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तीन दरवाजा
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तीन दरवाजा त्रण दरवाजा Teen Darwaza 1880s.jpg १८८० में तीन दरवाजा India Gujarat गुजरात में स्थान 23.0242034 72.5846408 तीन दरवाजा तीन द्वार, थ्री गेट्स प्रवेशद्वार भारतीय-इस्लामिक स्थापत्य भद्र के किल्ले से नजदीक अहमदाबाद भारत IN-GJ ईस्वीसन १४११ ईस्वीसन १४१५ અહમદશાહ आर्कोलिजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया राष्ट्रीय स्मारकASI स्मारक क्रमांक N-GJ-5
तीन दरवाजा (ત્રણ દરવાજા) भारत देश में गुजरात राज्य मेंअहमदाबाद महानगर में स्थित भद्र किल्ले का ऐतिहासीक प्रवेशद्वार है। ईस्वीसन १४१५ में इस प्रवेशद्वर का निर्माण हुआ था। इस द्वार से ऐतिहासीक घटनाएँ भी जुड़ी हैं। अहमदाबाद महानगर निगम के चिह्न में भी इस प्रवेश्द्वार का समावेश किया गया है।
इतिहास और वास्तुकला
अंगूठाकार|300x300पिक्सेल|तीन दरवाजे, 1866
तीन दरवाजा अहमदाबाद में भद्र के किल्ले की पूर्व दिशा में स्थित है। ये प्रवेशद्वार अहमद शाह के महल के विशाल मैदान की और ले जाता है। ये पथ भूतकाल में भव्य था और बादशाह की सवारी यहाँ से पसार होती थी। इस प्रवेशद्वार से जुड़ा रास्ता 17 फीट लम्बा और 13 फीट चौड़ा है। ये जगह कलात्मक शिल्प स्थापत्य से सज्ज है। पूर्व में राजमार्ग रहा होगा किन्तु फिलहाल अहमदाबाद की भव्यता में देखेने में ये जगह बहुत ही छोटी प्रतीत होती है।.Lonely Planet Lonely Planet Gujarat: Chapter from India Travel Guide http://books.google.com/books?id=Tad9BAAAQBAJ&pg=PT29 1 अप्रेल 2012 Lonely Planet 978-1-74321-201-1 29Achyut Yagnik Ahmedabad: From Royal city to Megacity http://books.google.com/books?id=ivMAUx6Hdl8C&pg=PT26 2 फरवरी 2011 Penguin Books Limited 978-81-8475-473-5 26
अमहदाबाद शहर की स्थापना के बाद तुरंत ही अहमद शाह ने इस तीन दरवाजा प्रवेशद्वार का निर्माण किया था। इसका निर्माण ईस्वीसन की 1414 से 1415 वीं सदी के दौरान हुआ था।Earthquake Spectra: The Professional Journal of the Earthquake Engineering Research Institute http://books.google.com/books?id=fSlIAQAAIAAJ The Institute 242 ईस्वीसन 1459 में मुहम्मद बेगड़ा 300 घोड़े और 30 हजार सनिकों के दल के साथ युद्ध लड़ने के लिए निकाला था और ये सैन्य इसी प्रवेशद्वार से बाहर निकाला था। उक्त समय रास्ते की दोनों और हाथी और शाही संगीत के साथ उनका स्वागत किया गया था। ये युद्ध मराठा सरदारों के साथ हुआ था।
मराठा पाठ
अंगूठाकार|तीन द्वार के स्तंभ पर पुत्री को पिता की संपत्ति में बराबर का अधिकार दिया जाएगा वाला पाठ दिख रहा है।
मराठा सूबा चिमान जी रघुनाथ ने सन 1812 में यह फरमान जारी किया था कि अब से स्त्रियॉं को उनकी पैतृक संपत्ति में पुरुष के समान ही अधिकार मिलेगा। हिन्दू और मुस्लिम दोनों के लिए ये फरमान जारी किया गया था। ये फरमान जिस शिलालेख पर अंकित किया गया था उनका अस्तित्व आज भी है। शिलालेख में 10 अक्तूबर 1812 की दिनांक लिखी है। पाठ में देवनागरी लिपि में लिखा हुआ है कि 'पुत्री को पिता की संपत्ति में किसी भी प्रकार के भेदभाव के बिना समान अधिकार दीजिये। भगवान विश्वनाथ का ये आदेश है। इस आदेश का पालन करने में कोई कसूर करेगा तो हिंदुओं को भगवान महादेव (शिव) और मुसलमानो को अल्लाह या रसूल को उत्तर देना पड़ेगा।'MARATHA MAGIC:Abad always saved the girl child! The Times of India Publications 8 फरवरी 2011 34 http://lite.epaper.timesofindia.com/mobile.aspx?article=yes&pageid=34&edlabel=TOIA&mydateHid=08-02-2011&pubname=&edname=&articleid=Ar03400&format=&publabel=TOI ૧૧ જાન્યુઆરી ૨૦૧૫ https://web.archive.org/web/20090706210636/http://lite.epaper.timesofindia.com/mobile.aspx?article=yes 6 जुलाई 2009 live Girls got property rights in 1800s The Times of India 20 जनवरी 2008 http://m.timesofindia.com/city/ahmedabad/Girls-got-property-rights-in-1800s/articleshow/2715094.cms 11 जनवरी 2015 https://web.archive.org/web/20190202175114/https://m.timesofindia.com/city/ahmedabad/Girls-got-property-rights-in-1800s/articleshow/2715094.cms 2 फ़रवरी 2019 live
अखंड दीपक
कथा
अंगूठाकार|300x300पिक्सेल|सड़क दृश्य, 1890
इस किल्ले और तीन प्रवेशद्वार के विषय में लोगों मै कुछ किवदंतियाँ या लोककथाएँ भी प्रचलित है। इस कथा के अनुसार 'एक बार धन की देवी लक्ष्मी शहर को छोडने के लिए भद्र के किले के पास आई और तीन दरवाजे से बाहर निकल रही थी। द्वारपाल ख्वाजा सीदिक कोटवाल ने उनको रोक लिया और जब तक बादशाह अहमद शाह अनुमति न दें तब तक शहर से बाहर न जाने के लिए कहाँ। कोटवाल बादशाह के पास गया और लक्ष्मी को शहर में रखने के लिए खुद का आत्मसमर्पण करना होगा ये बात बताई। परिणाम स्वरूप शहर की संपत्ति सलामत रही।Lamp of hope burns bright at historic Teen Darwaza The Times of India 3 सितंबर 2013 http://m.timesofindia.com/city/ahmedabad/Lamp-of-hope-burns-bright-at-historic-Teen-Darwaza/articleshow/22240853.cms 11 जनवरी 2015 https://web.archive.org/web/20150111205502/http://m.timesofindia.com/city/ahmedabad/Lamp-of-hope-burns-bright-at-historic-Teen-Darwaza/articleshow/22240853.cms 11 जनवरी 2015 livehttp://www.ahmedabadmirror.com/index.aspx?page=article§id=3&contentid=201102242011022403033528333ee5e43 Kankaria to showcase city Ahmedabad Mirror 23 फरवरी 2011 22 फरवरी 2013 Jadav, Ruturaj https://web.archive.org/web/20091207235844/http://www.ahmedabadmirror.com/index.aspx?page=article 7 दिसंबर 2009 dead
भद्र किल्ले के प्रवेशद्वार के पास कोटवाल का मकबरा आज भी वहाँ स्थित है। महालक्ष्मी जी के प्रतिनिधि स्वरूप माँ काली का मंदिर विद्यमान है। जो भद्रकाली के नाम से सुप्रसिद्ध है। इस कथा को समर्पित तीन दरवाजे के एक गोख में एक दीपक 600 साल से भी ज्यादा समय से प्रज्वलित रखा गया है। एक मुस्लिम परिवार के द्वार इस दीपक की निगरानी होती है और अखंड प्रज्वलित रखा जाता है। इस मुस्लिम परिवार के द्वारा कई पीढ़ियो से ये कार्य हो रहा है।
चित्र
सन्दर्भ
इस लेख में निम्नलिखित प्रकाशनाधिकार मुक्त पुस्तक का पाठ लिया गया है:-:
Sir Theodore Cracraft Hope Sir Theodore Cracraft Hope James Fergusson James Fergusson ૧૮૬૬ Architecture at Ahmedabad, the Capital of Goozerat http://books.google.com/books?id=_1NDAQAAMAAJ&pg=PA42 42 J. Murray
૧૮૭૯ Gazetteer of the Bombay Presidency: Ahmedabad http://books.google.com/books?id=EL4IAAAAQAAJ&pg=PA275 273–277 Government Central Press
श्रेणी:अहमदाबाद