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प्रायोगिक मनोविज्ञान

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प्रायोगिक मनोविज्ञान (Experimental psychology) कोई विषय नहीं है बल्कि एक विधिसम्म्त तरीका (methodological approach) है। आधुनिक मनोविज्ञान की औपचारिक शुरुआत 1879 में हुई जब विल्हेम वुंट द्वारा जर्मनी के लीपजिंग में पहली प्रयोगात्मक प्रयोगशाला की स्थापना की गई थी। विल्हेम सचेत अनुभव के अध्ययन में रुचि रखते थे और मन के घटकों या निर्माण खंडों का विश्लेषण करना चाहते थे। विलियम वुंड्ट के समय के मनोवैज्ञानिकों ने आत्मनिरीक्षण के माध्यम से मन की संरचना का विश्लेषण किया और इसलिए उन्हें संरचनावादी कहा गया।आत्मनिरीक्षण एक ऐसी प्रक्रिया थी जिसमें मनोवैज्ञानिक प्रयोगों में व्यक्तियों या विषयों को अपनी मानसिक प्रक्रियाओं या अनुभवों का विस्तार से वर्णन करने के लिए कहा जाता था। प्रायोगिक मनोविज्ञान को संरचनावाद या संरचनावाद के एक भाग के रूप में भी जाना जाता है। क्योंकि वुंट के विचार चेतना को एक संरचना के रूप में देखने पर केंद्रित थे (प्राथमिक संवेदनाओं के निर्माण खंडों द्वारा निर्मित जिसमें इसे तोड़ा जा सकता था) उनके दृष्टिकोण को संरचनावाद के रूप में चिह्नित किया गया था। प्रायोगिक मनोविज्ञान में प्रयुक्त विधियाँ प्रायोगिक मनोवैज्ञानिक मानव व्यवहार की जांच के लिए विभिन्न शोध विधियों और औजारों का उपयोग करते हैं। (१) प्रयोग कुछ मामलों में, मनोवैज्ञानिक यह निर्धारित करने के लिए प्रयोग कर सकते हैं कि अलग-अलग चर के बीच कोई कारण और प्रभाव संबंध है या नहीं। (२) मामलों का अध्ययन (केस स्टडीज) मामलों का अध्ययन शोधकर्ताओं को गहराई से किसी व्यक्ति या समूह का अध्ययन करने की अनुमति देता है। (३) सहसम्बंध अनुसन्धान सहसंबंध अध्ययन से शोधकर्ताओं के लिए विभिन्न चरों (variables) के बीच संबंध देखना सmभव हो जाता है। (४) प्राकृतिकवादी निरीक्षण प्राकृतिकवादी अवलोकन शोधकर्ताओं को अपने प्राकृतिक वातावरण में लोगों का निरीक्षण करने का मौका देता है। यह तकनीक उन मामलों में विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है जहां जांचकर्ता मानते हैं कि एक प्रयोगशाला सेटिंग में प्रतिभागी व्यवहार पर अनुचित प्रभाव हो सकता है। प्रायोगिक मनोविज्ञान का इतिहास 1874 - विल्हेम वुंट ने "फिजियोलॉजिकल मनोविज्ञान के सिद्धांत" नामक पहली प्रयोगात्मक मनोविज्ञान पाठ्यपुस्तक प्रकाशित की। 1875 - विलियम जेम्स ने संयुक्त राज्य अमेरिका में मनोविज्ञान प्रयोगशाला खोला। मूल प्रयोगात्मक शोध करने के बजाय, कक्षा प्रदर्शन के उद्देश्य के लिए यह प्रयोगशाला बनाई गई थी। 1879 - जर्मनी की लीपजिग में पहली प्रयोगात्मक मनोविज्ञान प्रयोगशाला की स्थापना की गई थी। 1883 - जी स्टेनली हॉल ने संयुक्त राज्य अमेरिका के जॉन हॉपकिंस विश्वविद्यालय में पहली प्रयोगात्मक मनोविज्ञान प्रयोगशाला खोली। 1885 - हरमन एबिंगहौस ने अपने प्रसिद्ध "स्मृत के बारे में' प्रकाशित किया। इसमें उन्होंने अपने सीखने और स्मृति प्रयोगों का वर्णन किया जो उन्होंने स्वयं पर आयोजित किए थे। 1887 - जॉर्ज ट्रबॉल लैड ने अपनी पाठ्यपुस्तक "एलिमेंट्स ऑफ फिजियोलॉजिकल साइकोलॉजी" प्रकाशित की। यह पहली अमेरिकी पुस्तक है जिसमें प्रयोगात्मक मनोविज्ञान पर महत्वपूर्ण जानकारी शामिल थी। 1887 - जेम्स मैककिन कैटेल ने पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय में दुनिया की तीसरी प्रयोगात्मक मनोविज्ञान प्रयोगशाला की स्थापना की। 1890 - विलियम जेम्स ने अपनी क्लासिक पाठ्यपुस्तक, "मनोविज्ञान के सिद्धांत" को प्रकाशित किया। 1891 - मैरी व्हिटन कैल्किन ने वेलेस्ले कॉलेज में एक प्रयोगात्मक मनोविज्ञान प्रयोगशाला की स्थापना की, जो मनोविज्ञान प्रयोगशाला बनाने वाली पहली महिला बन गई। 1893 - जी स्टेनली हॉल ने संयुक्त राज्य अमेरिका में मनोवैज्ञानिकों का सबसे बड़ा पेशेवर और वैज्ञानिक संगठन अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन की स्थापना की। 1920 - जॉन बी वाटसन और रोज़ली रेनर ने अब अपने प्रसिद्ध "लिटिल अल्बर्ट" प्रयोग का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने दिखाया कि लोगों में भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को शास्त्रीय रूप से सशर्त किया जा सकता है। 1929 - एडविन बोरिंग की पुस्तक "प्रायोगिक मनोविज्ञान का इतिहास" प्रकाशित की गयी। बोरिंग एक प्रभावशाली प्रयोगात्मक मनोवैज्ञानिक थे जो मनोविज्ञान अनुसंधान में प्रयोगात्मक तरीकों के उपयोग के लिए समर्पित थे। 1955 - ली क्रोनबैक ने मनोवैज्ञानिक परीक्षणों में रचनात्मक वैधता प्रकाशित की, जिसने मनोवैज्ञानिक अध्ययन में निर्माण वैधता के उपयोग को लोकप्रिय बनाया। 1958 - हैरी हारलो ने "द नेचर ऑफ लव" (प्रेम की प्रकृति) प्रकाशित की। 1961 - अल्बर्ट बांद्रा ने अब अपने प्रसिद्ध "बॉबो गुड़िया प्रयोग" का आयोजन किया , जिसने आक्रामक व्यवहार पर अवलोकन के प्रभावों का प्रदर्शन किया। श्रेणी:मनोविज्ञान श्रेणी:मनोविज्ञान