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411 समाचार
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राजगीर

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राजगीर Rajgir infobox 290 border:1 1/2/2/1 Vishwa Shanti stupa.jpg Mulagandhakuti in Vulture Peak.jpg View from mountain Rajgir bihar.jpg Son Bhandar caves front.jpg Rajgir - 034 Chair Lift (9244970406).jpg Rajgir - 002 Old City Walls (9242554013).jpg ऊपर से दक्षिणावर्त : विश्व शांति स्तूप, राजगीर पहाड़ियों का दृश्य, रत्नागिरि पहाड़ियों में रोपवे, प्राचीन दिवारें, स्वर्ण भंडार (सोनभंडार) गुफाएँ, गृद्धकूट पर्वत राजगीर India Bihar 25.03 85.42 inline, title बिहार में स्थिति देश ,मगध प्रान्त बिहार ज़िला नालंदा ज़िला 73 41587 2011 भाषा प्रचलित हिन्दी, मगही पिनकोड 803116 दूरभाष कोड +91-6112 BR-21 लिंगानुपात 1000/889 ♂/♀ साक्षरता दर 51.88% राजगीर (Rajgir) मगध भारत के बिहार राज्य के नालंदा ज़िले में स्थित एक ऐतिहासिक नगर है। यह कभी मगध साम्राज्य की राजधानी हुआ करती थी, जिससे बाद में मौर्य साम्राज्य का उदय हुआ।"Bihar Tourism: Retrospect and Prospect," Udai Prakash Sinha and Swargesh Kumar, Concept Publishing Company, 2012, ISBN 9788180697999"Revenue Administration in India: A Case Study of Bihar," G. P. Singh, Mittal Publications, 1993, ISBN 9788170993810 राजगृह का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है। वसुमतिपुर, वृहद्रथपुर, गिरिब्रज और कुशग्रपुर के नाम से भी प्रसिद्ध रहे राजगृह को आजकल राजगीर के नाम से जाना जाता है। पौराणिक साहित्य के अनुसार राजगीर बह्मा की पवित्र यज्ञ भूमि, संस्कृति और वैभव का केन्द्र तथा जैन धर्म के 20 वे तीर्थंकर मुनिसुव्रतनाथ स्वामी के गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान कल्याणक एवं 24 वे तीर्थंकर महावीर स्वामी के प्रथम देशना स्थली भी रहा है साथ ही भगवान बुद्ध की साधनाभूमि राजगीर में ही है। इसका ज़िक्र ऋगवेद, अथर्ववेद, तैत्तिरीय उपनिषद, वायु पुराण, महाभारत, वाल्मीकि रामायण आदि में आता है। जैनग्रंथ विविध तीर्थकल्प के अनुसार राजगीर जरासंध, श्रेणिक, बिम्बसार, कनिक आदि प्रसिद्ध शासकों का निवास स्थान था। जरासंध ने यहीं श्रीकृष्ण को हराकर मथुरा से द्वारिका जाने को विवश किया था। पटना से 100 किमी दक्षिण-पूर्व में पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच बसा राजगीर न केवल एक प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थस्थल है बल्कि एक सुन्दर हेल्थ रेसॉर्ट के रूप में भी लोकप्रिय है। यहां हिन्दु, जैन और बौद्ध तीनों धर्मों के धार्मिक स्थल हैं। खासकर बौद्ध धर्म से इसका बहुत प्राचीन संबंध है। बुद्ध न केवल कई वर्षों तक यहां ठहरे थे बल्कि कई महत्वपूर्ण उपदेश भी यहाँ की धरती पर दिये थे। बुद्ध के उपदेशों को यहीं लिपिबद्ध किया गया था और पहली बौद्ध संगीति भी यहीं हुई थी। मौसम तापमान: अधिकतम 40 °C, न्यूनतम 20 °C. जाड़ों में: अधिकतम 28 °C, न्यूनतम 6 °C वर्षा: 1,860 मिमी (मध्य-जून से मध्य-सितंबर) सबसे उपयुक्त: अक्टूबर से अप्रैल पर्यटन राजगीर ग्लास ब्रिज बिहार का पहले व भारत का दूसरे ग्लास ब्रिज राजगीर में स्थित है. पर्यटकों के बीच प्रसिद्ध इस ब्रिज पर चलने के बाद एक बेहद ही अद्भुत व सुखद अनुभव होगा. इस ग्लास ब्रिज से हर तरफ प्राकृतिक सुंदरता देखने को मिलती है. इस हरे भरे व सुंदर वातावरण में इस ग्लास ब्रिज पर चलना लोगों में रोमांच भर देता है. राजगीर की यात्रा इस पुल के बिना अधूरी मानी जाती है. हर दिन सैंकड़ों पर्यटक इस पुल पर चलने का एण्ड उठाते हैं। वाइल्ड्लाइफ सफारी वन्य जीवों के प्रेमियों के लिए भी राजगीर एक बहुत अच्छा डेस्टिनेशन है. यहां की वाइल्ड्लाइफ सफारी में आपको कई जानवर व पक्षी देखने को मिलेंगे. यहां कई ऐसे पक्षी भी दिखेंगे जो लगभग दुनिया में न के बराबर बचे हैं. यहां सफारी में आप बाघ, तेंदुआ, हिरण, भालू, बायसन, शेर, चीता और लकड़बग्घा जैसे जानवर देख सकेंगे।https://www.prabhatkhabar.com/state/bihar/nature-safari-to-vishwa-shanti-stupa-many-beautiful-places-to-visit-in-rajgir-axs राजगीर में घूमने के लिए है कई खूबसूरत जगह 27 जुलाई 2023 प्रभात खबर 13 दिसंबर 2023 नेचर सफारी, राजगीर रोमांच के दीवानों के लिए भी राजगीर में करने के लिए काफी कुछ है. यहां की प्राकृतिक खूबसूरती के बीच कई ऐसे स्थान हैं जहन्न कई रोमांचक गतिविधियों को लुत्फ ले सकते हैं. राजगीर में आपको जिपलाइन, रेसलिंग, रॉक क्लाइंबिंग, स्काई साइकलिंग, आर्चरी रिंग, और सस्पेंशन ब्रिज जैसी कई एडवेंचर एक्टिविटी करने को मिल जाती है. विश्व शांति स्तूप राजगीर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है "विश्व शांति स्तूप". यह स्तूप भगवान बुद्ध के शांति और विश्वसंघ के प्रतीक के रूप में जाना जाता है. इसका निर्माण भारत-जापान के मित्रता के अवसर पर हुआ था और इसकी ऊंचाई से आपको पूरा राजगीर का खूबसूरत दृश्य मिलता है. रोप-वे, राजगीर अगर आपको ऊंचाई से हरी-भरी वादियों के साथ ही पहाड़ देखने का शौक है तो राजगीर के रोपवे पर अपको एक बार जरूर जाना चाहिए. इस रोपवे से आप राजगीर के विश्व शांति स्तूप तक पहुंच सकते हैं साथ ही रास्ते में मनमोहक नजारे का लुत्फ ले सकते हैं. यहां दो रोपवे हैं एक पुराना है और एक नया ब्रह्म कुंड वैसे तो राजगीर में कई कुंड हैं. पर ब्रह्म कुंड इनमें से सबसे अधिक प्रसिद्ध है. यह एक ऐसा कुंड है, जहां पर स्नान करना पवित्र माना जाता है. इस ब्रह्म कुंड का पानी पूरे साल गर्म रहता है, चाहे वो ठंडी का मौसम हो या गर्मी का. इस कुंड में पहाड़ों से होते हुए पानी आता है. अगर आप भी राजगीर जा रहे हैं तो यहाँ जा कर जरूर स्नान करे घोरा कटोरा झील राजगीर में स्थित घोरा कटोरा झील पर्यटकों द्वारा खूब पसंद किया जाता है. इसके बारे में बताया जाता है कि पौराणिक समय में राजगीर के राजाओं के घोड़े पानी पीने के लिए यहीं आया करते थे. यह झील तकरीबन तीन तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ है. इस झील के बीच में भगवान गौतम बुद्ध की एक 70 फीट ऊंची प्रतिमा भी स्थापित की गई है दर्शनीय स्थल राजगीर वन्यजीव अभ्यारण्य पंच पहाड़ियों से घिरा राजगीर वन्यजीव अभ्यारण्य प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण और साथ ही अपने अंदर जैव-विविधता को समेटे हुए जिलें में एकलौता वन्यजीव आश्रयणी है। बिहार में 12 वन्यजीव अभ्यारण्य और एक राष्ट्रीय उद्यान है। राजगीर अभ्यारण्य में वनस्पतियों और वन्यप्राणियों की कई दुर्लभ प्रजातियां देखने को मिलती है। औषधीय पौधों की कई किस्मे राजगीर के जंगलो में पाई जाती है । बचे वन्यजीवों के भविष्य को सुरक्षा को सुनिश्चित करने के दिशा में पर्यावरण एवं वन विभाग द्वारा सन् 1978 में 35.84 वर्ग किलोमीटर के राजगीर अरण्य क्षेत्र को वन्यजीव अभ्यारण्य बना दिया गया था । हालाँकि कुछ वर्ष पहले तक इसे पंत वन्यजीव आश्रयणी के नाम से भी जाना जाता था । पर्यटक यहाँ बिना किसी झंझट के पहुँच सकते हैं और राजगीर का वन विश्रामागार बस ठहराव से ज्यादा दूर भी नही है। पटना से दूरी करीब 100 किलोमीटर है। राष्ट्रीय राजमार्ग 82 राजगीर वन क्षेत्रों को होते जाती है। राजगीर के ऐतिहासिक भूमि, धार्मिक तीर्थस्थल, तीन साल पर एक बार आनेवाला बृहद मलमास मेला और खूबसूरत वादियां पर्यटकों को खूब लुभाती है, यही वजह है कि राजगीर की पहचान आज अंतरास्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में है । पंच पहाड़ियां रत्नागिरी, विपुलाचल, वैभारगिरि, सोनगिरि उदयगिरि पतझड़ के समय बेजान तो लगते हैं लेकिन मॉनसून का आगाज होते ही जैसे ये पुर्नजीवित हो जाते हैं जिससे वन्यप्राणियों की चहलकदमी भी बढ़ जाती है जो पतझड़ वन की खासियत है । जीवनशैली में काफी घोर व्यस्तता के बाबजूद भी कुछ प्रकृति प्रेमी यहाँ आते हैं और प्राकृतिक छटाओं का आनंद लेते हैं । तीन तरफ से पहाड़ियों से घिरा राजगीर का घोड़ा कटोरा झील और झील से सूर्यास्त का दृश्य मन को मोह लेता है । पर्यटक यहाँ झील में नौकायान का लुत्फ़ उठा सकते हैं और यहाँ साफ़-सफाई का भी बेहद ख्याल रखा जाता हैं । हाल ही में इसी झील के बीच भगवान बुद्ध की एक विशाल प्रतिमा भी स्थापित की गई है । अगर आप प्राकृतिक सौंदर्यता के साथ रोमांच का अनुभव और वन्यजीव को खुले जंगलों में विचरण करते देखना चाहते हैं तो राजगीर अभ्यारण्य की सैर जरूर करें और इसके लिए वसंत से बेहतर कोई ऋतु नही हो सकता क्योंकि इसके आगमन के साथ ही जंगलो में जैसे बहार आ जाती है कलियां खिलने लगती है और माँझर लगे फलों के पेड़, फलों से लदे बेर के पेड़, खेतों में लहलहाती सरसों के पिले-पिले फूल और बागों में गाती कोयल और पपीहा अद्भुत अनुभूति का एहसास करते हैं । प्रकृति सौंदर्य को निहारना स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। वन्यजीव : राजगीर अभ्यारण्य में लंबी पूँछ वाली सुल्तान बुलबुल, रंगीन तीतर, कर्वानक, हारिल, बसंता, मछलीखोर पनकौवा, कोरिल्ला किलकिला, छोटा किलकिला और खंजन, कोतवाल, निशाचर उल्लू तथा नाईटज़ार (छपका) , शिकरा बाज, अपने मधुर आवाज के लिए मशहूर कोयल, पपीहा, आकर्षक सलेटी धनेश जिसके चोंच पर सिंग होता है, सिटी जैसी आवाज निकालने वाली छोटा सिल्ही बत्तख़, जंगल का प्रहरी टिटहरी, ऑरेंज हेडेड थ्रश आदि सामान्य पक्षी देखने को मिलते हैं वही स्तनधारियों में चीतल, लंगूर, मकैक बंदर, नीलगाय, जंगली सुअर, सिवेट कैट, गीदड़, धारीदार लकड़बग्घा, जंगली खरहा, जंगली बिल्ली, साहिल और पहाड़ो के खोहों में चमगादड़ों की कुछ प्रजातियां पाई जाती हैं । शिकार के चलते खत्म होते भारतीय बज्रकिट जिसे कभी राजगीर के जंगलो में देखना कोई बड़ी बात नही थी आज बिहार के जंगलो से खत्म होने के कगार पर पहुँच गए हैं । बिहार में करीब 14 से 15 प्रजाति के उभयचर पाए गए हैं जबकि अकेले राजगीर अभ्यारण्य में ही 12 प्रजाति देखे जा चुकें हैं (बिहार पर्यावरण संरक्षण अभियान) । बुलफ्रॉग भारत का सबसे बड़ी प्रजाति का मेंढक है, दिन में अपने खास खुरपीनुमा पैर से खुदाई कर मिट्टी के अंदर छुपा रहने वाला रोलांड बुरोइंग फ्रॉग और जंगलो के फर्श पर उंगली के नाखून आकर के छोटे मेंढक “ऑर्नाट फ्रॉग” और रेंगनेवाले प्राणियों में बहुत कम संख्या में बचे इंडियन रॉक पाइथन (अजगर) के अलावे ब्रोंजबैक ट्री स्नेक, ग्रीन वाइन स्नेक, कोबरा, करैत, वुल्फ स्नेक, मॉनिटर लिजार्ड, स्किंक भी खूब दिखते हैं । स्ट्रिपड टाईगर, पीकॉक पैन्सी, ग्रे पैन्सी, येलो पैन्सी, लेमन पैन्सी, कॉमन क्रो, मॉरमॉन, लाइम ब्लू, ग्राम ब्लू सहित करीब 70 प्रजाति के तितलियाँ राजगीर में मिलती है। राजगीर वन्य जीव प्राणी । राजगीर जू सफारी राजगी वन्यप्राणी सफारी मे आपका स्वागत है । यह 191 हेक्टर में फैला हुआ जो दो पर्वतों के बीच स्थित है । स्वर्णागिरी और वैभव गिरी - के संदर्भ में आपको 22 कुंड और 52 धारा देखने के लिए मिलेगा सभी धाराएं मगरमच्छ के मुंह से गिरते हैं ऐसा माना जाता है कि पहाड़ों में सल्फर की मात्रा अधिक है जिसके कारण पानी गर्म रहता है । राजगीर वन्यप्राणी सफारी को 3 जोन में बांटा गया है। मैनेजमेंट जोन , एंट्रेंस प्लाजा और सफारी प्लाजा । मैनेजमेंट जोन में टिकट की सुविधा साथ ही साथ पार्किंग की सुविधा दी गई है । एंट्रेंस जोन में एग्जीबिशन है 180° थिएटर है बटरफ्लाई जोन है । साथ ही साथ सेल्फी प्वाइंट ब्रांच की बनी हुई पांच प्रकार का एनिमल स्टैचू है । जिसमें एशियाटिक लायन , रॉयल बंगाल टाइगर , लेपर्ड , बियर और हिरण है। राजगीर मगध सम्राट राजा जरासंध एवं भगवान बुद्ध महावीर की तप भूमि है। सेल्फी पॉइंट में एक बेहद ही खूबसूरत और आकर्षक ब्रांच की बनी बुद्ध प्रतिमा भी है। सफारी प्लाजा में यात्री को ठहरने के लिए ओरिएंटेशन प्लाजा है। साथ ही साथ राजगीर के इतिहास को बताने के लिए मिनी थियेटर है । और एनिमल का जानकारी के लिए ओरिएंटेशन प्लाजा में वीडियो उपलब्ध है । जिसमें पांच प्रकार के जानवर के गुन और व्यवहारों को बताया जाता है। राजगीर वन्यप्राणी में पांच एंक्लोजर है । हेर्बाइवोर सफारी, बियर सफारी , लेपर्ड सफारी , टाइगर सफारी और लायन सफारी । हेर्बाइवोर सफारी में पांच प्रजाति के हिरण का परिवार दिखता है जिसमें चीतल, सांभर , हॉग डियर , बार्किंग डियर, ब्लैकबक और साथ ही साथ नीलगाय बंदर और लंगूर शामिल है। इस सफारी में आपको टिटहरी ब्लैक ड्रॉन्गो , कोरमोरेंट , पाउंड हीरोइन गाय बगुला आदि पंछियों भी मिल सकती है । हिरण की संख्या लगभग 400 से 500 के बीच में है । बियर सफारी में आपको स्लॉथ बियर देखने को मिलेंगे जिसमें चार बियर हैं जिनका नाम भोला सुंदरी आदि है । लेपर्ड सफारी में आपको छह लेपर्ड देखने को मिलेंगे जिसका नाम राजा , बेतिया ,.सम्राट , सुल्तान , और दो बच्चे हैं । टाइगर सफारी में आपको चार टाइगर है जिसका नाम देवी स्वर्ण वाल्मीकि और बगीरा है । इस सफारी में आपको इंडियन पैराडाइज फ्लाइकैटचर , किंगफिशर, व्हाइट थ्रोटेड किंगफिशर , सिकरा, कपासी चील कोयल, बगुला वनमुर्गी छोटा पनकौवा और भुजंगा आदि पंछी देखने को मिलेंगे और शेर सफारी में आपको छह शेर देखने के लिए मिलेगा साथी साथ लंगूर भी । सभी शावक गिर गुजरात जूनागढ़ से आए हैं । जो कि अब बड़े हो गए हैं यह पांच सफारी घूमने के उपरांत आपको पुनः ड्रॉप प्वाइंट पर लाया जाएगा। इस सफारी का यात्रा बस से होती है जो कि लगभग एक से डेढ़ घंटे की होती है इस बस में आपके साथ सफारी गाइड और ड्राइवर आपका सफर में साथ रहेंगे । जिसमें प्रमुख मार्गदर्शक चंदन कुमार राणावत है । गृद्धकूट पर्वत गृद्धकूट पर्वत इस पर्वत पर बुद्ध ने कई महत्वपूर्ण उपदेश दिये थे। जापान के बुद्ध संघ ने इसकी चोटी पर एक विशाल “शान्ति स्तूप” का निर्माण करवाया है जो आजकल पर्यटकों के आकर्षण का मूख्य केन्द्र है। स्तूप के चारों कोणों पर बुद्ध की चार प्रतिमाएं स्थपित हैं। स्तूप तक पहुंचने के लिए पहले पैदल चढ़ाई करनी पड़ती थी। अब एक “रज्जू मार्ग” भी बनाया गया है जो यात्रा को और भी रोमांचक बना देता है । लाल मन्दिर राजस्थानी चित्रकला का अद्भुत कारीगरी राजस्थानी चित्रकारों के द्वारा इस मन्दिर में बनाया गया है । इसी मन्दिर में भगवान महावीर स्वामी का गर्भगृह भूतल के निचे बनाया गया है जहां जैन तीर्थयात्री आकर भगवान महावीर के पालने को झुलाते है तथा असीम शांति का अनुभव इस मन्दिर में होता है । इसी मन्दिर में २० वे तीर्थंकर भगवान मुनिसुव्रतनाथ स्वामी की काले वर्ण की 11 फुट ऊँची विशाल खडगासन प्रतिमा विराजमान है । वीरशासन धाम तीर्थ भगवान महावीर स्वामी की लाल वर्ण की 11 फुट ऊँची विशाल पद्मासन प्रतिमा यहाँ विराजमान है । इस मन्दिर में भगवान महावीर स्वामी के दिक्षा कल्याणक महोत्सव में विशाल जुलुस हर साल जैन धर्मावलम्बियों द्वारा निकाला जाता है । जो भगवान महावीर के प्राचीन चरण वेणुवन के समीप बने वहाँ जाकर समाप्त होता है । इस मंदिर का निर्माण कार्य प्रारम्भ है तथा यात्रियों के ठहरने के लिए विशाल धर्मशाला ला निर्माण कराया जा रहा है। दिगम्बर जैन मन्दिर इसे धर्मशाला मन्दिर के नाम से भी जाना जाता है। जैन धर्मावलम्बियों के ठहरने के लिए विशाल धर्मशाला है जहां भारत के कोने - कोने से आने वाले तीर्थ यात्री रात्रि में ठहरते है तथा प्रातः पंचपहाड़ी के दर्शन करते है । इस मन्दिर में सभी सुविधायुक्त कमरे मौजूद है । इस मन्दिर में मूलनायक भगवान महावीर की श्वेत वर्ण पद्मासन प्रतिमा है । वेदी में सोने तथा शीशे का काम कराया गया है, जो अलौकिक छँटा प्रदान करता है । इसके अतिरिक्त 10 धातु की प्रतिमा, एक छोटी श्वेत पाषण की प्रतिमा एवं 2 धातु के मानस्तंभ है । गर्भ गृह की बाहरी दिवाल के आले में बायीं ओर पद्मावती माता की पाषाण की मूर्ति है । इसके शिरोभाग पर पार्श्वनाथ विराजमान है एवं इसके दायीं ओर क्षेत्रपाल जी स्थित है । बायीं ओर की अलग वेदी में भगवान पार्श्वनाथ एवं अन्य प्रतिमायें अवस्थित है । दाहिनी ओर नन्दीश्वर द्वीप का निर्माण हुआ है । मन्दिर शिखरबद्ध है एवं आकर्षक प्रवेशद्वार इसकी शोभा द्विगुणित करते है । इस मन्दिर का निर्माण गिरिडीह निवासी सेठ हजारीमल किशोरीलाल ने कराया था और प्रतिष्ठा वि०सं० 2450 में हुयी थी । इस धर्मशाला मन्दिर में आने वाले तीर्थ यात्री राजस्थानी से लेकर बिहार के खाने का लुफ्त उठा सकते है । गर्म जल के झरने वैभव पर्वत की सीढ़ियों पर मंदिरों के बीच गर्म जल के कई झरने (सप्तधाराएं) हैं जहां सप्तकर्णी गुफाओं से जल आता है। इन झरनों के पानी में कई चिकित्सकीय गुण होने के प्रमाण मिले हैं। पुरुषों और महिलाओं के नहाने के लिए 22 कुन्ड बनाए गये हैं। इनमें “ब्रह्मकुन्ड” का पानी सबसे गर्म (४५ डिग्री से.) होता है। स्वर्ण भंडार यह स्थान प्राचीन काल में जरासंध का सोने का खजाना था। कहा जाता है कि अब भी इस पर्वत की गुफा के अन्दर अतुल मात्रा में सोना छुपा है और पत्थर के दरवाजे पर उसे खोलने का रहस्य भी किसी गुप्त भाषा में खुदा हुआ है।वह किसी और भाषा में नहीं बल्कि शंख लिपि है और वह लिपि बिंदुसार के शासन काल में चला करती थी। . विपुलाचल पर्वत (जैन मंदिर) जैन धर्म के 24 वे तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी की प्रथम वाणी इसी विपुलाचल पर्वत से ही खिरी थी, उन्होंने समस्त विश्व को "जिओ और जीने दो" दिव्य सन्देश विपुलाचल पर्वत से दिया था । पहाड़ों की कंदराओं के बीच बने २६ जैन मंदिरों को आप दूर से देख सकते हैं पर वहां पहुंचने का मार्ग अत्यंत दुर्गम है। लेकिन अगर कोई प्रशिक्षित गाइड साथ में हो तो यह एक यादगार और बहुत रोमांचक यात्रा साबित हो सकती है। जैन मतावलंबियो में विपुलाचल, सोनागिरि, रत्नागिरि, उदयगिरि, वैभारगिरि यह पांच पहाड़ियाँ प्रसिद्ध हैं। जैन मान्यताओं के अनुसार इन पर 23 तीर्थंकरों का समवशरण आया था तथा कई मुनि मोक्ष भी गए हैं। आचार्य महावीर कीर्ति दिगम्बर जैन सरस्वती भवन इस भवन का निर्माण परम पूज्य आचार्य श्री विमल सागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में सन् 1972 को सम्पन्न हुआ था । नीचे एक बड़े हॉल में आचार्य महावीर कीर्ति जी की पद्मासन प्रतिमा विराजित है । ऊपर के कमरों में एक विशाल पुस्तकालय है, जिसमें जैन धर्म सम्बंधित हज़ारों हस्तलिखित एवं प्रकाशित पुस्तकें संग्रहित है । इसके अतिरिक्त जैन सिद्धांत भवन ‘आरा’ के सौजन्य से जैन चित्रकला एवं हस्तलिखित पाण्डुलिपियाँ की प्रदर्शनी आयोजित है । इसके अतिरिक्त विपुलाचल पर्वत पर भगवान महावीर के जीवनी से संबंधित हस्तनिर्मित चित्रों कि प्रदर्शनी लाखों जैन अजैन यात्रियों द्वारा देखी और सराही जाती हैं । कई वर्ष पूर्व श्री महावीर कीर्ति सरस्वती भवन के संचालन के लिये एक बड़ी रकम पू० आचार्य श्री भरत सागर जी के प्रेरणा से शिखर जी में कमिटी को भेजने के लिये कुछ प्रबुद्ध व्यक्तियों को सौंपी गई थी, पर खेद है कि अभी तक कमिटी को वह रकम नही मिली हैं । कुछ प्राचीन खण्डित प्रतिमाएँ एवं अन्य पदार्थ जो उत्खनन से प्राप्त हुये थे । यहाँ भी संग्रहित है । ऊपरी हिस्से में वाग्देवी (सरस्वती देवी) की प्रतिमा भी स्थापित है । बिम्बिसार का बंदीगृह thumb|right|280px|बिम्बिसार कारागार बिम्बिसार जेल गृद्धकूट पहाड़ी का एक सुंदर दृश्य प्रस्तुत करता है।भगवान बुद्ध के एक कट्टर अनुयायी, बिम्बिसार को बेटे अजातशत्रु द्वारा कैद किया गया था। अअजातशत्रु ने अपने पिता से कारावास की जगह का चयन करने के लिए पूछा था। राजा बिम्बिसार ने एक स्थान चुना, जहां से वे भगवान बुद्ध को देख सकें। इसके बावजूद वह गृधाकुट और बुद्ध को खिड़की से देख सकते थे। सप्तपर्णी गुफा 280px|अंगूठाकार|सप्तपर्णी गुफा प्रवेशद्वार सप्तपर्णी गुफा(या सत्तपर्णगुहा) राजगीर की एक पहाड़ी में स्थित गुफा है। कुछ सूत्रों के अनुसार प्रथम बौद्ध संगीति का आयोजन इसी स्थान पर हुआ था। यहाँ गरम जल का एक स्रोत है जिसमें स्नान करने से स्वास्थ्य लाभ होता है। यह हिन्दुओं के लिये पवित्र कुण्ड है। सप्तपर्णी गुफा के स्थल पर पहला बौध परिषत का गठन हुआ था जिसका नेतृत्व महा कस्साप ने किया था। बुद्ध भी कभी-कभार वहाँ रहे थे, और यह अतिथि संयासियों के ठहरने के काम में आता था। मनियार मठ “मनियार मठ" इस मठ के पास कुछ प्राचीन गुफाएं हैं जिनके बारे में लोगों की मान्यता है इनमें प्राचीन भारत का स्वर्ण भंडार है। मनियार मठ राजगीर का एक और खुदाई स्थल है। यह एक अष्टकोणी मंदिर है, जिसकी दीवारें गोलाकार हैं। मनियार मठ के परिसर में आप विविध राजकुलों की छाप देख सकते हैं, जैसे गुप्त राजकुल का धनुष,आज पुराने राजगीर के बीचोबीच स्थित है। और यह महाभारत में उल्लिखित मणि-नाग का समाधि स्थान माना जाता है। गिरियक स्तूप राजगीर का मलमास मेला राजगीर की पहचान मेलों के नगर के रूप में भी है। इनमें सबसे प्रसिद्ध मकर और मलमास मेले के हैं। शास्त्रों में मलमास तेरहवें मास के रूप में वर्णित है। सनातन मत की ज्योतिषीय गणना के अनुसार तीन वर्ष में एक वर्ष 366 दिन का होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस अतिरिक्त एक महीने को मलमास या अतिरिक्त मास कहा जाता है। ऐतरेय बह्मण के अनुसार यह मास अपवित्र माना गया है और अग्नि पुराण के अनुसार इस अवधि में मूर्ति पूजा–प्रतिष्ठा, यज्ञदान, व्रत, वेदपाठ, उपनयन, नामकरण आदि वर्जित है। लेकिन इस अवधि में राजगीर सर्वाधिक पवित्र माना जाता है। अग्नि पुराण एवं वायु पुराण आदि के अनुसार इस मलमास अवधि में सभी देवी देवता यहां आकर वास करते हैं। राजगीर के मुख्य ब्रह्मकुंड के बारे में पौराणिक मान्यता है कि इसे ब्रह्माजी ने प्रकट किया था और मलमास में इस कुंड में स्नान का विशेष फल है। मलमास मेले का ग्रामीण स्वरूप राजगीर के मलमास मेले को नालंदा ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों में आयोजित मेलों में सबसे बड़ा कहा जा सकता है। इस मेले का लोग पूरे साल इंतजार करते हैं। कुछ साल पहले तक यह मेला ठेठ देहाती हुआ करता था पर अब मेले में तीर्थयात्रियों के मनोरंजन के लिए तरह-तरह के झूले, सर्कस, आदि भी लगे होते हैं। युवाओं की सबसे ज्यादा भीड़ थियेटर में होती है जहां नर्तकियाँ अपनी मनमोहक अदाओं से दर्शकों का मनोरंजन करती हैं। जीवकर्म बुद्ध के समय प्रसिद्ध वैध जीवक राजगीर से थे। उन्होंने बुद्ध के नाम एक आश्रम समर्पित किया जिसे कहा जाता है। जीवक ही वे वैध थे जिन्होंने बुद्ध के बीमार होने पर उनका इलाज वेणु वन में किया था। जहां बुद्ध स्नान करते थे वो तालाब आज भी वेणु वन में मौजूद है। तपोधर्म तपोधर्म आश्रम गर्म चश्मों के स्थान पर स्थित है। आज वहाँ एक हिन्दू मन्दिर का निर्माण किया किया गया है जिसे लक्ष्मी नारायण मन्दिर का नाम दिया गया है। पूर्वकाल में तपोधर्म के स्थल पर एक बौध आश्रम और गर्म चश्मे थे। राजा बिम्बिसार यहाँ पर कभी-कभार स्नान किया करते । हिन्दू स्थल जरासंध का अखाडा़ हिन्दू मान्यता के अनुसार महान योद्धा जिसके बार-बार मथुरा पर हमले से श्री कृष्ण तंग आकर मथुरा-वासियों को द्वार्का भेजना पड़ा, इसी स्थान पर हर दिन सैन्य कलाओं का अभियास करता था। लक्ष्मी नारायण मंदिर right|thumb|280px|लक्ष्मीनारायण मंदिर गुलाबी रंग वाली हिन्दू लक्ष्मी नारायण मन्दिर अपने दामन में प्राचीन गर्म चश्मे समाए हुए हैं। यह मन्दिर अपने नाम के अनुसार विष्णु भगवान और उनकी पत्नी लक्ष्मी को समर्पित है। वास्तविक रूप में जल में एक डुबकी ही गर्म चश्मे को अनुभव करने का स्रोत था, परन्तु अब एक उच्च स्तरीय चश्मे को काम में लाया गया है जो कई आधूनिक पाइपों से होकर आता है जो एक हॉल की दीवारों से जुड़े हैं, जहाँ लोग बैठकर अपने ऊपर से जल के जाने का आनंद ले सकते हैं। अन्य स्थान अतिरिक्त पुरातत्व स्थलों में शामिल हैं: कर्णदा टैंक जहा बुद्ध स्नान लेते थे। मनियार मठ जिसका इतिहास पहली शताब्दी का है। मराका कुक्षी जहाँ अजन्मित अजातशत्रु को पिता की मृत्यु का कारण बनने का श्राप मिला रणभूमि जहाँ भीम और जरासंध महाभारत का एक युद्ध लड़े थे स्वर्णभण्डार गुफा विश्वशांति स्तूप एक पुराने दुर्ग के खण्डहर 2500 साल पुरानी दीवारें वेणु वन आवागमन वायुमार्ग: निकटतम हवाई-अड्डा पटना (107 किमी). रेलमार्ग: पटना एवं दिल्ली से सीधी रेल सेवा। सड़क द्वारा: पटना, गया, दिल्ली एवं कोलकाता से सीधा संपर्क। बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम पटना स्थित अपने कार्यालय से नालंदा एवं राजगीर के लिए वातानुकूलित टूरीस्ट बस एवं टैक्सी सेवा भी उपलब्ध करवाता है। इन्हें भी देखें नालंदा ज़िला बाहरी कड़ियाँ बिहार सरकार पर्यटन मंत्रालय के जालपृष्ठ पर राजगीर राजगीर : जैन, बौद्ध धर्मावलंबियों का तीर्थ - विनोद बंधु राजगीर आधिकारिक वेबसाइट https://web.archive.org/web/20230128055130/https://rajgir.co.in/ 28 जनवरी 2023 सन्दर्भ श्रेणी:नालंदा जिला श्रेणी:बिहार के शहर श्रेणी:नालंदा ज़िले के नगर * श्रेणी:बिहार में पर्यटन आकर्षण