411 REFERENCE · Wikipedia
स्वामी निश्चलानंद सरस्वती
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
शंकराचार्य महास्वामी श्री निश्चलानंद सरस्वती Jagadguru Shankaracharya Nischalananda Saraswati-Ji Maharaj.png स्वामी निश्चलानंद सरस्वती 30 जून 1943 मधुबनी ,बिहार,भारत गोवर्धन मठ के वर्तमान में 145 वें शंकराचार्य भारतीय सनातन हिंदू धर्मस्वामी निश्चलानन्द सरस्वती भारत के पुरी, उत्कल प्रदेश के ऋग्वेदीय पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्धन पीठ के वर्तमान १४५वें जगद्गुरु शंकराचार्य हैं ।Swami Nischalananda Saraswati https://www.govardhanpeeth.org/en/about-us-en/swami-nischalananda-saraswati Govardhan Math, Puri Govardhan Math, Puri 17 December 2021 en-gbSubhashish Mohanty ‘Shankaracharya is an institution’ https://www.telegraphindia.com/odisha/lsquo-shankaracharya-is-an-institution-rsquo/cid/1466941 Telegraph India 17 December 2021Puri Shankaracharya Happy with Move to Keep Govardhan Math out of Endowment Act, Seeks Total Autonomy https://www.news18.com/news/india/puri-shankaracharya-happy-with-move-to-keep-govardhan-math-out-of-endowment-act-seeks-total-autonomy-2357089.html News18 17 December 2021 en 22 October 2019 स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती के गुरु स्वामी हरिहरानन्द सरस्वती थे। स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती धर्मगुरु, गणितज्ञ, प्रवचनकर्ता हैं।
जीवन यात्रा
श्री निश्चलानंद सरस्वती का जन्म 1943 में मधुबनी में हुआ था, वे दरभंगा के महाराजा के राज-पंडित के पुत्र है।2018-09-22 जगतगुरु शङ्कराचार्य स्वामी निश्चलानंद जी महाराज गोवर्धन मठ जगतगुरु शङ्कराचार्य स्वामी निश्चलानंद जी महाराज http://govardhanpeeth.org/shankarachrya-matha/%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A4%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%81-%E0%A4%B6%E0%A4%99%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE/ https://web.archive.org/web/20180922115625/http://govardhanpeeth.org/shankarachrya-matha/%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A4%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%81-%E0%A4%B6%E0%A4%99%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE/ dead 2018-09-22 2022-03-26
पुरी पीठ के वर्तमान शंकराचार्य स्वामी श्री निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज का जन्म 30 जून 1943 को बिहार के मधुबनी जिले के हरिपुर बक्शी टोल नामक गाँव में हुआ था।
उनके पिता पंडित श्री लालवंशी झा और माता श्रीमती गीता देवी थीं। उनके पिता मिथिला परंपरा में संस्कृत के उच्च कोटि के विद्वान थे और मिथिला (दरभंगा साम्राज्य) के तत्कालीन राजा के दरबारी विद्वान थे।
स्वामी का पूर्व नाम नीलांबर था, जो उनके बड़े भाई पंडित श्रीदेव झा ने रखा था। नीलांबर बचपन में अद्भुत चरित्र के धनी थे और बहुत अध्ययनशील और बुद्धिमान भी थे।
उनकी प्रारंभिक शिक्षा उनके गाँव कलुआही और लोहा में और बाद में दिल्ली में हुई। 17 वर्ष की आयु में, उन्होंने अपना घर छोड़ दिया और अपनी जीवन यात्रा की खोज में निकल पड़े।
वेदों की सभी शाखाओं से संबंधित एक संगोष्ठी में धर्म सम्राट करपात्री जी महाराज और ज्योतिष पीठ के तत्कालीन शंकराचार्य स्वामी श्री कृष्णबोधाश्रम जी महाराज उपस्थित थे।
इस अवसर पर उन्होंने मन ही मन पूज्य करपात्री जी महाराज को अपना गुरु स्वीकार कर लिया था। नैमिषारण्य के स्वामी श्री नारदानंद सरस्वती ने उन्हें ध्रुवचैतन्य नाम दिया था।
उन्होंने काशी, वृंदावन, नैमिषारण्य, बद्रिकाश्रम, ऋषिकेश, हरिद्वार, पुरी, श्रृंगेरी आदि विभिन्न स्थानों पर वेदों और वेदों से संबंधित विभिन्न शाखाओं का बहुत गंभीरता से अध्ययन किया।
ध्रुवचैतन्य ने धर्म सम्राट करपात्री जी महाराज के गोरक्षा आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए हिंदुओं की आस्था का प्रतीक मानी जाने वाली गायों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ कड़ा संघर्ष किया।
गौरक्षा की वकालत करने के कारण उन्हें 9 नवंबर 1966 से 52 दिनों तक तिहाड़ जेल में रखा गया था।
उन्होंने वैशाख कृष्ण एकादशी, संवत 2031, 18 अप्रैल 1974 को हरिद्वार में स्वामी श्री करपात्रीजी महाराज के करकमलों से संन्यास ग्रहण किया।
स्वामी श्री करपात्रीजी महाराज ने उन्हें नये नाम निश्चलानंद सरस्वती के तहत संन्यास दीक्षा दी। 1976 से 1981 तक उन्होंने अपने गुरुदेव से प्रस्थानत्रयी, पंचदशी, वेदान्त परिभाष, न्याय मीमांसा, तंत्र और अद्वैत सिद्धि का गहन अध्ययन किया।
1982 से 1987 तक उन्होंने पुरी पीठ के तत्कालीन शंकराचार्य स्वामी श्री निरंजनदेव तीर्थ जी महाराज से विशेष जोर देते हुए खंडनाखंड खाद्य और यजुर्वेद का अध्ययन किया।
उन्होंने उनके साथ पांच चातुर्मास बिताए।
स्वामी श्री निश्चलानंद सरस्वती जी की प्रतिभा, प्रतिभा, सनातन धर्म के प्रति समर्पण और अपने गुरुओं में अत्यधिक आस्था से प्रभावित होकर शंकराचार्य स्वामी श्री निरंजनदेव तीर्थ जी महाराज ने उन्हें पुरी स्थित गोवर्धन पीठ के 145वें शंकराचार्य के रूप में अभिषिक्त किया।[१] वर्तमान समय में स्वामी निश्चलानंद जी महाराज वैदिक गणित के सर्वश्रेष्ठ विद्वान हैं समस्त विश्व में उनके जैसा महान गणितज्ञ आज और कोई भी नहीं है
बाहरी कड़िया
Purvamnaya Sri Govardhana Peetham
About Shri Adi Sankarcharya and His Parampara
श्रेणी:अद्वैत वेदांत
श्रेणी:पुरी के मठ
श्रेणी:हिन्दू तीर्थस्थल
श्रेणी:आदि शंकराचार्य
श्रेणी:पुरी जिला
वैदिक गणित में उनके जैसा विव्दान आजके विश्व में कोई नहीं