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मुदलियार
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75px75px75px पी टी राजन • बारतीदासन • सी एन अन्नादुरै • माइलस्वामी अन्नादुरै • ए. आर. रहमान मुदलियार भारत राज्यों-तमिलनाडु, पुदुच्चेरी, कर्नाटक और श्रीलंका तमिल हिन्दू धर्म, ईसाई धर्म पिल्लै, गौंडर
मुदलियार या मुदालियर भी कहा जाता है, मुदाली और मूदले तमिल जातियों द्वारा प्रयोग की जाने वाली एक पदवी/उपाधि है। यह शब्द मानद पदवी मुदाली से बना है जो मध्यकालीन दक्षिण भारत में शीर्ष दर्ज़े के नौकरशाही अधिकारियों और सैन्य अफसरों को प्रदान की जाती थी, व जिसका तमिल भाषा में अर्थ है पहले दर्ज़े का व्यक्ति.इर्षिक, यूजीन एफ़. डॉयलॉग एंड हिस्ट्री: कंस्ट्रक्टिंग साऊथ इंडिया, 1795-1895. बर्कले: कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय प्रेस, प्रत्यक्ष वेब सन्दर्भ: http://content.cdlib.org/xtf/view?docId=ft038n99hg&brand=eschol. यह उपनाम आम तौर पर भारतीय तमिलों और तमिल प्रवासियों के बीच प्रचलित है, हालांकि इसका प्रयोग दक्षिण भारत के अन्य भागों में भी किया जाता है।
व्युत्पत्ति
मुदलियार शब्द का अर्थ है प्रथम नागरिक या शीर्ष व्यक्ति .मुदाली शब्द का प्रयोग नागारत्तर संघ में एक पद के रूप में भी प्रयुक्त किया जाता था क्योंकि यह वेल्लालर जाति पर लागू होता है। इनका चोल/चेर/पांडिया साम्राज्यों के साथ निकट संबंधों का लंबा इतिहास रहा है। अधिक विस्तृत जानकारी के लिए वेल्लालर देखें.
इतिहास
कारिकाला ने अपने पुत्र अथोंडाई द्वारा कुरुम्बर के विरुद्ध युद्ध जीतने के पश्चात् थोंडाइमंडलम को 24 कोट्टम (जातियों) में बांटा और इन्हें मुदाली या मुदलियारतिरुपति के इतिहास: टी. के. टी. वीरराघवाचार्य द्वारा तिरुवेंगदम मंदिरभारतीय संस्कृति में दक्षिण भारत के कुछ योगदान - एस. कृष्णास्वामी ऐयांगर द्वारा पृष्ठ 161एशियाई जर्नल और मासिक मिश्रण पदवी दे कर वेल्लालर प्रमुखों को प्रदान किया, जिसका वास्तविक अर्थ प्रथम नागरिक या शीर्ष व्यक्ति था.
थोंडाइमंडलम की कुछ मुदाली जातियां मध्ययुगीन कवि कंबर के समय श्रीलंका चली गई थीं। उदाहरण के लिए, सीलोन के कुछ तमिल अपनी वंशावली इस समूह से संबंधित मानते हैं, उनमे से कुछ जो संत बन गए वे नयनार कहलाते हैं। सी शिवारत्नम की पुस्तक द तमिल्स इन अर्ली सीलोन (The Tamils in Early Ceylon), सीलोन में कुछ मुदलियारों को थानिनायका मुदलियार (अन्यों के साथ) से जुड़ा पाती है, एक धनी शैव वेलालर जो थोंडाइमंडलम से सीलोन चले गए।The Tamils in Early Ceylon By C. Sivaratnam, http://books.google.com/books?vid=0PrqSaY8TV9DtgCG9v&id=hlocAAAAMAAJ&q=mudaliyar+vellala&dq=mudaliyar+vellala&pgis=1 https://web.archive.org/web/20170411065551/https://books.google.com/books?vid=0PrqSaY8TV9DtgCG9v&id=hlocAAAAMAAJ&q=mudaliyar+vellala&dq=mudaliyar+vellala&pgis=1 11 अप्रैल 2017
थोंडाइ नाडू के एक वेल्लाला राजा मानाडूकांडा मुदाली ने कंबन पर उनके द्वारा लिखित कृषि कार्य की प्रशंसा करने वाली एक साहित्यिक कृति इरेझूपटु से खुश हो कर सोने की वर्षा की थी। सेयूर के एक वेल्लाला तनिनायागा को नेदुन्तिवा का प्रमुख बनाया गया था .http://noolaham.net/library/books/02/101/101.htm noolaham.net 23 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20070930024359/http://noolaham.net/library/books/02/101/101.htm 30 सितंबर 2007 dead
इसी तरह के और भी वर्णन मिलते हैं जैसे उदाहरण के लिए 17वीं सदी में एक शीर्ष मुस्लिम व्यापारी मराक्कयार को मदुरै के नायक राजा द्वारा मुदाली पिल्लई के पदवी दी गई थी।
थॉमस ए टिम्बर्ग की पुस्तक "ज्यूस इन इंडिया" के अनुसार कोचीन के राजा को भी मुदाली की उपाधि से सम्मानित किया गया था।
http://books.google.com/books?id=vbJtAAAAMAAJ&q=mudaliar+title&dq=mudaliar+title&lr=&pgis=1
अगामुड्यार जैसी जातियों ने भी मुदाली पदवी का प्रयोग किया था क्योंकि उन्होनें सैन्य दलों (रेजीमेंटों) को सेवा प्रदान की थी।http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_12/stones_176_to_200.html South Indian Inscriptions Volume_12 - Kopperunjingadeva II Inscriptions @ whatisindia.com 23 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20101226024851/http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_12/stones_176_to_200.html 26 दिसंबर 2010 dead September 2009
यद्यपि देसिगर, कोझिया वेल्लालर और करियार के बीच कुछ हद तक कम प्रचलित होने के अलावा इस पदवी का प्रयोग दूर तक फैला हुआ है।http://books.google.co.in/books?id=73msCkfD5V8C&pg=PA112&lpg=PA112&dq#PPA112,M1 संग्रहीत प्रति 15 जून 2020 https://web.archive.org/web/20121020112749/http://books.google.co.in/books?id=73msCkfD5V8C&pg=PA112&lpg=PA112&dq#PPA112,M1 20 अक्तूबर 2012 live
गट्टी मुदलियार
गट्टी मुदलियार नायक साम्राज्य के सबसे खतरनाक असुरक्षित राज्य के प्रमुख थे क्योंकि कावेरी के दाहिने किनारे पर स्थित उनकी सामरिक राजधानी कावेरिपुरम, मैसूर पठार के सबसे प्रमुख रास्तों में से एक के साथ लगती थी। हालांकि ऐसा लगता है कि उनकी शक्ति का केंद्र तारामंगलम रहा है जहां उन्होनें एक मंदिर के अनुदान भवन का निर्माण किया है। ऐसा कहा जाता है कि उनका वर्चस्व पूर्व में तलाईवासल, पश्चिम में इरोड जिले के धारापुरम और दक्षिण में करूर जिले तक फैला हुआ था। गट्टी मुदलियारों के पास अत्यंत सामरिक महत्व के किले ओमालुर तथा अत्तूर थे। 1635 ई. के आसपास, जब तिरुमलाई नायक की सत्ता चाहती थी कि पालाकोडक्षेत्र बीजापुर के अंतर्गत आ जाए, तब बीजापुर और गोलकुंडा के मुस्लिम सुल्तानों ने दक्षिण में आक्रमण किया। इस बीच सेरांगापटनम के कांतिराव नारासा राजा ने 1641 ई. में गट्टी मुदलियारों से कोयम्बटूर में कई स्थान हड़प लिए.
मुदलियार पदवी का प्रयोग विभिन्न जातियों द्वारा किया जाता है। ये जातियां गैर ब्राह्मण अगड़ी जातियों (एनबीएफसी/NBFC) के अंतर्गत आती हैं। मुदलियार पदवी का उपयोग करने वाली जातियों में से कुछ हैं:
बंगलुरु के मुदलियार
दक्षिण बंगलुरु (उल्सूर झील, एमजी रोड, उच्च मेदिनी इलाकों से घिरा हुआ है) की आबादी का एक महत्त्वपूर्ण प्रतिशत मुदलियार हैं। एमजी रोड तथा इसके आस पास स्थित कई प्रसिद्ध इमारतों का स्वामित्व किसी समय मुदलियारों के पास था (उदाहरण-गंगाराम, प्लाज़ा सिनेमा). प्रसिद्ध "कचहरी अट्टारा" या रेड कोर्ट हाउस जो विधान सौदा के सामने है, को एक प्रसिद्ध मुदलियार ठेकेदार द्वारा बनाया गया था। विंडसर मेनर (5 सितारा होटल) के आसपास के महलनुमा घरों पर आज भी संपन्न मुदलियार परिवारों का स्वामित्व और निवास है। बंगलौर प्रदर्शनी आमतौर पर उल्सूर में आरबीएएनएमएस (RBANMS) मैदानों पर आयोजित होती है जिसका स्वामित्व राय बहादुर अर्काट नारायणस्वामी मुदलियार ट्रस्ट के पास है। ट्रस्ट के पास इससे संबद्ध कई स्कूल और कॉलेज हैं। प्रसिद्ध क्विजमास्टर अविनाश मुदलियार एक और प्रख्यात मुदलियार है।
हैदराबाद के मुदलियार
सिकंदराबाद में बोइगुडा, पद्मा राव नगर, मारेडपल्ली के इलाकों में बड़ी संख्या में मुदलियार रहते हैं। कुछ कॉलेजों के अलावा वे "कीज़ हाई स्कूल" नामक लड़कियों का एक लोकप्रिय स्कूल चलाते हैं। "पद्म राव नगर" नामक एक लोकप्रिय आवासीय क्षेत्र का नाम स्वर्गीय दीवान बहादुर पद्मा राव मुदलियार के नाम पर रखा गया है।
श्रीलंका के मुदलियार
मुदलियार बड़ी संख्या में श्रीलंका के विभिन्न क्षेत्रों में रहते हैं। विभिन्न जाति के लोग मुदलियार बन सकते हैं यद्यपि मूलतः मुदलियार एक समरूप जाति समूह था। राजनीतिक विकास की प्रकृति के कारण मुदलियार एक जाति नाम से एक पदवी के रूप में परिवर्तित हो गया जिसने मुदलियारों को नेतृत्व करने वाले पदों तक पहुंचाया. जल्द ही सभी नेताओं को मुदलियार नाम धारण करना पड़ा.
मुदलियार द्रविड़ हैं
मुदलियार तमिल बोलने वाले द्रविड़ हैं। विभिन्न संस्कृतियों के साथ मुदलियारों के मेल जोल के कारण अपने मेल जोल के आधार पर उन्होनें कई उप शाखाएं विकसित कीं. इसे 19वीं सदी की शुरुआत में मुदलियारों द्वारा जस्टिस पार्टी की स्थापना द्वारा भी समझा जा सकता है जिसने औपनिवेशिक सरकारी नौकरशाही में गैर ब्राह्मणों के लिए समान प्रतिनिधित्व के लिए संघर्ष किया। मुदलियार शाखाओं का विकास- मुदालियर शाखाओं के कुछ उदाहरण ऐतिहासिक रूप से साबित हो चुके हैं। बाकियों का कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है। काइकोला मुदलियार चोल सेना की एक अलग शाखा के रूप में चोल साम्राज्य से जुड़े हैं। अर्काट मुदलियार पल्लव साम्राज्य से जुड़े हैं।
तोण्डैमण्डल सेवा वेल्लालर
तोण्डैमण्डल मुदलियार पर मुख्य लेख देखें
तोण्डैमण्डल मुदलियार या तोण्डैमण्डल सेवा वेल्लालर भारत के तमिल नाडु राज्य की सर्वाधिक प्रतिष्ठित जाति है।कैथलीन गफ द्वारा कैथलीन गफ द्वारा दक्षिण भारत में ग्रामीण समाज वे अपने वंश को पेरियापुराणम के लेखक सेक्कीळार से जुड़ा हुआ मानते हैं। वे मुदलियारों के मूल सजातीय समूह हैं जिन्हें चोल नरेश कारीकाला चोलवी कनाकसाभाई द्वारा द तमिल एट्टीन हंड्रेड इयर्स अगो."इर्स्चिक, यूजीन एफ. वार्ता और इतिहास: दक्षिण भारत का निर्माण, 1795-1895. बर्कले: कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय प्रेस, 1994."ऑर्डर एंड डिसऑर्डर इन कलोनीअल साउथ इंडिया युजिन ऍफ़. इर्स्चिक मॉडर्न एशियन स्टडीज़, खंड 23, संख्या 3 (1989), पीपी 459-492, द्वारा दक्षिण भारत के तोण्डैमण्डलम् या तोण्डैनाडु में बसाया गया था।http://www.hindu.com/fr/2004/09/03/stories/2004090300780600.htm The Hindu : Of tilting pillars 23 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20100918070816/http://www.hindu.com/fr/2004/09/03/stories/2004090300780600.htm 18 सितंबर 2010 live .
तोण्डैमण्डल कोंडैक्कट्टी वेल्लालर
परंपरा से पता लगता है कि यह समूह कुरुम्बर साम्राज्य को उखाड़ने के पश्चात् अडोंडाई चक्रवर्ती द्वारा तोण्डैमण्डलम् में बसाया जाने वाला पहला वेल्लालर समूह था।<सन्दर्भ="धर्म और लोक संस्कृति: आधुनिक दक्षिण भारत में युद्ध और समरूपता, द्वारा जॉन जया पॉल, कीथ एडवर्ड येंडल,http://books.google.com/books?vid=ISBN0700711015&id=x3GuKnZTGG4C&pg=PA241&lpg=PA241&ots=0mGugDgcw8&dq=adondai+kondaikatti&sig=rvjX3UZKGetOlVMyoGQS0IC4ac0">Religion and Public Culture: encounters and identities in modern South Indi by John Jeya Paul, Keith Edward Yandell,http://books.google.com/books?vid=ISBN0700711015&id=x3GuKnZTGG4C&pg=PA241&lpg=PA241&ots=0mGugDgcw8&dq=adondai+kondaikatti&sig=rvjX3UZKGetOlVMyoGQS0IC4ac0</ref> अडोंडाई चक्रवर्ती का वर्णन विभिन्न तरीकों से किया गया है: अ) चोल साम्राज्य में एक लेफ्टिनेंट के रूप में <सन्दर्भ=ग्रेट ब्रिटेन और आयरलैंड के शाही एशियाई समाज द्वारा ग्रेट ब्रिटेन और आयरलैंड के शाही एशियाई समाज पर पुस्तक,http://books.google.com/books?vid=0o3HpzvAK7y1RHyxOc&id=JLFfVFU1mCoC&pg=PA581&lpg=PA581&dq=adondai+chola#PPA581,M1">Journal of the Royal Asiatic Society of Great Britain and Ireland By Royal Asiatic Society of Great Britain and Ireland,http://books.google.com/books?vid=0o3HpzvAK7y1RHyxOc&id=JLFfVFU1mCoC&pg=PA581&lpg=PA581&dq=adondai+chola#PPA581,M1</ref>, ब) प्राचीन चोल नरेश कोक्किली और नागा रानी के एक पुत्र के रूप में, स) राजेन्द्र कुलोतुंगा चोल प्रथम के नाजायज़ पुत्र और महल के परिचर के रूप में <सन्दर्भ=एस. कृष्णास्वामी अयंगर द्वारा लिखित भारतीय संस्कृति में दक्षिण भारत के कुछ योगदान, http://books.google.com/books?vid=ISBN8120609999&id=vRcql-QBhRwC&pg=PA394&lpg=PA394&dq=adondai+chola&sig=CUdOfMyvFWr60FUG2jBelSkCQhQ">Some Contributions of South India to Indian Culture By S. Krishnaswami Aiyangar, http://books.google.com/books?vid=ISBN8120609999&id=vRcql-QBhRwC&pg=PA394&lpg=PA394&dq=adondai+chola&sig=CUdOfMyvFWr60FUG2jBelSkCQhQ</ref>, द) कारिकाला चोल के पुत्र के रूप में<सन्दर्भ=टी.के.टी. विराघवाचार्या द्वारा लिखित "तिरुपति का इतिहास: तिरुवेंगाडम मंदिर, http://books.google.com/books?vid=0EAC1QqCYpse1n8eEo&id=VBoaAAAAMAAJ&q=adondai&dq=adondai&pgis=1">History of Tirupati: The Tiruvengadam Temple By T. K. T. Viraraghavacharya, http://books.google.com/books?vid=0EAC1QqCYpse1n8eEo&id=VBoaAAAAMAAJ&q=adondai&dq=adondai&pgis=1</ref>. अथोंडाई चक्रवर्ती की अस्पष्ट पहचान और बसने के समय के कारण यह दावा कमज़ोर लगता है। यहां स्त्रोतों में विरोधाभास हैं, कुछ कहते हैं कि 7वीं या 8वीं ई. में बसाया गया था, अन्य कहते हैं कि ऐसा कुछ अधिक देर से 11वीं या 12वीं सदी में हुआ था। फिर भी बसने की यह क्रिया कारिकाला चोल के तोण्डैमण्डलम् के बसने की क्रिया के बहुत बाद की है<ref name="http://books.google.com/books?vid=030r8wCzi070dfHyMo&id=TTQKoe4eXzgC&q=kurumbars+chola&dq=kurumbars+chola&pgis=1. कई मिरासीदार और जमींदार इस समूह से संबंधित थे। वे मुख्य रूप से चेन्नई, कांचीपुरम और वेल्लूर जिलों में बसे हुए हैं।
अगामुदैया मुदलियार
अगामुदैया मुदलियार पर मुख्य लेख देखें
अगामुदैया मुदलियार 13वीं शताब्दी की शुरुआत से ही मुदलियार पदवी का उपयोग कर रहे थे। कहा जाता है कि 13वीं सदी में तिरुविन्दालुर नाडु में कुलात्तुर से एक कईलादामुदेयान उर्फ़ सोलाकोनपल्लवारियार के पास मुदाली की पदवी थी.September 2009 तमिलनाडु के उत्तरी जिलों में इनकी उपस्थिति महत्वपूर्ण है।
अर्काट, थुलुवा वेल्लालर
थुलुवा वेल्लालर पर मुख्य लेख देखें
थुलुवा वेल्लालर या तुलुवा या तुलुमार वेल्लालरों की एक उप-जाति है और दक्षिण केनरा के एक आधुनिक जिले के एक भाग तुलुनाड से आए हुए प्रवासी थे। अथोंडाई चक्रवर्ती नामक राजा ने थुलुवा वेल्लालर के लोगों को वर्तमान तमिलनाडु के तोण्डैमण्डलम् में बसाया था। अथोंडाई चक्रवर्ती ने कुरुम्बर से लड़ाई जीतने के बाद उत्तरी तमिलनाडु पर अपना शासन स्थापित किया था। यही कारण है कि इस विजयी राजा के नाम पर उत्तरी तमिलनाडु के उस भाग का नाम तोण्डैमण्डलम् रखा गया था। ऐसा भी उल्लेख किया गया है कि अथोंडाई चक्रवर्ती श्रीशैलम से वेल्लालरों को तोण्डैमण्डलम् में बसाने के लिए लाया था।
केरल के मुथाली/मुदाली
केरल के मुथाली (मुदाली) विभिन्न मुदलियार समुदायों से संबंधित हैं। वे मुख्य रूप से त्रिवेंद्रम और केरल के पालघाट जिलों और तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले में पाए जाते हैं। वे 17वीं सदी के अंत के बाद से विभिन्न कारणों जैसे कृषि, नारियल तेल निष्कर्षण, नारियल-जटा उद्योग और विशेषज्ञ सेनानियों और विश्वसनीय जासूसों के रूप में इन स्थानों पर जा कर बस गए। उन्हें त्रावणकोर के शाही परिवार द्वारा उनकी सांस्कृतिक समानता और वफादारी के कारण विशेष वरीयता दी गई थी। यह स्थिति आगे चल कर त्रावणकोर के भीतर उनके प्रभाव क्षेत्र को मजबूत बनाने में मददगार साबित हुई. ब्रिटिश युग के दौरान, कई परिवारों ने ईसाई धर्म अपना लिया। केरल के मुथाली, केरल में एक सूक्ष्म अल्पसंख्यक जाति होने के बावजूद अभी भी अपनी एक अलग पहचान रखते हैं। उनके भाषाई और शैक्षिक पिछड़ेपन के कारण केरलhttp://www.keralapsc.org/obcs.htm संग्रहीत प्रति 23 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20110719171742/http://www.keralapsc.org/obcs.htm 19 जुलाई 2011 dead , तमिलनाडुhttp://www.tn.gov.in/department/bclist.htm संग्रहीत प्रति 23 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20090418042121/http://www.tn.gov.in/department/bclist.htm 18 अप्रैल 2009 live और पांडिचेरीhttp://ncbc.nic.in/backward-classes/pondicherry.html संग्रहीत प्रति 23 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20090619081949/http://ncbc.nic.in/backward-classes/pondicherry.html 19 जून 2009 dead राज्यों में उन्हें पिछड़े वर्ग के रूप में वर्गीकृत किया गया है। स्वतंत्रता और राज्य पुनर्गठन के बाद धीरे धीरे, केरल के मुथाली पूरी तरह से केरल की संस्कृति के साथ घुल मिल गए हैं, लेकिन वे अभी भी भगवान मुरुगा/सुब्रमण्य को अपनी पूजा का मुख्य देवता मानते हैं जबकि केरल के अधिकांश हिन्दू भगवान विष्णु के भक्त हैं।
स्वाति थिरूनल द्वारा थंजावूर सुगंधावल्ली उर्फ़ सुगंधा पार्वती बाई को अपनी पत्नी मानने के साथ त्रावणकोर शाही परिवार से अलगाव की भावना उत्पन्न हुई. उनकी पहली पत्नी थिरुवत्तार अम्मा वीत्तिल पानापिल्लई अयिकुट्टी नारायणी पिल्लई केन्द्रीय त्रावणकोर के एक शक्तिशाली नायर परिवार से संबंधित थी। स्वाति थिरूनल की 33 वर्ष की कम उम्र में रहस्यमय मौत के बाद, केरल के मुथाली समुदाय ने विभिन्न खतरों का सामना किया। तत्कालीन ब्रिटिश निवासी जनरल कुल्लेन ने समय पर बीच बचाव कर समुदाय पर एक बड़ा खतरा टालने में मदद की. दक्षिण त्रावणकोर की केरलामुथाली समाजम एक संगठित संस्था है जो वर्तमान में समुदाय के हितों के लिए काम कर रही हैhttp://www.swathithirunal.in/miscellanios.htm#04 संग्रहीत प्रति 23 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20100619015804/http://www.swathithirunal.in/miscellanios.htm#04 19 जून 2010 dead .
नन्जिल मुदाली
नन्जिल मुदाली लोगों का एक और समूह है जो अपने नाम के पीछे मुदाली लगाते हैं। वे कन्याकुमारी जिले में नन्जिल के रहने वाले हैं।
http://www.tn.gov.in/department/bclist.htm बैकवर्ड क्लासेस की सूची 23 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20090418042121/http://www.tn.gov.in/department/bclist.htm 18 अप्रैल 2009 live
सेंगुन्था मुदलियार
सेन्गुन्थर पर मुख्य लेख देखें
काइकोलार या सेन्गुन्थर दक्षिण भारत के राज्यों के अधिसंख्य तमिल लोग हैंhttp://www.tn.gov.in/bcmbcmw/bclist.htm List Of Backward Classes Approved 23 नवंबर 2010 https://archive.today/20120805210932/http://www.tn.gov.in/bcmbcmw/bclist.htm 5 अगस्त 2012 live . ऐतिहासिक दृष्टि से, उस समय बहत्तर उप प्रभाग (नाडू या देसम) थे। उनका नाम तमिल भाषा के शब्द "काई" (हाथ) और "कोल" (करघे या भाले में प्रयुक्त होने वाले शटल (फलक)) से मिल कर बना है। उन्होनें करघे के विभिन्न भागों का नाम विभिन्न देवताओं और ऋषियों के नाम पर रखा. वे सेन्गुन्थर के नाम से भी जाने जाते हैं जिसका तमिल में अर्थ है लाल कटार.
चोल शासन के दौरान काईकोलारों ने सैनिकों के रूप में सेवा की और उन्हें "तेरिन्जा काईकोलार पडाई" कहा जाता था। (तमिल में तेरिन्जा का अर्थ है "परिचित" और पडाई का अर्थ है "रेजिमेंट"), इसलिए "तेरिन्जा-काईकोलार पडाई" निजी अंगरक्षक थे। चोल साम्राज्य के दौरान काईकोलारों को सेना में भर्ती किया गया और 8वीं से 13वीं सदी तक कई सैन्य दलों का गठन किया गया। 10वीं शताब्दी में चोल साम्राज्य के दौरान भी काईकोलार तमिल समाज के प्रमुख सदस्य थे।http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_19/inscription_of_parakesarivarman_no_01.html साउथ इंडियन इंस्क्रिप्शंस-वॉल्यूम-XIX-इंस्क्रिप्शंस ऑफ़ परकेसरीवर्मन @ whatisindia.com 23 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20110928143702/http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_19/inscription_of_parakesarivarman_no_01.html 28 सितंबर 2011 dead September 2009
समरकेसरित-तेरिन्जा-काइक्कोलर और विक्रमासिंगत-तेरिन्जा-काइक्कोलर ने परान्तका की संभावित पदवियों के आधार पर अपने नाम रखे.http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_19/introduction1.html साउथ इंडियन इंस्क्रिप्शंस-वॉल्यूम-XIX-इंस्क्रिप्शंस ऑफ़ परकेसरीवर्मन @ whatisindia.com 23 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20110718035039/http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_19/introduction1.html 18 जुलाई 2011 dead September 2009
http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_13/stones_26_to_50.html साउथ इंडियन इंस्क्रिप्शंस वॉल्यूम 13 - इंस्क्रिप्शंस ऑफ़ राजकेसरीवर्मन @ whatisindia.com 23 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20110928143712/http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_13/stones_26_to_50.html 28 सितंबर 2011 dead September 2009
http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_13/introduction.html साउथ इंडियन इंस्क्रिप्शंस वॉल्यूम 13 - चोलास इंस्क्रिप्शंस @ whatisindia.com 23 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20110928143744/http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_13/introduction.html 28 सितंबर 2011 dead September 2009
http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_17/introduction.html साउथ इंडियन इंस्क्रिप्शंस - वॉल्यूम 17 इंस्क्रिप्शंस कलेक्टेड ड्यूरिंग द इयर 1903-04 @ whatisindia.com 23 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20110928143750/http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_17/introduction.html 28 सितंबर 2011 dead September 2009
उदैयर-गंदारादित्तात्तेरिन्जा-काइक्कोलर[8] नामक रेजिमेंट का नाम अवश्य ही उत्तम-चोल के पिता, राजा गंदारादित्य के नाम पर रहा होगा.
http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_13/stones_1_to_25.html साउथ इंडियन इंस्क्रिप्शंस-वॉल्यूम 13 - इंस्क्रिप्शंस ऑफ़ राजकेसरीवर्मन @ whatisindia.com 23 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20110928143837/http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_13/stones_1_to_25.html 28 सितंबर 2011 dead September 2009
http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_26/vijayanagara.html साउथ इंडियन इंस्क्रिप्शंस - इंस्क्रिप्शंस कलेक्टेड ड्यूरिंग द इयर 1908-09 @ whatisindia.com 23 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20090702163621/http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_26/vijayanagara.html 2 जुलाई 2009 dead September 2009
सिंगालान्तका-तेरिन्दा-काइक्कोलर (सिंगालान्तका यानी परान्तका प्रथम के नाम पर एक सैन्य दल का नाम)
http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_2/no_77_78_west_base_anekatangapadam_temple_kanchi.html साउथ इंडियन इंस्क्रिप्शंस वॉल्यूम 2 - तंजावुर में राजारजेस्वरा मंदिर इंस्क्रिप्शंस @ whatisindia.com 23 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20090523061545/http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_2/no_77_78_west_base_anekatangapadam_temple_kanchi.html 23 मई 2009 dead September 2009
http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_3/no_129_133_uttama_chola.html साउथ इंडियन इंस्क्रिप्शंस वॉल्यूम 3 - नागेस्वरास्वामिन और उमम्बेस्वरा और अदिमुलेस्वरा टेम्पल्स इंस्क्रिप्शंस @ whatisindia.com 23 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20090522060344/http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_3/no_129_133_uttama_chola.html 22 मई 2009 dead September 2009
दानातोंगा-तेरिन्जा-काइक्कोला (सैन्य दल या समूह). दस्तावेजों का आरंभिक लेखन और परान्तका प्रथम का उपनाम दानातुन्गा, उसके शासन काल में अपने क्रियान्वन के बारे में बताता है।
http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_19/inscription_of_parakesarivarman_no_22.html साउथ इंडियन इंस्क्रिप्शंस-वॉल्यूम-XIX-इंस्क्रिप्शंस ऑफ़ परकेसरीवर्मन @ whatisindia.com 23 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20120503230016/http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_19/inscription_of_parakesarivarman_no_22.html 3 मई 2012 dead September 2009
http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_13/stones_101_to_125.html साउथ इंडियन इंस्क्रिप्शंस वॉल्यूम 13 - इंस्क्रिप्शंस ऑफ़ राजकेसरीवर्मन @ whatisindia.com 23 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20120503230245/http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_13/stones_101_to_125.html 3 मई 2012 dead September 2009
http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_19/inscription_of_parakesarivarman_no_274.html साउथ इंडियन इंस्क्रिप्शंस-वॉल्यूम-XIX-इंस्क्रिप्शंस ऑफ़ परकेसरीवर्मन @ whatisindia.com 23 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20120503225443/http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_19/inscription_of_parakesarivarman_no_274.html 3 मई 2012 dead September 2009
मुत्तावल्पेर्रा संभवतः राजा द्वारा सैन्य दल को दिए जाने वाले किसी विशेष सम्मान या पद के बारे में इंगित करता है।
http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_19/inscription_of_parakesarivarman_no_358.html साउथ इंडियन इंस्क्रिप्शंस-वॉल्यूम-XIX-इंस्क्रिप्शंस ऑफ़ परकेसरीवर्मन @ whatisindia.com 23 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20100128232751/http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_19/inscription_of_parakesarivarman_no_358.html 28 जनवरी 2010 dead September 2009
http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_22/part_1/rajaraja_1.html साउथ इंडियन इंस्क्रिप्शंस - इंस्क्रिप्शंस ऑफ़ राजाराजा I @ whatisindia.com 23 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20091117110458/http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_22/part_1/rajaraja_1.html 17 नवंबर 2009 dead September 2009
http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/tiruvarur_temple/introduction.html साउथ इंडियन इंस्क्रिप्शंस - तिरुवरुर (थिरुवरुर) टेम्पल इंस्क्रिप्शंस @ whatisindia.com 23 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20110807223014/http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/tiruvarur_temple/introduction.html 7 अगस्त 2011 dead September 2009
http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_23/aditya_2_karikala.html साउथ इंडियन इंस्क्रिप्शंस - इंस्क्रिप्शंस कलेक्टेड ड्यूरिंग द इयर 1906-07 @ whatisindia.com 23 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20090522080957/http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_23/aditya_2_karikala.html 22 मई 2009 dead September 2009
http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_26/kulasekhara_dharmaperumal.html साउथ इंडियन इंस्क्रिप्शंस - इंस्क्रिप्शंस कलेक्टेड ड्यूरिंग द इयर 1908-09 @ whatisindia.com 23 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20090522064418/http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_26/kulasekhara_dharmaperumal.html 22 मई 2009 dead September 2009
http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_26/bujabalaraya.html साउथ इंडियन इंस्क्रिप्शंस - इंस्क्रिप्शंस कलेक्टेड ड्यूरिंग द इयर 1908-09 @ whatisindia.com 23 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20090523071121/http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_26/bujabalaraya.html 23 मई 2009 dead September 2009
http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_26/vikramacholadeva.html साउथ इंडियन इंस्क्रिप्शंस - इंस्क्रिप्शंस कलेक्टेड ड्यूरिंग द इयर 1908-09 @ whatisindia.com 23 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20090523052352/http://www.whatisindia.com/inscriptions/south_indian_inscriptions/volume_26/vikramacholadeva.html 23 मई 2009 dead September 2009
श्रीलंकाई मुदलियार
सी शिवारत्नम की पुस्तक द तमिल्स इन अर्ली सीलोन (The Tamils in Early Ceylon), सीलोन में कुछ मुदलियारों को थानिनायका मुदलियार (अन्यों के साथ) से जुड़ा पाती है, एक धनी शैव वेल्लाला जो थोंडाइमंडलम से सीलोन चले गए।The Tamils in Early Ceylon By C. Sivaratnam, http://books.google.com/books?vid=0PrqSaY8TV9DtgCG9v&id=hlocAAAAMAAJ&q=mudaliyar+vellala&dq=mudaliyar+vellala&pgis=1 https://web.archive.org/web/20170411065551/https://books.google.com/books?vid=0PrqSaY8TV9DtgCG9v&id=hlocAAAAMAAJ&q=mudaliyar+vellala&dq=mudaliyar+vellala&pgis=1 11 अप्रैल 2017 .
जाफना में मुदाली उपनाम के साथ थोंडाइमंडलम से
दो या तीन वंश हैं। सेयूर से इरुमरापुम थूया थानिनायागा मुदाली और मन्नाडुकोंडा मुदाली जिनके वंश के बारे में प्रसिद्ध कवि कंबर के समय में भी उल्लेख मिलता है। जाफना की एक एतिहासिक पुस्तक कैलाया मलाई में थोंडाइ नाडु से जाफना में प्रवास पर प्रत्यक्ष उद्धरण है। अन्य वंश संभवतः इस खंड के अंतर्गत या श्रीलंकाई वेल्लालर खंड के अंतर्गत आते हैं।
उनके बाद उनके परिवार के वेल्लाला थे जिन्होनें इरेझुपटु के काम के लिए कंबन पर सोने की वर्षा की, जिनका देश टोंडाईनाडे था, जिनका नाम दूर तक फैला हुआ था, जो कमल के फूलों की माला पहनते थे और जिनका नाम मानाडुकांडा मुदाली था। उन्हें इरुपलई में आश्रय दिया गया। उनके बाद सेयूर के वेल्लाला थे जो इंद्र के समान धनी थे और जो अपने भलाई के मार्ग से कभी नहीं भटके. जिनकी माला पानी के लिली नामक फूलों की बनी हुई थी। जिनकी ख्याति महान थी और जिनका पैतृक और मातृ क्रम अतुलनीय और शुद्ध था और जिनका नाम तानिनायागा था। उन्हें नेदुन्तिवा का मुखिया बनाया गया था .. September 2009
19वीं सदी के श्रीलंका में ब्रिटिश प्रशासकों द्वारा निर्मित मुदलियारों के वर्ग को देखने के लिए श्रीलंकाई मुदलियार देखें.
सेनैत्तलैवर् मुदलियार
सेनैत्तलैवर् पर मुख्य लेख देखें
यह जानना दिलचस्प है कि यह समुदाय विभिन्न क्षेत्रों में विविध पदवियों का उपयोग करता है। इंटरनेट पर इस के लिए कोई संदर्भ नहीं है, लेकिन धर्मपुरी, तिरुनेल्वेली, विरुधुनगर, पुदुक्कोट्टै, पुदुच्चेरि और आसपास के क्षेत्रों में सैंकड़ों परिवार हैं जो मुदलियार पदवी का प्रयोग करते हैं। तंजावूर, नागप्पट्टिणम्, पोरयार में और इनके आस पास की जगहों के सैंकड़ों परिवार चेत्तियार पदवी का प्रयोग करते हैं। मदुरै, तेनि, रामनाडु में और इनके आसपास के क्षेत्रों में कुछ परिवार पिल्लई पदवी का प्रयोग करते हैं। तिरुनेलवेली में और आसपास के क्षेत्र के सैंकड़ों परिवार मूपनार पदवी का प्रयोग करते हैं।
उल्लेखनीय मुदलियार
List of Mudaliars
सन्दर्भ
https://web.archive.org/web/20170626121657/http://mudaliarinternational.org/
https://web.archive.org/web/20140518033750/http://mudaliarcommunity.com/
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