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पश्चिमी तटीय मैदान
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पश्चिमी तटीय मैदान भौगोलिक क्षेत्र Physical_Map_of_India.jpg भारत का भौतिक मानचित्र, जिसमें विभिन्न स्थलाकृतिक क्षेत्र दर्शाए गए हैं देश भारत राज्य गुजरात महाराष्ट्र गोवा कर्नाटक केरल सबसे बड़ा नगर मुंबई भाषाएँ प्रमुख गुजराती, कन्नड़, कोंकणी, मराठी, मलयालम, तुलु भारतीय मानक समय
पश्चिमी तटीय मैदान भारत में दक्कन का पठार के पश्चिमी भाग और अरब सागर के बीच स्थित एक संकीर्ण तटीय भू-भाग है। यह मैदान पश्चिमी भारत के कच्छ क्षेत्र से लेकर भारतीय प्रायद्वीप के दक्षिणी छोर कन्याकुमारी तक फैला हुआ है। इसके पूर्व में पश्चिमी घाट पर्वतमाला इसकी प्राकृतिक सीमा बनाती है। यह क्षेत्र गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक और केरल राज्यों से होकर गुजरता है।
इस तटीय मैदान को सामान्यतः छह उपक्षेत्रों में विभाजित किया जाता है—उत्तर में कच्छ, काठियावाड़ तथा गुजरात का तटीय मैदान, मध्य भाग में कोंकण तट और कनारा, तथा दक्षिण में मालाबार। पश्चिमी घाट की उपस्थिति के कारण वर्षा लाने वाली मानसूनी हवाएँ अवरुद्ध हो जाती हैं, जिससे गुजरात के दक्षिणी भाग से लेकर केरल तक का क्षेत्र दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान भारी वर्षा प्राप्त करता है। पूर्वी तटीय मैदान की तुलना में यहाँ अपेक्षाकृत कम नदियाँ बहती हैं क्योंकि भारतीय प्रायद्वीप का ढाल पूर्व से पश्चिम की ओर अधिक तीव्र है। इस क्षेत्र की प्रमुख नदियों में नर्मदा और ताप्ती शामिल हैं।
भूगोल
पश्चिमी तटीय मैदान दक्कन का पठार के पश्चिमी किनारे और पश्चिम में अरब सागर के बीच स्थित एक तटीय भूभाग है।https://pib.gov.in/newsite/erelcontent.aspx?relid=42501 Physiography of Water 9 September 2008 5 June 2026 Press Information BureauPopulation of India Economic and Social Commission for Asia and the Pacific, United Nations 1982 2
यह मैदान कच्छ का रण क्षेत्र से लेकर भारतीय प्रायद्वीप के दक्षिणी सिरे कन्याकुमारी तक फैला हुआ है। इसकी औसत चौड़ाई लगभग 50 से 100 किलोमीटर के बीच है। यह गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल तथा दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव और पुदुचेरी (विशेष रूप से माहे) से होकर गुजरता है।https://ugcmoocs.inflibnet.ac.in/assets/uploads/1/146/5058/et/5%20THE%20COASTAL%20INDIA200304050503035555.pdf The Coastal India University Grants Commission 5 June 2026 20 मार्च 2025 https://web.archive.org/web/20250320081803/https://ugcmoocs.inflibnet.ac.in/assets/uploads/1/146/5058/et/5%20THE%20COASTAL%20INDIA200304050503035555.pdf deadhttps://www.jagranjosh.com/general-knowledge/the-western-ghats-coastal-plain-1448367692-1 Western Coastal Plains Jagran Josh 5 June 2026 सितंबर 2026 InternetArchiveBot
यह पूर्वी तटीय मैदान की तुलना में अधिक संकीर्ण है तथा दोनों तटीय मैदान कन्याकुमारी में मिलते हैं।https://unacademy.com/content/upsc/difference-between/eastern-and-western-coastal-plains/ Eastern and Western Coastal Plains Unacademy 5 June 2026
पश्चिमी घाट पर्वतमाला इस मैदान की पूर्वी सीमा का निर्माण करती है। पश्चिमी घाट उत्तर में ताप्ती नदी के दक्षिण स्थित सतपुड़ा पर्वतमाला से आरम्भ होकर लगभग 1,600 किलोमीटर तक दक्षिण में कन्याकुमारी तक विस्तृत है।Western Ghats Biodiversity Hotspot 16 June 2021 https://www.worldatlas.com/articles/western-ghats-biodiversity-hotspot.html World Atlas 5 June 2026 2 July 2024 https://web.archive.org/web/20240702024516/https://www.worldatlas.com/articles/western-ghats-biodiversity-hotspot.htmlWestern Ghats topographic map https://en-gb.topographic-map.com/map-hg5b3/Western-Ghats/ topographic-map.com 5 June 2026 2 July 2024 https://web.archive.org/web/20240702024517/https://en-gb.topographic-map.com/map-hg5b3/Western-Ghats/
पश्चिमी घाट में तीन प्रमुख दर्रे हैं जो तटीय मैदानों को दक्कन के पठार से जोड़ते हैं—उत्तरी भाग में गोवा गैप, मध्य भाग में सबसे पुराना और सबसे चौड़ा पालक्काड दर्रा] तथा दक्षिणी भाग में सबसे संकरा शेंकोट्टई दर्रा।Ancient Geographical Gaps and Paleo-Climate Shape the Phylogeography of an Endemic Bird in the Sky Islands of Southern India V. V. Robin Anindya Sinha Uma Ramakrishnan 10.1371/journal.pone.0194158 2010 PLOS 5 10 e13321 20967202 2954160
जलप्रणाली और जलवायु
thumb|upright=0.7|वार्षिक वर्षा
पश्चिमी घाट भारत की अनेक बारहमासी नदियों का प्रमुख उद्गम क्षेत्र है। यहाँ से निकलने वाली प्रमुख नदी प्रणालियों में गोदावरी, कावेरी और कृष्णा शामिल हैं। यद्यपि इन नदियों का उद्गम पश्चिमी घाट में होता है, फिर भी अधिकांश नदियाँ पूर्व की ओर बहते हुए बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं। इसका कारण भारतीय प्रायद्वीप का पूर्व की ओर अपेक्षाकृत अधिक ढाल होना है। पश्चिमी तटीय मैदान में प्रायः छोटी नदियाँ और जलधाराएँ पाई जाती हैं, जिनमें मानसून के दौरान जलप्रवाह काफी बढ़ जाता है।Western Ghats - From Ecology To Economics Shanavas P H Sumesh A K Haris P M 2016 978-9-3852-4758-3 Educreation Publishing 27–29
इस क्षेत्र की प्रमुख नदियों में नर्मदा तथा ताप्ती उल्लेखनीय हैं, जो पश्चिमी घाट के उत्तर में स्थित गुजरात के मैदानों से होकर बहती हैं।The Indian Rivers: Scientific and Socio-economic Aspects Dhruv Sen Singh 2017 978-9-8110-2984-4 Springer Nature 309
कच्छ का उत्तरी भाग अपेक्षाकृत शुष्क तथा अर्ध-मरुस्थलीय है। पश्चिमी घाट इस क्षेत्र की जलवायु और ऋतुचक्र को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अप्रैल और मई के दौरान भूमि का तापमान बढ़ने से समुद्र की ओर से आर्द्र हवाएँ स्थल की ओर आकर्षित होती हैं। अरब सागर से आने वाली ये हवाएँ पश्चिमी घाट से टकराकर ऊपर उठती हैं।https://www.britannica.com/science/Indian-monsoon Indian monsoon Britannica 5 June 2026 1 August 2016 https://web.archive.org/web/20160801140005/https://www.britannica.com/science/Indian-monsoon
ऊपर उठने पर वायु ठंडी हो जाती है और पश्चिमी तट पर पर्वतीय वर्षा (ओरोग्राफिक वर्षा) होती है।https://www.britannica.com/science/orographic-precipitation Orographic precipitation Britannica 5 June 2026 5 January 2020 https://web.archive.org/web/20200105212629/https://www.britannica.com/science/orographic-precipitation यही प्रक्रिया जून में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन का कारण बनती है। पर्वतों को पार करते समय वायु अपनी अधिकांश नमी खो देती है, जिसके परिणामस्वरूप पश्चिमी तट पर भारी वर्षा होती है।https://wgbis.ces.iisc.ac.in/biodiversity/sahyadri/wgbis_info/climate.htm Climate of Western Ghats Indian Institute of Science 5 June 2026 21 May 2024 https://web.archive.org/web/20240521124321/https://wgbis.ces.iisc.ac.in/biodiversity/sahyadri/wgbis_info/climate.htm
यह क्षेत्र पूरे वर्ष गर्म और आर्द्र उष्णकटिबंधीय जलवायु का अनुभव करता है। औसत तापमान दक्षिण में लगभग 20 डिग्री सेल्सियस तथा उत्तर में लगभग 24 डिग्री सेल्सियस रहता है। अधिक ऊँचाई वाले क्षेत्रों में उपोष्णकटिबंधीय अथवा समशीतोष्ण जलवायु भी पाई जाती है और शीत ऋतु में तापमान कभी-कभी शून्य डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुँच जाता है।
इस क्षेत्र में वार्षिक वर्षा लगभग 100 से 900 सेंटीमीटर के बीच होती है, जबकि औसत वर्षा लगभग 250 सेंटीमीटर है। उत्तरी महाराष्ट्र के क्षेत्रों में भारी वर्षा के बाद लंबे शुष्क काल देखे जाते हैं, जबकि भूमध्य रेखा के निकट स्थित क्षेत्रों में वर्षा अपेक्षाकृत कम होती है, लेकिन वर्षा ऋतु अधिक समय तक बनी रहती है।https://archive.org/details/ConservationOfRainforestsInIndia/mode/2up Conservation of Rain forests in India Biodiversity of the Western Ghats - An Overview R.J. Ranjit Daniels 5 June 2026 Wildlife Institute of India
सन्दर्भ