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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

बृहस्पति (ग्रह)

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#FFC8A0 बृहस्पति 24px|♃ frameless|upright=1.2 कैसिनी से ली गई बृहस्पति की छवि, काला धब्बा युरोपा की परछाई है। Yeomans Donald K. 2006-07-13 http://ssd.jpl.nasa.gov/?horizons HORIZONS System NASA JPL 2007-08-08 https://web.archive.org/web/20070328180634/http://ssd.jpl.nasa.gov/?horizons 28 मार्च 2007 live — At the site, go to the "web interface" then select "Ephemeris Type: Elements", "Target Body: Jupiter Barycenter" and "Center: Sun".Orbital elements refer to the barycenter of the Jupiter system, and are the instantaneous osculating values at the precise J2000 epoch. Barycenter quantities are given because, in contrast to the planetary centre, they do not experience appreciable changes on a day-to-day basis from to the motion of the moons. J2000 ८१,६५,२०,८०० कि॰मी॰(५.४५८१०४ ख॰ई॰) ७४,०५,७३,६०० कि॰मी॰(४.९५०४२९ ख॰ई॰) ७७,८५,४७,२०० कि॰मी॰(५.२०४२६७ ख॰ई॰) ०.०४८७७५ १.३०५° क्रान्तिवृत्तसे६.०९° सूर्यकी भूमध्यरेखा से०.३२° अविकारी सतह से2009-04-03 The MeanPlane (Invariable plane) of the Solar System passing through the barycenter http://home.surewest.net/kheider/astro/MeanPlane.gif 2009-04-10 https://www.webcitation.org/5glwILykY?url=http://home.comcast.net/~kpheider/MeanPlane.gif 14 मई 2009 live (produced with Solex 10 https://web.archive.org/web/20081220235836/http://chemistry.unina.it/~alvitagl/solex/ 20 दिसंबर 2008 written by Aldo Vitagliano; see also Invariable plane) १००.४९२° २७५.०६६° १८.८१८° ४,३३२.५९ दिन११.८६१८ वर्ष१०,४७५.८ बृहस्पति सौर दिवस http://cseligman.com/text/sky/rotationvsday.htm Rotation Period and Day Length Seligman Courtney 2009-08-13 https://www.webcitation.org/60qT3Ukn5?url=http://cseligman.com/text/sky/rotationvsday.htm 11 अगस्त 2011 dead ३९८.८८ दिन १३.०७ कि॰मी॰/से॰ ९५ yes ०.०६४८७ ± ०.०००१५ ७१,४९२ ± ४ कि॰मी॰Refers to the level of 1 bar atmospheric pressure ११.२०९ पृथ्वी ६६,८५४ ± १० कि॰मी॰ १०.५१७ पृथ्वी ६९,९११ ± ६ कि॰मी॰ ६.१४१९×१०१० कि॰मी॰२http://solarsystem.nasa.gov/planets/profile.cfm?Object=Jupiter&Display=Facts Solar System Exploration: Jupiter: Facts & Figures NASA 7 मई 2008 13 फ़रवरी 2012 https://web.archive.org/web/20131225084108/http://solarsystem.nasa.gov/planets/profile.cfm?Object=Jupiter&Display=Facts 25 दिसंबर 2013 live १२१.९ पृथ्वी १.४३१३×१०१५ ;कि॰मी॰३ १३२१.३ पृथ्वी १.८९८६×१०२७ कि.ग्रा. ३१७.८ पृथ्वी१/१०४७ सूर्यAstrodynamic Constants JPL Solar System Dynamics 2009-02-27 http://ssd.jpl.nasa.gov/?constants 2007-08-08 https://web.archive.org/web/20190321205811/https://ssd.jpl.nasa.gov/?constants 21 मार्च 2019 live १.३२६ ग्राम/से॰मी॰३ २४.७९ मीटर/सेकण्ड२२.५२८ g ५९.५ कि॰मी॰/सेकण्ड ९.९२५ घंटा Seidelmann, P. K.; Abalakin, V. K.; Bursa, M.; Davies, M. E.; de Burgh, C.; Lieske, J. H.; Oberst, J.; Simon, J. L.; Standish, E. M.; Stooke, P.; Thomas, P. C. 2001 http://www.hnsky.org/iau-iag.htm Report of the IAU/IAG Working Group on Cartographic Coordinates and Rotational Elements of the Planets and Satellites: 2000 HNSKY Planetarium Program 2007-02-02 https://www.webcitation.org/60qCIcHwA?url=http://www.hnsky.org/iau-iag.htm 10 अगस्त 2011 dead (9 घंटा 55 मिनट 30 सेकण्ड) १२.६ कि॰मी॰/सेकण्ड४५,३०० कि॰मी॰/घंटा ३.१३° २६८.०५७°१७ घंटा ५२ मिनट १४ सेकण्ड ६४.४९६° ०.३४३ (Bond) ०.५२ (geom.) -१.६ से -२.९४ २९.८" — ५०.१" en-us-Jupiter.ogg ˈ dʒ uː p ɪ- t ərJupiter, entry in the Oxford English Dictionary, prepared by J. A. Simpson and E. S. C. Weiner, vol. 8, second edition, Oxford: Clarendon Press, 1989. ISBN 0-19-861220-6 (vol. 8), ISBN 0-19-861186-2 (set.) बाहरी ग्रह yes 1 bar level १६५ K< २०–२०० किलो पास्कलAnonymous Probe Nephelometer Galileo Messenger NASA/JPL March 1983 6 http://www2.jpl.nasa.gov/galileo/messenger/oldmess/2Probe.html 2007-02-12 https://web.archive.org/web/20090719111109/http://www2.jpl.nasa.gov/galileo/messenger/oldmess/2Probe.html 19 जुलाई 2009 dead (बादल परत) २७ कि॰मी॰ ८९.८±२.०%हाइड्रोजन (H2)१०.२±२.०0%हीलियम~०.३%मीथेन~०.०२६%अमोनिया~०.००३% हाइड्रोजन ड्यूटेराइड (HD)०.०००६%इथेन०.०००४%जलबर्फ:अमोनियाजलअमोनियम हाइड्रोसल्फाइड(NH4SH) बृहस्पति (प्रतीक: 16px|♃) सूर्य से पाँचवाँ और हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है। यह मुख्य रूप से एक गैस पिंड है जिसका द्रव्यमान सूर्य के हजारवें भाग के बराबर तथा सौरमंडल में मौजूद अन्य सात ग्रहों के कुल द्रव्यमान का ढाई गुना है। बृहस्पति को शनि, अरुण और वरुण के साथ एक गैसीय ग्रह के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इसे रात्रि में नंगी आंखों से देखा जा सकता है। खगोल विद ने सौर मंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति का चक्कर लगा रहे 12 नए उपग्रहों की खोज की है इस खोज के बाद से बृहस्पति के अब कुल 95 उपग्रह हो गए हैं फिर भी शनि 145 उपग्रह के साथ सबसे ज्यादा उपग्रह वाला ग्रह है। यह ग्रह प्राचीन काल से ही खगोलविदों द्वारा जाना जाता रहा है De Crespigny Rafe Emperor Huan and Emperor Ling http://www.anu.edu.au/asianstudies/decrespigny/HuanLing_part2.pdf https://web.archive.org/web/20060907044624/http://www.anu.edu.au/asianstudies/decrespigny/HuanLing_part2.pdf 7 सितंबर 2006 Asian studies, Online Publications May 1, 2012 Xu Huang apparently complained that the astronomy office had failed to give them proper emphasis to the eclipse and to other portents, including the movement of the planet Jupiter (taisui). At his instigation, Chen Shou/Yuan was summoned and questioned, and it was under this pressure that his advice implicated Liang Ji. dead तथा यह अनेकों संस्कृतियों की पौराणिक कथाओं और धार्मिक विश्वासों के साथ जुड़ा हुआ था। रोमन सभ्यता ने अपने देवता जुपिटर के नाम पर इसका नाम रखा था।Stuart Ross Taylor 2001 Solar system evolution: a new perspective : an inquiry into the chemical composition, origin, and evolution of the solar system 2nd, illus., revised Cambridge University Press 0-521-64130-6 208 इसे जब पृथ्वी से देखा गया, बृहस्पति -2.94 के सापेक्ष कांतिमान तक पहुँच सकता है, छाया डालने लायक पर्याप्त उज्जवल,http://blogs.discovermagazine.com/badastronomy/2011/11/18/young-astronomer-captures-a-shadow-cast-by-jupiter/#.UaDO1UAoNAU Young astronomer captures a shadow cast by Jupiter : Bad Astronomy Blogs.discovermagazine.com November 18, 2011 May 27, 2013 https://web.archive.org/web/20130702142010/http://blogs.discovermagazine.com/badastronomy/2011/11/18/young-astronomer-captures-a-shadow-cast-by-jupiter#.UaDO1UAoNAU 2 जुलाई 2013 live जो इसे चन्द्रमा और शुक्र के बाद आसमान की औसत तृतीय सर्वाधिक चमकीली वस्तु बनाता है। (मंगल ग्रह अपनी कक्षा के कुछ बिंदुओं पर बृहस्पति की चमक से मेल खाता है)। बृहस्पति एक चौथाई हीलियम द्रव्यमान के साथ मुख्य रूप से हाइड्रोजन से बना हुआ है और इसका भारी तत्वों से युक्त एक चट्टानी कोर हो सकता है।Saumon, D.; Guillot, T. Shock Compression of Deuterium and the Interiors of Jupiter and Saturn https://archive.org/details/sim_astrophysical-journal_2004-07-10_609_2/page/1170 The Astrophysical Journal 609 2 1170–1180 2004 2004ApJ...609.1170S 10.1086/421257 astro-ph/0403393 0004-637X अपने तेज घूर्णन के कारण बृहस्पति का आकार एक चपटा उपगोल (भूमध्य रेखा के पास चारों ओर एक मामूली लेकिन ध्यान देने योग्य उभार लिए हुए) है। इसके बाहरी वातावरण में विभिन्न अक्षांशों पर कई पृथक दृश्य पट्टियां नजर आती है जो अपनी सीमाओं के साथ भिन्न भिन्न वातावरण के परिणामस्वरूप बनती है। बृहस्पति के विश्मयकारी 'महान लाल धब्बा' (Great Red Spot), जो कि एक विशाल तूफ़ान है, के अस्तित्व को १७ वीं सदी के बाद तब से ही जान लिया गया था जब इसे पहली बार दूरबीन से देखा गया था। यह ग्रह एक शक्तिशाली चुम्बकीय क्षेत्र और एक धुंधले ग्रहीय वलय प्रणाली से घिरा हुआ है। बृहस्पति के कम से कम ७९(२०१८ तक) चन्द्रमा है। इनमें वो चार सबसे बड़े चन्द्रमा भी शामिल है जिसे गेलीलियन चन्द्रमा कहा जाता है जिसे सन् १६१० में पहली बार गैलीलियो गैलिली द्वारा खोजा गया था। गैनिमीड सबसे बड़ा चन्द्रमा है जिसका व्यास बुध ग्रह से भी ज्यादा है। यहाँ चन्द्रमा का तात्पर्य उपग्रह से है। बृहस्पति का अनेक अवसरों पर रोबोटिक अंतरिक्ष यान द्वारा, विशेष रूप से पहले पायोनियर और वॉयजर मिशन के दौरान और बाद में गैलिलियो यान के द्वारा, अन्वेषण किया जाता रहा है। फरवरी २००७ में न्यू होराएज़न्ज़ प्लूटो सहित बृहस्पति की यात्रा करने वाला अंतिम अंतरिक्ष यान था। इस यान की गति बृहस्पति के गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल कर बढाई गई थी। इस बाहरी ग्रहीय प्रणाली के भविष्य के अन्वेषण के लिए संभवतः अगला लक्ष्य यूरोपा चंद्रमा पर बर्फ से ढके हुए तरल सागर शामिल हैं। इसके उपग्रहों की संख्या 79 है। गठन बृहस्पति प्राथमिक तौर पर गैसों और तरल पदार्थों से बना हुआ है। चार गैसीय ग्रहों में सबसे बड़ा होने के साथ यह १,४२,९८४ किमी विषुववृत्तिय व्यास के साथ सौरमंडल का भी सबसे बड़ा ग्रह है। बृहस्पति का १.३२६ ग्राम /से॰मी॰३ का घनत्व गैसीय ग्रहों में दूसरा सर्वाधिक, लेकिन सभी चार स्थलीय ग्रहों से कम है। रासायनिक संरचना बृहस्पति का उपरी वायुमंडल ८८-९२% हाइड्रोजन और ८-१२% हीलियम से बना है और ध्यान रहे यहाँ प्रतिशत का तात्पर्य अणुओं की मात्रा से है। हीलियम परमाणु का द्रव्यमान हाइड्रोजन परमाणु से चार गुना ज्यादा होता है। यह संरचना तब बदल जाती है जब इसके द्रव्यमान के अनुपात को विभिन्न परमाणुओं के योगदान के रूप में वर्णित किया जाता है। इस प्रकार वातावरण लगभग ७५ % हाइड्रोजन और २४ % हीलियम द्रव्यमान द्वारा औए शेष एक प्रतिशत द्रव्यमान अन्य तत्वों से मिलकर बना होता है। इसके आतंरिक भाग में घने पदार्थ मिलते है, इस तरह मोटे तौर पर वितरण ७१% हाइड्रोजन, २४% हीलियम और ५% अन्य तत्वों के द्रव्यमान का होता है। खगोलशास्त्रियों का मानना है कि बृहस्पति के केन्द्रीय भाग में हाइड्रोजन भयंकर दबाव से कुचलकर धातु हाइड्रोजन के रूप में मौजूद है। बृहस्पति का चुम्बकीय क्षेत्र हमारे सौर मंडल के किसी भी अन्य ग्रह से अधिक शक्तिशाली है और वैज्ञानिक कहते हैं कि इसकी वजह बृहस्पति के अन्दर की धातु हाइड्रोजन है।Encyclopedia of the solar system https://web.archive.org/web/20140712191013/http://books.google.com/books?id=G7UtYkLQoYoC 12 जुलाई 2014, Paul Robert Weissman, Torrence V. Johnson, Academic Press, 2007, ISBN 978-0-12-088589-3, ... Hydrogen and helium compose about 90% of Jupiter's mass. Most of the hydrogen exists in the form of metallic hydrogen. Jupiter is the largest reservoir of this materialin the solar system. Convection in the metallic hydrogen interior is likely responsible for the generation of Jupiter's magnetic field ... बृहस्पति के वायुमंडल में मीथेन, जल वाष्प, अमोनिया और सिलिकॉन आधारित यौगिक मिले है। इसमे कार्बन, इथेन, हाइड्रोजन सल्फाइड, फोस्फाइन और सल्फर के होने के भी संकेत मिले है। वायुमंडल के बाह्यतम परत में जमीं हुई अमोनिया के क्रिस्टल होते हैं। अवरक्त पराबैंगनी मापन के माध्यम से जांचने पर बेंजीन और अन्य हाइड्रोकार्बन की मात्रा भी पायी गई है। हाइड्रोजन और हीलियम का वायुमंडलीय अनुपात आद्य सौर नीहारिका की सैद्धांतिक संरचना के बहुत करीब हैं। ऊपरी वायुमंडल में नियॉन की मात्रा २० भाग प्रति दस लाख है, जो सूर्य में प्रचुर मात्रा में लगभग १० भाग प्रति दस लाख होती है। बृहस्पति के वायुमंडल में भारी अक्रिय गैसों की प्रचुरता सूर्य से लगभग दो से तीन गुना ज्यादा है। स्पेक्ट्रोस्कोपी के आधार पर, शनि संरचना में बृहस्पति के समान समझा जाता है लेकिन अन्य दो गैसीय ग्रहों यूरेनस और नेप्च्यून के पास अपेक्षाकृत बहुत कम हाइड्रोजन और हीलियम है। वायुमंडलीय प्रविष्टि जांच के अभाव की वजह से, बृहस्पति से परे बाहरी ग्रह उच्च गुणवत्ता वाले भारी तत्वों की बहुतायत संख्या में कमी कर रहे हैं। द्रव्यमान thumb|left|पृथ्वी और बृहस्पति की तुलना thumb|left|बृहस्पति की सूर्य और पृथ्वी से तुलना बृहस्पति का द्रव्यमान हमारे सौर मंडल के अन्य सभी ग्रहों के संयुक्त द्रव्यमान का २.५ गुना है। यह इतना बड़ा है कि सूर्य के साथ इसका बेरिसेंटर सूर्य की सतह के ऊपर सूर्य के केंद्र से १.०६८ सौर त्रिज्या पर स्थित है। यद्यपि इस ग्रह की त्रिज्या पृथ्वी से ११ गुना बड़ी है पर यह अपेक्षाकृत बहुत कम घना है। बृहस्पति का आयतन १३२१ पृथ्वीयों के बराबर है, तो भी द्रव्यमान पृथ्वी से मात्र ३१८ गुना है। http://nssdc.gsfc.nasa.gov/planetary/factsheet/jupiterfact.html Jupiter Fact Sheet NASA Williams Dr. David R. August 8, 2007 November 16, 2004 https://web.archive.org/web/20110413155109/http://nssdc.gsfc.nasa.gov/planetary/factsheet/jupiterfact.html 13 अप्रैल 2011 live बृहस्पति की त्रिज्या सूर्य की त्रिज्या का लगभग १/१० है और इसका द्रव्यमान सौर द्रव्यमान का हजारवाँ हिस्सा मात्र है इसलिए दोनों निकायों का घनत्व समान है। एक "बृहस्पति द्रव्यमान" (MJ या M<sub>Jup</sup>) को प्रायः अन्य पिंडों के द्रव्यमान की एक इकाई के रूप में, विशेषरूप से ग़ैर-सौरीय ग्रह और भूरे बौनों के लिए प्रयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए ग़ैर-सौरीय ग्रह HD 209458-b का द्रव्यमान ०.६९ MJ जबकि COROT-7b का द्रव्यमान ०.०१५ MJ व्यक्त किया जाता है। सैद्धांतिक मॉडल से संकेत मिलता है कि अगर बृहस्पति का वर्तमान द्रव्यमान बहुत अधिक बढ़ जाए तो यह ग्रह सिकुड़ जाएगा। द्रव्यमान में मामूली परिवर्तन से इसकी त्रिज्या में कोई ख़ास अन्तर नहीं होगा और लगभग ५०० M⊕ (१.६ बृहस्पति द्रव्यमान) से अधिक होने पर आतंरिक भाग गुरुत्व बल के अंतर्गत संकुचित हो जाएगा और पदार्थ की मात्रा बढ़ने के बावजूद ग्रह के आयतन में कमी होगी। बढ़ते द्रव्यमान के साथ संकुचन की प्रक्रिया पर्याप्त तारकीय प्रज्वलन प्राप्त करने तक जारी रहेगी, जैसे कि ५० बृहस्पति द्रव्यमान के आसपास भूरे बौने का उच्च-द्रव्यमान। परिणामस्वरूप, बृहस्पति की संरचना और विकासवादी इतिहास के अनुरूप इसे बड़े व्यास वाले ग्रह के जैसा माना गया। यद्यपि बृहस्पति को एक सितारा बनने हेतू हाइड्रोजन संलयन के लिए ७५ गुना बड़ा होने की आवश्यकता होगी, सबसे छोटे लाल बौना तारे की त्रिज्या बृहस्पति से लगभग ३० प्रतिशत अधिक है। इसके बावजूद, बृहस्पति अभी भी सूर्य से प्राप्त गर्मी की तुलना में अधिक विकरित करता है और यह प्राप्त कुल सौर विकिरण के बराबर ही उष्मा की मात्रा अपने अन्दर उत्पादित करता है। यह अतिरिक्त तापीय विकिरण ऊष्मप्रवैगिकी प्रक्रिया के माध्यम से केल्विन-हेल्महोल्ट्ज़ तंत्र द्वारा उत्पन्न होती है। इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप ग्रह में प्रतिवर्ष लगभग २ से॰मी॰ संकुचन होता है। पहले जब यह ग्रह बना था तब यह बहुत ही तप्त था और इसका व्यास भी वर्तमान से दो गुना था। आतंरिक संरचना ऐसा लगता है बृहस्पति का घना कोर तत्वों के एक मिश्रण के साथ बना है, जो कुछ हीलियम युक्त तरल हाइड्रोजन धातु की परत से ढंका है और इसकी बाहरी परत मुख्य रूप से आणविक हाइड्रोजन से बनी हुई है। इस आधारभूत रूपरेखा के अलावा वहाँ अभी भी काफी अनिश्चितता है। इतनी गहराई के पदार्थों पर ताप और दाब के गुणों को देखते हुए प्रायः इसके कोर को चट्टानी जैसा माना गया है परन्तु इसकी विस्तृत संरचना अज्ञात है। सन् १९९७ में गुरुत्वाकर्षण माप द्वारा कोर के अस्तित्व का सुझाव दिया गया था जो संकेत कर रहा है कि कोर का द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान का १२ से ४५ गुना या बृहस्पति के कुल द्रव्यमान का लगभग ४ % -१४% है।Guillot, T.; Gautier, D.; Hubbard, W. B. New Constraints on the Composition of Jupiter from Galileo Measurements and Interior Models Icarus 1997 130 2 534–539 1997astro.ph..7210G 10.1006/icar.1997.5812 astro-ph/9707210 इसका कोर क्षेत्र घने धातु हाइड्रोजन से घिरा हुआ है जो बाहर की ओर बृहस्पति की त्रिज्या के लगभग ७८% तक फैला है। हीलियम व नियॉन वर्षा की बूंदों के रूप में इस परत से होकर तेजी से नीचे की ओर बरसते है, जिससे उपरी वायुमंडल में इन तत्वों की बहुतायत में कमी हो जाती है। धातु हाइड्रोजन की परत के ऊपर हाइड्रोजन का पारदर्शी आंतरिक वायुमंडल स्थित है। इस गहराई पर तापमान क्रांतिक तापमान के ऊपर होता है जो हाइड्रोजन के लिए केवल ३३ केल्विन है।Andreas Züttel September 2003 Materials for hydrogen storage Materials Today 6 9 24–33 10.1016/S1369-7021(03)00922-2 इस अवस्था में द्रव और गैस में कोई भेद नहीं रह जाता है, तब हाइड्रोजन को परम क्रांतिक तरल अवस्था में होना कहा जाता है। उपरी परत में गैस के जैसा व्यवहार करना हाइड्रोजन के लिए अधिक सुगम होता है जो नीचे की ओर विस्तार के साथ १००० कि॰मी॰ गहराई तक बना रहता है और अधिक गहराई में यह तरल जैसा होता है। एक बार नीचे उतर जाने पर गैस धीरे धीरे गर्म और घनी होती जाती है लेकिन भौतिक रूप से इसकी कोई स्पष्ट सीमा रेखा नहीं है।Guillot T. A comparison of the interiors of Jupiter and Saturn https://archive.org/details/sim_planetary-and-space-science_october-november-1999_47_10-11/page/1183 Planetary and Space Science 1999 47 10–11 1183–200 1999P&SS...47.1183G astro-ph/9907402 10.1016/S0032-0633(99)00043-4 Lang Kenneth R. 2003 http://ase.tufts.edu/cosmos/view_chapter.asp?id=9&page=3 Jupiter: a giant primitive planet NASA January 10, 2007 https://web.archive.org/web/20110514093512/http://ase.tufts.edu/cosmos/view_chapter.asp?id=9&page=3 14 मई 2011 live बृहस्पति के अंदर कोर की ओर जाने से ताप और दाब में तेजी से वृद्धि होती है। ऐसा माना जाता है कि १०,००० K (केल्विन) तापमान और २०० GPa (गीगा पास्कल) दबाव के चरण संक्रमण क्षेत्र पर, जहाँ हाइड्रोजन अपने क्रांतिक बिंदु से अधिक गर्म होती है - धातु बन जाती है। कोर की सीमा पर तापमान ३६,००० K और आंतरिक दबाव ३,०००–४,५०० GPa होने का अनुमान है। thumb|720px|center|कटा हिस्सा, बृहस्पति के भीतरी भाग की बनावट दिखाता है, एक चट्टानी कोर तरल धातु हाइड्रोजन की गहरी परत से घिरा हुआ है।|alt=Diagram of Jupiter's moons, surface, and interior वायुमंडल बृहस्पति का वायुमंडल बृहस्पति पर सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रहीय वायुमंडल है जो उंचाई में ५००० कि॰मी॰ तक फैला हुआ है। बृहस्पति पर कोई धरातल नहीं है, इसलिए साधारणतया वायुमण्डल के आधार को उस बिंदु पर माना जाता है जहाँ वायुमण्डलीय दाब १० बार इकाई के बराबर या पृथ्वी के सतही दबाव का १० गुना हो। बादल परत thumb|right|वॉयजर १ से लिया गया बृहस्पति के ऊपर बादलों का चित्र। बृहस्पति सदा अमोनिया क्रिस्टल और संभवतः अमोनियम हाइड्रोसल्फाइड के बादलों से ढंका रहता है। यह बादल ट्रोपोपाउस में स्थित हैं और विभिन्न अक्षांशों की धारियों में व्यवस्थित है, इन्हें उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के रूप में जाना जाता है। इन धारियों को हल्के रंग के क्षेत्रों (zones) और गहरे रंग की पट्टियों (belts) में उप-विभाजित किया गया है। इन परस्पर विरोधी परिसंचरण आकृतियों की पारस्परिक क्रिया तूफान और अस्तव्यस्तता का कारण होती है। क्षेत्रों में पवन की गति १०० मीटर/सेकण्ड (३६० कि॰मी॰/घंटा) होना आम बात है। क्षेत्रों की चौड़ाई, रंग और तीव्रता में वर्ष दर वर्ष भिन्नता देखी गयी है लेकिन उनमे इतनी स्थिरता बनी रहती है कि खगोलविद् पहचानकर उन्हें कोई नाम दे सके। बादल परत की गहराई लगभग ५० कि॰मी॰ है और यह बादलों के कम से कम दो पटावों (decks) से मिलकर बनी है। एक निचला मोटा पटाव और एक पतला साफ़ सुथरा क्षेत्र। बृहस्पति के वातावरण में बिजली की चमक के प्रमाण मिलने से लगता है कि अमोनिया परत के भीतर जलीय बादलों की एक पतली परत हो सकती है। बिजली की यह चमक जलीय ध्रुवता (polarity) के कारण होती है जो जलीय बादलों को बिजली उत्पादन के लिए आवश्यक पृथक आवेश बनाने सक्षम बनाती है। यह विद्युतीय चमक पृथ्वी पर होने वाली बिजली की चमक से हजार गुना तक शक्तिशाली हो सकती है। बढ़ती आतंरिक गर्मी से प्रेरित होकर जलीय बादल गरज का रूप ले सकते है। बृहस्पति के बादलों का नारंगी और भूरापन यौगिकों द्वारा उमड़ने के कारण है और रंगों में यह बदलाव तब होता है जब सूर्य का पराबैंगनी प्रकाश इसे उजागर करता है। विशाल लाल धब्बा और अन्य छोटे भंवर thumb|left |बृहस्पति का ग्रेट रेड स्पोट बृहस्पति पर सबसे जानी पहचानी आकृति विशाल लाल धब्बा या ग्रेट रेड स्पोट है। यह पृथ्वी से भी बड़ा एक प्रति चक्रवाती तूफ़ान है जो भूमध्यरेखा के दक्षिण में २२° पर स्थित है। इसके अस्तित्व को सन् १८३१ से या इससे भी पहले सन् १६६५ से जान लिया गया था। गणितीय मॉडल बताते है कि यह तूफ़ान शाश्वत है और इस आकृति का अस्तित्व चिरस्थायी है। इस तूफ़ान का आकार इतना पर्याप्त है कि इसे १२ से॰मी॰ एपर्चर या उससे ज्यादा के भू-आधारित दूरदर्शी से आसानी से देखा जा सकता है। यह अंडाकार धब्बा छः घंटे की अवधि के साथ वामावर्त घूर्णन करता है। इसकी लम्बाई २४ - ४०,००० कि॰मी॰ और चौड़ाई १२ - १४,००० कि॰मी॰ है। यह इतना बड़ा है कि इसमे तीन पृथ्वियां समा जाए। इस तूफ़ान की अधिकतम उंचाई उपरी बादलों से भी ८ कि॰मी॰ ऊपर है। thumb|right|300px|बृहस्पति के ग्रेट रेड स्पॉट के आकार में कम हो रही है (15 मई 2014)Harrington J.D. Weaver Donna Villard Ray Release 14-135 - NASA's Hubble Shows Jupiter's Great Red Spot is Smaller than Ever Measured http://www.nasa.gov/press/2014/may/nasas-hubble-shows-jupiters-great-red-spot-is-smaller-than-ever-measured May 15, 2014 NASA May 16, 2014 https://web.archive.org/web/20190120110734/https://www.nasa.gov/press/2014/may/nasas-hubble-shows-jupiters-great-red-spot-is-smaller-than-ever-measured 20 जनवरी 2019 live इस गैसीय ग्रह के अशांत वातावरण में इस तरह के तूफ़ान होना आम बात है। बृहस्पति पर सफ़ेद और भूरे रंग के बेनाम अनेको छोटे धब्बे है। सफ़ेद धब्बे उपरी वातावरण के भीतर अपेक्षाकृत शांत बादल से मिलकर बने है इसके विपरीत भूरे धब्बे गर्म होते है और सामान्य बादल परत के भीतर बनते है। इससे पहले कि वॉयजर इस आकृति की तूफानी प्रवृत्ति की पुष्टि करता, यह जान लिया गया था कि इस धब्बे का संबंध इस ग्रह की किसी गहरी रचना से नहीं था और इस बात के पुख्ता प्रमाण थे - जैसे कि इसकी घूर्णन गति अपने इर्द गिर्द मौजूद वातावरण कि अपेक्षा भिन्न है और कभी यह तेज घूमता है तो कभी बहुत धीमे। यह तूफानी धब्बा अपने दर्ज इतिहास के दौरान किसी भी संभावित नियत आवर्ती निशानी के सापेक्ष ग्रह के चारों ओर कई बार यात्रा कर चुका है। ग्रहीय छल्ले thumb|right|बृहस्पति के छल्ले बृहस्पति में एक धुंधली वलय प्रणाली है जो मुख्यतः तीन भागो मे बनी है। अंदरूनी छल्ला, अपेक्षाकृत चमकीला मुख्य छल्ला और बाहरी पतला छल्ला। ऐसा लगता है कि यह छल्ले शनि के छल्लों जैसे बर्फीले ना होकर धुल से बने है। संभवतः इसका मुख्य छल्ला ऐड्रास्टीया (Adrastea) और मीटस (Metis) चन्द्रमा की सामग्री के छिटकने से बना है। यह आम तौर पर चाँद पर वापस गिरने वाली वह सामग्री है जिसे बृहस्पति के शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण ने अपनी ओर खिंच लिया है। इस घूमती सामग्री की कक्षा की दिशा बृहस्पति की ओर है। इसी तरह, थीबी (Thebe) और ऐमलथीया (Amalthea) चन्द्रमा, संभवतः दो अलग अलग घटकों की धूलयुक्त बाहरी छल्ले बनाते है। ऐमलथीया की कक्षा के साथ वहाँ चट्टानी छल्ले के भी प्रमाण मिले है जो इसी चन्द्रमा के मलबे से बने हो सकते है। मेग्नेटोस्फेयर thumb|left|300px|बृहस्पति का मैग्नेटोस्फेयर, भीतर मौजूद चार गैलिलीयन उपग्रह. बृहस्पति का व्यापक चुम्बकीय क्षेत्र या मेग्नेटोस्फेयर पृथ्वी की तुलना में १४ गुना शक्तिशाली है। भूमध्यरेखा पर ४.२ गॉस (०.४२ मिली टेस्ला mT) से लेकर ध्रुवों पर १०-१४ गॉस (१.०-१.४ मिली टेस्ला mT) तक का विचरण इसे सौरमंडल का सबसे शक्तिशाली चुम्बकीय क्षेत्र बनाता है (सौर धब्बो को छोड़कर)। ऐसा माना जा रहा है कि इसकी उत्पत्ति भंवर धाराओं से होती है जो धातु हाइड्रोजन कोर के भीतर सुचालक पदार्थों के घूमने से बनती है। आयो (Io) चन्द्रमा पर ज्वालामुखी बड़ी मात्रा में सल्फरडाई आक्साइड गैस उत्सर्जित कर अपनी कक्षा के साथ-साथ गैस टॉरस बनाता है। यह गैस मेग्नेटोस्फेयर में आयनिकृत होकर सल्फर और ऑक्सीजन आयन उत्पादित करती है। यह दोनों परस्पर, बृहस्पति के वायुमंडल से उत्पन्न हाइड्रोजन आयनों से मिलकर बृहस्पति के विषुववृत्त तल में एक प्लाज्मा चादर बनाते है। इस चादर में प्लाज्मा ग्रह के साथ-साथ घूमने लगता है और चुम्बकीय डिस्क की तुलना में चुंबकीय द्विध्रुवीय विरूपण का कारण बनता है। प्लाज्मा चादर के भीतर इलेक्ट्रोन एक शक्तिशाली रेडियो तरंग उत्पन्न करते है जो ०.६ -०.३ मेगा हर्ट्ज़ परास का विस्फोट पैदा करता है thumb|बृहस्पति पर औरोरा, तीन चमकदार बिंदु बृहस्पति के चन्द्रमा हैं, आयो (बाईं ओर), गेनीमेड (तल पर) और यूरोपा (यह भी तल पर)I इसके अलावा, बेहद चमकदार करीब-करीब वृत्ताकार क्षेत्र मुख्य अंडाकार कहलाता है तथा धुंधला ध्रुवीय औरोरा देखा जा सकता हैI इस ग्रह से ७५ बृहस्पति अर्ध व्यास की दूरी पर सौर वायु के साथ मेग्नेटोस्फेयर के संपर्क से बो शॉक पैदा होती है। बृहस्पति का मेग्नेटोस्फेयर, मेग्नेटोपाउस से घिरा है जो मेग्नेटोशिल्थ के अंदरूनी किनारे पर स्थित है। मेग्नेटोशिल्थ, मेग्नेटोस्फेयर और बो शॉक के बीच का क्षेत्र है। सौर वायु इसी क्षेत्र से टकराकर बृहस्पति के मेग्नेटोस्फेयर को तान देता है और तनाव का यह विस्तार शनि की कक्षा के पास पहुँचने तक जारी रहता है। बृहस्पति के चारों बड़े चन्द्रमाओं की कक्षाएं मेग्नेटोस्फेयर के अन्दर स्थित है जो सौर वायु से इनकी रक्षा करता है। बृहस्पति का मेग्नेटोस्फेयर, ग्रह के ध्रुवीय क्षेत्रों से तीव्र धारा की रेडियो उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है। आयो चन्द्रमा पर ज्वालामुखी गतिविधि, बृहस्पति के मेग्नेटोस्फेयर में गैस फेंक कर ग्रह के आसपास कणों का टॉरस बनाती है। जैसे ही आयो टॉरस से होकर होकर गुजरता है टकराहट से आल्फवेन तरंग उत्पन्न होती है जो आयनित पदार्थ को वहन कर बृहस्पति के ध्रुवीय क्षेत्रों में ले जाती है। परिणामस्वरूप, साइक्लोट्रोंन मेसर तंत्र के माध्यम से रेडियो तरंगे उत्पन्न होती है और यह ऊर्जा एक शंकु आकार की सतह के साथ बाहर की ओर फैलती है। जब पृथ्वी इस शंकु को काटती है, बृहस्पति से रेडियों उत्सर्जन, सौर रेडियों उत्सर्जन से अधिक हो सकता है। परिक्रमा एवं घूर्णन thumb| बृहस्पति ७७ करोड़ ८० लाख कि॰मी॰ की औसत दूरी से सूर्य की परिक्रमा करता है तथा हरेक चक्कर ११.८६ वर्ष में लगाता हैबृहस्पति एकमात्र ग्रह है जिसका सूर्य के साथ साझा द्रव्यमान केंद्र सूर्य के आयतन से बाहर स्थित है।Herbst, T. M.; Rix, H.-W. 1999 Guenther, Eike; Stecklum, Bringfried; Klose, Sylvio Star Formation and Extrasolar Planet Studies with Near-Infrared Interferometry on the LBT Optical and Infrared Spectroscopy of Circumstellar Matter, ASP Conference Series, Vol. 188. 1-58381-014-5 341–350 1999ASPC..188..341H Astronomical Society of the Pacific San Francisco, Calif. – See section 3.4. बृहस्पति की सूर्य से औसत दूरी ७७ करोड़ ८० लाख किमी (५.२ खगोलीय इकाई) है तथा सूर्य का एक पूर्ण चक्कर हरेक ११.८६ वर्ष में लगाता है।शनि की तुलना में दो-तिहाई कक्षीय अवधि, सौरमंडल के इन दो बड़े ग्रहों के मध्य ५:२ का परिक्रमण तालमेल (orbital resonance) बनाता है।Michtchenko T. A. Ferraz-Mello, S. Modeling the 5 : 2 Mean-Motion Resonance in the Jupiter–Saturn Planetary System Icarus 2001 February 149 2 77–115 10.1006/icar.2000.6539 2001Icar..149..357M अर्थात् बृहस्पति सूर्य के पाँच चक्कर और शनि सूर्य के दो चक्कर समान समय में लगाते है। इसकी अंडाकार कक्षा पृथ्वी की तुलना में १.३१° झुकी हुई है। ०.०४८ विकेन्द्रता (eccentricity) के कारण बृहस्पति की सूर्य से दूरी विविधतापूर्ण है। इसके और के बीच का फर्क ७.५ करोड़ किमी है। बृहस्पति का अक्षीय झुकाव बहुत कम, केवल ३.१३° होने से, पृथ्वी और मंगल जैसे महत्वपूर्ण मौसमी परिवर्तनों का इस ग्रह को कोई भी अनुभव नहीं है। http://science.nasa.gov/headlines/y2000/interplanetaryseasons.html Interplanetary Seasons Science@NASA 2007-02-20 https://web.archive.org/web/20071016161443/http://science.nasa.gov/headlines/y2000/interplanetaryseasons.html 16 अक्तूबर 2007 live बृहस्पति का घूर्णन सौरमंडल के सभी ग्रहों में सबसे तेज है, यह अपने अक्ष पर एक घूर्णन १० घंटे से थोड़े कम समय में पूरा करता है, जिससे भूमध्यरेखीय उभार बनता है जो भू-आधारित दूरदर्शी से आसानी से दिखाई देता है। इस घूर्णन को २४.७९ मीटर/सेकण्ड२ भूमध्यरेखीय सतही गुरुत्वाकर्षण की तुलना में, भूमध्यरेखा पर १.६७  मीटर/सेकण्ड२ केन्द्राभिमुख त्वरण(centripetal acceleration) की जरुरत होती है, इस तरह भूमध्यरेखीय सतह पर परिणामी त्वरण केवल २३.१२  मीटर/सेकण्ड२होता है। इस ग्रह का आकार चपटा उपगोल जैसा है, जिसका अर्थ है इसके भूमध्यरेखा के आरपार का व्यास, इनके ध्रुवों के बीच के व्यास से ९२७५ कि॰मी॰ अधिक लंबा है। चूँकि बृहस्पति एक ठोस ग्रह नहीं है, इसके ऊपरी वायुमंडल में अनेक घूर्णन गतियाँ है। इसके ध्रुवीय वायुमंडल का घूर्णन, भूमध्यरेखीय वायुमंडल से ५ मिनट लंबा है। गतियों की तीन प्रणालियों को सापेक्षिक निशानी के रूप में इस्तेमाल किया गया है, विशेषरूप से जब वायुमंडलीय लक्षणों का अभिलेख किया जाता है। प्रणाली I १०° उत्तर से १०° दक्षिण अक्षांशों पर लागू, ९ घंटे ५० मिनट ३०.० सेकण्ड पर सबसे कम अवधि। प्रणाली II इसके उत्तर और दक्षिण के सारे अक्षांशों पर लागू, घूर्णन अवधि ९ घंटे ५५ मिनट ४०.६ सेकण्ड। प्रणाली III को पहले रेडियो खगोलविद ने परिभाषित किया था, यह ग्रह के मैग्नेटोस्फेयर से मेल खाता है, यह अवधि बृहस्पति की आधिकारिक घूर्णन अवधि है।Ian Ridpath 1998 Norton's Star Atlas 19th Prentice Hall 0-582-35655-5 अवलोकन thumb|बृहस्पति और चंद्रमा का संयोजन thumb| इस बाहरी ग्रह की प्रतिगामी गति पृथ्वी के सन्दर्भ में उसकी सापेक्षिक स्थिति के कारण है। बृहस्पति सामान्यतः आकाश में चौथा सबसे चमकदार निकाय है (सूर्य, शुक्र ग्रह और हमारे चन्द्रमा के बाद); किसी समय पर मंगल ग्रह बृहस्पति से उज्जवल दिखाई देता है। यह पृथ्वी के सन्दर्भ में बृहस्पति की स्थिति पर निर्भर करता है। यह दृश्य परिमाण में भिन्न हो सकते हैं जैसे निम्न विमुखता पर -२.९ जैसी तेज चमक से लेकर सूर्य के साथ संयोजन के दौरान -१.६ जैसा मंद | बृहस्पति का कोणीय व्यास भी इसी तरह ५०.१ से २९.८ आर्क सेकंडों तक बदलता है। अनुकूल विमुखता तब पाई जाती है जब बृहस्पति से होकर गुजर रहा होता है। यह स्थिति प्रत्येक चक्कर में एक बार पाई जाती है। जैसे बृहस्पति मार्च २०११ में अपसौर के निकट पहुँचा, सितंबर २०१० में एक अनुकूल विमुखता थी |Horizons output http://home.surewest.net/kheider/astro/jup2010.txt Favorable Appearances by Jupiter 2008-01-02 https://web.archive.org/web/20120626132058/http://home.surewest.net/kheider/astro/jup2010.txt 26 जून 2012 live (Horizons https://web.archive.org/web/20120609112340/http://ssd.jpl.nasa.gov/horizons.cgi?find_body=1&body_group=mb&sstr=599 9 जून 2012 ) सूर्य के चारों ओर, बृहस्पति के साथ कक्षीय दौड़ में, पृथ्वी प्रत्येक ३९८.२ दिनों पर बृहस्पति को पार कर लेती है, इस अवधि को एक संयुति काल कहा जाता है। इस स्थिति में, बृहस्पति पृष्ठभूमि सितारों के सन्दर्भ में प्रतिगामी गति अंतर्गत गुजरता दिखाई देता है। यही कारण है, इस एक अवधि के लिए बृहस्पति रात्रि आसमान में पीछे जाता हुआ प्रतीत होता है, एक पश्च गति का प्रदर्शन करता है। बृहस्पति की १२-वर्षीय कक्षीय अवधि, राशिचक्र के दर्जन ज्योतिषीय चिन्हों से मेल खाती है और यह चिन्हों के ऐतिहासिक मूल हो सकते है। यही कारण है, प्रत्येक बार जब बृहस्पति विमुखता तक पहुँचता है, यह पूर्व की ओर लगभग 30 ° खिसक गया होता है, जो एक राशि-चक्र की चौड़ाई है। चूँकि बृहस्पति की कक्षा पृथ्वी की कक्षा से बाहर की ओर है, बृहस्पति का स्थिति कोण, जैसा पृथ्वी से देखा गया, कभी ११.५° से अधिक नहीं होता है। यही कारण है, जब भू-आधारित दूरबीन के माध्यम से इसे देखा जाता है, ग्रह हमेंशा लगभग पूरी तरह से प्रदीप्त दिखाई देता है। केवल बृहस्पति के लिए अंतरिक्ष यान मिशन के दौरान ही इस ग्रह का अर्द्ध चंद्राकार रूप प्राप्त किया गया। 1974 http://history.nasa.gov/SP-349/ch8.htm Encounter with the Giant NASA 2007-02-17 https://web.archive.org/web/20120112070819/http://history.nasa.gov/SP-349/ch8.htm 12 जनवरी 2012 live अनुसंधान एवं अंवेषण पूर्व-दूरबीन अनुसंधान thumb| अल्मागेस्ट मॉडल में पृथ्वी (⊕) के सापेक्ष बृहस्पति (☉) की ऊर्ध्व गति . बृहस्पति का प्रेक्षण ७वीं या ८वीं शताब्दी इपू के बेबीलोनीयन खगोलविदों से होता चला आ रहा है।Babylonian Observational Astronomy A. Sachs Philosophical Transactions of the Royal Society of London 276 1257 May 2, 1974 43–50 (see p. 44) Royal Society of London 74273 10.1098/rsta.1974.0008 1974RSPTA.276...43S चीनी खगोल विज्ञान इतिहासकार, जि॰ जेझोंग ने दावा किया है कि एक चीनी खगोलशास्त्री गैन डी॰ ने बिना दृश्य साधनों की सहायता के ३६२ ई॰पू॰ में बृहस्पति के चन्द्रमाओं में से एक की खोज की है। यदि सही है, यह गैलिलियो की खोज से लगभग दो सहस्राब्दियों पहले की बात होगी।Xi Z. Z. The Discovery of Jupiter's Satellite Made by Gan-De 2000 Years Before Galileo Acta Astrophysica Sinica 1981 1 2 87 1981AcApS...1...87XPaul Dong 2002 China's Major Mysteries: Paranormal Phenomena and the Unexplained in the People's Republic China Books 0-8351-2676-5 अपनी दूसरी सदीं की अल्मागेस्ट कृति में, हेल्लेनिस्टिक खगोलविद् क्लाडियस टोलेमस ने पृथ्वी के सापेक्ष बृहस्पति की गति की व्याख्या के लिए, deferents और epicycles पर आधारित एक भूकेन्द्रीय ग्रहीय मॉडल का निर्माण किया, जिसने पृथ्वी के चारों ओर इसकी कक्षीय अवधि ४३३२.३८ या ११.८६ वर्षों के रूप में दी।A Survey of the Almagest Olaf Pedersen 1974 Odense University Press 423, 428 ४९९ में, भारतीय गणित और खगोल विज्ञान के उत्तम युग से एक गणितज्ञ-खगोलशास्त्री, आर्यभट्ट, ने भी बृहस्पति की कक्षीय अवधि का अनुमान ४३३२.२७२२ दिन या ११.८६ वर्षों के रूप में लगाने के लिए एक भूकेन्द्रीय मॉडल का प्रयोग किया था।tr. with notes by Walter Eugene Clark http://www.archive.org/download/The_Aryabhatiya_of_Aryabhata_Clark_1930/The_Aryabhatiya_of_Aryabhata_Clark_1930.pdf The Aryabhatiya of Aryabhata 1930 University of Chicago Press 9, Stanza 1 भू-आधारित दूरदर्शी अनुसंधान सन् १६१० में, गैलीलियो गैलिली ने एक दूरदर्शी का उपयोग कर बृहस्पति के चार बड़े चंद्रमाओं- आयो, युरोपा, गैनिमीड और कैलीस्टो की खोज की, यह गैलिलियाई चन्द्रमा के रूप में जाने जाते है और पृथ्वी के अलावा अन्य चन्द्रमाओं का पहला दूरदर्शीय अवलोकन माना जाता है। यह गैलीलियो की भी खगोलीय गति की एक प्रथम खोज थी जिसके केंद्र पर स्पष्ट रूप से पृथ्वी नहीं थी। यह कोपर्निकस के 'ग्रहों की गति का सूर्य केंद्रीय सिद्धांत' के पक्ष में एक प्रमुख बात थी; गैलिलियो के इस कोपर्निकस सिद्धांत के मुखर समर्थन ने उन्हें न्यायिक जाँच के भयावह घेरे में ला खड़ा किया। Westfall Richard S http://galileo.rice.edu/Catalog/NewFiles/galilei_gal.html Galilei, Galileo The Galileo Project 2007-01-10 https://web.archive.org/web/20110514104916/http://galileo.rice.edu/Catalog/NewFiles/galilei_gal.html 14 मई 2011 live सन् १६६० के दौरान, बृहस्पति पर धब्बों और रंगीन पट्टियों की खोज के लिए कैसिनी ने एक नई दूरबीन का उपयोग किया और ध्यान से देखा तो ग्रह चपटा दिखाई दिया। वें ग्रह की घूर्णन अवधि का अनुमान लगाने में भी सक्षम थे। O'Connor, J. J.; Robertson, E. F. April 2003 http://www-history.mcs.st-andrews.ac.uk/Biographies/Cassini.html Giovanni Domenico Cassini University of St. Andrews 2007-02-14 https://web.archive.org/web/20111117065622/http://www-history.mcs.st-andrews.ac.uk/Biographies/Cassini.html 17 नवंबर 2011 live १६९० में कैसिनी ने देखा कि वातावरण भिन्न भिन्न घूर्णन के अधीन चलायमान है। thumb|वॉयेजर १ से ली गई बृहस्पति की तस्वीर, ग्रेट रेड स्पॉट और गुजरता हुआ एक सफ़ेद अंडा विशाल लाल धब्बा, बृहस्पति के दक्षिणी गोलार्द्ध में एक प्रख्यात अंडाकार आकृति है, इसे १६६४ में रॉबर्ट हुक द्वारा पहले देखा गया हो सकता है और १६६५ में गियोवन्नी कैसिनी द्वारा, हालाँकि यह विवादास्पद है। औषध विक्रेता हेनरिक स्च्वाबे ने १८३१ में विशाल लाल धब्बे के विस्तार को दिखाने के लिए सबसे पहले ज्ञात आरेखण प्रस्तुत किया।Paul Murdin 2000 Encyclopedia of Astronomy and Astrophysics https://archive.org/details/encyclopediaofas0000unse_w5z7 Institute of Physics Publishing Bristol 0-12-226690-0 लाल धब्बा कथित तौर पर १८७८ में विशिष्ट बनने से पहले १६६५ और १७०८ के बीच कई अवसरों पर दृष्टि से खो गया था। यह १८८३ और २० वीं सदी के शुरू में लुप्त होने के रूप में दर्ज हुआ था। August 1974 http://history.nasa.gov/SP-349/ch1.htm SP-349/396 Pioneer Odyssey—Jupiter, Giant of the Solar System NASA 2006-08-10 https://web.archive.org/web/20110104065245/http://history.nasa.gov/SP-349/ch1.htm 4 जनवरी 2011 live गिओवान्नी बोरेल्ली और कैसिनी, दोनों ने बृहस्पति चंद्रमाओं के गतियों की सावधानीपूर्वक सारणियाँ बनाई, इसने उन समयों के पूर्वानुमानों की अनुमति दी जब चन्द्रमा ग्रह के आगे या पीछे से गुजरेंगे। सन् १६७० के द्वारा, यह देखा गया कि जब पृथ्वी की ओर से बृहस्पति, सूर्य के विपरीत पक्ष पर था, यह घटना १७ मिनटों की पाई, बाद के वर्षों से और अधिक की उम्मीद है। ओले रोमर ने तर्कों से निष्कर्ष निकाला कि दृष्टि तात्कालिक नहीं है (एक निष्कर्ष, जिसे कैसिनी ने पहले नकार दिया था) और समय की इस विसंगति का उपयोग प्रकाश की गति का आकलन करने के लिए किया था। http://www.mathpages.com/home/kmath203/kmath203.htm Roemer's Hypothesis MathPages 2007-01-12 https://archive.today/20120906031735/http://www.mathpages.com/home/kmath203/kmath203.htm 6 सितंबर 2012 live सन् १८९२ में, इ॰इ॰बर्नार्ड ने कैलिफोर्निया में लीक वेधशाला पर ३६ इंच (९१० मि॰मी॰) वर्त्तक के साथ बृहस्पति के एक पाँचवें उपग्रह का निरीक्षण किया। अपेक्षाकृत इस छोटे निकाय की खोज ने, जो उनकी पैनी दृष्टि का एक साक्षी था, उनको शीघ्रता से प्रसिद्द बना दिया। बाद में इस चन्द्रमा को ऐमलथीया नाम दिया गया था। Joe Tenn March 10, 2006 http://www.phys-astro.sonoma.edu/BruceMedalists/Barnard/ Edward Emerson Barnard Sonoma State University 2007-01-10 https://web.archive.org/web/20110917023559/http://www.phys-astro.sonoma.edu/BruceMedalists/Barnard/ 17 सितंबर 2011 live सीधे दृश्य अवलोकन द्वारा खोजा गया यह आखिरी ग्रहीय चाँद था। October 1, 2001 http://www2.jpl.nasa.gov/galileo/education/teacherres-amalthea.html Amalthea Fact Sheet NASA JPL 2007-02-21 https://web.archive.org/web/20081208090536/http://www2.jpl.nasa.gov/galileo/education/teacherres-amalthea.html 8 दिसंबर 2008 live इसके पश्चात अतिरिक्त आठ उपग्रह, १९७९ में वॉयेजर १ प्रविष्ठी यान की उड़ान से पहले खोजे गए थे। thumb|left|यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला के दूरबीन द्वारा ली गई बृहस्पति की अवरक्त छवि. सन् १९३२ में, रूपर्ट विल्डट् ने बृहस्पति के वर्णक्रम में अमोनिया और मीथेन की अवशोषण पट्टियों की पहचान की। Dunham Jr. Theodore Note on the Spectra of Jupiter and Saturn Publications of the Astronomical Society of the Pacific 1933 45 42–44 1933PASP...45...42D 10.1086/124297 तीन दीर्घायु प्रतिचक्रवातीय आकृतियों को सफ़ेद अंडे कहा गया जो १९३८ में देखे गए थे। कई दशकों के लिए वे वातावरण में अलग विशेषताओं के रूप में बनें रहें, कभी कभी एक दूसरे के निकट आ जाते लेकिन कभी भी विलीन नहीं हुए। अंततः, उनमें से दो अण्डों ने १९९८ में विलय कर दिया, फिर २००० में तीसरे को अपने साथ मिला लिया और ओवल बी.ए. हो गया। Youssef, A.; Marcus, P. S. The dynamics of jovian white ovals from formation to merger Icarus 2003 162 1 74–93 2003Icar..162...74Y 10.1016/S0019-1035(02)00060-X रेडियो दूरदर्शी अनुसंधान सन् १९५५ में, बर्नार्ड बर्क और केनेथ फ्रेंकलिन ने बृहस्पति से आने वाली २२.२ मेगाहर्टज् रेडियों संकेतो की बौछारों का पता लगाया।बौछारों की यह अवधि ग्रह के घूर्णन से मेल खाई और वे इस जानकारी का उपयोग कर घूर्णन दर को परिष्कृत करने में भी सक्षम थे। बृहस्पति से आने वाली रेडियों बौछारें दो रूपों में पाई गई थी: कई सेकंड तक चलने वाली लम्बी बौछारें (L - बौछारें) और छोटी बौछारें (S - बौछारें) जिसकी अवधि सेकण्ड के सौंवें भाग से कम थी। Weintraub Rachel A. September 26, 2005 http://www.nasa.gov/vision/universe/solarsystem/radio_jupiter.html How One Night in a Field Changed Astronomy NASA 2007-02-18 https://web.archive.org/web/20110703080812/http://www.nasa.gov/vision/universe/solarsystem/radio_jupiter.html 3 जुलाई 2011 live वैज्ञानिकों ने पाया है कि बृहस्पति से प्रसारित रेडियो संकेतों के तीन रूप थे। डेकामीट्रिक रेडियों बौछारें (दसियों मीटर की तरंग दैर्घ्य के साथ) बृहस्पति के घूर्णन के साथ बदलती है और बृहस्पति के चुंबकीय क्षेत्र के साथ आयो के संपर्क से प्रभावित हो रही है। Garcia Leonard N http://radiojove.gsfc.nasa.gov/library/sci_briefs/decametric.htm The Jovian Decametric Radio Emission NASA 2007-02-18 https://web.archive.org/web/20120302222737/http://radiojove.gsfc.nasa.gov/library/sci_briefs/decametric.htm 2 मार्च 2012 dead डेसीमीट्रिक रेडियो उत्सर्जन (तरंगदैर्य सेंटीमीटर में मापा गया), १९५९ में पहली बार फ्रैंक ड्रेक और हेन ह्वातुम द्वारा अवलोकित की गई।इस संकेत की उत्पत्ति बृहस्पति भूमध्य रेखा के आसपास की एक टॉरस आकार की पट्टी से हुई थी। यह संकेत, बृहस्पति के चुंबकीय क्षेत्र में त्वरित इलेक्ट्रॉनों से साइक्लोट्रॉन विकिरण के कारण होता है।Klein, M. J.; Gulkis, S.; Bolton, S. J. 1996 http://deepspace.jpl.nasa.gov/technology/TMOT_News/AUG97/jupsrado.html Jupiter's Synchrotron Radiation: Observed Variations Before, During and After the Impacts of Comet SL9 NASA 2007-02-18 https://web.archive.org/web/20061001094814/http://deepspace.jpl.nasa.gov/technology/TMOT_News/AUG97/jupsrado.html 1 अक्तूबर 2006 dead तापीय विकिरण बृहस्पति के वातावरण में गर्मी द्वारा उत्पादित होता है। अंतरिक्ष प्रोब के साथ अन्वेषण बृहस्पति का अन्वेषण १९७३ के बाद से कई स्वचालित अंतरिक्ष यानों ने बृहस्पति का दौरा किया है, विशेष रूप से उल्लेखनीय पायोनियर १० अंतरिक्ष यान है, बृहस्पति के इतना पर्याप्त करीब पहुँचने वाला पहला अंतरिक्ष यान, जो सौरमंडल के इस बड़े ग्रह के गुणों और तथ्यों की जानकारी वापस भेज सके।NASA – Pioneer 10 Mission Profile https://web.archive.org/web/20151106205010/http://quest.nasa.gov/sso/cool/pioneer10/mission/ 6 नवंबर 2015 . NASA. Retrieved on 2011-12-22.NASA – Glenn Research Center https://web.archive.org/web/20170713041117/https://www.nasa.gov/centers/glenn/about/history/pioneer.html 13 जुलाई 2017 . NASA. Retrieved on 2011-12-22. सौरमंडल के भीतर अन्य ग्रहों के लिए उड़ान, ऊर्जा की कीमत पर संपन्न होती है ; जो अंतरिक्ष यान के वेग में शुद्ध परिवर्तन या धक्का या डेल्टा-v के द्वारा वर्णित किया जाता है। पृथ्वी से बृहस्पति के लिए, निम्न पृथ्वी कक्षा से होहमान्न स्थानांतरण कक्षा में प्रवेश के लिए एक ६.३ कि॰मी॰/सेकण्ड डेल्टा-v की आवश्यकता होती है।Fortescue, Peter W.; Stark, John and Swinerd, Graham Spacecraft systems engineering, 3rd ed., John Wiley and Sons, 2003, ISBN 0-470-85102-3 p. 150. तुलना के लिए, निम्न पृथ्वी कक्षा पर पँहुचने के लिए ९.७ कि॰मी॰/सेकण्ड डेल्टा- v की जरुरत होगी। Hirata Chris http://www.pma.caltech.edu/~chirata/deltav.html Delta-V in the Solar System California Institute of Technology 2006-11-28 https://web.archive.org/web/20060715015836/http://www.pma.caltech.edu/~chirata/deltav.html 15 जुलाई 2006 dead सौभाग्य से, बृहस्पति पहुँचने के लिए ग्रहीय उड़ानों की ऊर्जा की जरुरत को गुरुत्वाकर्षण की सहायता से कम किया जा सकता है, Wong Al मई 28, 1998 http://www2.jpl.nasa.gov/galileo/faqnav.html Galileo FAQ: Navigation NASA 2006-11-28 https://web.archive.org/web/20080526232404/http://www2.jpl.nasa.gov/galileo/faqnav.html 26 मई 2008 live अन्यथा लम्बी अवधि की उड़ान की कीमत काफी हो सकती है। उड़ान अभियान + उड़ान अभियान अंतरिक्ष यान निकटतमपहुँच दूरी पायोनियर १० दिसंबर ३, १९७३ १,३०,००० कि॰मी॰ पायोनियर ११ दिसंबर ४, १९७४ ३४,००० कि॰मी॰ वॉयेजर १ मार्च ५, १९७९३,४९,००० कि॰मी॰ वॉयेजर २ जुलाई ९, १९७९ ५,७०,००० कि॰मी॰ युलीसेस फरवरी ८, १९९२४,०८,८९४ कि॰मी॰ फरवरी ४,२००४ १२,००,००,००० कि॰मी॰ कैसिनी दिसंबर ३०,२००० १,००,००,००० कि॰मी॰ न्यू होरिजोंस फरवरी २८, २००७ २३,०४,५३५ कि॰मी॰ thumb|वॉयेजर १ ने बृहस्पति की इस तस्वीर को २४ जनवरी १९७९ को लिया था। सन् १९७३ के प्रारंभ में, अनेक अंतरिक्ष यानों ने ग्रहीय उड़ान की कौशलताओं का प्रदर्शन किया है, जिसने उनको बृहस्पति के अवलोकन क्षेत्र के भीतर ला दिया। पायोनियर मिशन ने बृहस्पति के वायुमंडल और उनके चंद्रमाओं की पहली नजदीकी छवियों को प्राप्त किया। उसने पाया कि ग्रह के पास का विकिरण क्षेत्र उम्मीद से कहीं ज्यादा शक्तिशाली था, लेकिन दोनों अंतरिक्ष यान इस वातावरण में जीवित रहने में कामयाब रहे। इस अंतरिक्ष यान के प्रक्षेप पथ का उपयोग ग्रहीय प्रणाली के आकलन को बड़े पैमाने पर परिष्कृत करने के लिए किया गया। ग्रह द्वारा रेडियो संकेतों को ढंकने का परिणाम बृहस्पति के व्यास और ध्रुवीय सपाट राशि के बेहतर माप के रूप में हुआ। Lasher Lawrence अगस्त 1, 2006 http://spaceprojects.arc.nasa.gov/Space_Projects/pioneer/PNhome.html Pioneer Project Home Page NASA Space Projects Division 2006-11-28 https://web.archive.org/web/20060206090452/http://spaceprojects.arc.nasa.gov/Space_Projects/pioneer/PNhome.html 6 फ़रवरी 2006 dead छः वर्ष बाद, वॉयेजर मिशन से गैलिलीयन चंद्रमाओं की समझ में बेहद सुधार हुआ और बृहस्पति के छल्लों की खोज हुई। उसने यह भी पुष्टि की कि विशाल लाल धब्बा प्रतिचक्रवाती था। छवियों की तुलना से पता चला है कि पायोनियर मिशन के बाद लाल धब्बे का रंग बदल गया था और यह बदलाव नारंगी से गहरे भूरे रंग की ओर था। आयनित परमाणुओं के टॉरस की खोज आयो के कक्षीय पथ के साथ साथ हुई थी और चंद्रमाओं की सतहों पर जहाँ ज्वालामुखी पाए गए, कुछ में फूटने की प्रक्रिया चल रही थी। जैसे ही अंतरिक्ष यान ग्रह के पीछे से गुजरा, रात्रि पक्ष के वातावरण से इसने बिजली की चमक अवलोकित की। January 14, 2003 http://voyager.jpl.nasa.gov/science/jupiter.html Jupiter NASA Jet Propulsion Laboratory 2006-11-28 https://www.webcitation.org/68rIVid7l?url=http://voyager.jpl.nasa.gov/science/jupiter.html 2 जुलाई 2012 live बृहस्पति से मुठभेड़ के लिए अगला मिशन, यूलिसेस सौर यान ने, सूर्य के चारों ओर एक ध्रुवीय कक्षा प्राप्त करने के लिए उड़ान कलाबाजी का प्रदर्शन किया। इस गुजारें के दौरान अंतरिक्ष यान ने बृहस्पति के मेग्नेटोस्फेयर के अध्ययनों का संचालन किया। यूलिसेस के पास कैमरा नहीं होने से, कोई छवि नहीं ली गई। छः साल बाद एक दूसरी उड़ान बहुत अधिक से अधिक दूरी पर थी। Chan, K.; Paredes, E. S.; Ryne, M. S. 2004 http://www.aiaa.org/Spaceops2004Archive/downloads/papers/SPACE2004sp-template00447F.pdf Ulysses Attitude and Orbit Operations: 13+ Years of International Cooperation PDF American Institute of Aeronautics and Astronautics 2006-11-28 https://web.archive.org/web/20051214075825/http://www.aiaa.org/Spaceops2004Archive/downloads/papers/SPACE2004sp-template00447F.pdf 14 दिसंबर 2005 dead सन् २००० में, कैसिनी यान ने, शनि मार्ग के लिए, बृहस्पति से उड़ान भरी और कभी ग्रह से बनी कुछ उच्च-स्पष्टता की छवियाँ प्रदान की। १९ दिसम्बर २००० को, अंतरिक्ष यान ने हिमालीया चन्द्रमा की तस्वीर को कैद किया, परन्तु सतह विवरण दिखाने के लिए स्पष्टता बहुत ही निम्न थी।Hansen, C. J.; Bolton, S. J.; Matson, D. L.; Spilker, L. J.; Lebreton, J.-P. The Cassini–Huygens flyby of Jupiter 2004Icar..172....1H Icarus 2004 172 1 1–8 10.1016/j.icarus.2004.06.018 न्यू होरिजोंस यान ने, प्लूटो मार्ग के लिए, गुरुत्वाकर्षण की सहायता से बृहस्पति से उड़ान भरी। इसकी निकटतम पहुँच २८ फ़रवरी २००७ पर थी।http://www.planetary.org/explore/topics/space_missions/new_horizons/022807.html Mission Update: At Closest Approach, a Fresh View of Jupiter 2007-07-27 https://web.archive.org/web/20070429113112/http://www.planetary.org/explore/topics/space_missions/new_horizons/022807.html 29 अप्रैल 2007 liveयान के कैमरों ने आयो पर ज्वालामुखीयों से निर्गम प्लाज्मा की गणना की और विस्तार में सभी चारों गैलिलीयन चंद्रमाओं का अध्ययन किया तथा साथ ही साथ बाहरी चंद्रमाओं हिमालीया और एलारा से यह लम्बी-दूरी का अवलोकनकर्ता बना।http://www.nasa.gov/mission_pages/newhorizons/news/jupiter_system.html Pluto-Bound New Horizons Provides New Look at Jupiter System 2007-07-27 https://web.archive.org/web/20101212052748/http://www.nasa.gov/mission_pages/newhorizons/news/jupiter_system.html 12 दिसंबर 2010 live४ सितम्बर २००६ को इसने जोवीयन प्रणाली की तस्वीरें लेना शुरू किया। January 19, 2007 http://news.bbc.co.uk/2/hi/science/nature/6279423.stm New Horizons targets Jupiter kick बीबीसी न्यूज़ Online 2007-01-20 https://web.archive.org/web/20110512190223/http://news.bbc.co.uk/2/hi/science/nature/6279423.stm 12 मई 2011 live Alexander Amir सितंबर 27, 2006 http://www.planetary.org/news/2006/0927_New_Horizons_Snaps_First_Picture_of.html New Horizons Snaps First Picture of Jupiter The Planetary Society 2006-12-19 https://web.archive.org/web/20070221220556/http://www.planetary.org/news/2006/0927_New_Horizons_Snaps_First_Picture_of.html 21 फ़रवरी 2007 live गैलिलियो मिशन thumb|left|अंतरिक्ष यान कैसिनी से बृहस्पति का दृश्य. अब तक केवल गैलिलियो ने बृहस्पति का चक्कर लगाया है, जो ७ दिसम्बर १९९५ को बृहस्पति के चारों ओर की कक्षा में चला गया। इसने सात साल से अधिक ग्रह का चक्कर लगाया, तथा सभी गैलिलियाई चंद्रमाओं और ऐमलथीया की बहु-उड़ानों का वाहक बना। इस अंतरिक्ष यान ने धूमकेतु सुमेकर-लेवी ९ की टक्कर का भी साक्ष्य दिया जब यह १९९४ में बृहस्पति पर पहुँचा और घटना के लिए एक अद्वितीय लाभप्रद अवसर दिया। उच्च-प्राप्ति रेडियो प्रसारण एंटीना की असफल तैनाती के कारण इसकी मूल डिजाइन क्षमता सिमित थी, हालाँकि बृहस्पति प्रणाली के बारे में गैलिलियो से प्राप्त जानकारी व्यापक थी। McConnell Shannon अप्रैल 14, 2003 http://www2.jpl.nasa.gov/galileo/ Galileo: Journey to Jupiter NASA Jet Propulsion Laboratory 2006-11-28 https://www.webcitation.org/68rIYpsgf?url=http://solarsystem.nasa.gov/galileo/ 2 जुलाई 2012 live एक वायुमंडलीय प्रविष्ठी यान जुलाई १९९५ में अंतरिक्ष यान से छोड़ा गया था, जिसने ७ दिसम्बर को ग्रह के वायुमंडल में प्रवेश किया। इसने पैराशूट से वायुमंडल की १५० कि॰मी॰ की यात्रा की, ५७.६ मिनटों के लिए आंकड़े एकत्रित किये और उस दबाव के द्वारा कुचल दिया गया, जिसके अधीन वह उस समय था (१५३ ° से॰ तापमान पर, पृथ्वी के सामान्य दाब का लगभग २२ गुना)। Julio Magalhães December 10, 1996 http://spaceprojects.arc.nasa.gov/Space_Projects/galileo_probe/htmls/probe_events.html Galileo Probe Mission Events NASA Space Projects Division 2007-02-02 https://web.archive.org/web/20070102143553/http://spaceprojects.arc.nasa.gov/Space_Projects/galileo_probe/htmls/probe_events.html 2 जनवरी 2007 deadउसके बाद वह पिघल गया होगा और संभवतः वाष्पीकृत हो गया होगा। गैलीलियों यान ने भी दुर्भाग्य से इसी तरह के इससे भी अधिक द्रुत परिवर्तन का अनुभव किया, जब २१ सितम्बर २००३ को इसे जानबूझ कर ५० कि॰मी॰/ सेकण्ड से अधिक वेग से इस ग्रह की ओर चलाया गया, यह आत्मघाती कदम एक उपग्रह को भविष्य की किसी भी संभावित दुर्घटना से और संभवतः दूषित होने से बचाने के लिए उठाया गया था और यह उपग्रह है, युरोपा - एक चाँद जिसमें जीवन को शरण देने की संभावना है, ऐसी धारणा रही है। भविष्य के प्रोब और रद्द मिशन thumb|कैसिनी यान की दृष्टि में 1 जनवरी 2001 को बृहस्पति और आयो नासा के पास हाल में एक मिशन अंतर्गत एक ध्रुवीय कक्षा से बृहस्पति का विस्तार में अध्ययन चल रहा है। जूनो नामक, यह अंतरिक्ष यान २०११ में प्रक्षेपित हुआ और २०१६ के अंत तक यथास्थान पहुँच जाएगा।Anthony Goodeill 2008-03-31 http://newfrontiers.nasa.gov/missions_juno.html New Frontiers – Missions – Juno NASA 2007-01-02 https://web.archive.org/web/20070203235637/http://newfrontiers.nasa.gov/missions_juno.html 3 फ़रवरी 2007 dead युरोपा बृहस्पति प्रणाली मिशन (EJSM), बृहस्पति और उनके चंद्रमाओं के अन्वेषण के लिए नासा / इसा का संयुक्त प्रस्ताव है। फरवरी २००९ में यह घोषणा की गई थी कि इसा / नासा ने इस मिशन को टाइटन शनि प्रणाली मिशन से आगे प्राथमिकता दी।Talevi, Monica; Brown, Dwayne 2009-02-18 NASA and ESA Prioritize Outer Planet Missions http://www.nasa.gov/topics/solarsystem/features/20090218.html 2009-02-18 https://www.webcitation.org/60qDClK49?url=http://www.nasa.gov/topics/solarsystem/features/20090218.html 10 अगस्त 2011 livePaul Rincon 2009-02-18 Jupiter in space agencies' sights http://news.bbc.co.uk/1/hi/sci/tech/7897585.stm बीबीसी न्यूज़ 2009-02-28 https://web.archive.org/web/20090221185643/http://news.bbc.co.uk/1/hi/sci/tech/7897585.stm 21 फ़रवरी 2009 live इस मिशन के लिए इसा का योगदान अभी भी, इसा की अन्य परियोजनाओं के साथ वित्तीय खींचतान से जूझ रहा है।Sergio Volonte 2007-07-10 Cosmic Vision 2015-2025 Proposals http://sci.esa.int/science-e/www/object/index.cfm?fobjectid=41177 ESA 2009-02-18 https://www.webcitation.org/61Cw7wZd4?url=http://sci.esa.int/science-e/www/object/index.cfm?fobjectid=41177 25 अगस्त 2011 live इसकी प्रक्षेपण तिथि २०२० के आसपास होगी। युरोपा बृहस्पति प्रणाली मिशन, नासा के नेतृत्व वाली बृहस्पति यूरोपा परिक्रमा यान और इसा के नेतृत्व वाली बृहस्पति गैनिमीड परिक्रमा यान दोनों को शामिल करता है।http://sci.esa.int/science-e/www/area/index.cfm?fareaid=107 Laplace: A mission to Europa & Jupiter system ESA 2009-01-23 https://www.webcitation.org/68rIlqQjm?url=http://sci.esa.int/science-e/www/area/index.cfm?fareaid=107 2 जुलाई 2012 live बृहस्पति के चन्द्रमाओं यूरोपा, गेनीमेड और कैलिस्टो पर उपसतह तरल महासागरों की संभावना की वजह से, वहाँ के बर्फीले चन्द्रमाओं के विस्तृत अध्ययन में विशेष रुचि रही है। वित्तीय कठिनाइयों ने प्रगति को विलंबित कर दिया है। नासा के जीमो (बृहस्पति-बर्फ़ीले चन्द्रमा परिक्रमा यान) को २००५ में रद्द कर दिया गया था।Brian Berger White House scales back space plans MSNBC 2005-02-07 http://www.msnbc.msn.com/id/6928404/ 2007-01-02 https://web.archive.org/web/20110822025509/http://www.msnbc.msn.com/id/6928404/ 22 अगस्त 2011 live एक यूरोपीयन जोवियन यूरोपा परिक्रमा मिशन का भी अध्ययन किया गया था।Atzei Alessandro 2007-04-27 http://sci.esa.int/science-e/www/object/index.cfm?fobjectid=35982 Jovian Minisat Explorer ESA 2008-05-08 https://www.webcitation.org/68rIidB9R?url=http://sci.esa.int/science-e/www/object/index.cfm?fobjectid=35982 2 जुलाई 2012 live इस अभियान का स्थान युरोपा बृहस्पति प्रणाली मिशन ने ले लिया था। चन्द्रमा thumb|325px|गैलिलीयन चन्द्रमा, बाएं से दाएं, सूर्य से बढ़ती दूरी के क्रमानुसार: आयो, युरोपा, गैनिमीड, कैलीस्टो. right|thumb|बृहस्पति, गैलिलीयन चन्द्रमाओ के साथ बृहस्पति के उपग्रह बृहस्पति के 79 प्राकृतिक उपग्रह है, इनमें से १० कि॰मी॰ से कम व्यास के ५० उपग्रह है और इन सभी को १९७५ के बाद खोजा गया है। चार सबसे बड़े चन्द्रमा आयो, युरोपा, गैनिमीड और कैलिस्टो, गैलिलीयन चन्द्रमा के नाम से जाने जाते है। गैलिलीयन चन्द्रमा सौरमंडल के कुछ बड़े उपग्रहों, आयो, युरोपा और गैनिमीड की कक्षाएँ, एक विशिष्ट स्वरूप बनाते है जिसे लाप्लास रेजोनेंस के नाम से जाना जाता है। आयो उपग्रह, बृहस्पति के चार चक्कर लगाने में जितना समय लेता है, ठीक उतने ही समय में युरोपा पूरे पूरा दो चक्कर और गैनिमीड पूरे पूरा एक चक्कर लगाता है। यह रेजोनेंस, तीन बड़े चन्द्रमाओं के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के कारण बनता है जो उनकी कक्षाओं के आकार को विकृत कर अंडाकार कर देते है क्योंकि प्रत्येक चाँद अपने हर एक पूरे चक्कर में पडोसी चाँद से एक ही बिंदु पर अतिरिक्त खिंचाव प्राप्त करता है। दूसरी ओर, बृहस्पति से ज्वारीय बल, कक्षाओं को वृत्तिय बनाने की कोशिश करता है।Musotto, S.; Varadi, F.; Moore, W. B.; Schubert, G. Numerical simulations of the orbits of the Galilean satellites http://cat.inist.fr/?aModele=afficheN&cpsidt=13969974 Icarus 2002 159 2 500–504 10.1006/icar.2002.6939 2002Icar..159..500M 14 फ़रवरी 2012 https://web.archive.org/web/20110810071532/http://cat.inist.fr/?aModele=afficheN&cpsidt=13969974 10 अगस्त 2011 live गैलिलियन चंद्रमाओं की पृथ्वी के चन्द्रमा से तुलनानामअधवव्यासद्रव्यमानकक्षा की त्रिज्यापरिक्रमण काल किमी % किग्रा % किमी % दिवस %आयोˈaɪ.oʊ३६४३१०५८.९×१०२२१२०४,२१,७००११०१.७७७युरोपाjʊˈroʊpə३१२२९०४.८×१०२२६५६,७१,०३४१७५३.५५१३ गैनिमीडˈɡænimiːd५२६२१५०१४.८×१०२२२००१०,७०,४१२२८०७.१५२६कैलीस्टोkəˈlɪstoʊ४८२११४०१०.८×१०२२१५०१८,८२,७०९४९०१६.६९६१ चंद्रमाओं का वर्गीकरण thumb|right|140px|युरोपा वॉयजर मिशन की खोजों से पहले, बृहस्पति के चन्द्रमा अपने कक्षीय तत्वों की समानता के आधार पर बड़े ही सलीके से चार चार के चार समूहों में व्यवस्थित किए गए थे। बाद में, नए छोटे बाहरी चन्द्रमाओं की बड़ी संख्या ने तस्वीर जटिल कर दी। अब मुख्य छः समूह माने जाते है, हालाँकि उनमे से कुछ दूसरों से अलग है। मूल उप-विभाजन, आठ अंदरूनी नियमित चन्द्रमाओं को समूह में बांटना है जिनकी कक्षाएं बृहस्पति के विषुववृत्त तल के नजदीक है और करीब-करीब वृत्ताकार है तथा बृहस्पति के साथ बने हुए लगते है। शेष चन्द्रमा अंडाकार और झुकी कक्षाओं के साथ अज्ञात संख्या में छोटे-छोटे अनियमित चंद्रमाओं से मिलकर बने है। यह हड़प लिए गए क्षुद्रग्रहों या हड़प लिए गए क्षुद्रग्रहों के खंड माने गए है। अनियमित चन्द्रमा जिस समूह में शामिल है समान कक्षीय गुण साझा करते है और इस प्रकार वें एक ही मूल की उपज हो सकते है।Jewitt, D. C.; Sheppard, S.; Porco, C. Bagenal, F.; Dowling, T.; McKinnon, W 2004 Jupiter: The Planet, Satellites and Magnetosphere Cambridge University Press 0-521-81808-7 http://www.ifa.hawaii.edu/~jewitt/papers/JUPITER/JSP.2003.pdf PDF 17 फ़रवरी 2012 14 जुलाई 2011 https://web.archive.org/web/20110714003048/http://www.ifa.hawaii.edu/~jewitt/papers/JUPITER/JSP.2003.pdf bot: unknownNesvorný, D.; Alvarellos, J. L. A.; Dones, L.; Levison, H. F. Orbital and Collisional Evolution of the Irregular Satellites https://archive.org/details/sim_astronomical-journal_2003-07_126_1/page/398 The Astronomical Journal 2003 126 1 398–429 2003AJ....126..398N 10.1086/375461 नियमित चन्द्रमा अंदरूनी समूह Inner groupअंदरूनी समूह के सभी चारों चंद्रमाओं का व्यास २०० कि॰मी॰ से कम, कक्षीय त्रिज्या २,००,००० कि॰मी॰ से कम और कक्षीय झुकाव आधा डिग्री से कम है। गैलिलीयन चन्द्रमा The Galilean Satellites https://archive.org/details/sim_science_1999-10-01_286_5437/page/76 Showman, A. P.; Malhotra, R. Science 1999 286 5437 77–84 10.1126/science.286.5437.77 10506564इन चारो ग्रहों की खोज गैलीलियों गैलिली द्वारा और सिमोन मारियास द्वारा समानांतर की गई थी, इसकी कक्षा ४,००,००० कि॰मी॰ और २०,००,००० कि॰मी॰ के बीच है, तथा यह सौरमंडल के कुछ बड़े चंद्रमाओं में से है।अनियमित चन्द्रमा थेमीस्टोThemistoयह अपने समूह का एक मात्र चन्द्रमा है, इसकी कक्षा गैलिलीयन चंद्रमाओं और हिमालिया समूह के बीच है। हिमालीया समूहHimalia groupयह सघन सटे चंद्रमाओं का समूह है, १,१०,००,००० - १,२०,००,००० कि॰मी॰ दूरी से बृहस्पति का चक्कर लगाते है।कार्पोCarpoएक और अपने समूह का अकेला चन्द्रमा, जो अनांके समूह के अंदरूनी किनारे पर है।अनांके समूहAnanke groupइस प्रतिगामी कक्षा समूह की सीमा अस्पष्ट है, बृहस्पति से औसत दूरी २,१२,७६,००० कि॰मी॰ के साथ औसत झुकाव १४९ डिग्री है।कार्मे समूहCarme groupयह एक काफी अलग प्रतिगामी समूह है, बृहस्पति से औसत दूरी २,३४,०४,००० कि॰मी॰ के साथ औसत झुकाव १६५ डिग्री है।पेसीफाए समूह्Pasiphaë groupयह एक छितरा हुआ और थोड़ा विशिष्ट प्रतिगामी समूह है जो सभी बाह्यतम चन्द्रमाओं को शामिल करता है। सौर प्रणाली के साथ सहभागिता right|thumb|यह चित्र बृहस्पति की कक्षा में ट्रोजन क्षुद्रग्रहों के साथ ही मुख्य क्षुद्रग्रह बेल्ट को दिखाता है। सूर्य के साथ-साथ, बृहस्पति के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव ने सौरमंडल को आकार देने में बहुत मदद की है, अधिकतर ग्रहों की कक्षाएं सूर्य के भूमध्यरेखीय तल की बजाय बृहस्पति के कक्षीय तल के पास स्थित है (केवल बुध ग्रह का कक्षीय झुकाव सूर्य की भूमध्यरेखा से नजदीक है)। क्षुद्रग्रह बेल्ट में किर्कवुड अंतराल अधिकांशतः बृहस्पति की वजह से हैं और यह ग्रह अंदरूनी सौरमंडलीय इतिहास के चंद्रप्रलय के लिए जिम्मेदार हो सकता है।Kerr Richard A. Did Jupiter and Saturn Team Up to Pummel the Inner Solar System? Science 2004 306 5702 1676 http://www.sciencemag.org/cgi/content/full/306/5702/1676a?etoc 2007-08-28 10.1126/science.306.5702.1676a 15576586 https://web.archive.org/web/20080410133028/http://www.sciencemag.org/cgi/content/full/306/5702/1676a?etoc 10 अप्रैल 2008 live अपने चन्द्रमाओं के साथ, बृहस्पति का गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र उन कई क्षुद्रग्रहों को भी नियंत्रित करता है जो लाग्रंगियन बिंदुओं के क्षेत्रों में बसे है और अपनी-अपनी कक्षाओं में सूर्य के इर्दगिर्द बृहस्पति का अनुसरण करते है। यह ट्रोजन क्षुद्रग्रह के रूप में जाने जाते है, तथा ग्रीक कैम्प और ट्रोजन कैम्प में विभाजित है। इनमे से पहला, ५८८ एचिलेस (588 Achilles), सन् १९०६ में मैक्स वोल्फ द्वारा खोजा गया ; उसके बाद दो हजार से अधिक और खोजे जा चुके है,http://www.minorplanetcenter.org/iau/lists/JupiterTrojans.html List Of Jupiter Trojans 2010-10-24 IAU Minor Planet Center https://www.webcitation.org/60qD0ZB1U?url=http://www.minorplanetcenter.org/iau/lists/JupiterTrojans.html 10 अगस्त 2011 live उनमें से सबसे बड़ा ६२४ हेक्टोर (624 Hektor) है। बृहस्पति परिवार के अधिकतर लघु-अवधि-धूमकेतु - उन धूमकेतुओं के रूप में परिभाषित हैं जिनके अर्ध्य-मुख्य अक्ष (semi-mejor axis) बृहस्पति के अक्षों से छोटे हैं। बृहस्पति परिवार के धूमकेतु, नेप्चून कक्षा के पार कुइपर बेल्ट में निर्मित माने जाते हैं। बृहस्पति के साथ नजदीकी मुठभेड़ों के दौरान उनकी कक्षाएं एक छोटी अवधि में तब्दील कर दी गई और बाद में सूर्य और बृहस्पति के साथ नियमित गुरुत्वाकर्षण प्रभाव द्वारा वृत्ताकार हो गईं।Quinn, T.; Tremaine, S.; Duncan, M. Planetary perturbations and the origins of short-period comets Astrophysical Journal, Part 1 1990 355 667–679 1990ApJ...355..667Q 10.1086/168800 टक्कर thumb|right|२३ जुलाई को ली गई हबल छवि, २००९ बृहस्पति टक्कर द्वारा छोड़े गए लगभग ५,००० मील लम्बे धब्बे को दिखा रहा है।Dennis Overbye Hubble Takes Snapshot of Jupiter’s ‘Black Eye’ http://www.nytimes.com/2009/07/25/science/space/25hubble.html?ref=science 2009-07-24 New York Times 2009-07-25 https://web.archive.org/web/20180719231249/https://www.nytimes.com/2009/07/25/science/space/25hubble.html?ref=science 19 जुलाई 2018 live बृहस्पति को सौरमंडल का वेक्यूम क्लीनर कहा गया है,Richard A. Lovett Stardust's Comet Clues Reveal Early Solar System National Geographic News December 15, 2006 http://news.nationalgeographic.com/news/2006/12/061215-comet-stardust.html 2007-01-08 https://web.archive.org/web/20180719230245/https://news.nationalgeographic.com/news/2006/12/061215-comet-stardust.html 19 जुलाई 2018 live विशाल गुरुत्वीय कूप और अंदरूनी सौरमंडल के पास स्थित होने के कारण यह सौरमंडलीय ग्रहों के सबसे सतत भीषण टक्करों को झेलता है।Nakamura, T.; Kurahashi, H. Collisional Probability of Periodic Comets with the Terrestrial Planets: An Invalid Case of Analytic Formulation Astronomical Journal 1998 115 2 848–854 http://www.iop.org/EJ/article/1538-3881/115/2/848/970144.html 2007-08-28 10.1086/300206 1998AJ....115..848N https://web.archive.org/web/20200406073259/https://iopscience.iop.org/article/1538-3881/115/2/848/970144.html 6 अप्रैल 2020 liveयह सोचा गया था कि यह ग्रह धूमकेतु बमबारी से आंतरिक प्रणाली के लिए आंशिक रूप से ढाल का कार्य करता है। हाल के कंप्यूटर सिमुलेशन सुझाव देते है कि बृहस्पति, उन धूमकेतुओं की संख्या में होने वाली कमी का कारण नहीं है जो आंतरिक सौर प्रणाली से होकर गुजरते है, जैसे ही इसका गुरुत्व अन्दर की ओर आने वाले धूमकेतुओं की कक्षाओं को मोड़ता है, मोटे तौर पर उतनी ही संख्या में उन्हें बाहर निकाल फेंकता है।Horner, J.; Jones, B. W. 2008 Jupiter – friend or foe? I: the asteroids International Journal of Astrobiology 7 3–4 251–261 10.1017/S1473550408004187 0806.2795 2008IJAsB...7..251H यह विषय खगोलविदों के बीच विवादास्पद बना हुआ है, जैसे कुछ का मानना ​​है कि यह कुइपर बेल्ट से धूमकेतुओं को पृथ्वी की ओर खींचता है, जबकि अन्य लोगों का मानना ​​है कि बृहस्पति कथित ऊर्ट बादल से पृथ्वी की रक्षा करता है।Dennis Overbyte 2009-07-25 Jupiter: Our Comic Protector? Thew New York Times 2009-07-27 http://www.nytimes.com/2009/07/26/weekinreview/26overbye.html?hpw https://web.archive.org/web/20180719231044/https://www.nytimes.com/2009/07/26/weekinreview/26overbye.html?hpw 19 जुलाई 2018 live १९९७ के ऐतिहासिक खगोलीय आरेखण के एक सर्वेक्षण ने सुझाव दिया कि हो सकता है १६९० में खगोल विज्ञानी कैसिनी ने एक टक्कर का निशान दर्ज किया हो। सर्वेक्षण की गई आठ अन्य उम्मीदवारों की टिप्पणियाँ, एक टक्कर के होने की संभावना बहुत कम या ना के बराबर है।Tabe, Isshi; Watanabe, Jun-ichi; Jimbo, Michiwo 1997 February Discovery of a Possible Impact SPOT on Jupiter Recorded in 1690 Publications of the Astronomical Society of Japan 49 L1–L5 1997PASJ...49L...1T Watanabe Jimbo १६ जुलाई १९९४ से २२ जुलाई १९९४ की समयावधि के दौरान, धूमकेतु सुमेकर-लेवी ९ (SL9, औपचारिक रूप से नामित F2 D/1993) के २० से अधिक टुकड़े बृहस्पति के दक्षिणी गोलार्द्ध से टकरायें, सौरमंडल के दो निकायों के बीच की इस टक्कर ने पहला प्रत्यक्ष अवलोकन उपलब्ध कराया। इस टक्कर ने बृहस्पति के वायुमंडल की संरचना पर उपयोगी आंकड़े प्रदान किये। Baalke Ron http://www2.jpl.nasa.gov/sl9/ Comet Shoemaker-Levy Collision with Jupiter NASA 2007-01-02 https://web.archive.org/web/20080825002013/http://www2.jpl.nasa.gov/sl9/ 25 अगस्त 2008 liveRobert R. Britt Remnants of 1994 Comet Impact Leave Puzzle at Jupiter space.com August 23, 2004 http://www.space.com/scienceastronomy/mystery_monday_040823.html 2007-02-20 https://web.archive.org/web/20100814221555/http://www.space.com/scienceastronomy/mystery_monday_040823.html 14 अगस्त 2010 live १९ जुलाई २००९ को, प्रणाली २ में लगभग २१६ डिग्री देशांतर पर इस टक्कर स्थल को खोज लिया गया था।Staff http://www.abc.net.au/news/stories/2009/07/21/2632368.htm Amateur astronomer discovers Jupiter collision 2009-07-21 ABC News online 2009-07-21 https://web.archive.org/web/20110512163237/http://www.abc.net.au/news/stories/2009/07/21/2632368.htm 12 मई 2011 livehttp://www.iceinspace.com.au/index.php?id=70,550,0,0,1,0 Mike Salway जुलाई 19, 2009 IceInSpace News Breaking News: Possible Impact on Jupiter, Captured by Anthony Wesley IceInSpace 2009-07-19 https://web.archive.org/web/20120304171154/http://www.iceinspace.com.au/index.php?id=70,550,0,0,1,0 4 मार्च 2012 liveयह टक्कर अपने पीछे, बृहस्पति के वायुमंडल में एक काला धब्बा छोड़ गया, जो आकार में ओवल बीए के समान है। इन्फ्रारेड प्रेक्षण ने, जहाँ यह टक्कर हुई, एक उजले धब्बे को दिखाया है, जिसका अर्थ है इस टक्कर ने बृहस्पति के दक्षिण ध्रुव के पास के क्षेत्र में निचले वायुमंडल को गर्म कर दिया।Grossman Lisa July 20, 2009 Jupiter sports new 'bruise' from impact New Scientist http://www.newscientist.com/article/dn17491-jupiter-sports-new-bruise-from-impact.html 18 फ़रवरी 2012 https://web.archive.org/web/20090803010347/http://www.newscientist.com/article/dn17491-jupiter-sports-new-bruise-from-impact.html 3 अगस्त 2009 live टक्कर की अन्य घटना, जो पूर्व प्रेक्षित टक्करों से छोटी है, ३ जून २०१० को शौकिया खगोल विज्ञानी एंथोनी वेसलें द्वारा आस्ट्रेलिया में पाई गई और बाद में फिलीपींस में एक और शौकिया खगोल विज्ञानी द्वारा इस खोज को वीडियो पर कैद कर लिया गया है। http://www.astronomy.com/asy/default.aspx?c=a&id=9918 Another impact on Jupiter 2010-06-04 Michael Bakich Astronomy Magazine online 2010-06-04 https://web.archive.org/web/20100609093512/http://www.astronomy.com/asy/default.aspx?c=a&id=9918 9 जून 2010 live जीवन की संभावना सन् १९५३ में, मिलर-उरे प्रयोग ने प्रदर्शन किया कि आद्य पृथ्वी के वायुमंडल में मौजूद बिजली और रासायनिक यौगिकों का एक संयोजन, ऐसे कार्बनिक यौगिक (एमिनो एसिड सहित) बना सकते है जो जीवन रूपी इमारत की इंटो के जैसे काम आ सकते है। ऐसा ही कृत्रिम वातावरण जिसमे पानी, मीथेन, अमोनिया और आणविक हाइड्रोजन शामिल हो, सभी अणु अभी भी बृहस्पति के वातावरण में है। बृहस्पति के वायुमंडल में एक शक्तिशाली ऊर्ध्वाधर वायु परिसंचरण प्रणाली है, जो इन यौगिकों को वहन कर निचले क्षेत्रों में ले जाएगा। वायुमंडल के आतंरिक भाग के भीतर का उच्च तापमान इन रसायनों को तोड़ देगा, जो पृथ्वी -सदृश्य जीवन के गठन में बाधा पहुँचाएगा।Heppenheimer T. A. 2007 http://www.nss.org/settlement/ColoniesInSpace/colonies_chap01.html Colonies in Space, Chapter 1: Other Life in Space National Space Society 2007-02-26 https://web.archive.org/web/20120118211527/http://www.nss.org/settlement/ColoniesInSpace/colonies_chap01.html 18 जनवरी 2012 dead यह माना जाता है कि पृथ्वी की तरह बृहस्पति पर जीवन की अधिक संभावना नहीं है, वहाँ के वायुमंडल में पानी की केवल छोटी सी मात्रा है और बृहस्पति की भीतरी गहराई में संभावित ठोस सतह असाधारण दबाव के अधीन होगी। सन् १९७६ में, वॉयजर मिशन से पहले, यह धारणा थी कि अमोनिया या जल-आधारित जीवन बृहस्पति के ऊपरी वायुमंडल में विकसित हो सकता है। यह परिकल्पना स्थलीय समुद्र की पारिस्थितिकी पर आधारित है जिसके अनुसार शीर्ष स्तर पर सरल संश्लेषक प्लवक है, निचले स्तर पर यह प्लवक मछली का भोजन है और समुद्री शिकारी, जो मछली का शिकार करते है।http://www.daviddarling.info/encyclopedia/J/Jupiterlife.html 2006-03-09 Life on Jupiter Encyclopedia of Astrobiology, Astronomy & Spaceflight https://www.webcitation.org/664sBBzPY?url=http://www.daviddarling.info/encyclopedia/J/Jupiterlife.html 11 मार्च 2012 liveParticles, environments, and possible ecologies in the Jovian atmosphere Sagan, C.; Salpeter, E. E. The Astrophysical Journal Supplement Series 1976 32 633–637 10.1086/190414 1976ApJS...32..737S बृहस्पति के चन्द्रमाओं में से कुछ पर भूमिगत महासागरों की उपस्थिति ने जीवन की अधिक संभावना होने की अटकलों को जन्म दिया है। पौराणिकी thumb|भारतीय पौराणिक कथाओं में बृहस्पति ग्रह के देवता बृहस्पति ग्रह को प्राचीन काल से जान लिया गया था। यह रात को आसमान में नग्न आँखों से दिखाई देता है और कभी कभी दिन में भी देखा जा सकता है जब सूर्य नीचे हो।Staff June 16, 2005 Stargazers prepare for daylight view of Jupiter ABC News Online http://www.abc.net.au/news/newsitems/200506/s1393223.htm 2008-02-28 https://web.archive.org/web/20160209210018/http://web.archive.org/web/20110512163240/http://www.abc.net.au/news/newsitems/200506/s1393223.htm 9 फ़रवरी 2016 bot: unknown बेबीलोनियन से, यह निकाय उनके देवता मर्ड़क का प्रतिनिधि है। वे क्रांतिवृत्त के साथ इस ग्रह की लगभग १२-वर्षीय कक्षीय अवधि का इस्तेमाल उनकी राशि चक्र के नक्षत्रों को परिभाषित करने करते थे।Rogers J. H. Origins of the ancient constellations: I. The Mesopotamian traditions Journal of the British Astronomical Association, 1998 108 9–28 1998JBAA..108....9R रोमनों ने इसका नाम ज्यूपिटर रखा (लेटिन: Iuppiter, Iūpiter), जो रोमन पौराणिक कथाओं के प्रमुख देवता है, जिसका नाम आद्य-भारत-यूरोपीय सम्बोधन परिसर *Dyēu-pəter (पंजीकृत:*Dyēus-pətēr, अर्थ:' ' हे पिता आकाश के देवता ' ' या ' 'हे पिता दिवस के देवता ' ') से आता है।Harper Douglas November 2001 http://www.etymonline.com/index.php?term=Jupiter Jupiter Online Etymology Dictionary 2007-02-23 https://web.archive.org/web/20080928101056/http://www.etymonline.com/index.php?term=Jupiter 28 सितंबर 2008 live jovian बृहस्पति का विशेषणीय रूप है, इसका प्राचीन विशेषणीय रूप jovial है, जो मध्य युग में ज्योतिषियों द्वारा नियोजित था, जिसका अर्थ ' ' ख़ुशी ' ' या ' ' आनंदित ' ' भाव से आया है जिसे बृहस्पति के ज्योतिषीय प्रभाव के लिए उत्तरदायी ठहराया गया है।http://dictionary.reference.com/browse/jovial Jovial Dictionary.com 2007-07-29 https://web.archive.org/web/20120216090837/http://dictionary.reference.com/browse/jovial 16 फ़रवरी 2012 live चीनी, कोरियाई और जापानीयों ने ग्रह को काष्ठ तारे के जैसा निर्दिष्ट किया, जो पाँच चीनी तत्वों पर आधारित है।वैदिक ज्योतिष में, हिंदू ज्योतिषियों ने इस ग्रह का नाम देवताओं के धर्माचार्य बृहस्पति पर रखा और प्रायः ' ' गुरु ' ' कहा गया। http://www.webonautics.com/mythology/guru_jupiter.html Guru Indian Divinity.com 2007-02-14 https://web.archive.org/web/20080916192305/http://www.webonautics.com/mythology/guru_jupiter.html 16 सितंबर 2008 deadअंग्रेजी भाषा में Thursday (गुरुवार), ' ' Thor's day ' ' से लिया गया है, जर्मन मिथको में Thor बृहस्पति ग्रह के साथ जुडा है। Falk Michael Astronomical Names for the Days of the Week https://archive.org/details/sim_journal-of-the-royal-astronomical-society-of-canada_1999-06_93_3/page/122 Journal of the Royal Astronomical Society of Canada 1999 93 122–33 1999JRASC..93..122F 10.1016/j.newast.2003.07.002 मध्य एशियाई-तुर्की मिथकों में, बृहस्पति को ' ' Erendiz/Erentüz ' ' जैसा कहा गया, जिसका अर्थ ' ' eren(?)+yultuz(तारा) ' ' है। ' ' eren ' ' के अर्थ के बारे में कई सिद्धांत हैं। इसके अलावा, इन लोगों ने बृहस्पति की कक्षा की गणना ११ साल और ३०० दिन के रूप में की। वे मानते थे कि कुछ सामाजिक और प्राकृतिक घटनाएँ आसमान पर Erentüz हलचल से जुडी है।http://www.ntvmsnbc.com/id/25085903/ Türk Astrolojisi ntvmsnbc.com 2010-04-23 https://archive.today/20130104145343/http://www.ntvmsnbc.com/id/25085903/ 4 जनवरी 2013 live इन्हें भी देखें बृहस्पति के प्राकृतिक उपग्रह गैस दानव खगोलशास्त्र से सम्बन्धित शब्दावली बृहस्पति के बारे में रोचक तथ्य https://web.archive.org/web/20200820140800/https://hindishayarimala.in/about-jupiter-planet-in-hindi/ 20 अगस्त 2020 सन्दर्भ 2 श्रेणी:बृहस्पति ग्रह श्रेणी:गैस दानव