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411 समाचार
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बैसवाड़ा

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बैसवाड़ा या बैसवारा अवध का पश्चिमी उपप्रान्त एवं ऐतिहासिक क्षेत्र है।गुमनामी में खो रहा बैसवारा का यश यह प्रदेश बहुत दिनों तक थानेश्वर के बैस क्षत्रियों के अधिकार में रहा । बैस क्षत्रियों की बस्ती होने के कारण यह प्रदेश 'बैसवारा' या 'बैसवाड़ा' कहा जाने लगा।bais यहाँ की बोलचाल की भाषा को बैसवारी या बैसवाड़ी कहते हैं। यह अवधी की एक उपभाषा है। बैस वश के प्रसिद्ध सम्राट् हर्षवर्धन ने अपनी राजधानी कन्नौज में रखी थी। बैसवारा साहित्य और शौर्य की सांस्कृतिक परंपरा वाला ऐतिहासिक क्षेत्र है। बैस क्षत्रियों के प्रभाव व साढ़े बाइकस परगना का क्षेत्र को होने के कारण इसे बैसवारा कहा गया। इन बाइस परगनों में आज के उन्नाव, रायबरेली व बाराबंकी के थोड़े थोड़े भाग सम्मलित हैं। बैसवाड़ा की स्थापना बैस राजपूत राजा अभयचंद बैस ने की थी। अभय चंद, थानेश्वर के महाराजाधिराजा महाराजापुत्र शिलादित्य हर्षवर्धन की २५वे वंशज थे।.Rulers, Townsmen and Bazaars: North Indian Society in the Age of British Expansion, 1770-1870 28 Cambridge South Asian Studies C. A. Bayly CUP Archive 1988 978-0-521-31054-3 https://books.google.com/books?id=xfo3AAAAIAAJ&pg=PA96 96–100 इन बाइस परगनों में निगोहा, मोहनलालगंज, हसनगंज, हड़हा, सरवन, परसंदन, डौडियाखेड़ा, घाटमपुर, भगवंत नगर, बिहार, पाटन, पनहन, मगरापुर, खीरों, सरेनी, बरेली, डलमऊ, बछरावां, कुम्हरावां, बिजनौर, हैदरगढ़, पुरवा मौरावा शामिल हैं। आईने अकबरी में भी बैसवारा क्षेत्र के उल्लेख हैं। उस समय बैसवारा क्षेत्र में दो हजार दो सौ पांच गांव तथा क्षेत्रफल तेरह लाख चौहत्तर हजार एक सौ चार एकड़ था। कविवर गिरधारी ने भी बैसवारे का वर्णन करते हुए किस क्षेत्र में कौन से राजा का अधिकार था इसका उल्लेख किया है। कहा जाता है कि बैसवारा क्षेत्र की आधार शिला बैस राजपूतों अभयचंद्र व निर्भय चंद्र ने रखी थी। गंगा दशहरा मेले के समय बक्सर आयी अरगल की राजकुमार पर भर जाति के लोगों ने कुदृष्टि डाली तो मेले में घूम रहे बैसवंस के दोनों भाइयों से सहन नहीं हुआ। भयंकर युद्ध हुआ जिसमें निर्भयचंद्र शहीद हुए। किंतु राजकुमारी की लाज बचा ली। राजा अरगल ने अभयचंद्र को अपना दामाद बनाकर यही साढ़े बाइस परगने दहेज में दे दिए जिससे बैसवारा अस्तित्व में आया। इसी वंश परंपरा में आगे चलकर राजा सातन देव व लोकनायक बाबा तिलोक चंद्र हुए। राणा बेनी माधव तथा राव रामबख्श सिंह की वीरता किसी परिचय की मोहताज नहीं है। इन क्रांतिकारी वीरों ने अपने जीते जी कभी बैसवारे में अंग्रेजों का झंडा गड़ने नहीं दिया। यहां के शौर्य पराक्रम और आन बान की शान में अंग्रेजों को इस क्षेत्र का विघटन करने के लिए विवश कर दिया। इसके लिए उन्होंने संपूर्ण बैसवारे को उन्नाव, रायबरेली, लखनऊ व बाराबंकी जिलों में विघटित कर दिया ताकि यहां के लोग एक स्थान पर एकत्र न हो सकें और इस प्रकार से बैसवारा विखंडित होकर रह गया ओर आज तक अपने पुराने रूप में नहीं आ सका। बैंस उपनाम बेस बैस बयास बायस बायास प्रसिद्ध व्यक्ति राजा रामबख्श सिंह -- प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अमर शहीद सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' देवीदत्त शुक्ल (२५ वर्ष से अधिक समय तक सरस्वती के सम्पादक रहे) मलिक मुहम्मद जायसी राणा बेनीमाधव सुखदेव मिश्र राजा सातन देव बाबा तिलोक चंद्र शिवमंगल सिंह 'सुमन' शिवबहादुर सिंह भदौरिया डॉ० उपेंद्र डॉ० ब्रह्ममित्र मधुकर खरे लल्लू बाजपेई -- आल्हा गायन के सम्राट सन्दर्भ इन्हें भी देखें राव रामबख्श सिंह श्रेणी:उत्तर प्रदेश का भूगोल