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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

आयो (उपग्रह)

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आयो Jupiter I Ionian 250px|True-color image taken by the Galileo probe. गैलिलीयो यान द्वारा ली गयी आयो की तस्वीर - केन्द्रीय बिंदु से बाएं ओर का काला बिंदु प्रोमीथियस नामक विष्फोटित ज्वालामुखी है। #a0ffa0 yes गैलीलियो गैलिली January 8, 1610Blue Jennifer November 9, 2009 http://planetarynames.wr.usgs.gov/append7.html Planet and Satellite Names and Discoverers USGS 2010-01-13 https://www.webcitation.org/610c8g3sc?url=http://planetarynames.wr.usgs.gov/Page/Planets 17 अगस्त 2011 live 421,700 km (0.002 819 AU) 0.0041 420,000 km (0.002 807 AU) 423,400 km (0.002 830 AU) 1.769 137 786 d (152 853.504 7 s, 42.459 306 86 h) 17.334 km/s 2.21° (to the ecliptic)0.05° (to Jupiter's equator) Jupiter yes 1,821.3 km (0.286 Earths)Thomas P. C. et al. 1998 The Shape of Io from Galileo Limb Measurements Icarus 135 1 175–180 10.1006/icar.1998.5987 1998Icar..135..175T 3,660.0 × 3,637.4 × 3,630.6 km 41,910,000 km2 (0.082 Earths) 2.5310 km3 (0.023 Earths) 8.931922 kg (0.015 Earths) 3.528 g/cm3 1.796 m/s2 (0.183 g) 2.558 km/s 0.63 ± 0.02Yeomans Donald K. July 13, 2006 Planetary Satellite Physical Parameters JPL Solar System Dynamics http://ssd.jpl.nasa.gov/?sat_phys_par 2007-11-05 https://www.webcitation.org/5msK7adC4?url=http://ssd.jpl.nasa.gov/?sat_phys_par 18 जनवरी 2010 live 5.02 (opposition)Classic Satellites of the Solar System http://www.oarval.org/ClasSaten.htm Observatorio ARVAL 2007-09-28 https://www.webcitation.org/61Cvx6xRx?url=http://www.oarval.org/ClasSaten.htm 25 अगस्त 2011 dead synchronous 271 km/h yes Surface 90 K 110 K 130 KRathbun J. A. Spencer 2004 J.R. Tamppari L.K. Martin T.Z. Barnard L. Travis L.D. Mapping of Io's thermal radiation by the Galileo photopolarimeter-radiometer (PPR) instrument Icarus 169 1 127–139 10.1016/j.icarus.2003.12.021 2004Icar..169..127R yes trace 90% sulfur dioxide आयो (Io), हमारे सौर मण्डल के पाँचवे ग्रह बृहस्पति का तीसरा सब से बड़ा उपग्रह है और यह पूरे सौर मंडल का चौथा सब से बड़ा चन्द्रमा है। आयो का व्यास (डायामीटर) 3,642 किमी है। बृहस्पति के चार प्रमुख उपग्रहों (गैनिमीड, कलिस्टो, आयो और यूरोपा) में यह बृहस्पति की सब से क़रीबी कक्षा में परिक्रमा करने वाला चन्द्रमा है। बृहस्पति के इतना समीप होने की वजह से उस ग्रह के भयंकर गुरुत्वाकर्षण से पैदा होने वाला ज्वारभाटा बल आयो को गूंथता रहता है जिस से इस उपग्रह पर बहुत से ज्वालामुखी हैं। सन् 2010 तक आयो पर 400 से भी अधिक सक्रीय ज्वालामुखी गिने जा चुके थे। पूरे सौर मंडल में और कोई वस्तु नहीं जहाँ आयो से ज़्यादा भौगोलिक उथल-पुथल हो रही हो।Encyclopedia of the Solar System https://archive.org/details/encyclopediasola00mcfa_702 Io: The Volcanic Moon Rosaly MC Lopes Academic Press 2006 Lucy-Ann McFadden, Paul R. Weissman, Torrence V. Johnson 419–431 978-0-12-088589-3Lava lakes on Io: Observations of Io’s volcanic activity from Galileo NIMS during the 2001 fly-bys Icarus Lopes R. M. C. et al. 140–174 169 1 2004 10.1016/j.icarus.2003.11.013 2004Icar..169..140L सौर मंडल के बाहरी चंद्रमाओं की बनावट में ज़्यादातर बर्फ़ की बहुतायत होती है लेकिन आयो पर ऐसा नहीं है। आयो अधिकतर पत्थरीले पदार्थों का बना हुआ है। अन्य भाषाओं में आयो को अंग्रेज़ी में "Io" लिखा जाता है। आयो प्राचीन यूनानी धार्मिक कथाओं में ज़्यूस की प्रेमिका थी। ज़्यूस का यूनानी धर्म में वही स्थान है जो भारत में बृहस्पति का है। "ज्यूपिटर" ज़्यूस का रोमन नाम है। अकार और ढाँचा thumb|200px|left|घूमते हुए आयो का चलचित्र - जो बड़ा लाल छल्ला नज़र आ रहा है वह "पेले" नामक ज्वालामुखी के इर्द-गिर्द घिरे गंधक के योगिकों से बना मलबा है आयो पृथ्वी के चन्द्रमा से थोड़ा बड़ा है - उसका व्यास (डायमीटर) चन्द्रमा के व्यास से लगभग 5% अधिक है। आयो का ढाँचा पृथ्वी, शुक्र और मंगल जैसे पत्थरीले ग्रहों से मिलता-जुलता है। इसके बहरी भाग में सिलिकेट और भीतरी भाग में लोहा या लोहे और गंधक (सलफ़र) का मिश्रण है। यह अंदरूनी धातु का केन्द्रीय भाग आयो के द्रव्यमान का 20% है। गैलिलेओ यान से मिली जानकारी के अनुसार सतह के नीचे एक पिघले पत्थर (मैग्मा) की 50 किमी मोटी तह होने की सम्भावना है जिसका तापमान 1,200 डिग्री सेंटीग्रेड के आसपास है। जब वैज्ञानिकों ने सबसे पहली बार आयो की सतह की तस्वीरें देखी उन्हें यह देखकर आश्चर्य हुआ के उसपर उल्कापिंडों के गिरने से बने प्रहार क्रेटर नहीं थे जबकि चन्द्रमा, मंगल, बुध और बृहस्पति के उपग्रहों पर ऐसे बहुत से क्रेटर हैं। उसके बजाए उन्हें एक लाल, पीली, हरी रंग-बिरंगी सतह दिखी। इसकी वजह यह थी के बृहस्पति, गैनिमीड, कलिस्टो और यूरोपा के ज्वारभाटा बल से आयो बुरी तरह गूंथा जाता है और उसपर कई ज्वालामुखियों से लावा उगलता रहता है। यह लावा क्रेटर भर देता है और पूरी ज़मीन पर गंधक (सलफ़र) के रंग-बिरंगे रासायनिक यौगिक फैला देता है। इन्हें भी देखें बृहस्पति (ग्रह) बृहस्पति के प्राकृतिक उपग्रह बाहरी कड़ियाँ "सौर मंडल के दृश्य" वेबसाईट का आयो पृष्ठ (अंग्रेज़ी में) सन्दर्भ 2 श्रेणी:आयो (चंद्रमा) श्रेणी:बृहस्पति के प्राकृतिक उपग्रह श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना