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एकलिंगजी

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एकलिंग जी, हरिहर मन्दिर, मीरा मन्दिर नाम से प्रसिद्ध Meera temple Eklingji.jpg राजस्थान में स्थिति भारत राजस्थान उदयपुर जिला कैलाश पुरी बप्पा रावल एकलिंग राजस्थान के उदयपुर जिले में स्थित एक मंदिर परिसर है। यह स्थान उदयपुर से लगभग १८ किमी उत्तर में दो पहाड़ियों के बीच स्थित है। वैसे उक्त स्थान का नाम 'कैलाशपुरी' है परन्तु यहाँ एकलिंग का भव्य मंदिर होने के कारण इसको एकलिंग जी के नाम से पुकारा जाने लगा। https://bhaktisanskar.com/eklingji-mahadev-temple/ एकलिंगजी महादेव मन्दिर ११ मार्च, २०१५ २०१५ मार्च जालस्थल भक्तिसन्सार https://web.archive.org/web/20170224212037/https://bhaktisanskar.com/eklingji-mahadev-temple/ 24 फ़रवरी 2017 dead भगवान शिव श्री एकलिंग महादेव रूप में मेवाड़ राज्य के महाराणाओं तथा अन्य राजपूतो कुल देवता हैं। मान्यता है कि यहाँ में राजा तो उनके प्रतिनिधि मात्र रूप से शासन किया करते हैं। इसी कारण उदयपुर के महाराणा को दीवाण जी कहा जाता है।ये राजा किसी भी युद्ध पर जाने से पहले एकलिंग जी की पूजा अर्चना कर उनसे आशीष अवश्य लिया करते थे। यहाँ मन्दिर परिसर के बाहर मन्दिर न्यास द्वारा स्थापित एक लेख के अनुसार डूंगरपुर राज्य की ओर से मूल बाणलिंग के इंद्रसागर में प्रवाहित किए जाने पर वर्तमान चतुर्मुखी लिंग की स्थापना की गई थी। इतिहास बताता है कि एकलिंग जी को ही को साक्षी मानकर मेवाड़ के राणाओं ने अनेक बार यहाँ ऐतिहासिक महत्व के प्रण लिए थे। यहाँ के महाराणा प्रताप के जीवन में अनेक विपत्तियाँ आईं, किन्तु उन्होंने उन विपत्तियों का डटकर सामना किया। किन्तु जब एक बार उनका साहस टूटने को हुआ था, तब उन्होंने अकबर के दरबार में उपस्थित रहकर भी अपने गौरव की रक्षा करने वाले बीकानेर के राजा पृथ्वी राज को, उद्बोधन और वीरोचित प्रेरणा से सराबोर पत्र का उत्तर दिया। इस उत्तर में कुछ विशेष वाक्यांश के शब्द आज भी याद किये जाते हैं: तुरुक कहासी मुखपतौ, इणतण सूं इकलिंग, ऊगै जांही ऊगसी प्राची बीच पतंग। स्थापत्य एकलिंग का यह भव्य मंदिर चारों ओर ऊँचे परकोटे से घिरा हुआ है। इस परिसर में कुल १०८ मंदिर हैं। मुख्य मंदिर में एकलिंगजी (शिव) की चार सिरों वाली ५० फीट की मूर्त्ति स्थापित है। चार चेहरों के साथ महादेव चौमुखी या भगवान शिव की प्रतिमा के चारों दिशाओं में देखती है। वे विष्णु (उत्तर), सूर्य (पूर्व), रुद्र (दक्षिण), और ब्रह्मा (पश्चिम) का प्रतिनिधित्व करते हैं।https://devasthan.rajasthan.gov.in/images/udaipur/eklingji.htm Temple Profile devasthan.rajasthan.gov.in 2025-10-19 शिव के वाहन, नंदी बैल, की एक पीतल की प्रतिमा मंदिर के मुख्य द्वार पर स्थापित है। मंदिर में परिवार के साथ भगवान शिव का चित्र देखते ही बनता है। देवी पार्वती और भगवान गणेश, क्रमशः शिव की पत्नी और बेटे, की मूर्तियाँ मंदिर के अंदर स्थापित हैं। यमुना और सरस्वती की मूर्तियां भी मंदिर में भी निहित हैं। http://www.palpalindia.com/2015/06/20/dharm-astha-adhyatam-udaipur-ka-eklingji-mandir-Eklingji-Temple-in-Udaipur-97279.html उदयपूर का एकलिंगजी मंदिर उदयपुर पल-पल इण्डिया https://web.archive.org/web/20170224051954/http://www.palpalindia.com/2015/06/20/dharm-astha-adhyatam-udaipur-ka-eklingji-mandir-Eklingji-Temple-in-Udaipur-97279.html 24 फ़रवरी 2017 dead इन छवियों के बीच में, यहाँ एक शिवलिंग चाँदी के साँप से घिरा हुआ है। मंदिर के चांदी दरवाजों पर भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की छवियाँ हैं। नृत्य करती नारियों की मूर्तियों को भी यहां देखा जा सकता है। गणेशजी मंदिर, अंबा माता मंदिर, नाथों का मंदिर, और कालिका मंदिर इस मंदिर के पास स्थित हैं। इस मंदिर के निर्माणकाल व कर्ता के संबंध में कोई लिखित प्रमाण नहीं मिला है, परंतु जनश्रुति के अनुसार इसका निर्माण बप्पा रावल ने आठवीं शताब्दी के लगभग करवाया था। उसके बाद यह मन्दिर तोड़ दिया गया, जिसे बाद में उदयपुर के ही महाराणा मोकल ने इसका जीर्णोद्धार करवाया तथा वर्तमान मंदिर के नए स्वरूप का संपूर्ण श्रेय महाराणा रायमल को है। उक्त मंदिर की काले संगमरमर से निर्मित महादेव की चतुर्मुखी प्रतिमा की स्थापना महाराणा रायमल द्वारा की गई थी। मंदिर के दक्षिणी द्वार के समक्ष एक ताखे में महाराणा रायमल संबंधी १०० श्लोकों का एक प्रशस्तिपद लगा हुआ है। परिसर |अंगूठाकार इस मंदिर की चारदीवारी के अंदर और भी कई मंदिर निर्मित हैं, जिनमें से एक महाराणा कुंभा का बनवाया हुआ विष्णुमंदिर है। इस मंदिर को लोग मीराबाई का मंदिर कहते हैं। एकलिंग जी के मंदिर से थोड़ी दूर दक्षिण में कुछ ऊँचाई पर विक्रम संवत १०२८ (ई. सन् ९७१) में यहाँ के मठाधीश ने 'लकुलीश' का एक मंदिर बनवाया तथा इस मंदिर के कुछ नीचे विंध्यवासिनी देवी का एक अन्य मंदिर भी स्थित है। जनश्रुति से यह भी ज्ञात होता है कि बप्पा रावल के गुरु नाथ हारीतराशि एकलिंग जी के मंदिर के महन्त थे और उन्हीं की शिष्य परंपरा ने मंदिर की पूजा आदि का कार्य सँभाला। एकलिंग जी के मंदिर के महंत, उक्त नाथों का एक प्राचीन मठ आज भी मंदिर के पश्चिम में बना हुआ है। बाद में नाथ साधुओं का आचरण भ्रष्ट हो जाने से मंदिर की पूजा आदि का कार्य गुसाइयों को सौंपा गया और वे उक्त मंदिर के मठाधीश हो गए। यह परंपरा आज भी चली आ रही है। एकलिंग माहात्म्य एकलिङ्गमाहात्म्य राजस्थान के इतिहास को प्रकाशित करने वाली पुस्तक है। यह संस्कृत में कान्हा व्यास द्वारा रचित है जो मेवाड़ के सिसोदिया राजवंश की वंशावली में महाराणा कुंभा के दरबारी थे। एकलिंगमाहात्म्य १५वीं शताब्दी की सामाजिक संस्कृति का विवरण देता है। इसमें महाराणा कुंभा के शासनकाल का सुंदर वर्णन है। इसमें चित्तौड़ और एकलिंगजी मंदिर का भी वर्णन है। सन्दर्भ ग्रन्थ टॉड जेम्स (१७८२-१८३५) विलियम क्रूक ऐनल्स ऐंड ऐंटिंक्विटीज़ ऑव राजस्थान https://archive.org/details/annalsantiquitie01todj १९२० ऑक्स्फ़ोर्ड युनिवर्सिटी प्रेस en SRLF_UCSD:LAGE-3187207 ६९८ https://web.archive.org/web/20170404064057/https://archive.org/details/annalsantiquitie01todj 4 अप्रैल 2017 live ओझा महामहोपाध्याय रायबहादुर डा.गौरीशंकर हीराचंद श्री जगदीश सिंह गहलोत राजपूताना का इतिहास https://drive.google.com/file/d/0BwqVx444SxLaazRkbWpvak5PZ3c/view जिल्द (यहाँ:पीडीएफ़) प्रथम वैदिक यंत्रालय अजमेर ४९६ https://web.archive.org/web/20170224054445/https://drive.google.com/file/d/0BwqVx444SxLaazRkbWpvak5PZ3c/view 24 फ़रवरी 2017 live , : , भाग१ ; टाड : ट्रैवेल्स इन वेस्टर्न इंडिया। सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ Eklingji एकलिंग जी श्रेणी:उदयपुर की इमारतें श्रेणी:उदयपुर का इतिहास श्रेणी:उदयपुर के पर्यटन स्थल श्रेणी:उदयपुर के हिन्दू मन्दिर