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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद
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अंगूठाकार|हिंदू संत
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, भारत में हिन्दू सन्तों एवं साधुओं का सर्वोच्च संगठन है। इसमें १४ अखाड़े सम्मिलित हैं जिनमें निर्मोही अखाड़ा (जो रामजन्मभूमि मामले में पक्षकार हैं) तथा श्री दत्तात्रेय अखाड़ा दो प्रमुख अखाड़े हैं। अखाड़ा परिषद न केवल सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार का कार्य करती है, बल्कि समाज में धार्मिक संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कुंभ मेले जैसे बड़े आयोजनों में अखाड़ों की व्यवस्था करना और संतों की आवश्यकताओं का ध्यान रखना इसकी प्रमुख जिम्मेदारियों में से एक है।अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने जारी की फर्जी बाबाओं की सूची
अखाड़े एक तरह से हिंदू धर्म के 'मठ' कहे जा सकते हैं। आरम्भ में केवल चार प्रमुख अखाड़े थे लेकिन वैचारिक मतभेद के कारण उनका विभाजन होता गया। आज 13 प्रमुख अखाड़े हैं। अखाड़े अपनी-अपनी परंपराओं में शिष्यों को दीक्षित करते हैं और उन्हें उपाधि देते हैं।
महन्त रवीन्द्र पुरी अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के वर्तमान अध्यक्ष हैं।महंत रवींद्र पुरी सामान्य संन्यासी से बने निरंजनी अखाड़े के संकटमोचक उन्हें २०२१ में अध्यक्ष चुना गया था। वे हरिद्वार के मनसा देवी ट्रस्ट के भी अध्यक्ष हैं। वे अखाड़ा परिषद के सचिव पद पर भी रह चुके हैं। महंत रवीन्द्र पुरी ने ४१ वर्ष पूर्व संन्यास लिया था। उन्होंने पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी से जुड़कर अपनी धार्मिक यात्रा शुरू की और 1994 में अखाड़े के सचिव बने।
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है।
इतिहास
1954 में इलाहाबाद कुंभ में श्रद्धालुओं में भगदड़ मची थी जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी। ऐसी समस्याओं के निवारण के लिये १३ अखाड़ों ने मिलकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की स्थापना की। सभी अखाड़ों के दो-दो पदाधिकारी इसमें शामिल किये गये। तब से लेकर आज तक यह व्यवस्था चली आ रही है।अखाड़ा परिषद की 'कहानी' संतों की जुबानी
सन्दर्भ
इन्हें भी देखें
अखाड़ा
काशी विद्वत परिषद
बाहरी कड़ियाँ
अखाड़ा परिषद ने जारी की फर्जी बाबाओं की सूची, सूची में ये नाम
श्रेणी:हिन्दू संगठन