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मुअम्मर अल-गद्दाफ़ी
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मुअम्मर गद्दाफ़ी معمر القذافي ar Muammar al-Gaddafi at the AU summit.jpg अफ़्रीकी संघ की बैठक (२००९) में गद्दाफ़ी लीबिया का नेता एवं मार्गदर्शक सूची देखें अब्दुल अती अल-ओबेईदीमुहम्मद अज़-ज़रुक रज्जबमित्फ़ा अल-उस्ता उमर अब्दुल रज़्ज़ाक अस-सस्वामुहम्मद अज़- ज़नातीमित्फ़ा मुहम्मद केआबाइम्बारेक शमेखमुहम्मद अबु अल-कासिम अल-ज़्वाई सूची देखें जदल्लाह अज़्ज़ुज़ अत-ताल्ही मुहम्मद अज़-ज़रुक रजबजदल्लाह अज़्ज़ुज़ अत-ताल्हीउमर मुस्तफ़ा अल-मुंतसिरअबुज़ेद उमर दोरदाअब्दुल मजीद अल-क़ाउदमुहम्मद अहमद अल-मंगौशइम्बारेक शमेखशुक्री ग़नेमबग़्दादी महमूदी २ मार्च १९७७ २३ अगस्त २०११ पद सृजन पद समाप्ति लीबिया की क्रांतिकारी कमान परिषद का अध्यक्ष महमूद मुलेमान अल मग़रीबीअबदेस्सलाम जल्लाउदअब्दुल अती-ओबेईदी १ सितंबर १९६९ २ मार्च १९७७ इदरीस (बादशाह) स्वयं(महासचिव, जनरल पीपुल्स कॉन्ग्रेस) महासचिव, जनरल पीपुल्स कॉन्ग्रेस अब्दुल अती अल-ओबेईदी २ मार्च १९७७ २ मार्च १९७९ स्वयं अध्यक्ष, रिवॉल्यूश्नरी कमाण्ड काउन्सिल अब्दुल अती अल-ओबेईदी लीबिया के प्रधान मंत्री १६ जनवरी १९७० १६ जुलाई १९७२ महमूद सुलेमान अल-मग़रिबी अब्देस्सलाम जल्लाउद अध्यक्ष, अफ़्रीकी संघ २ फ़रवरी २०९ ३१ जनवरी २०१० जकाया किकवेते बिन्गु वा मुथारिका जून १९४२Some sources, such as a BBC Obituary Muammar Gaddafi https://web.archive.org/web/20130203040314/http://www.bbc.co.uk/news/world-africa-12537524 3 फ़रवरी 2013 , give the date as 7 June. Other sources say June 1942; others say "Spring of 1942" (Encyclopedia of the Modern Middle East, 2004) or "September 1942" (Encyclopedia of World Biography, 1998) सिरते, इतालवी लीबिया(अब लीबिया) 2011 10 20 1942 6 7 y सिरते या सिरते एवं मिस्राता के बीच, लीबिया अरब सोशलिस्ट यूनियन (लीबिया) (१९७१-१९७७) फ़ातिहा अल-नूरी (१९६९-१९७०) साफ़िया फ़रकाश एल-ब्रसाई (१९७१-२०११) Sons मुहम्मदसैफ़ अल-इस्लामअल-सादीहन्निबलमुअत्तस्सेमसैफ़ अल-अरबखामिसमिलाद (दत्तक)पुत्रियां आयशाहान्ना (दत्तक) मिलिट्री युनिवर्सिटी अकादमी इस्लाम Muammar al-Gaddafi Signature.svg Libya 1951 लीबिया साम्राज्य (१९६१–१९६९)Libya 1972 लीबियाई अरब गणराज्य (१९६९-१९७७)Libya 1977 लीबियई अरब जमहीरिया (१९७७-२०११) लीबियाई सेना १९६१-२०११ कर्नल लीबियाई सशस्त्र बल लीबियाई-मिस्री युद्धचैडियाई-लीबियाई संघर्षयुगांडा-तंजानिया युद्ध२०११ लीबियाई गृह युद्ध ऑर्डर ऑफ़ युगोस्लैव स्टारऑर्डर ऑफ़ गुड होप
मुअम्मर मुहम्मद अबू मिनयार अल-गद्दाफ़ी (ar مُعمّر محمد أبو منيار القذّافي; 1942 – 20 अक्टूबर 2011)http://www.bhaskar.com/article/INT-libya-leader-gaddafi-underground-network-of-tunnels-2514330.html संग्रहीत प्रति 24 अक्तूबर 2011 https://web.archive.org/web/20111022231834/http://www.bhaskar.com/article/INT-libya-leader-gaddafi-underground-network-of-tunnels-2514330.html 22 अक्तूबर 2011 live सन् १९६९ से लीबिया के शासक थे। उन्हें 'कर्नल गद्दाफ़ी' के नाम से जाना जाता था।
कर्नल मुअम्मर गद्दाफ़ी ने लीबिया पर कुल 42 साल तक राज किया और वे किसी अरब देश में सबसे अधिक समय तक राज करने वाले तानाशाह के रूप में जाने जाते रहे। उन्होंने अपने को क्रांति का प्रथप्रदर्शक और राजाओं का राजा घोषित कर रखा था।
गद्दाफ़ी के दावों पर यकीन करें तो उनके दादा अब्देसलम बोमिनियार ने इटली द्वारा लिबिया को कब्ज़ा करने की कोशिश के दौरान लड़ाई लड़ी थी और १९११ के युद्ध में मारे गये थे। वे उस युद्ध के पहले शहीद थे।
गद्दाफी ने 1952 के आसपास मिस्र के राष्ट्रपति गमल अब्देल नसीर से प्रेरणा ली और 1956 मंउ इज़राइल विरोधी आंदोलन में भाग भी लिया। मिस्र में ही उन्होंने अपनी पढ़ाई भी की। १९६० के शुरुवाती दिनों में गद्दाफ़ी ने लिबिया की सैन्य अकादमी में प्रवेश लिया, जिसके बाद उन्होंने यूरोप में अपनी शिक्षा ग्रहण की और जब लिबिया में क्रांति हुई तो उन्होंने लिबिया की कमान संभाली.
गद्दाफ़ी के विरोधियों का कहना है कि कर्नल मुअम्मर गद्दाफ़ी भी राजा की तरह खुद को लीबिया का सर्वे सर्वा समझने लग गये। आरोप है कि भ्रष्टाचार के जरिए गद्दाफ़ी ने अकूत संपत्ति कमाई और विदेशी बैंकों में जमा किया।
बाद में पिछले साल दिसंबर में ट्यूनीशिया की राजनीतिक क्रांति ने गद्दाफ़ी की भी जड़ें हिला दी। ट्यूनीशिया के बाद मिस्र में प्रदर्शन हुए. वहां हुस्नी मुबारक को जाना पड़ा. मोरक्को के राजा ने जनता के गुस्से को भांपते हुए जनमत संग्रह कराया. गद्दाफ़ी अपनी जनता का मूड नहीं भांप सके और अरब की क्रांति की भेंट चढ़ गए।२० अक्टूबर,२०११ को एक संदिग्ध सैन्य हमले में गद्दाफ़ी मारे गये। कर्नल मुअम्मर गद्दाफ़ी के खात्मे के साथ ही लीबिया में ४२ साल लंबे तानाशाही शासन के अंत हो गया और शनिवार यानि २२ अक्टूबर को लीबिया आज़ादी मुल्क घोषित कर दिया जाएगा। लीबिया की अंतरिम सरकार चला रही नेशनल ट्रांजिशनल काउंसिल (राष्ट्रीय अंतरिम परिषद या एन॰ टी॰ सी॰) लीबिया को आज़ाद मुल्क घोषित करेगी। इसके साथ ही लीबिया में पूरी तरह से लोकतांत्रिक सरकार बनने की उलटी गिनती भी शुरू हो गई है।
लीबिया के अंतरिम प्रधानमंत्री और एन॰ टी॰ सी॰ में नंबर दो की हैसियत रखने वाले महमूद जिबरिल ने गद्दाफ़ी की मौत के बाद ऐलान किया, 'अब लीबिया के लिए नई शुरुआत का समय आ गया है। नया और एकता के सूत्र में बंधा लीबिया।' गद्दाफ़ी की मौत के बाद लीबिया में जश्न का माहौल है। दुनिया के अलग-अलग इलाकों में रह रहे लीबियाई नागरिक भी तानाशाही शासन के अंत पर खुशी मना रहे हैं। लेकिन दुनिया के कई देश लीबिया के भविष्य को लेकर मिलीजुली प्रतिक्रियाएं जाहिर कर रहे हैं। दुनिया के कई मुल्क लीबिया को शुभकामनाएं देने के साथ आशंका भी जाहिर कर रहे हैं कि इस देश में अराजकता का माहौल जल्द ख़त्म हो पाएगा।
ख़बरों के मुताबिक अपने आख़िरी समय में अपने गृह नगर सिर्ते में छुपा गद्दाफ़ी वहाँ से भागने की फिराक में था। वह अपने काफिले के साथ वहाँ से जैसे ही निकला, फ्रेंच लडा़कू विमानों ने उस पर हमला कर दिया। हवाई हमले के बाद गद्दाफ़ी का काफिला नेशनल ट्रांजिशनल काउंसिल की फ़ौज के साथ झड़प में फंस गया। माना जा रहा है कि इस दौरान हुई गोलीबारी में गद्दाफ़ी ज़ख़्मी हो गया। इसके बाद वह ज़मीन पर घिसटते हुए एक पाइप के पास जाकर छुप गया। कुछ घंटों बाद एन॰ टी॰ सी॰ के लड़ाकों ने गद्दाफ़ी को पानी की निकासी के लिए बने एक पाइप के पास से खोज निकाला।
बताया जा रहा है कि इनमें से एक ने अपने जूते से गद्दाफ़ी की पिटाई की। चश्मदीदों के मुताबिक गद्दाफ़ी दया की भीख मांग रहा था। वहीं, गद्दाफ़ी के शव के साथ एंबुलेंस में सवार अब्दल-जलील अब्दल अज़ीज़ नाम के डॉक्टर का दावा है कि गद्दाफ़ी को दो गोलियाँ लगी थीं। अज़ीज़ के मुताबिक एक गोली गद्दाफ़ी सिर में और सीने पर लगी थी।
बाहरी कड़ियाँ
कर्नल गद्दाफी मारे गये
गद्दाफी अब भी सत्ता में कैसे बने हुए हैं?
गद्दाफी मारा गया, लीबिया स्वतंत्रसितंबर 2021 InternetArchiveBot
सन्दर्भ
श्रेणी:तानाशाह
श्रेणी:तख्तापलट करके सत्ता हासिल करने वाले नेता