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नटवरलाल
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नटवरलाल मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव 1912 बांगड़ा, सीवान, बिहार और उड़ीसा प्रांत, ब्रिटिश भारत 24 जून 1996 नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, नई दिल्ली, दिल्ली, भारत yes 2009 07 25 1912 01 01 बंगरा (बांगर) में मूर्ति भारतीय ठगी 1937–1996नटवरलाल (जन्म मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव; 1912 — 25 जुलाई 2009) भारत के प्रमुख ठगों में से एक था जिसने कारावास से भागना जैसे अपराधों के साथ-साथ ताजमहल, लाल किला, राष्ट्रपति भवन और संसद भवन को कई बार बेचने जैसे ठगी के कार्य किये।http://www.timescrest.com/opinion/nuts-about-natwarlal-5243 Nuts about Natwarlal 23 अप्रैल 2011 द टाइम्स ऑफ़ इंडिया 3 अगस्त 2018 https://web.archive.org/web/20161116072947/http://www.timescrest.com/opinion/nuts-about-natwarlal-5243 16 नवम्बर 2016 en नटवरलाल के बारे में रोचक तथ्य deadhttps://books.google.com/books?id=VA9TaE2V0eMC&q=natwarlal+shrivastav&pg=PA22 Applied Psychology: India Specific and Cross-cultural Perspectives By Smarak Swain स्मारक स्वाइन 22 उसके द्वारा अनुमानित ठगी का आज का मूल्य लगभग ₹129 अरब है।
प्रारम्भिक जीवन
नटवरलाल का जन्म सीवान के बांगरा गाँव में एक रईस जमींदार रघुनाथ श्रीवास्तव के घर पर हुआ था। वो दो भाइयों में बड़ा बेटा था। उसके पिता एक स्टेशन मास्टर थे।https://www.indiatoday.in/magazine/special-report/story/19871130-the-life-and-crimes-of-a-master-criminal-natwarlal-799579-1987-11-30 The life and crimes of a master criminal Natwarlal चेंगप्पा राज 30 नवम्बर 1987 इंडिया टुडे 2 नवम्बर 2020 en एक शातिर अपराधी नटवरलाल का जीवन और अपराध
नटवरलाल को पहली बार अपनी ठगी की विद्या का तब आभाष हुआ जब उसे किसी पड़ोसी ने बैंक ड्राफ्ट जमा करवाने के लिए भेजा। उसने पड़ोसी के नकली हस्ताक्षर करके उसके खाते से 1,000 रुपये निकाल लिये। इसके बाद नटवरलाल कलकत्ता चला गया और वहाँ वाणिज्य स्नातक में प्रवेश ले लिया हालांकि इस समय भी वो सामयिक शेयर दलाल का काम करता था। उसने कपड़े का व्यापर करने का भी प्रयास किया लेकिन असफल रहा।
ऐसा माना जाता है कि उसका बांगड़ा का घर अंग्रेज़ों ने गिरा दिया यद्यपि जमीन पर मालिकाना अधिकार उनके परिवार का ही है।
जीवन
उन्होंने सैकड़ों लोगों को धोखा दिया और 50 से अधिक छद्म नामों का इस्तेमाल किया। वह हमेशा ठगी के लिए शहर बदलता रहता था। लोगों को धोखा देने के लिए उपन्यासों से पढ़कर आइडिया इस्तेमाल करता था। ठगी में नटवर लाल इतने शातिर था कि उसने 3 बार ताजमहल, दो बार लाल किला, एक बार राष्ट्रपति भवन और एक बार संसद भवन तक को बेच दिया था। राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के फर्जी साइन करके नटवर लाल ने संसद को बेच दिया था। जिसे समय संसद को बेचा था, उस समय सारे सांसद वहीं मौजूद थे। कहते हैं कि नटवर लाल के 52 नाम थे, उन्ही में से एक नाम नटवर लाल था। सरकारी कर्मचारी का भेष धरकर नटवर लाल ने विदेशियों को ये सारे स्मारक बेचे थे। इनकी ठगी पर ‘मिस्टर नटवर लाल’ फिल्म भी बन चुकी है। जिसमें अमिताभ बच्चन ने इनका रोल निभाया है। वह प्रसिद्ध हस्तियों के हस्ताक्षर बनाने में भी माहिर था। यह भी कहा जाता है कि उन्होंने कई बड़े उद्योगपतियों को भी धोखा दिया था, वह एक बड़ी रकम नकद उनसे यह कहकर लेता था कि वह एक सामाजिक कार्यकर्ता है। उसने कई दुकानदारों को लाखों रुपये का चूना लगाया । दुकानदारों से बड़ी संख्या में सामान लेकर उन्हें नकली चेक और डिमांड ड्राफ्ट द्वारा भुगतान करता था।
दिल्ली का कनाट प्लेस. सुरेंद्र शर्मा की घड़ी की दुकान थी।एक दिन सफेद कमीज और पैंट पहने एक बूढ़ा आदमी घड़ी की दुकान में जाता है और खुद का परिचय तत्कालीन वित्तमंत्री नारायण दत्त तिवारी का पर्सनल स्टाफ डी.एन. तिवारी रूप में देता है और दुकानदार से कहता है कि प्रधानमंत्री राजीव गांधी के दिन अच्छे नहीं चल रहे हैं, इसलिए उन्होंने पार्टी के सभी वरिष्ठ लोगों को समर्थन के लिए दिल्ली बुलाया है और इस बैठक में शामिल होने वाले सभी लोगों को वो घड़ी भेंट करना चाहते हैं तो मुझे आपकी दुकान से 93 घड़ी चाहिए। दुकानदार को पहले तो इस आदमी की बातों पर शक हुआ लेकिन एक साथ इतनी घड़ियों को बेचने के लालच से खुद को रोक नहीं पाया।
अगले दिन वो बूढ़ा आदमी घड़ी लेने दुकान पहुंचा। दुकानदार को घड़ी पैक करने की बात कह एक स्टाफ को अपने साथ नॉर्थ ब्लॉक (नॉर्थ ब्लॉक वो जगह है, जहां प्रधानमंत्री से लेकर बड़े-बड़े अफसरों का ऑफिस होता है) ले गया. वहां उसने स्टाफ को भुगतान के तौर पर 32,829 रुपए का बैंक ड्राफ्ट दे दिया. दो दिन बाद जब दुाकनदार ने ड्राफ्ट जमा किया तो बैंक वालों ने बताया कि वो ड्राफ्ट फर्जी है। फिर दुकानदार को समझ आया कि वो बूढ़ा आदमी नटवर लाल था और इसके बाद वित्तमंंत्री वीपी सिंह तो कभी वाराणसी के जिला जज का नाम तो कभी यूपी के सीएम के नाम पर नटवर लाल अलग-अलग शहर में दुकानदारों का चूना लगाता रहा।
नटवरलाल को नौ बार गिरफ्तार किया गया था लेकिन हर बार वह जेल से भागने में सफल रहा। उसे जालसाजी के 14 मामलों के लिए दोषी ठहराया गया था और 113 साल की सजा सुनाई गई थी, लेकिन उसने मुश्किल से 20 साल जेल में बिताए। आखिरी बार जब उसे 1996 में गिरफ्तार किया गया था तो उस समय उसकी उम्र 84 साल थी। लेकिन वह पुलिस को चकमा देने में फिर से कामयाब रहा।उस समय वह व्हीलचेयर का उपयोग करता था और उसे कानपुर जेल से दिल्ली इलाज के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था।नई दिल्ली रेलवे स्टेशन मौका पाकर वह गायब हो गया। इसके बाद उसे 24 जून 1996 को पुलिस द्वारा अंतिम बार देखा गया था। उस तारीख के बाद उसे फिर कभी नहीं देखा गया।नटवर लाल को अपने किए पर कोई शर्म नहीं थी। वह अपने आपको रॉबिन हुड मानता था, कहता था कि मैं अमीरों से लूट कर गरीबों को देता हूं। उसका कहना था कि मैंने कभी हथियार का इस्तेमाल नहीं किया। लोगों से बहाने बनाकर पैसे मांगे और लोग पैसे दे गए। इसमें मेरा क्या कसूर है? आखिरी बार नटवर लाल बिहार के दरभंगा रेलवे स्टेशन पर देखा गया था। पुलिस में पुराने थानेदार ने जो सिपाही के जमाने से नटवर लाल को जानता था, उसे पहचान लिया। नटवर लाल ने भी देख लिया कि उसे पहचान लिया गया है। सिपाही अपने साथियों को लेने थाने के भीतर गया और नटवर लाल गायब था। यह बात अलग है कि पास खड़ी मालगाड़ी के डिब्बे से नटवर लाल के उतारे हुए कपड़े मिले और गार्ड की यूनीफॉर्म गायब थी।
मृत्यु
नटवरलाल के वकील द्वारा 2009 में अदालत में यह कहते हुए अर्जी डाली गई कि नटवरलाल की मृत्यु 25 जुलाई 2009 को चुकी है इसलिए उसके खिलाफ लम्बित केस खारिज़ कर दिए जाए । नटवार लाल के छोटे भाई गंगाप्रसाद जोकि गोपालगंज में रहता है का भी कहना था कि नटवारलाल का अन्तिम संस्कार रांची में कर दिया गया है ।परन्तु आज तक इसके कोई पुख्ता सबूत या सरकारी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं ।
परिवार
नटवारलाल के जीवन में दो पत्नियां एवं एक बेटी थी ।
सन्दर्भ
श्रेणी:1912 में जन्मे लोग
श्रेणी:२००९ में निधन