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अपॉलॉजी (प्लेटो)
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सुकरात की अपॉलॉजी (ग्रीक : Ἀπολογία Σωκράτους, अपॉलॉजिया सोक्रातॉस् ; लैटिन : Apologia Socratis), या सुकरात का पक्षपोषण (न्याय-याचना) प्लेटो द्वारा लिखित , विधिक आत्मरक्षा के भाषण का एक सुकरात संवाद है जिसे सुकरात (469-399 ईसा पूर्व) ने धर्मपरायणहीनता (अश्रद्धा) और धार्मिक भ्रष्टाचार के लिए 399 ई.पू. में अपने सुनवाई (विचारण) में बोला था।
विशेष रूप से, सुकरात की न्याय-याचना, एथेंस के "युवाओं को भ्रष्ट करने" और "उन देवताओं पर विश्वास नहीं करना जिनमें नगर विश्वास करता है, लेकिन अन्य दाइमोनिया में, जो की (एथेंस के लिए) नूतन हैं" के आरोपों के खिलाफ एक बचाव है।
दार्शनिक सुकरात के विचारण और मृत्यु के बारे में प्राथमिक स्रोतों में से, सुकरात की अपॉलॉजी, वह संवाद है जो उनकी सुनवाई को दर्शाता है, और यूथिफ्रो , फीदो और क्रीतो के साथ चार सुकराती संवादों में से एक है , जिसके माध्यम से प्लेटो दार्शनिक सुकरात के अंतिम दिनों का विवरण देते हैं।
सन्दर्भ
श्रेणी:प्लेटो
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