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बीइंग एंड नथिंगनेस
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बीइंग एंड नथिंगनेस (अस्तित्व और शून्यता) ज्यां-पॉल सार्त्र फ्रांसीसी फ्रांस अस्तित्ववाद, सत्तामीमांसा, घटनाक्रियाविज्ञान दार्शनिक ग्रंथ गैलीमार्ड 722 (मूल संस्करण)
बीइंग एंड नथिंगनेस: एन एस्से ऑन फेनोमेनोलॉजिकल ओन्टोलॉजी (Being and Nothingness, L'Être et le néant) फ्रांसीसी दार्शनिक ज्यां-पॉल सार्त्र द्वारा 1943 में लिखित एक विशाल और जटिल दार्शनिक ग्रंथ है। यह पुस्तक आधुनिक अस्तित्ववाद का आधारभूत स्तंभ मानी जाती है। एडमंड हुसेर्ल और मार्टिन हाइडेगर के 'घटनाक्रियाविज्ञान' से प्रभावित होकर, सार्त्र ने इस पुस्तक में मानव चेतना, स्वतंत्र इच्छा, और भौतिक दुनिया के बीच के संबंधों की एक गहरी और मौलिक व्याख्या प्रस्तुत की है।
सार्त्र के दर्शन का मूल आधार वास्तविकता को दो अलग-अलग प्रकार के 'अस्तित्व' में विभाजित करना है:
स्वयं-में-अस्तित्व: यह निर्जीव वस्तुओं और अचेतन भौतिक दुनिया का अस्तित्व है। एक पत्थर, एक मेज, या एक पेड़ 'स्वयं-में-अस्तित्व' हैं। वे पूर्ण, ठोस, और अचल हैं। वे केवल 'हैं'—उनमें कोई चेतना, कोई शून्यता या आत्म-बोध नहीं होता।
स्वयं-के-लिए-अस्तित्व: यह मानव चेतना है। चेतना कोई ठोस वस्तु नहीं है; सार्त्र के अनुसार, यह एक "शून्यता" है। चूँकि चेतना हमेशा किसी न किसी चीज़ के *बारे* में होती है, इसलिए वह स्वयं में कुछ भी नहीं है। यह 'अपूर्णता' और 'कमी' ही मनुष्य को निरंतर भविष्य की ओर धकेलती है और उसे अपने लिए नए अर्थ गढ़ने की स्वतंत्रता देती है।Catalano Joseph S. A Commentary on Jean-Paul Sartre's Being and Nothingness https://archive.org/details/commentaryonjean00cata University of Chicago Press 1980 978-0226096995 78-85
पूर्ण स्वतंत्रता और संताप
सार्त्र का सबसे प्रसिद्ध सूत्र है: "अस्तित्व सार से पहले आता है"। इसका अर्थ है कि मनुष्य किसी पूर्व-निर्धारित उद्देश्य के बिना दुनिया में जन्म लेता है। वह जो भी बनता है, वह अपने स्वतंत्र विकल्पों और कार्यों के माध्यम से स्वयं को गढ़ता है।
सार्त्र तर्क देते हैं कि मनुष्य "स्वतंत्र होने के लिए अभिशप्त है"। यह असीमित स्वतंत्रता एक भारी मनोवैज्ञानिक बोझ पैदा करती है, जिसे सार्त्र संताप कहते हैं। यह संताप यह महसूस करने से पैदा होता है कि हमारे कार्यों को निर्देशित करने के लिए कोई ईश्वर, कोई नियति या कोई पूर्व-निर्धारित नैतिकता मौजूद नहीं है; हम पूरी तरह से अपने विकल्पों के लिए उत्तरदायी हैं।Flynn Thomas R. Sartre and Marxist Existentialism: The Test Case of Collective Responsibility https://archive.org/details/sartremarxistexi0000flyn University of Chicago Press 1984 978-0226254661 30-38
स्वतंत्रता के इस भारी 'संताप' से बचने के लिए मनुष्य अक्सर आत्म-प्रवंचना या आत्म-धोखे का सहारा लेता है, जिसे सार्त्र बुरा विश्वास कहते हैं।
जब कोई व्यक्ति अपनी स्वतंत्रता से इनकार करता है और यह बहाना बनाता है कि उसके पास कोई विकल्प नहीं था, या जब वह स्वयं को केवल एक भूमिका तक सीमित कर लेता है।
सार्त्र एक कैफे वेटर का प्रसिद्ध उदाहरण देते हैं, जो एक वेटर की तरह चलने, झुकने और बात करने का अत्यधिक अभिनय करता है। वह व्यक्ति खुद को एक वस्तु में बदलने की कोशिश कर रहा है ताकि उसे अपनी वास्तविक मानव स्वतंत्रता का सामना न करना पड़े।Webber Jonathan The Existentialism of Jean-Paul Sartre Routledge 2009 978-0415431521 50-60
पुस्तक का एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा दूसरों के साथ हमारे संबंधों पर केंद्रित है। सार्त्र "दूसरा" और "दृष्टि" की अवधारणा प्रस्तुत करते हैं।
जब हम अकेले होते हैं, तो हम अपनी दुनिया के केंद्र होते हैं (पूर्ण विषय)। लेकिन जैसे ही कोई 'दूसरा' व्यक्ति हमें देखता है, उसकी दृष्टि हमें एक 'वस्तु' में बदल देती है। अचानक हम खुद को दूसरों की नज़र से आंकने लगते हैं और शर्म या अपराधबोध महसूस करते हैं। यह अहसास कि दूसरे की उपस्थिति हमारी स्वतंत्रता को सीमित करती है, सार्त्र के इस विचार का आधार है कि "नर्क दूसरे लोग हैं"।
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
इंटरनेट आर्काइव पर 'बीइंग एंड नथिंगनेस'
श्रेणी:अस्तित्ववाद
श्रेणी:सत्तामीमांसा