए बड़ी बातें 2019-12-26 The Economic Times 2020-06-20
पूर्ण ग्रहण
400 px|right|2008-08-01 Solar eclipse progression
अक्सर चाँद, सूरज के सिर्फ़ कुछ हिस्से को ही ढ़कता है। यह स्थिति खण्ड-ग्रहण कहलाती है। कभी-कभी ही ऐसा होता है कि चाँद सूरज को पूरी तरह ढँक लेता है, इसे पूर्ण-ग्रहण कहते हैं। पूर्ण-ग्रहण धरती के बहुत कम क्षेत्र में ही देखा जा सकता है। ज़्यादा से ज़्यादा दो सौ पचास (250) किलोमीटर के सम्पर्क में। इस क्षेत्र के बाहर केवल खंड-ग्रहण दिखाई देता है। पूर्ण-ग्रहण के समय चाँद को सूरज के सामने से गुजरने में दो घण्टे लगते हैं। चाँद सूरज को पूरी तरह से, ज़्यादा से ज़्यादा, सात मिनट तक ढँकता है। इन कुछ क्षणों के लिए आसमान में अंधेरा हो जाता है, या यूँ कहें कि दिन में रात हो जाती है।https://www.jansatta.com/religion/surya-grahan-solar-eclipse-june-2020-date-and-time-timings-in-india-surya-grahan-kab-lagega-padega-samay-or-kab-ka-pad-rha-hai-check-here/1441886/ दो दिन बाद लगने जा रहा है सूर्य ग्रहण, जानिए कब, कहां और कैसे देखें इसे 2020-06-20 Jansatta hi 2020-06-20
ज्योतिष विज्ञान की दृष्टि से सूर्य ग्रहण
ग्रहण प्रकृति का एक अद्भुत चमत्कार है। ज्योतिष के दृष्टिकोण से यदि देखा जाए तो यह अभूतपूर्व अनोखा, विचित्र ज्योतिष ज्ञान है, जो ग्रह और उपग्रहों की गतिविधियाँ एवं उनका स्वरूप स्पष्ट करता है। सूर्य ग्रहण (सूर्योपराग) तब होता है, जब सूर्य आंशिक अथवा पूर्ण रूप से चन्द्रमा द्वारा आवृ्त (व्यवधान / बाधा) हो जाए। इस प्रकार के ग्रहण के लिए चन्दमा का पृथ्वी और सूर्य के बीच आना आवश्यक है। इससे पृ्थ्वी पर रहने वाले लोगों को सूर्य का आवृ्त भाग नहीं दिखाई देता है।https://www.bhaskar.com/religion/dharam/solar-eclipse-what-say-religion-science-and-astrology-about-the-solar-eclipse-01583885.html सूर्यग्रहण के बारे में क्या कहता है धर्म, विज्ञान और ज्योतिष शास्त्र b_vinay 2019-07-01 Dainik Bhaskar hi 2020-06-21 https://web.archive.org/web/20200621095323/https://www.bhaskar.com/religion/dharam/solar-eclipse-what-say-religion-science-and-astrology-about-the-solar-eclipse-01583885.html 21 जून 2020 live
सूर्यग्रहण होने के लिए निम्न शर्ते पूरी होनी आवश्यक है।
अमावस्या होनी चाहिये
चन्द्रमा का अक्षांश शून्य के निकट होना चाहिए।http://astrobix.com/indian_festivals/surya_grahan/Suryagrahan_When_Why_How.aspx सूर्यग्रहण कब, क्यों और कैसे ? ए.एस.पी सूर्य ग्रहण hi 18 सितंबर 2014 https://web.archive.org/web/20150714021102/http://astrobix.com/indian_festivals/surya_grahan/Suryagrahan_When_Why_How.aspx 14 जुलाई 2015 dead
उत्तरी ध्रुव को दक्षिणी ध्रुव से मिलाने वाली रेखाओं को रेखांश कहा जाता है तथा भूमध्य रेखा के चारो वृत्ताकार में जाने वाली रेखाओं को अक्षांश के नाम से जाना जाता है। सूर्य ग्रहण सदैव अमावस्या को ही होता है। जब चन्द्रमा क्षीणतम हो और सूर्य पूर्ण क्षमता संपन्न तथा दीप्त हों। चन्द्र और राहु या केतु के रेखांश बहुत निकट होने चाहिए। चन्द्र का अक्षांश लगभग शून्य होना चाहिये और यह तब होगा जब चन्द्र रविमार्ग पर या रविमार्ग के निकट हों, सूर्य ग्रहण के दिन सूर्य और चन्द्र के कोणीय व्यास एक समान होते हैं। इस कारण चन्द सूर्य को केवल कुछ मिनट तक ही अपनी छाया में ले पाता है। सूर्य ग्रहण के समय जो क्षेत्र ढक जाता है उसे पूर्ण छाया क्षेत्र कहते हैं।
प्रकार
thumb|400px|right||पूर्ण सूर्य ग्रहण की ज्यामिति
अंगूठाकार|25 अक्टूबर 2022 को भारत, कटंगा, जबलपुर, मध्य प्रदेश, के आसपास टीवी टॉवर स्थान के करीब से देखा गया सौर ग्रहण।चित्र में उस एक ही सूर्य में, दो प्रकार की प्रकाशीय घटना प्रकट हो रही हैं , यह प्रकाशीय अंतर, १) धुंध के प्रेरण से सूर्य के प्रकाश बिम्ब के उत्तरीय व दक्षिणी क्षेत्र व २) ग्रहण के प्रेरण से ,सूर्य बिम्ब के पूर्वी व् पश्चिमी भाग में उपस्थित दीखते हैं ।
चन्द्रमा द्वारा सूर्य के बिम्ब के पूरे या कम भाग के ढ़के जाने की वजह से सूर्य ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं जिन्हें पूर्ण सूर्य ग्रहण, आंशिक सूर्य ग्रहण व वलयाकार सूर्य ग्रहण कहते हैं।https://www.naidunia.com/spiritual/vrat-tyohar-surya-grahan-2020-timings-in-india-solar-eclipse-will-happen-tomorrow-know-which-cities-will-be-seen-5655285 Surya Grahan 2020 Timings in India : देश के कई शहरों में देखा गया सूर्य ग्रहण जानिये सूर्य ग्रहण समाप्त होने का समय और इससे जुड़ी सारी बातें 2020-06-20 Nai Dunia hi 2020-06-21 https://web.archive.org/web/20200621041547/https://www.naidunia.com/spiritual/vrat-tyohar-surya-grahan-2020-timings-in-india-solar-eclipse-will-happen-tomorrow-know-which-cities-will-be-seen-5655285 21 जून 2020 dead
1. पूर्ण सूर्य ग्रहण
अंगूठाकार|उत्तरी अमरीका से लिया गया पूर्ण सुर्य ग्रहण का दृश्य
पूर्ण सूर्य ग्रहण उस समय होता है जब चन्द्रमा पृथ्वी के काफ़ी पास रहते हुए पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है और चन्द्रमा पूरी तरह से पृ्थ्वी को अपने छाया क्षेत्र में ले ले फलस्वरूप सूर्य का प्रकाश पृ्थ्वी तक पहुँच नहीं पाता है और पृ्थ्वी पर अंधकार जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है तब पृथ्वी पर पूरा सूर्य दिखाई नहीं देता। इस प्रकार बनने वाला ग्रहण पूर्ण सूर्य ग्रहण कहलाता है।https://bindassnews.com/solar-eclipse-july-2019/ सूर्य ग्रहण जुलाई 2019 की संपूर्ण जानकारी एच.टी.एम.एल सूर्य ग्रहण समय व दिनांक hi 13 अप्रैल 2019 https://web.archive.org/web/20190413055920/https://bindassnews.com/solar-eclipse-july-2019/ 13 अप्रैल 2019 dead
2. आंशिक सूर्य ग्रहण
आंशिक सूर्यग्रहण में जब चन्द्रमा सूर्य व पृथ्वी के बीच में इस प्रकार आए कि सूर्य का कुछ ही भाग पृथ्वी से दिखाई नहीं देता है अर्थात चन्दमा, सूर्य के केवल कुछ भाग को ही अपनी छाया में ले पाता है। इससे सूर्य का कुछ भाग ग्रहण ग्रास में तथा कुछ भाग ग्रहण से अप्रभावित रहता है तो पृथ्वी के उस भाग विशेष में लगा ग्रहण आंशिक सूर्य ग्रहण कहलाता है।https://khabar.ndtv.com/news/health/surya-grahan-2020-solar-eclipse-21-june-2020-kab-hai-surya-grahan-date-and-time-in-india-take-these-precautions-know-eclipse-time-and-sutak-kal-solar-2249233 Surya Grahan 2020: 21 जून को लगेगा साल का पहला सूर्य ग्रहण, बरतें ये सावधानियां, जानें ग्रहण का समय और सूतक काल! NDTVIndia 2020-06-23 26 जून 2020 https://web.archive.org/web/20200626041747/https://khabar.ndtv.com/news/health/surya-grahan-2020-solar-eclipse-21-june-2020-kab-hai-surya-grahan-date-and-time-in-india-take-these-precautions-know-eclipse-time-and-sutak-kal-solar-2249233 dead
3. वलयाकार सूर्य ग्रहण
वलयाकार सूर्य ग्रहण में जब चन्द्रमा पृथ्वी के काफ़ी दूर रहते हुए पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है अर्थात चन्द्र सूर्य को इस प्रकार से ढकता है, कि सूर्य का केवल मध्य भाग ही छाया क्षेत्र में आता है और पृथ्वी से देखने पर चन्द्रमा द्वारा सूर्य पूरी तरह ढका दिखाई नहीं देता बल्कि सूर्य के बाहर का क्षेत्र प्रकाशित होने के कारण कंगन या वलय के रूप में चमकता दिखाई देता है। कंगन आकार में बने सूर्यग्रहण को ही वलयाकार सूर्य ग्रहण कहलाता है।https://khabar.ndtv.com/news/lifestyle/surya-grahan-2020-solar-eclipse-2020-timing-of-surya-grahan-in-delhi-bengaluru-chennai-and-10-main-points-2249681 Surya Grahan 2020: उत्तर भारत समेत इन राज्यों में दिखा साल का पहला सूर्य ग्रहण, पढ़ें 10 बड़ी बातें NDTVIndia 2020-06-23 https://web.archive.org/web/20200621145712/https://khabar.ndtv.com/news/lifestyle/surya-grahan-2020-solar-eclipse-2020-timing-of-surya-grahan-in-delhi-bengaluru-chennai-and-10-main-points-2249681 21 जून 2020 dead
अवलोकन के समय
किन्ही परिस्थितयों में , ग्रसित सूर्य वातावरणीय प्रदूषण के रहते ,अपने उस दिन के निरधारित उदित होने वाले अथवा अस्त होने वाले समय पर ,अधिक प्रकाशीय अंतर में दिखने योग्य बन जाता है। यह सब स्थानीय प्रस्थितयों के चलते वा,यु मंडल में उपस्थित धुंध के होने से ,संभव हो पाता है । यह घटना प्रकृतीय संयोजन में विराजते अद्भुत संतुलन का अभूतपूर्व उदहारण प्रस्तुत करती है ।
खगोल शास्त्रीयों की गणनाएँ
खगोल शास्त्रियों नें गणित से निश्चित किया है कि 18 वर्ष 18 दिन की समयावधि में 41 सूर्य ग्रहण और 29 चन्द्रग्रहण होते हैं। एक वर्ष में 5 सूर्यग्रहण तथा 2 चन्द्रग्रहण तक हो सकते हैं। किन्तु एक वर्ष में 2 सूर्यग्रहण तो होने ही चाहिए। हाँ, यदि किसी वर्ष 2 ही ग्रहण हुए तो वो दोनो ही सूर्यग्रहण होंगे। यद्यपि वर्षभर में 7 ग्रहण तक सम्भाव्य हैं, तथापि 4 से अधिक ग्रहण बहुत कम ही देखने को मिलते हैं। प्रत्येक ग्रहण 18 वर्ष 11 दिन बीत जाने पर पुन: होता है। किन्तु वह अपने पहले के स्थान में ही हो यह निश्चित नहीं हैं, क्योंकि सम्पात बिन्दु निरन्तर चल रहे हैं।
साधारणतया सूर्यग्रहण की अपेक्षा चन्द्रग्रहण अधिक देखे जाते हैं, परन्तु सच्चाई यह है कि चन्द्र ग्रहण से कहीं अधिक सूर्यग्रहण होते हैं। 3 चन्द्रग्रहण पर 4 सूर्यग्रहण का अनुपात आता है। चन्द्रग्रहणों के अधिक देखे जाने का कारण यह होता है कि वे पृ्थ्वी के आधे से अधिक भाग में दिखलाई पड़ते हैं, जब कि सूर्यग्रहण पृ्थ्वी के बहुत बड़े भाग में प्राय सौ मील से कम चौड़े और दो से तीन हजार मील लम्बे भूभाग में दिखलाई पडते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि मध्यप्रदेश में खग्रास (जो सम्पूर्ण सूर्य बिम्ब को ढकने वाला होता है) ग्रहण हो तो गुजरात में खण्ड सूर्यग्रहण (जो सूर्य बिम्ब के अंश को ही ढँकता है) ही दिखलाई देगा और उत्तर भारत में वो दिखायी ही नहीं देगा।https://www.jagran.com/news/national-chandra-and-surya-grahan-2020-lunar-and-solar-eclipse-to-occur-in-june-2020-from-date-and-time-know-all-details-20328253.html lunar and solar eclipse 2020: जून में लगेंगे चंद्र और सूर्य ग्रहण, जानें- तिथि, समय व अन्य जानकारियां Dainik Jagran hi 2020-06-25 https://web.archive.org/web/20200612222122/https://www.jagran.com/news/national-chandra-and-surya-grahan-2020-lunar-and-solar-eclipse-to-occur-in-june-2020-from-date-and-time-know-all-details-20328253.html 12 जून 2020 live
वैज्ञानिक दृष्टिकोण में सूर्य ग्रहण
चाहे ग्रहण का कोई आध्यात्मिक महत्त्व हो अथवा न हो किन्तु दुनिया भर के वैज्ञानिकों के लिए यह अवसर किसी उत्सव से कम नहीं होता। क्योंकि ग्रहण ही वह समय होता है जब ब्राह्मण्ड में अनेकों विलक्षण एवं अद्भुत घटनाएँ घटित होतीं हैं जिससे कि वैज्ञानिकों को नये नये तथ्यों पर कार्य करने का अवसर मिलता है। 1968 में लार्कयर नामक वैज्ञानिक नें सूर्य ग्रहण के अवसर पर की गई खोज के सहारे वर्ण मण्डल में हीलियम गैस की उपस्थिति का पता लगाया था।https://www.jagran.com/spiritual/religion-know-the-scientific-and-devotional-information-about-sun-eclipse-20418313.html Solar Eclipse 2020: जानें, सूर्य ग्रहण से जुड़े वैज्ञानिक और धार्मिक रोचक तथ्य Dainik Jagran hi 2020-06-25 https://web.archive.org/web/20200621153934/https://www.jagran.com/spiritual/religion-know-the-scientific-and-devotional-information-about-sun-eclipse-20418313.html 21 जून 2020 live
आईन्स्टीन का यह प्रतिपादन भी सूर्य ग्रहण के अवसर पर ही सही सिद्ध हो सका, जिसमें उन्होंने अन्य पिण्डों के गुरुत्वाकर्षण से प्रकाश के पडने की बात कही थी। चन्द्रग्रहण तो अपने सम्पूर्ण तत्कालीन प्रकाश क्षेत्र में देखा जा सकता है किन्तु सूर्यग्रहण अधिकतम 10 हजार किलोमीटर लम्बे और 250 किलोमीटर चौड़े क्षेत्र में ही देखा जा सकता है। सम्पूर्ण सूर्यग्रहण की वास्तविक अवधि अधिक से अधिक 11 मिनट ही हो सकती है उससे अधिक नहीं। संसार के समस्त पदार्थों की संरचना सूर्य रश्मियों के माध्यम से ही सम्भव है। यदि सही प्रकार से सूर्य और उसकी रश्मियों के प्रभावों को समझ लिया जाए तो समस्त धरा पर आश्चर्यजनक परिणाम लाए जा सकते हैं। सूर्य की प्रत्येक रश्मि विशेष अणु का प्रतिनिधित्व करती है और जैसा कि स्पष्ट है, प्रत्येक पदार्थ किसी विशेष परमाणु से ही निर्मित होता है। अब यदि सूर्य की रश्मियों को पूँजीभूत कर एक ही विशेष बिन्दु पर केन्द्रित कर लिया जाए तो पदार्थ परिवर्तन की क्रिया भी सम्भव हो सकती है।
भारतीय वैदिक काल और सूर्य ग्रहण
वैदिक काल से पूर्व भी खगोलीय संरचना पर आधारित कलैन्डर बनाने की आवश्कता अनुभव की गई। सूर्य ग्रहण चन्द्र ग्रहण तथा उनकी पुनरावृत्ति की पूर्व सूचना ईसा से चार हजार पूर्व ही उपलब्ध थी। ऋग्वेद के अनुसार अत्रिमुनि के परिवार के पास यह ज्ञान उपलब्ध था। वेदांग ज्योतिष का महत्त्व हमारे वैदिक पूर्वजों के इस महान ज्ञान को प्रतिविम्बित करता है।https://www.naidunia.com/spiritual/vrat-tyohar-surya-grahan-2020-timings-in-india-solar-eclipse-will-happen-tomorrow-know-which-cities-will-be-seen-5655285 Surya Grahan 2020 Timings in India : देश के कई शहरों में देखा गया सूर्य ग्रहण जानिये सूर्य ग्रहण समाप्त होने का समय और इससे जुड़ी सारी बातें 2020-06-20 Nai Dunia hi 2020-06-25 https://web.archive.org/web/20200621041547/https://www.naidunia.com/spiritual/vrat-tyohar-surya-grahan-2020-timings-in-india-solar-eclipse-will-happen-tomorrow-know-which-cities-will-be-seen-5655285 21 जून 2020 dead
ग्रह नक्षत्रों की दुनिया की यह घटना भारतीय मनीषियों को अत्यन्त प्राचीन काल से ज्ञात रही है। चिर प्राचीन काल में महर्षियों नें गणना कर दी थी। इस पर धार्मिक, वैदिक, वैचारिक, वैज्ञानिक विवेचन धार्मिक एवं ज्योतिषीय ग्रन्थों में होता चला आया है। महर्षि अत्रिमुनि ग्रहण के ज्ञान को देने वाले प्रथम आचार्य थे। ऋग्वेदीय प्रकाश काल अर्थात वैदिक काल से ग्रहण पर अध्ययन, मनन और परीक्षण होते चले आए हैं।
सूर्य ग्रहण के समय हमारे ऋषि-मुनियों के कथन
हमारे ऋषि-मुनियों ने सूर्य ग्रहण लगने के समय भोजन के लिए मना किया है, क्योंकि उनकी मान्यता थी कि ग्रहण के समय में कीटाणु बहुलता से फैल जाते हैं। खाद्य वस्तु, जल आदि में सूक्ष्म जीवाणु एकत्रित होकर उसे दूषित कर देते हैं। इसलिए ऋषियों ने पात्रों के कुश डालने को कहा है, ताकि सब कीटाणु कुश में एकत्रित हो जाएँ और उन्हें ग्रहण के बाद फेंका जा सके। पात्रों में अग्नि डालकर उन्हें पवित्र बनाया जाता है ताकि कीटाणु मर जाएँ। ग्रहण के बाद स्नान करने का विधान इसलिए बनाया गया ताकि स्नान के दौरान शरीर के अंदर ऊष्मा का प्रवाह बढ़े, भीतर-बाहर के कीटाणु नष्ट हो जाएं और धुल कर बह जाएं।https://hindi.oneindia.com/news/india/the-first-solar-eclipse-of-the-year-2020-today-here-is-everything-about-it-566157.html Solar Eclipse 2020: साल का पहला सूर्यग्रहण आज, जानिए इससे जुड़ी कुछ जरूरी बातें Sharma Ankur 2020-06-21 https://hindi.oneindia.com hi 2020-06-25
पुराणों की मान्यता के अनुसार राहु चन्द्रमा को तथा केतु सूर्य को ग्रसता है। ये दोनों ही छाया की सन्तान हैं। चन्द्रमा और सूर्य की छाया के साथ-साथ चलते हैं। चन्द्र ग्रहण के समय कफ की प्रधानता बढ़ती है और मन की शक्ति क्षीण होती है, जबकि सूर्य ग्रहण के समय जठराग्नि, नेत्र तथा पित्त की शक्ति कमज़ोर पड़ती है। गर्भवती स्त्री को सूर्य-चन्द्र ग्रहण नहीं देखने चाहिए, क्योंकि उसके दुष्प्रभाव से शिशु अंगहीन होकर विकलांग बन सकता है, गर्भपात की सम्भावना बढ़ जाती है। इसके लिए गर्भवती के उदर भाग में गोबर और तुलसी का लेप लगा दिया जाता है, जिससे कि राहु-केतु उसका स्पर्श न करें। ग्रहण के दौरान गर्भवती महिला को कुछ भी कैंची या चाकू से काटने को मना किया जाता है और किसी वस्त्रादि को सिलने से रोका जाता है। क्योंकि ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से शिशु के अंग या तो कट जाते हैं या फिर सिल (जुड़) जाते हैं।https://www.bhaskar.com/rajasthan/udaipur/news/rajasthan-news-there-will-be-lunar-eclipse-on-10-january-in-the-new-year-4-lunar-eclipses-and-2-solar-eclipses-in-12-months-112559-6284173.html नए साल में 10 जनवरी को चंद्रग्रहण, 12 महीनों में 4 चंद्रग्रहण और 2 सूर्यग्रहण होंगे 2019-12-29 Dainik Bhaskar hi 2020-06-25 https://web.archive.org/web/20200101103348/https://www.bhaskar.com/rajasthan/udaipur/news/rajasthan-news-there-will-be-lunar-eclipse-on-10-january-in-the-new-year-4-lunar-eclipses-and-2-solar-eclipses-in-12-months-112559-6284173.html 1 जनवरी 2020 live
ग्रहण लगने के पूर्व नदी या घर में उपलब्ध जल से स्नान करके भगवान का पूजन, यज्ञ, जप करना चाहिए। भजन-कीर्तन करके ग्रहण के समय का सदुपयोग करें। ग्रहण के दौरान कोई कार्य न करें। ग्रहण के समय में मंत्रों का जाप करने से सिद्धि प्राप्त होती है। ग्रहण की अवधि में तेल लगाना, भोजन करना, जल पीना, मल-मूत्र त्याग करना, केश विन्यास बनाना, रति-क्रीड़ा करना, मंजन करना वर्जित किए गए हैं। कुछ लोग ग्रहण के दौरान भी स्नान करते हैं। ग्रहण समाप्त हो जाने पर स्नान करके ब्राह्मण को दान देने का विधान है। कहीं-कहीं वस्त्र, बर्तन धोने का भी नियम है। पुराना पानी, अन्न नष्ट कर नया भोजन पकाया जाता है और ताजा भरकर पिया जाता है। ग्रहण के बाद डोम को दान देने का अधिक माहात्म्य बताया गया है, क्योंकि डोम को राहु-केतु का स्वरूप माना गया है।https://www.jansatta.com/religion/surya-grahan-solar-eclipse-june-2020-date-and-time-timings-in-india-surya-grahan-kab-lagega-padega-samay-or-kab-ka-pad-rha-hai-check-here/1441886/ दो दिन बाद लगने जा रहा है सूर्य ग्रहण, जानिए कब, कहां और कैसे देखें इसे 2020-06-21 Jansatta hi 2020-06-25
सूर्यग्रहण में ग्रहण से चार प्रहर पूर्व और चंद्र ग्रहण में तीन प्रहर पूर्व भोजन नहीं करना चाहिये। बूढे बालक और रोगी एक प्रहर पूर्व तक खा सकते हैं ग्रहण पूरा होने पर सूर्य या चन्द्र, जिसका ग्रहण हो, ग्रहण के दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी और फूल नहीं तोडना चाहिए। बाल तथा वस्त्र नहीं निचोड़ने चाहिये व दंत धावन नहीं करना चाहिये ग्रहण के समय ताला खोलना, सोना, मल मूत्र का त्याग करना, मैथुन करना और भोजन करना - ये सब कार्य वर्जित हैं। ग्रहण के समय मन से सत्पात्र को उद्देश्य करके जल में जल डाल देना चाहिए। ऐसा करने से देनेवाले को उसका फल प्राप्त होता है और लेने वाले को उसका दोष भी नहीं लगता। ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जरुरतमन्दों को वस्त्र दान से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है। 'देवी भागवत' में आता है कि भूकम्प एवं ग्रहण के अवसर पृथ्वी को खोदना नहीं चाहिये।https://www.naidunia.com/spiritual/vrat-tyohar-surya-grahan-2019-solar-eclipse-is-descripted-in-vedic-epics-this-sage-had-first-knowledge-of-it-4419772 Surya Grahan 2019: चार हजार साल पहले इन ऋषि ने किया था सूर्य ग्रहण का वर्णन 2019-12-15 Nai Dunia hi 2020-06-23 https://web.archive.org/web/20191216172838/https://www.naidunia.com/spiritual/vrat-tyohar-surya-grahan-2019-solar-eclipse-is-descripted-in-vedic-epics-this-sage-had-first-knowledge-of-it-4419772 16 दिसंबर 2019 dead
इन्हें भी देखें
चंद्रग्रहण
ग्रहण
खगोल शास्त्र
सन्दर्भ
श्रेणी:खगोलशास्त्र
श्रेणी:सूर्य
श्रेणी:सूर्य ग्रहण
श्रेणी:कॉमन्स पर निर्वाचित चित्र युक्त लेख