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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

मंसूर अली खान (बंगाल के नवाब)

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मंसूर अली खान (30 अक्टूबर 1830 – 4 नवम्बर 1884) सन् 1838 से सन् 1880 में उनके त्यागपत्र तक बंगाल के नवाब थे। उनके शासनकाल के दौरान उन्होंने अपने रियासत में विभिन्न नीतियाँ लागू की जो अक्सर औपनिवेशिक सरकार के साथ मौद्रिक मुद्दों पर औपनिवेशिक सरकार के साथ टकराव में आते रहे। खान अक्सर ब्रिटेन जाकर वहाँ ही औपनिवेशिक सरकार के साथ के विवादों के सम्बंध में अपना पक्ष रखते थे। सन् 1880 में खान ने अपने सबसे बड़े बेटे के लिए गद्दी छोड़ने का निर्णय लिया और नवाब का पद छोड़ने के चार वर्ष बाद ही उनका निधन हो गया। जीवनी नवाब नाज़िम मंसूर अली खान का जन्म 29 अक्टूबर 1830 को हुआ। उनके पिता मुबारक अली खान द्वितीय और माँ रईस-उन्निसा बेगम थीं। उनके पिता की मृत्यु के बाद 29 अक्टूबर 1838 को वो आठ वर्ष की आयु में नवाब बने और वो ईद उल-फ़ित्र के दिन नवाब बने। उन्होंने अपने आप को मुंतिज़मुल-मुल्क (देश का शासक), मोहसिनु-दौला (राज्य का उपकारक), फेरदुन जाह (उच्च पद) और नसरुत जंग (युद्ध में सहायक) की उपाधि दी। हालांकि उन्हें नवाब नाज़िम फेरदुन जाह अथवा जनाबे-अली के नाम से भी जाना जाता है। जब उन्होंने पद छोड़ दिया तब अपनी उपाधि को घटाकर नवाब बहादूर रख लिया तथा महामहिम की योग्यता के उपयोग से इनकार किया।Lethbridge Sir Roper The Golden Book of India: A Genealogical and Biographical Dictionary of the Ruling Princes, Chiefs, Nobles, and Other Personages, Titled Or Decorated of the Indian Empire ; with an App. for Ceylon 1900 Low & Marston https://books.google.com/books?id=zykYAAAAYAAJ&q=%22Sayyid+Mansur+Ali+Khan%22+-wikipedia+-pataudi en सन्दर्भ श्रेणी:बंगाल के नवाब