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अहमत अबाके
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अहमत अबाके Ahmet Abakay Ahmet-Abakay1.jpg अहमत अबाके 1950 सिवास, तुर्की पत्रकार, लेखक 'प्रोग्रेसिव जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन' के अध्यक्ष, अर्मेनियाई मूल की माँ की पहचान उजागर करना
अहमत अबाके (Ahmet Abakay; जन्म: 1950) एक तुर्की पत्रकार, लेखक और 'प्रोग्रेसिव जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन' (तुर्की: Çağdaş Gazeteciler Derneği) के पूर्व अध्यक्ष हैं। वे तुर्की में प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों के मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए किए गए अपने कार्यों के लिए जाने जाते हैं। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने कई प्रमुख तुर्की समाचार पत्रों के लिए काम किया है। अबाके अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तब चर्चा में आए जब उन्होंने 2013 में अपनी पुस्तक 'होशाना के अंतिम शब्द' (Hoşana'nın Son Sözü) प्रकाशित की। इस पुस्तक में उन्होंने अपनी माँ की छिपी हुई अर्मेनियाई पहचान को उजागर किया था, जिसके कारण उन्हें तुर्की के राष्ट्रवादी समूहों और उनके अपने परिवार के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
अहमत अबाके का जन्म 1950 में तुर्की के मध्य अनातोलिया क्षेत्र में स्थित सिवास (Sivas) प्रांत के डिवरिगी (Divriği) जिले में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा और परवरिश इसी क्षेत्र में हुई। उच्च शिक्षा के लिए वे तुर्की की राजधानी अंकारा चले गए, जहाँ उन्होंने अंकारा विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान संकाय (Faculty of Political Science, Ankara University) में प्रवेश लिया। यहाँ से राजनीति विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना करियर बनाने का निर्णय लिया।
पत्रकारिता और करियर
स्नातक होने के बाद, अहमत अबाके ने तुर्की के विभिन्न समाचार पत्रों और मीडिया आउटलेट्स के साथ जुड़कर एक संवाददाता के रूप में काम करना शुरू किया। अपने शुरुआती करियर में उन्होंने इलियास (İlyas), यनी उलुस (Yeni Ulus), और अंकारा टेलीग्राफ (Ankara Telgraf) जैसे प्रमुख तुर्की समाचार पत्रों के लिए काम किया।
तुर्की में पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा करने और उन्हें एक संगठित मंच प्रदान करने के उद्देश्य से, अबाके ने 'प्रोग्रेसिव जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन' (Çağdaş Gazeteciler Derneği - ÇGD) की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे इस संगठन के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और उन्होंने एक लंबे समय तक इसके अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।http://www.cgdankara.org/index.php?Did=195&Page=1 Çağdaş Gazeteciler Derneği Ankara Şubesi - Tarihçe www.cgdankara.org 2026-03-10http://mulkiye.org.tr/dosyalar/files/e-bulten%202008-07.pdf AHMET ABAKAY KİMDİR? mulkiye.org.tr 2026-03-10 15 अक्तूबर 2013 https://web.archive.org/web/20131015174825/http://mulkiye.org.tr/dosyalar/files/e-bulten%202008-07.pdf dead
प्रेस की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष
एक पत्रकार संघ के अध्यक्ष के रूप में, अबाके ने हमेशा तुर्की में पत्रकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की वकालत की। 1989 में हेलसिंकी वॉच (वर्तमान में ह्यूमन राइट्स वॉच) द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट 'पेइंग द प्राइस: फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन इन टर्की' (Paying the price: freedom of expression in Turkey) में उनके कार्यों और प्रेस की स्वतंत्रता के लिए उनके संघर्ष का उल्लेख किया गया था।http://archive.org/details/bub_gb_kvYmkcILrysC Paying the price : freedom of expression in Turkey Whitman Lois Froncek Thomas Helsinki Watch (Organization : U.S.) 1989 [New York] : Helsinki Watch : Internatipnal Freedom to Publish Committee of the Association of American Publishers unknown library 978-0-929692-15-9
मार्च 2011 में, जब तुर्की में 'एर्गेनेकोन' (Ergenekon) मामले की जांच के तहत सरकार द्वारा कई प्रमुख पत्रकारों के घरों और कार्यालयों पर छापे मारे गए और उन्हें गिरफ्तार किया गया, तब अबाके ने इसका कड़ा विरोध किया था। उन्होंने इन छापों को स्पष्ट रूप से "प्रेस को डराने और चुप कराने की कोशिश" करार दिया और पत्रकारों की रिहाई की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया।Opposition, lawyers and colleagues express outrage at new Ergenekon raids Hürriyet Daily News 3 March 2011
'होशाना के अंतिम शब्द' और पारिवारिक विवाद
2013 में, अहमत अबाके ने अपने जीवन और परिवार से जुड़ी एक ऐतिहासिक सच्चाई को अपनी पुस्तक होशाना'निन सोन सोज़ू (Hoşana'nın Son Sözü - होशाना के अंतिम शब्द) में प्रकाशित किया। इस पुस्तक में अबाके ने यह बताया कि उनकी माँ, होशाना, मूल रूप से एक अर्मेनियाई (Armenian) थीं।
1915 के ऐतिहासिक घटनाक्रमों (अर्मेनियाई विस्थापन) के दौरान, होशाना को एक अलेवी (Alevi) तुर्क परिवार ने गोद ले लिया था। उस समय वह केवल एक छोटी बच्ची थीं। तुर्की के तत्कालीन सामाजिक और राजनीतिक माहौल में भेदभाव के डर से, होशाना ने अपनी असली जातीय पहचान को 82 वर्षों तक पूरी तरह से गुप्त रखा। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम दिनों में, अपनी मृत्यु से कुछ सप्ताह पहले ही अबाके को इस सच्चाई के बारे में बताया था।https://www.hurriyetdailynews.com/my-mother-was-armenian-journalist-group-chair-reveals-56125 My mother was Armenian, journalist group chair reveals - Türkiye News 2013-10-13 Hürriyet Daily News en 2026-03-10http://t24.com.tr/haber/ahmet-abakay-annem-82-yil-ermeni-oldugunu-sakladi/240569 Ahmet Abakay: Annem, Ermeni olduğunu 82 yıl boyunca sakladı... T24 2026-03-11 tr-TR
जब अबाके ने इस सच्चाई को अपनी पुस्तक के माध्यम से सार्वजनिक किया, तो तुर्की में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया। तुर्की के चरमपंथी और अति-राष्ट्रवादी समूहों ने अर्मेनियाई पहचान को उजागर करने के लिए अबाके को गंभीर धमकियां दीं। हालांकि, अबाके के लिए सबसे बड़ी चुनौती उनके अपने परिवार और रिश्तेदारों की ओर से आई। पुस्तक के विमोचन के बाद, उनके परिवार के अधिकांश सदस्यों (उनके चचेरे भाई, भतीजे और अन्य रिश्तेदारों) ने उन पर आरोप लगाया कि उन्होंने परिवार को "अर्मेनियाई" बताकर परिवार के सम्मान को ठेस पहुंचाई है। उनके रिश्तेदारों ने उन पर पुस्तक को बाजार से वापस लेने का दबाव डाला और ऐसा न करने पर उनका पूर्ण रूप से बहिष्कार कर दिया और उनसे सभी संबंध तोड़ लिए।https://armenpress.am/en/article/735761 Turkish journalist receives threats for publishing book on his mother's Armenian origins 2013-10-08 Armenpress en 2026-03-11
इन्हें भी देखें
बेजान मातुर
मेतिन गोकतेपे
सबाहतिन अली
सेविले यिलमान
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
विकिडाटा (Q15455294)
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