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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

जुस्तिनियन प्रथम

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Mosaic of Justinianus I - Basilica San Vitale (Ravenna).jpg Mosaic of Justinian जस्टिनियन प्रथम का चित्र, 547 ई. रोमन साम्राज्य 1 अप्रैल 527 – 14 नवंबर 565 ऑगस्टस 1 अप्रैल 527 राज तिलक जस्टिन प्रथम जस्टिन द्वितीय जस्टिन प्रथम (1 अगस्त 527 तक) सह-सम्राट पेट्रस सबेशस 482 टॉरेशियम, डार्डिनिया, पूर्वी रोमन साम्राज्यJ. B. Bury (2008) [1889]. History of the Later Roman Empire from Arcadius to Irene II. Cosimo, Inc. 1605204056, p. 7. 14 नवंबर 565 (आयु 83) कांस्टेंटिनोपल, पूर्वी रोमन साम्राज्य पवित्र प्रेरित का गिरजाघर थीयोडोरा (वि. 525; विच्छ. 548) पेट्रस सबेशस यस्टिनियैनस Imperator Caesar Flavius Petrus Sabbatius Iustinianus AugustusThe sole source for Justinian's full name are consular diptychs of the year 521, which refer to him as Flavius Petrus Sabbatius Iustinianus.PLRE The name Flavius became a courtesy title by the late 4th century and was no longer used as a personal name.Cameron Alan 1988 Flavius: a Nicety of Protocol https://www.jstor.org/stable/41540754 Latomus 47 1 26–33 41540754 9 August 2023 7 March 2023 https://web.archive.org/web/20230307050740/https://www.jstor.org/stable/41540754 live Justinian's full titulature, as attested in his Institutes, was Imperator Caesar Flavius Iustinianus Alamannicus Gothicus Francicus Germanicus Anticus Alanicus Vandalicus Africanus pius felix inclitus victor ac triumphator semper Augustus (Imperator Caesar Flavius Justinian, victor over the Alamanni, Goths, Franks, Germans, Antes, Alans, Vandals, Africans; pious, fortunate, renowned, victorious and triumphant, ever Augustus)Abdy John Thomas https://books.google.com/books?id=NR_-NWnIm4cC&pg=PR21 The Institutes of Justinian 1876 Cambridge University Press 21 John Thomas Abdy 10 October 2023 4 November 2023 https://web.archive.org/web/20231104230422/https://books.google.com/books?id=NR_-NWnIm4cC&pg=PR21 live जस्टिनियन राजवंश सबेशसजस्टिन प्रथम (दत्तक) विजिलेंटिया ईसाई धर्म सीज़र 525 – 1 अप्रैल 527 जस्टिनियन प्रथमἸουστινιανός जस्टिनयन प्रथम (grc Ἰουστινιανός; 482 – 14 नवंबर 565) या जस्टिनियन महान 527 से 565 तक पूर्वी रोमन साम्राज्य का तक सम्राट था। सम्राट् जुस्तिनिअन का जन्म ११ मई सन् ४८३ को हुआ। इसका पहला नाम 'उप्रादा' था, परन्तु कुस्तुनतुनियाँ में शिक्षा प्राप्त करने और उसके चाचा जुस्तिन द्वारा उसे गोद लिए जाने के पश्चात् उसने अपना नाम बदल कर जुस्तिनिअन कर लिया। सन् ५२७ में चाचा की मृत्यु के बाद वह सिंहासनारूढ़ हुआ और सन् ५६५ में अपनी मृत्यु तक शासन करता रहा। शासनारूड़ होने के बाद जुस्तिनिअन ने अपना ध्यान अंतर्राष्ट्रीय मामलों पर लगाया। उसकी सेना को विदेशों से अनेक युद्ध लड़ने पड़े। सन् ५२९ से लेकर ५३२ तक फारस के साथ उसका युद्ध होता रहा। इन युद्धों में उसके सेनापति बोलिसारियस को महत्वपूर्ण सफलताएँ मिलीं लेकिन इन सफलताओं से जुस्तिनिअन का कोई विशेष लाभ नहीं हुआ। उसने फारस के साथ संघर्ष से बचने के लिये उससे शांतिसंधि कर ली और उसे वार्षिक रूप से एक निश्चित धनराशि देने लगा। ५३३ में बोलिसारियस बंडालों को जीतकर सिसली होता हुआ इटली पहुँचा और उसे साम्राज्य में मिला लिया। परंतु अपनी सैनिक दुर्बलता के कारण जुस्तिनिअन इटली पर स्थायी प्रभुत्व नहीं स्थापित कर सका। स्पेन को भी विजय करने का उसका प्रयत्न सफल नहीं रहा। उसके शासन काल में डेन्यूब तट की बर्बर जातियाँ भी उसके लिये सिर दर्द बनी रहीं। ५५९ में कुस्तुनतुनियाँ की रक्षा के लिये सेवानिवृत्त बोलिसारियस को बुलाने के लिये भी उसे बाध्य होना पड़ा था। जुस्तिनिअन प्रमुखत: 'रोमन ला' को व्यवस्थित बनाने के लिये प्रसिद्ध है। इस कार्य के लिये सभी रोमन सम्राटों की राजाज्ञा और आज्ञापत्र का पर्यवेक्षण कर, पुनरावृत्ति को बचाकर उनका एक कोड बनाया गया जो ५२९ में प्रकाशित हुआ। न्यायायिकों के मत और मान्यताओं का भी संग्रह किया गया जिसके परिणामस्वरूप 'डाइजेस्ट' जैसे विशाल ग्रंथ का प्रकाशन हुआ जिसमें प्रसिद्ध विधि-विशेषज्ञों की लगभग १०,००० मान्यताओं का संग्रह है। अंत में जुस्तिनिअन ने 'रोमन ला' की एक पाठ्यपुस्तक तैयार करने का आदेश दिया और 'इंस्टीट्यूट्स' नामक ग्रंथ तैयार हुआ। बाद में इन सबको मिलाकर दस खंडों का प्रसिद्ध 'कार्पस जूरिस सिविलस' प्रकाशित किया गया। यही रोमन ला का मुख्य स्रोत है। जुस्तिनिअन की महानता के संबंध में कोई संदेह नहीं लेकिन यह तथ्य भुलाया नहीं जा सकता कि उसे बहुत ही योग्य सहायकों का सहयोग प्राप्त था। बेलिसारियस महान् सेनाध्यक्ष और त्रिबोनियन योग्य न्यायाधीश था। इसके अतिरिक्त राजकुमारी थिओदोस ने उसके शासन में सक्रिय रुचि लेकर उसमें हाथ बँटाया। जुस्तिनिअन के चरित्र की पवित्रता और उसकी नैतिकता का परिचय इससे मिलता है कि उसका धर्मशास्त्र में विश्वास था और उसने धार्मिक पाखंडों को दूर करने का बहुत प्रयत्न किया। उसने कई चर्च बनवाए जिनमें कुस्तुनतुनियाँ के सैंट सोफिया चर्च की तो संसार की अद्भुत वस्तुओं में गणना होती है। अपनी असाधारण प्रतिभा और अटूट समर्पण के कारण, जस्टिनियन की गिनती सबसे सक्षम रोमन सम्राटों में की जाती है। सन्दर्भ श्रेणी:रोमन साम्राज्य