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गरम बृहस्पति
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अंग्रेज़ी सितंबर 2026
सितंबर 2026
गरम बृहस्पति (अंग्रेज़ी: Hot Jupiter) सौरमंडल से बाहर पाए जाने वाले गैस दानव ग्रहों (एक्सोप्लैनेट) की एक श्रेणी है, जिनका द्रव्यमान बृहस्पति ग्रह के समान या उससे मिलता-जुलता होता है, परंतु ये अपने मातृ तारे की बेहद निकट कक्षा में परिक्रमा करते हैं। इस निकटता के कारण इनकी सतह का तापमान अत्यंत अधिक होता है, जिसकी वजह से इन्हें "गरम बृहस्पति" कहा जाता है। इन्हें कभी-कभी "रोस्टर प्लैनेट" भी कहा जाता है।
विशेषताएँ
गरम बृहस्पति श्रेणी के ग्रहों की परिक्रमा अवधि सामान्यतः दस दिनों से भी कम होती है, तथा इनका द्रव्यमान बृहस्पति के द्रव्यमान का लगभग एक-चौथाई या उससे अधिक होता है। अपने तारे के इतने निकट होने के बावजूद ये गैसीय संरचना में सामान्य बृहस्पति-प्रकार के ग्रहों के समान ही होते हैं। तारे की भीषण ऊष्मा के कारण इनका वायुमंडल अत्यधिक गर्म हो जाता है और कुछ मामलों में इनका आकार भी बृहस्पति से बड़ा फूला हुआ पाया गया है।
खोज और महत्व
पहला ज्ञात गरम बृहस्पति 51 पेगासी बी था, जिसकी खोज 1995 में स्विस खगोलविदों मिशेल मेयर और डिडिये क्वेलोज़ ने की थी। यह किसी सूर्य-सदृश तारे के चारों ओर परिक्रमा करता हुआ पाया जाने वाला पहला एक्सोप्लैनेट था और इसकी परिक्रमा अवधि लगभग साढ़े चार दिन है। इस खोज ने ग्रह निर्माण के तत्कालीन सिद्धांतों को चुनौती दी, क्योंकि इतने विशाल ग्रह का अपने तारे के इतने समीप होना अपेक्षित नहीं था। इस उपलब्धि के लिए मेयर और क्वेलोज़ को वर्ष 2019 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार संयुक्त रूप से प्रदान किया गया।
गरम बृहस्पति ग्रहों की खोज रेडियल वेलोसिटी (विकिरण वेग) पद्धति द्वारा अपेक्षाकृत आसानी से की जा सकती है, क्योंकि इनका विशाल द्रव्यमान और निकटतम कक्षा अपने मातृ तारे में स्पष्ट डगमगाहट उत्पन्न करते हैं। तब से अब तक सैकड़ों गरम बृहस्पति ग्रहों की खोज हो चुकी है, और वैज्ञानिक अब भी इनके निर्माण की सटीक प्रक्रिया — चाहे वह उन्हीं की कक्षा में सीधा निर्माण हो या किसी अन्य दूरस्थ कक्षा से स्थानांतरण (माइग्रेशन) — पर शोध कर रहे हैं।
सन्दर्भ
श्रेणी:ग्रहों के प्रकार