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शालिवाहन
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अगस्त 2023
सातवाहन वंश प्राचीन भारत का एक महान राजवंश है। सातवाहन वंश की स्थापना 60 ईसा पूर्व राजा सिमुक ने की थी। सातवाहन वंश में राजा सिमुक , शातकर्णी, गौतमीपुत्रशातकर्णी, वशिस्थिपुत्र, पुलुमावी शातकर्णी, यज्ञश्री शातकारणी प्रमुख राजा थे। सातवाहन राजाओं ने 300 वर्षों तक शासन किया।
प्रतिष्ठान, सातवाहन वंश की राजधानी रही। यह महाराष्ट्र के ओरंगाबाद जिले में है। सातवाहन साम्राज्य की राजकीय भाषा प्राकृत वा लिपि ब्राम्ही थी। इस समय अमरावती कला का विकास हुआ था। सातवाहन राजवंश में मातृसत्तात्मक प्रचलन में था अर्थात राजाओं के नाम उनकी माता के नाम पर (गौतमीपुत्र सातकारणी) रखने की प्रथा थी लेकिन सातवाहन राजकुल पितृसत्तात्मक था क्योंकि राजसिंहासन का उत्तराधिकारी वंशानुगत ही होता था। सातवाहन राजवंश के द्वारा अजंता एवं एलोरा की गुफाओं का निर्माण किया गया था। सातवाहन राजाओं ने चांदी, तांबे, सीसे, पोटीन और कांसे के सिक्कों का प्रचलन किया। ब्राम्हणों को भूमि दान करने की प्रथा का आरंभ सर्वप्रथम सातवाहन राजाओं ने किया था जिसका उल्लेख नानाघाट अभिलेख में है।
राजा शालीवाहन सातवाहन राजवंश के सबसे प्रतापी वा महान राजा थे। उनके शासनकाल में यह राजवंश अपनी चरम सीमा पर था । राजा शालीवाहन की मां गौतमी थी। राजा शालीवाहन का जन्म आदिसोसन की कृपा से हुआ था (मत्स्यपुराण के अनुसार)। राजा शालीवाहन का बचपन समस्याओं से भरा हुआ था परंतु राजा शालीवाहन को ईश्वर की घोर तपस्या के फलस्वरूप अनेकों वरदान प्राप्त हुए, जिससे राजा सलीवाहन ने राजपाठ और युद्ध के क्षेत्र में महारथ हासिल की इसलिए इन्हे दक्षिणपथ का स्वामी एवं वर्दिया (वरदान प्राप्त करने वाला) कहा जाता है"।
सन्दर्भ
इन्हें भी देखें
श्रेणी:भारत के राजवंश