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बीकानेर का भूगोल
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बीकानेर राज्य के उत्तर में पंजाब का फिरोजपुर जिला, उत्तर-पूर्व में हिसार, उत्तर-पश्चिम में भावलपुर राज्य, दक्षिण में जोधपुर, दक्षिण-पूर्व में जयपुर और दक्षिण-पश्चिम में जैसलमेर राज्य, पूर्व में हिसार तथा लोहारु के परगने तथा पश्चिम में भावलपुर राज्य थे।
वर्तमान बीकानेर जिला
वर्तमान बीकानेर जिला राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है। यह २७ डिग्री ११ और २९ डिग्री ०३ उत्तर अक्षांश और ७१ डिग्री ५४ और ७४ डिग्री १२ पूर्व देशांतर के मध्य स्थित है। इसका कुल क्षेत्रफल २७२४४ वर्ग किलोमीटर है। बीकानेर के उत्तर में गंगानगर तथा फिरोजपुर, पश्चिम में जैसलमेर, पूर्व में नागौर एंव दक्षिण में जोधपुर स्थित है।
पर्वत
बीकानेर राज्य में सुजानगढ़ को छोड़कर और कहीं पर्वत श्रेणियाँ नही हैं। ये पर्वत श्रेणियाँ दक्षिण में जोधपुर और जयपुर की सीमाओं के निकट स्थित है। इनमें से गोपालपुरा के पास की पहाड़ी समुद्र के सतह से १६५१ फुट ऊँची है अर्थात् आस-पास की समतल भूमि से इसकी ऊँचाई केवल ६०० फुट के करीब है।
जमीन की बनावट
राज्य के दक्षिणी और पूर्वी भाग वागड़ नाम की विशाल मरुभूमि का और कुछ हिस्सा उत्तर-पश्चिमी भाग भारत की मरुभूमि का अंश है। इसका केवल उत्तर-पूर्वी भाग ही उपजाऊ है। इसका अधिकांश हिस्सा रेत के टीलों से भरा है, जो २० फुट से लेकर कहीं कहीं १०० फुट तक ऊँचे हो जाते है। यह कहा जा सकता है कि एक प्रकार से यहां की भूमि सूखी और हर प्रकार से ऊजड़ ही है। किन्तु वर्षा ॠतु में घास उग आने पर यहां का प्राकृतिक सौन्दर्य देखने योग्य होता HI
नदियां
यहां पर साल भर बहने वाली नदी एक भी नही है। केवल दो नदियां ऐसी हैं, जो वर्षा ॠतु में बीकानेर राज्य में प्रवेश कर इसके कुछ हिस्सों में जल पहुँचाती है।
काटली -
यह वास्तव में जयपुर राज्य की सीमा में बहती है। उक्त राज्य के खंडेला के पास की पहाड़ियों से निकलकर उत्तर की तरफ शेखावटी से लगभग साठ मील तक बहती हुई यह बीकानेर राज्य में प्रवेश करती है। अच्छी वर्षा होने पर यह राजगढ़ तहसील के दक्षिणी हिस्से में १० से १६ मील तक बहकर रेतीले रेगिस्तान में लुप्त हो जाती है।
धग्गर (हाकड़ा) -
इसका उदगम स्थान सिरमोर राज्य के अंतगर्त हिमालय पर्वत के नीचे का ढलुवा भाग है। पटियाला और हिसार जिले से बहकर यह टीबी के निकट बीकानेर में प्रवेश करती है। यह प्राचीनकाल में राज्य के उत्तरी भाग में बहती हुई सिंधु नदी से जा मिलती थी। पर अब यह वर्षा ॠतु को छोड़कर सदा सूखी रहती है और इस समय भी यह हनुमानगढ़ के पश्चिम एक दो मील से आगे तक नही जाती है।
बीकानेर में नहरों द्वारा सिंचाई का प्रबंध किया जाता है। जिले की प्रमुख नहरों में धग्गर नहर, पश्चिमी यमुना नहर, गंग नहर इत्यादि महत्वपूर्ण है।
झीलें
बीकानेर राज्य में कोई बड़ी झील नही है। मीठे और खारे पानी की झीलें निम्नलिखित हैं।
गजनेर
बीकानेर से २० मील दूर दक्षिण पश्चिम में यह मीठे पानी की झील उल्लेखनीय है। इनमें पश्चिम के ऊँचाई वाले प्रदेश का आया हुआ वर्षा का पानी जमा होता है और इसकी लंबाई-चौड़ाई क्रमश: आधा और चौथाई मील है। इसका जल रोगोत्पादक है। ऐसा प्रसिद्ध है कि महाराजा गज सिंह के समय जोधपुर वालों की चढ़ाई होने पर गजसिंह ने इसमें विष डलवा दिया था, जिसका प्रभाव अब तक विधमान है। लगातार कुछ दिनों तक इन जल का सेवन करने से लोग बीमार पड़ जाते हैं। इसके पास ही भव्य महल, मनोहर उद्यान और शिकार की ओदियाँ बनी हुई हैं। इस झील से कुछ दूर दूसरा बांध बांधा गया है, जिसमें आवश्यकता होने पर जल इस झील में लेने की व्यवस्था की गई है।
कोलायत
गजनेर से १० मील दक्षिण-पश्चिम में कोलायत नामक पवित्र स्थान में एक और छोटी क्षील है। इसे पुष्कर के समान पवित्र माना जाता है। यह भी वर्षा के जल पर निर्भर है और कम वर्षा होने पर सूख जाती है। इसके किनारों पर मंदिर, धर्मशालाएँ और पक्के घाट बने हुए हैं। यहां पर कपिलेश्वर मुनि का आश्रम था, ऐसा माना जाता है। इसी कारण इसका महत्व और बढ़ गया है। कार्तिकी पूर्णिमा के अवसर पर होने वाले मेले में दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।
छापर
सुजानगढ़ जिले की इस खारे पानी की इस क्षील से पहले नमक बनाया जाता था। परंतु बाद में इसे बंद कर दिया गया। यह लगभग छ: मील लंबी और दो मील चौड़ी झील है, परंतु इसकी गहराई इतनी कम है कि उष्णकाल के प्रारंभ में ही बहुत कुछ सूख जाती है।
लूणकरणसर
बीकानेर से पचास मील उत्तर-पूर्व में खारे पानी की यह दूसरी झील है। यहां भी पहले नमक बनता था, पर अब वह बंद हो गया।
[[श्रेणी:लुनकरनसर