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कल्लणै
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कल्लणै बाँध भारत Grand Anicut, Kallanai (11876067114).jpg 150 ई तंजावुर जिला, तमिलनाडु कल्लणै बाँध (जब इसके गेट खुले हैं) सिंचाई कार्य कर रहा है चोल राजा करिकाल चोलन बैरेज बांध कावेरी नदी 5.4 m ft 329 m ft 20 m ft तमिलनाडु सरकार
कल्लणै, कावेरी नदी पर बना एक प्राचीन बांध है जो तमिलनाडु के तंजावुर जिले में स्थित है। http://www.thehindu.com/life-and-style/kids/article2408778.ece Flowing waters for fertile fields 29 August 2011 The Hindu India https://books.google.com/books?id=Bge-0XX6ip8C&dq=kallanai&pg=PA508 Water Resources System Operation: Proceedings of the International Conference on Water and Environment Singh Vijay P. Ram Narayan Yadava Allied Publishers 2003 81-7764-548-X 508 यह तिरुचिरापल्ली से 15 किमी की दूरी पर तथा तंजावुर से 45 किमी की दूरी पर स्थित है। इस बांध का निर्माण मूलतः चोल राजा करिकालन के शासनकाल में 150 ई में हुआ था। http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/tp-tamilnadu/a-rock-solid-dam-that-has-survived-1800-years/article4494161.ece A rock solid dam that has survived 2000 years Syed Muthahar Saqaf 10 March 2013 The Hindu 13 November 2013 अक्तूबर 2026 InternetArchiveBot https://timesofindia.indiatimes.com/city/trichy/Karikalan-cholan-memorial-inaugurated/articleshow/30300318.cms Karikalan cholan memorial inaugurated - Times of India The Times of India 2019-02-15 यह विश्व में चौथा सबसे पुराना जल मोड़ या जल-नियामक संरचना है और भारत में सबसे पुराना है। यह अब भी उपयोग में है। https://books.google.com/books?id=f9D4Ob1YcJgC&pg=PA33 South Asia: An Environmental History Christopher V. Hill ABC-CLIO 2008 978-1-85109-925-2 33– http://www.thanjavurtourism.com/kallanai-dam.html Kallanai Dam Thanjavur Tourism www.thanjavurtourism.com 2 November 2018 9 अक्तूबर 2018 https://web.archive.org/web/20181009222808/http://www.thanjavurtourism.com/kallanai-dam.html dead अपनी भव्य वास्तुकला के कारण यह तमिलनाडु के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है।
यह बांध मूल रूप से चोल राजा करिकालन द्वारा 150 ई - 100 ई में बनवाया गया था। इस बांध के निर्माण के पीछे विचार नदी को डेल्टा जिलों की ओर मोड़ना था जिससे उन क्षेत्रों में भी सिंचाई हो सके। 19वीं शताब्दी में अंग्रेजों ने इस बांध को फिर से तैयार किया था। 1804 में अंग्रेजों ने कैल्डवेल नामक एक सैन्य इंजीनियर को कावेरी नदी पर अध्ययन करने और डेल्टा क्षेत्र के लिए सिंचाई को बढ़ावा देने के लिए नियुक्त किया गया था। Skempton 2002 114 कैल्डवेल ने पाया कि बड़ी मात्रा में पानी कोलिडम में चला जाता है जिससे सिंचाई के लिए बहुत कम मात्रा में जल उपलब्ध हो पाता है।Skempton 2002 114 आरम्भ में काल्डवेल ने प्रस्ताव दिया कि बांध की उंचाई 69 cm in बढ़ा दी जाय, इससे जल का स्तर ऊँचा हो जायेगा और सिंचाई के लिये अधिक जल उपलब्ध होगा। इसके बाद, दूसरे इंजीनियर मेजर सिम ने कोलिडम नदी (कोलरून) की ओर जाने वाले आउटलेट्स के साथ नदी के उस पार अंडरस्लुइस के विचार का प्रस्ताव रखा, जिससे गाद बनने से रोका जा सके। कोलेरून, कावेरी की प्रमुख सहायक नदी है। 19वीं शताब्दी में सर आर्थर कॉटन ने कोलेरून पर लोअर एनाइकट बनावाया जिसे कल्लणै की प्रतिकृति माना जाता है।
सन्दर्भ
श्रेणी:चोल वास्तुकला
श्रेणी:चोल साम्राज्य
श्रेणी:तमिल नाडु में बाँध