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बेड़ू पाको बारमासा
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बेडु पाको बारमासा (हिन्दी: पहाड़ी अंजीर वर्ष भर पकते हैं), उत्तराखण्ड का एक प्रसिद्ध कुमाऊँनी लोकगीत है, जिसके रचयिता स्व. बृजेन्द्र लाल शाह हैं। मोहन उप्रेती तथा बृजमोहन शाह द्वारा संगीतबद्ध यह गीत दुनिया भर में उत्तराखण्डियों द्वारा सुना जाता है।Upreti Upreti Deepak Deepak 27 April 2016 आग से धधक रहे जंगलों के बीच हरा-भरा खड़ा है ये पेड़ http://www.amarujala.com/uttarakhand/no-effect-of-summer-on-bedu-tree 13 June 2017 hi Pithoragarh Amar Ujala https://web.archive.org/web/20170822133849/http://www.amarujala.com/uttarakhand/no-effect-of-summer-on-bedu-tree 22 अगस्त 2017 liveUniyal Uniyal Ruchika Ruchika Millennial musicians sing to revive 'dying' Garhwali language http://timesofindia.indiatimes.com/city/dehradun/Millennial-musicians-sing-to-revive-dying-Garhwali-language/articleshow/53573916.cms 13 June 2017 en New Delhi The Times of India https://web.archive.org/web/20161111054528/http://timesofindia.indiatimes.com/city/dehradun/Millennial-musicians-sing-to-revive-dying-Garhwali-language/articleshow/53573916.cms 11 नवंबर 2016 live राग दुर्गा पर आधारित इस गीत को पहली बार वर्ष १९५२ में राजकीय इण्टर कॉलेज, नैनीताल के मंच पर गाया गया।वेद विलास उनियाल नारेण काफल पाको चैता... http://www.devbhoomimedia.com/naran-kafal-pako-chaita/ देवभूमि मीडिया 7 सितम्बर 2018 2 जून 2018 https://web.archive.org/web/20180719144128/http://www.devbhoomimedia.com/naran-kafal-pako-chaita/ 19 जुलाई 2018 dead बाद में इसे दिल्ली में तीन मूर्ति भवन में एक अन्तर्राष्ट्रीय सभा के सम्मान में प्रदर्शित किया गया, जिससे इसे अधिक प्रसिद्धि मिली। उस सभा में एचएमवी द्वारा बनाये गए इस गीत की रिकॉर्डिंग समस्त मेहमानों को स्मारिका के रूप में भी दी गयी थीं। यह भारत के पहले प्रधानमंत्री, जवाहर लाल नेहरू के पसंदीदा गीतों में से था। 14 February 2016 Uttarakhandis showcase their culture http://www.indiannewslink.co.nz/uttarakhandis-showcase-their-culture 11 March 2016 IndianNewslink https://web.archive.org/web/20160311192222/http://www.indiannewslink.co.nz/uttarakhandis-showcase-their-culture/ 11 मार्च 2016 live
गीत यह है-
बेडु पाको बारा मासा, ओ नरणी काफल पाको चैत मेरी छैला
बेडु पाको बारा मासा, ओ नरण काफल पाको चैत मेरी छैला – २
बेडु पाको बारा मासा -२, ओ नरण काफल पाको चैत मेरी छैला – २ (कोरस)
भुण भुण दीन आयो -२ नरण पूजा तेरी मैत मेरी छैला -२
बेडु पाको बारा मासा -२, ओ नरण काफल पाको चैत मेरी छैला – २
आप खांछे पन सुपारी -२, नरण मैं पीलूँ छ बीड़ी मेरी छैला -२
बेडु पाको बारा मासा -२, ओ नरण काफल पाको चैत मेरी छैला – २
अल्मोडा की नंदा देवी, नरण फुल छढ़ूनी पाती मेरी छैला
बेडु पाको बारा मासा -२
त्यार खुटा मा कांटो बुड्या, नरणा मेरी खुटी पीड़ा मेरी छैला
बेडु पाको बारा मासा -२
अल्मोडा को लल्ल बजार, नरणा लल्ल मटा की सीढ़ी मेरी छैला
बेडु पाको बारा मासा -२
सन्दर्भ
श्रेणी:उत्तराखण्ड की संस्कृति
श्रेणी:गीत