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बहिष्करण

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सितंबर 2026बहिष्करण (Exclusion) सामान्य अर्थ में किसी व्यक्ति, समूह, वस्तु या विचार को किसी व्यवस्था, समुदाय, गतिविधि या संसाधन से बाहर रखने की प्रक्रिया या स्थिति है। समाजशास्त्र और सामाजिक नीति में सामाजिक बहिष्करण उस प्रक्रिया को कहा जाता है जिसके द्वारा व्यक्ति या समूह समाज के आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक जीवन में पूर्ण भागीदारी से वंचित या दूर हो जाते हैं।Social inclusion, European Commission/Eurostat. सामाजिक बहिष्करण को केवल गरीबी के पर्याय के रूप में नहीं देखा जाता। इसमें आय की कमी के साथ-साथ रोज़गार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक संबंधों, राजनीतिक भागीदारी, सार्वजनिक सेवाओं और अन्य महत्वपूर्ण संसाधनों तक सीमित पहुँच भी शामिल हो सकती है।Social Exclusion: Concept, Application, and Scrutiny, Asian Development Bank. इस अवधारणा का आधुनिक सामाजिक-नीतिगत प्रयोग विशेष रूप से यूरोप में विकसित हुआ, लेकिन बाद में यह दुनिया के विभिन्न समाजों में असमानता, गरीबी, भेदभाव और सामाजिक भागीदारी के अध्ययन का महत्वपूर्ण उपकरण बन गया। समाजशास्त्री हिलारी सिल्वर ने 1994 में सामाजिक बहिष्करण को समझने के लिए एकजुटता (solidarity), विशिष्टीकरण (specialization) और एकाधिकार (monopoly) के तीन प्रमुख प्रतिमानों की चर्चा की।Hilary Silver, "Social exclusion and social solidarity: three paradigms", International Labour Review, 1994, International Labour Organization. thumb|320px|बहिष्करण, समावेशन, पृथक्करण और एकीकरण की अवधारणाओं का तुलनात्मक चित्रण thumb|300px|बहिष्करण और समावेशन के विभिन्न सामाजिक रूपों का आरेख अवधारणा बहिष्करण का मूल अर्थ किसी व्यक्ति या समूह की किसी व्यवस्था में भागीदारी को रोकना या सीमित करना है। सामाजिक संदर्भ में यह केवल किसी व्यक्ति को किसी स्थान से बाहर निकालने की प्रत्यक्ष क्रिया नहीं है, बल्कि ऐसी सामाजिक, आर्थिक और संस्थागत परिस्थितियों को भी दर्शाता है जिनके कारण कुछ लोग उन अवसरों और संसाधनों तक नहीं पहुँच पाते जो समाज के अन्य सदस्यों के लिए उपलब्ध होते हैं।Social inclusion, European Commission/Eurostat. सामाजिक बहिष्करण की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसकी बहुआयामी प्रकृति है। कोई व्यक्ति एक ही समय में आर्थिक रूप से गरीब, राजनीतिक रूप से कम प्रतिनिधित्व वाला और सामाजिक रूप से अलग-थलग हो सकता है। इसके विपरीत, किसी व्यक्ति को एक क्षेत्र में बहिष्करण का सामना करना पड़ सकता है जबकि दूसरे क्षेत्र में वह पूरी तरह शामिल हो।Social Exclusion: Concept, Application, and Scrutiny, Asian Development Bank. सामाजिक बहिष्करण का विकास आधुनिक अर्थ में सामाजिक बहिष्करण की अवधारणा यूरोपीय सामाजिक नीति और गरीबी संबंधी बहसों में विशेष रूप से 20वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में उभरी। 1970 और 1980 के दशकों में सामाजिक परिवर्तन, बेरोज़गारी, कल्याणकारी राज्य की सीमाओं और नई प्रकार की सामाजिक वंचनाओं ने इस अवधारणा को अधिक महत्व दिया।Hilary Silver, "Social exclusion and social solidarity: three paradigms", International Labour Organization, 1994. सामाजिक बहिष्करण की अवधारणा ने पारंपरिक गरीबी-अध्ययन का दायरा बढ़ाया। केवल यह पूछने के बजाय कि किसी व्यक्ति के पास कितनी आय है, शोधकर्ताओं ने यह देखना शुरू किया कि वह व्यक्ति समाज के सामान्य संस्थानों और गतिविधियों में किस सीमा तक भाग ले सकता है।Social Exclusion: Concept, Application, and Scrutiny, Asian Development Bank. बहिष्करण के प्रमुख आयाम सामाजिक बहिष्करण अनेक क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है। इसके प्रमुख आयाम निम्नलिखित हैं। आर्थिक बहिष्करण आर्थिक बहिष्करण तब होता है जब व्यक्ति या समूह रोज़गार, आय, संपत्ति, ऋण, बाज़ार या अन्य आर्थिक संसाधनों तक पर्याप्त पहुँच प्राप्त नहीं कर पाते। दीर्घकालिक बेरोज़गारी, अस्थिर रोज़गार, अत्यंत कम आय, वित्तीय सेवाओं तक सीमित पहुँच और संपत्ति के असमान वितरण जैसी स्थितियाँ आर्थिक बहिष्करण को बढ़ा सकती हैं।Hilary Silver, "Social exclusion and social solidarity: three paradigms", International Labour Organization. आर्थिक बहिष्करण और गरीबी में निकट संबंध है, लेकिन दोनों समान नहीं हैं। गरीबी मुख्यतः संसाधनों की अपर्याप्तता पर केंद्रित हो सकती है, जबकि बहिष्करण यह भी पूछता है कि व्यक्ति को आर्थिक अवसरों और संस्थानों में भाग लेने से किन प्रक्रियाओं द्वारा रोका जा रहा है।Social Exclusion: Concept, Application, and Scrutiny, Asian Development Bank. सामाजिक बहिष्करण सामाजिक बहिष्करण में व्यक्ति या समूह सामाजिक संबंधों, समुदायों और संस्थानों से अलग हो सकता है। सामाजिक अलगाव, कलंक, पूर्वाग्रह और भेदभाव इसके महत्वपूर्ण रूप हो सकते हैं। किसी व्यक्ति को उसकी जाति, नस्ल, जातीयता, धर्म, लिंग, दिव्यांगता, आयु या अन्य सामाजिक पहचान के कारण सामाजिक अवसरों से दूर रखा जाना इसका उदाहरण हो सकता है। राजनीतिक बहिष्करण राजनीतिक बहिष्करण तब होता है जब किसी व्यक्ति या समूह की राजनीतिक प्रक्रिया में भागीदारी सीमित हो। इसमें मतदान से वंचित होना, राजनीतिक प्रतिनिधित्व का अभाव, निर्णय लेने वाली संस्थाओं तक सीमित पहुँच और सार्वजनिक नीतियों के निर्माण में कम प्रभाव शामिल हो सकते हैं। राजनीतिक भागीदारी सामाजिक समावेशन का महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योंकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों की आवाज़ सार्वजनिक निर्णयों को प्रभावित करने का माध्यम बनती है।Social Exclusion: Concept, Application, and Scrutiny, Asian Development Bank. शैक्षिक बहिष्करण शिक्षा तक असमान पहुँच सामाजिक बहिष्करण का महत्वपूर्ण रूप है। विद्यालयों की उपलब्धता, आर्थिक स्थिति, सामाजिक भेदभाव, भाषा, भौगोलिक दूरी और अन्य संस्थागत बाधाएँ कुछ समूहों के शैक्षिक अवसरों को सीमित कर सकती हैं। शिक्षा का बहिष्करण आगे चलकर रोज़गार, आय और सामाजिक गतिशीलता में भी असमानता पैदा कर सकता है। स्वास्थ्य संबंधी बहिष्करण स्वास्थ्य सेवाओं तक असमान पहुँच भी बहिष्करण का रूप हो सकती है। आय, स्थान, सामाजिक स्थिति, दिव्यांगता और अन्य परिस्थितियों के कारण कुछ समूह गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से अपेक्षाकृत अधिक दूर रह सकते हैं। इस प्रकार सामाजिक बहिष्करण केवल आर्थिक संसाधनों का प्रश्न नहीं बल्कि जीवन की मूलभूत क्षमताओं और अवसरों तक पहुँच का भी प्रश्न है।Social Exclusion: Concept, Application, and Scrutiny, Asian Development Bank. सांस्कृतिक बहिष्करण सांस्कृतिक बहिष्करण तब दिखाई देता है जब किसी समूह की भाषा, संस्कृति, परंपरा, पहचान या सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को सामाजिक जीवन में कम महत्व दिया जाता है या उसे सार्वजनिक संस्थानों में पर्याप्त स्थान नहीं मिलता। यह स्थिति विशेष रूप से भाषाई, जातीय और सांस्कृतिक अल्पसंख्यकों के संदर्भ में अध्ययन की जाती है। बहिष्करण के कारण बहिष्करण के कारण एकल नहीं होते। इसके पीछे सामाजिक संस्थाएँ, आर्थिक संरचनाएँ, राजनीतिक शक्ति-संबंध और सांस्कृतिक मान्यताएँ एक साथ काम कर सकती हैं। भेदभाव भेदभाव बहिष्करण का एक महत्वपूर्ण तंत्र है। यदि किसी व्यक्ति को उसकी सामाजिक पहचान के कारण शिक्षा, रोज़गार, आवास या अन्य सेवाओं में कम अवसर मिलते हैं, तो इससे उसकी समाज में पूर्ण भागीदारी सीमित हो सकती है। सामाजिक कलंक किसी व्यक्ति या समूह के बारे में नकारात्मक सामाजिक धारणाएँ भी बहिष्करण को जन्म दे सकती हैं। कलंक के कारण व्यक्ति सामाजिक संबंधों, संस्थानों या सार्वजनिक जीवन से दूर हो सकता है। आर्थिक असमानता आय और संपत्ति की अत्यधिक असमानता लोगों की शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, वित्तीय सेवाओं और अन्य अवसरों तक पहुँच में अंतर पैदा कर सकती है। संस्थागत बाधाएँ कभी-कभी बहिष्करण व्यक्तिगत पूर्वाग्रह के बजाय संस्थागत नियमों, प्रक्रियाओं या संरचनाओं से उत्पन्न होता है। ऐसी बाधाएँ किसी विशेष समूह को संसाधनों या अवसरों तक पहुँचने में व्यवस्थित रूप से कठिनाई पैदा कर सकती हैं। सामाजिक शक्ति और समूह-सीमा शक्तिशाली समूह कभी-कभी संसाधनों, संस्थानों या सामाजिक प्रतिष्ठा तक पहुँच को नियंत्रित करके अन्य समूहों को बाहर रख सकते हैं। हिलारी सिल्वर के एकाधिकार प्रतिमान में सामाजिक बहिष्करण को समूहों द्वारा संसाधनों और अवसरों पर नियंत्रण तथा सामाजिक बंदीकरण से जोड़ा गया है।Hilary Silver, "Social exclusion and social solidarity: three paradigms", International Labour Organization. हिलारी सिल्वर के तीन प्रतिमान हिलारी सिल्वर ने सामाजिक बहिष्करण की अवधारणा के तीन प्रमुख सैद्धांतिक प्रतिमानों की पहचान की:Hilary Silver, "Social exclusion and social solidarity: three paradigms", International Labour Organization. प्रतिमान मुख्य विचार प्रमुख वैचारिक संबंध एकजुटता (Solidarity) व्यक्ति और समाज के बीच सामाजिक एवं नैतिक संबंधों के कमजोर होने को बहिष्करण से जोड़ता है। गणतांत्रिक परंपरा विशिष्टीकरण (Specialization) व्यक्तियों और समूहों के बीच सामाजिक विभाजन तथा भेदभाव को बहिष्करण से जोड़ता है। उदारवादी परंपरा एकाधिकार (Monopoly) शक्तिशाली समूहों द्वारा संसाधनों और अवसरों तक पहुँच को नियंत्रित करने पर बल देता है। सामाजिक-लोकतांत्रिक परंपरा इन तीनों प्रतिमानों से पता चलता है कि सामाजिक बहिष्करण की कोई एक सार्वभौमिक व्याख्या नहीं है। विभिन्न समाजों में इसकी व्याख्या सामाजिक संबंधों, अधिकारों, आर्थिक संरचनाओं और शक्ति-संबंधों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।Hilary Silver, "Social exclusion and social solidarity: three paradigms", International Labour Organization. बहिष्करण और गरीबी बहिष्करण और गरीबी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, लेकिन दोनों समान अवधारणाएँ नहीं हैं। गरीबी में सामान्यतः आय, उपभोग या आवश्यक संसाधनों की कमी पर ध्यान दिया जाता है। सामाजिक बहिष्करण इससे आगे जाकर यह देखता है कि व्यक्ति या समूह समाज के सामान्य जीवन में किस सीमा तक भाग ले सकता है और उसे अवसरों, संस्थानों तथा सामाजिक संबंधों तक कैसी पहुँच प्राप्त है।Social inclusion, European Commission/Eurostat. अमर्त्य सेन ने सामाजिक बहिष्करण को क्षमता दृष्टिकोण और गरीबी के व्यापक अध्ययन से जोड़ते हुए यह दिखाया कि किसी व्यक्ति का कल्याण केवल उसकी आय से निर्धारित नहीं होता; सामाजिक संबंधों और अवसरों में भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।Amartya Sen, Social Exclusion: Concept, Application, and Scrutiny, Asian Development Bank, 2000. बहिष्करण और भेदभाव भेदभाव और बहिष्करण निकट संबंधी लेकिन अलग अवधारणाएँ हैं। भेदभाव किसी व्यक्ति या समूह के साथ उसकी पहचान या किसी अन्य आधार पर असमान व्यवहार को दर्शाता है, जबकि बहिष्करण का केंद्र यह है कि व्यक्ति या समूह सामाजिक जीवन, संस्थाओं, अवसरों और संसाधनों में कितनी पूर्ण भागीदारी कर सकता है। भेदभाव बहिष्करण का एक कारण हो सकता है, लेकिन हर बहिष्करण प्रत्यक्ष भेदभाव का परिणाम नहीं होता। कभी-कभी आर्थिक, भौगोलिक या संस्थागत परिस्थितियाँ भी किसी समूह की भागीदारी को सीमित कर सकती हैं। बहिष्करण और हाशियाकरण हाशियाकरण (marginalization) और बहिष्करण में भी निकट संबंध है। हाशियाकरण का अर्थ सामान्यतः किसी व्यक्ति या समूह को सामाजिक व्यवस्था के केंद्र से दूर धकेले जाने की प्रक्रिया से है। बहिष्करण में किसी व्यवस्था या अवसर से बाहर होना प्रमुख हो सकता है, जबकि हाशियाकरण में सामाजिक शक्ति, प्रतिष्ठा और निर्णय लेने की प्रक्रिया में अपेक्षाकृत कमजोर स्थिति पर अधिक ध्यान दिया जाता है। बहिष्करण और समावेशन सामाजिक समावेशन (social inclusion) बहिष्करण की विपरीत दिशा में काम करने वाली अवधारणा है। इसका उद्देश्य लोगों को सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक जीवन में प्रभावी भागीदारी के अवसर उपलब्ध कराना है। समावेशन की नीतियों में शिक्षा तक समान पहुँच, सामाजिक सुरक्षा, रोजगार के अवसर, सार्वजनिक सेवाओं की उपलब्धता, भेदभाव-विरोधी कानून और राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा देना शामिल हो सकता है। thumb|300px|समावेशन, एकीकरण, पृथक्करण और बहिष्करण के बीच वैचारिक अंतर हालाँकि समावेशन केवल किसी व्यक्ति को औपचारिक रूप से किसी संस्था में शामिल कर देने से पूरा नहीं होता। वास्तविक समावेशन के लिए व्यक्ति की प्रभावी भागीदारी और अवसरों तक सार्थक पहुँच भी आवश्यक हो सकती है। भारत में बहिष्करण भारत में सामाजिक बहिष्करण का अध्ययन जाति, लिंग, जनजाति, धर्म, दिव्यांगता, गरीबी और अन्य सामाजिक-आर्थिक असमानताओं के संदर्भ में किया जाता है। जाति-आधारित सामाजिक संरचनाओं ने ऐतिहासिक रूप से कुछ समूहों की सामाजिक स्थिति, व्यवसाय, संसाधनों और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी को सीमित किया। आधुनिक भारत में दलित और अन्य वंचित समुदायों के संदर्भ में सामाजिक बहिष्करण तथा भेदभाव महत्वपूर्ण शोध-विषय बने हुए हैं। भारतीय समाज के संदर्भ में सामाजिक बहिष्करण केवल आय की कमी तक सीमित नहीं है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार, भूमि, सामाजिक प्रतिष्ठा, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सार्वजनिक संस्थानों तक पहुँच भी इसके अध्ययन का हिस्सा हैं।सामाजिक बहिष्कार अक्तूबर 2026 InternetArchiveBot , SATHEE/NCERT सामग्री. भारत में सामाजिक असमानता और बहिष्करण को कम करने के लिए भारतीय संविधान, आरक्षण, भेदभाव-विरोधी प्रावधान, सामाजिक सुरक्षा तथा विभिन्न कल्याणकारी कार्यक्रमों का महत्व है। फिर भी कानूनी समानता और वास्तविक सामाजिक समानता के बीच अंतर सामाजिक बहिष्करण के अध्ययन का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है। बहिष्करण के प्रभाव बहिष्करण के प्रभाव अनेक स्तरों पर दिखाई दे सकते हैं। शिक्षा और कौशल के अवसरों में कमी; रोज़गार और आय के अवसरों में कमी; स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुँच; राजनीतिक प्रतिनिधित्व में कमी; सामाजिक संबंधों और सामुदायिक भागीदारी में कमी; सामाजिक कलंक और अलगाव; गरीबी और असमानता का पीढ़ियों तक बने रहना; नागरिक अधिकारों और सार्वजनिक संस्थानों तक सीमित पहुँच। सामाजिक बहिष्करण कई बार स्वयं को पुनरुत्पादित करने वाला चक्र भी बना सकता है। उदाहरण के लिए, शिक्षा तक सीमित पहुँच रोज़गार के अवसरों को कम कर सकती है, कम आय स्वास्थ्य और आवास की स्थिति को प्रभावित कर सकती है और ये परिस्थितियाँ अगली पीढ़ी के अवसरों को भी सीमित कर सकती हैं। मापन सामाजिक बहिष्करण को मापना गरीबी या बेरोज़गारी की तुलना में अधिक जटिल है क्योंकि यह बहुआयामी अवधारणा है। इसके अध्ययन में विभिन्न संकेतकों का उपयोग किया जा सकता है, जैसे: क्षेत्र संभावित संकेतक आर्थिक आय, बेरोज़गारी, रोज़गार की स्थिरता शिक्षा विद्यालय में नामांकन, शैक्षिक उपलब्धि, शिक्षा तक पहुँच स्वास्थ्य स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और उपयोग सामाजिक सामाजिक संबंध, अलगाव और सामुदायिक भागीदारी राजनीतिक मतदान, प्रतिनिधित्व और राजनीतिक भागीदारी आवास सुरक्षित एवं पर्याप्त आवास तक पहुँच डिजिटल इंटरनेट, डिजिटल उपकरण और डिजिटल सेवाओं तक पहुँच यूरोपीय संघ ने गरीबी और सामाजिक बहिष्करण के जोखिम को मापने के लिए बहुआयामी संकेतकों का उपयोग किया है, जो यह दर्शाता है कि सामाजिक बहिष्करण केवल आय का प्रश्न नहीं है।Social inclusion, European Commission/Eurostat. डिजिटल बहिष्करण आधुनिक समाज में डिजिटल विभाजन सामाजिक बहिष्करण का एक महत्वपूर्ण आयाम बन गया है। इंटरनेट, डिजिटल उपकरणों, डिजिटल साक्षरता और ऑनलाइन सार्वजनिक सेवाओं तक असमान पहुँच व्यक्ति की शिक्षा, रोजगार, वित्तीय सेवाओं और राजनीतिक भागीदारी को प्रभावित कर सकती है। इस कारण डिजिटल समावेशन को सामाजिक समावेशन की व्यापक नीतियों का एक हिस्सा माना जाने लगा है। नीतिगत उपाय बहिष्करण को कम करने के लिए नीतियाँ सामान्यतः कई क्षेत्रों में एक साथ काम करती हैं। इनमें शामिल हैं: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुँच; स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार; रोजगार और कौशल-विकास के अवसर; सामाजिक सुरक्षा; भेदभाव-विरोधी कानून; दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सुलभता; राजनीतिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व; सामाजिक रूप से वंचित समूहों के लिए लक्षित कार्यक्रम; डिजिटल पहुँच और डिजिटल साक्षरता; सुरक्षित एवं पर्याप्त आवास। अमर्त्य सेन ने सामाजिक बहिष्करण के समाधान को केवल आय हस्तांतरण तक सीमित न रखकर सामाजिक अवसरों और सहभागिता के विस्तार से जोड़ने पर बल दिया।Amartya Sen, Social Exclusion: Concept, Application, and Scrutiny, Asian Development Bank, 2000. आलोचनाएँ सामाजिक बहिष्करण की अवधारणा व्यापक होने के कारण इसकी परिभाषा और मापन को लेकर बहस होती रही है। विभिन्न शोधकर्ता इसे अलग-अलग प्रकार से परिभाषित करते हैं—कहीं यह गरीबी और बेरोज़गारी से जुड़ता है, कहीं नागरिक अधिकारों से और कहीं सामाजिक संबंधों तथा शक्ति-संबंधों से।Hilary Silver, "Social exclusion and social solidarity: three paradigms", International Labour Organization. एक आलोचना यह है कि यदि बहिष्करण की परिभाषा अत्यधिक व्यापक कर दी जाए तो यह लगभग सभी प्रकार की सामाजिक असमानता को समाहित कर सकता है। दूसरी ओर, इसकी व्यापकता ही इसे जटिल सामाजिक समस्याओं के बहुआयामी अध्ययन के लिए उपयोगी बनाती है। सिल्वर ने भी संकेत किया कि बहिष्करण की विभिन्न अवधारणाएँ अलग-अलग राजनीतिक और वैचारिक परंपराओं से जुड़ी हैं। इसलिए इस शब्द का प्रयोग करते समय यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि बहिष्करण को किस सैद्धांतिक दृष्टिकोण से समझा जा रहा है।Hilary Silver, "Social exclusion and social solidarity: three paradigms", International Labour Organization. अन्य संदर्भों में बहिष्करण बहिष्करण शब्द का प्रयोग सामाजिक विज्ञान के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी होता है। गणित में inclusion–exclusion principle एक गणना-विधि है। कानून में exclusion किसी अधिकार, दावे, साक्ष्य या क्षेत्र पर लागू न होने वाली स्थिति को संदर्भित कर सकता है। धर्म में किसी धार्मिक समुदाय से व्यक्ति को बाहर करना अलग-अलग परंपराओं में अलग रूप ले सकता है। शिक्षा में विद्यार्थी को विद्यालय या कक्षा से अस्थायी अथवा स्थायी रूप से बाहर करना एक प्रशासनिक या अनुशासनात्मक प्रक्रिया हो सकती है। कंप्यूटिंग में exclusion विभिन्न तकनीकी प्रक्रियाओं या डेटा-प्रबंधन संदर्भों में प्रयुक्त हो सकता है। इसलिए किसी विशेष संदर्भ के बिना बहिष्करण शब्द का अर्थ निर्धारित करना उचित नहीं होता; सामाजिक विज्ञान में इसका प्रमुख विश्लेषणात्मक रूप सामाजिक बहिष्करण है। इन्हें भी देखें सामाजिक असमानता भेदभाव सामाजिक स्तरीकरण गरीबी सामाजिक न्याय कल्याणकारी राज्य मानवाधिकार सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ हिलारी सिल्वर — Social exclusion and social solidarity, International Labour Organization अमर्त्य सेन — Social Exclusion: Concept, Application, and Scrutiny, Asian Development Bank European Commission/Eurostat — Social inclusion सामाजिक बहिष्कार — NCERT/SATHEE अक्तूबर 2026 InternetArchiveBot