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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

जाँनिसार अख्तर

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जान निसार अख्तर 1914 02 18 ग्वालियर, ग्वालियर रियासत, ब्रिटिश भारत (अब मध्य प्रदेश, भारत) 1976 08 19 1914 02 14 मुंबई, महाराष्ट्र, भारत कवि, शायर और गीतकार गज़ल प्रगतिशील लेखक आंदोलन "ख़ाक-ए दिल" ("दिल की राख ") (1973) (सफिया सिराज उल हक) (खादीजा तलत) जावेद अख्तरसलमान अख्तरशाहिद अख्तरउनेजा अख्तरअल्बिना शर्मा जाँनिसार अख्तर (उर्दू: جان نثار اختر;अंग्रेजी:Jan Nisar Akhtar, 18 फ़रवरी 1914 – 19 अगस्त 1976) भारत से 20 वीं सदी के एक महत्वपूर्ण उर्दू शायर, गीतकार और कवि थे। अख्तर साहब ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से सन 1935-36 में उर्दू में गोल्ड मेडल लेकर एम. ए. किया था। 1947 केेेेेे देश विभाजन के पहले एक ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज में उर्दू के प्रोफेसर रहे और फिर सन 1956 तक भोपाल केे हमीदिया कॉलेज में उर्दू विभाग के अध्यक्षष पद पर रहे। उनका मानना था कि आदमी जिस्म से नहीं दिलों दिमाग से बुड्ढा होता है। पति पत्नी के नाम पर उनके द्वारा अनेक रुवारयां लिखी गई। सन 1976 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजेेेेे गए अख्तर साहब के लिखे फिल्म अनारकली, नूरी, प्रेम पर्वत, रजिया सुल्तान, बाप रे बाप आदि फिल्म के गीतों ने धूम मचा दी थी। उनके सुपुत्र जावेद अख्तर ने भी शायरी की दुनिया में बहुत नाम कमाया। तरक्कीपसन्द शायरी को जिन शोअरा ने मालामाल किया उसमें एक नाम जाँनिसार अख्तर का भी है। े सन्दर्भ श्रेणी:उर्दू शायर श्रेणी:1914 में जन्मे लोग श्रेणी:१९७६ में निधन श्रेणी:फ़िल्मी गीतकार श्रेणी:साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत उर्दू भाषा के साहित्यकार