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411 समाचार
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जियाउर्रहमान आज़मी

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इस्लाम सुन्नी 30 जुलाई 2020 प्रो. डॉ. जियाउर्रहमान आज़मी बिलरियागंज, उत्तर प्रदेश, भारत 1943https://clarionindia.net/a-journey-from-up-hindu-brahmin-family-to-top-scholar-of-islamic-world/ A Journey from UP Hindu Brahmin Family to Top Scholar of Islamic World Caravan Desk 12 सितंबर 2020 1 अक्तूबर 2020 https://web.archive.org/web/20201001130235/https://clarionindia.net/a-journey-from-up-hindu-brahmin-family-to-top-scholar-of-islamic-world/ dead शैख़ भारत Jamia Darussalam Islamic University of Madinah King Abdul Aziz University al-Azhar University लेखक Professor Dean Islamic scholar मदीना, सऊदी अरब जियाउर्रहमान आज़मी या जियाउर रहमान आज़मी (जन्म: 1943-2020; अंग्रेज़ी:Dhiya Ur-Rahman Azmi मुस्लिम लेखक, विद्वान और प्रोफेसर थे जो भारत के आज़मगढ़, उत्तर प्रदेश से अरब में जाकर बस गए और जिन्होंने इस्लामी विश्वविद्यालय मदीना में हदीस के डीन के रूप में भी कार्य किया था। व्यक्तिगत जीवन लेखक के अनुसार, उनका जन्म उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ के निकट स्थित एक गाँव बिलरियागंज के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। जन्म के समय उनका नाम बांकेलाल रखा गया था। मात्र 16 वर्ष की आयु में उन्होंने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया।"कुछ लेखक के बारे में", पुस्तक "इस्लाम की शीतल छाया में", पृष्ठ 10 https://archive.org/details/QuranKiSheetalChayahttp://umm-ul-qura.org/2020/07/31/biography-of-shaykh-dhiya-ar-rahman-azami/ Biography of Shaykh Dhiya Ar-Rahman A’zami https://web.archive.org/web/20200916030016/http://umm-ul-qura.org/2020/07/31/biography-of-shaykh-dhiya-ar-rahman-azami/ 16 August 2020 live वे अपने गृहनगर से जामिया दारुस्सलाम, उमरबाद चले गए, जहाँ उन्होंने लगभग पाँच वर्षों तक क़ुरआन और हदीस का गहन अध्ययन किया तथा अरबी और इस्लामी अध्ययन में डिग्री प्राप्त की। इसके पश्चात उन्हें इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ मदीना में प्रवेश मिला, जहाँ से उन्होंने स्नातक की उपाधि प्राप्त की। आगे चलकर मक्का स्थित किंग अब्दुल अज़ीज़ यूनिवर्सिटी से मास्टर की पढ़ाई पूरी की और अंततः अल-अजहर यूनिवर्सिटी से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्हें इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ मदीना में प्रोफेसर नियुक्त किया गया और सऊदी अरब की नागरिकता भी प्रदान की गई। विश्वविद्यालय में उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। वे हदीस विभाग के डीन भी रहे। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने लेखन और अध्ययन को अपना जीवन समर्पित कर दिया। मस्जिद-ए-नबवी में उनके लिए एक विशेष कुर्सी निर्धारित की गई थी, जहाँ वे लोगों को हदीस की शिक्षा देते थे। अंततः, 30 जुलाई 2020 को उनका निधन हो गया।।https://thecognate.com/renowned-hadith-scholar-muslim-convert-from-hinduism-shaykh-dhiya-ur-rahman-azmi-passes-away-in-madinah/ Renowned Hadith Scholar & Muslim Convert From Hinduism Shaykh Dhiya Ur-Rahman Azmi Passes Away In Madinahs July 30, 2020 The Cognate 12 सितंबर 2020 18 फ़रवरी 2025 https://web.archive.org/web/20250218102314/https://thecognate.com/renowned-hadith-scholar-muslim-convert-from-hinduism-shaykh-dhiya-ur-rahman-azmi-passes-away-in-madinah/ dead पुस्तकें आज़मी ने अपनी आत्मकथा सहित 20 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया। उनकी सबसे प्रसिद्ध पुस्तक "अल-जामे अल-कामिल फ़िल-हदीस अस-सहीह अल-शामिल" जिसमें सभी प्रामाणिक हदीस का संग्रह है। हिंदी में "कुरआन मजीद की इन्साइक्लोपीडिया", और "क़ुरआन की शीतल छाया में" लिखी जो उर्दू और मराठी में भी प्रकाशित हुई।कुरआनच्या' शीतल छायेत https://archive.org/details/quranachyasheetalchhayet बाहरी कड़ियाँ जियाउर्रहमान आज़मी की पुस्तक अमेज़न पर इन्हें भी देखें मदरसा सौलतिया इज़हार उल-हक रहमतुल्लाह कैरानवी दिरसात फ़ील-यहुदियात वाल-मसीहियत वा ल-अदियानल-हिंद अल-यहुदियात वा अल-मसिहिय्यात सन्दर्भ श्रेणी:२०२० में निधन श्रेणी:भारतीय लेखक श्रेणी:इस्लामी धर्मशास्त्री श्रेणी:आज़मगढ़ के महत्वपूर्ण व्यक्तित्व श्रेणी:इस्लाम में परिवर्तित लोगों की सूची श्रेणी:हिन्दू धर्म और इस्लाम श्रेणी:इस्लाम के मुस्लिम विद्वान श्रेणी:इस्लाम के भारतीय मुस्लिम विद्वान श्रेणी:इस्लाम के भारतीय सुन्नी मुस्लिम विद्वान श्रेणी:लेखक श्रेणी:21वीं सदी के इस्लाम के मुस्लिम विद्वान श्रेणी:21वीं सदी के मुसलमान