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411 समाचार
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स्वदेशाभिमानी (समाचार पत्र)

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स्वदेशाभिमानी स्वदेशाभिमानी पत्र की पृष्ठभूमि में रामक्र्ष्ण पिल्लै साप्ताहिक समाचार पत्र Broadsheet 1905 1910 वक्कोम मौलवी रामकृष्ण पिल्लै मलयालम तिरुअनन्तपुरम स्वदेशभिमानी (अर्थ : अपने देश पर गर्व करने) त्रावणकोर राज्य में प्रकाशित एक समाचार पत्र था, जिसे सरकार और त्रावणकोर के दीवान, पी० राजगोपालाचारी की आलोचना के कारण 1910 में त्रावणकोर सरकार द्वारा प्रतिबंधित करके जब्त कर लिया गया था। http://keralawindow.net/imp_v.htm VAKKOM MOULAVI 2008-11-20 14 फ़रवरी 2008 https://web.archive.org/web/20080214223246/http://www.keralawindow.net/imp_v.htm dead Vyazhavatta Smaranakal Amma B. Kalyani D C Books/ Current Books, Kottayam 1916 81-7130-015-4 14 (2008) Malayalam Ende Naadukadathal Pillai Ramakrishna D C Books/ Current Books, Kottayam 1911 81-264-1222-4 5 (2007) http://www.islamicvoice.com/october.2001/community.htm#vak Vakkom Complex Opened 2008-11-24 7 जनवरी 2009 https://web.archive.org/web/20090107093242/http://www.islamicvoice.com/october.2001/community.htm#vak dead http://www.keralapromoter.com/wikiped/kerala-poets-and-writers.html Kerala poets and writers 2008-11-24 23 अप्रैल 2010 https://web.archive.org/web/20100423000747/http://www.keralapromoter.com/wikiped/kerala-poets-and-writers.html dead http://www.csesindia.org/admin/modules/cms/docs/publication/19.pdf WHEN THE KERALA MODEL OF DEVELOPMENT IS HISTORICISED THARAKAN P.K. MICHAEL 2008-11-24 25 जुलाई 2011 https://web.archive.org/web/20110725210311/http://www.csesindia.org/admin/modules/cms/docs/publication/19.pdf dead http://www.india9.com/i9show/Vakkom-Abdul-Khader-Moulavi-71720.htm Vakkom Abdul Khader Moulavi 2008-11-24 इतिहास वक्कोम मुहम्मद अब्दुल खादिर मौलवी उर्फ वक्कोम मौलवी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व करने और त्रावणकोर में लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संघर्ष करने के लिए 19 जनवरी 1905 को इस साप्ताहिक समाचार पत्र की स्थापना की। वह सीधे इंग्लैंड से एक स्वचालित फ़्लैटबेड प्रिंटिंग प्रेस आयात करने में सफल रहे, जो उस समय उपलब्ध नवीनतम प्रिन्टिंग प्रेस थी। प्रेस अंजुथेंगु से संचालित होता था, जो उस समय सीधे तौर पर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा शासित एक ब्रिटिश उपनिवेश था। जनवरी 1906 में रामकृष्ण पिल्लै के संपादक बनने से पहले सी०पी० गोविन्द पिल्लै इसके संपादक थे। The Political Ideas of Swadesabhimani K. Ramakrishna Pillai Nair R. Ramakrishnan Kerala Academy of Political Science 1975 33 रामकृष्ण पिल्लै और उनके परिवार को चिरयिंकिल तालुक के वक्कोम में स्थानांतरित होना पड़ा जहां अखबार का कार्यालय और प्रिंटिंग प्रेस स्थित थे। जुलाई 1907 में अखबार का कार्यालय और पिल्लै परिवार दोनों तिरुवनंतपुरम चले गए। हालाँकि वक्कोम मौलवी अभी भी इसके स्वामी थे, किन्तु मौलवी ने रामकृष्ण को अखबार चलाने की पूरी आज़ादी दी थी। यद्यपि दोनों के बीच कभी कोई कानूनी या वित्तीय अनुबंध नहीं हुआ, फिर भी मौलवी ने प्रेस स्थापित करने के लिए सभी वित्तीय सहायता प्रदान की। http://www.vmft.org/index.php?option=com_content&view=article&id=49:moulavi-and-swadeshabhimani&catid=31:general&Itemid=46 'Moulavi' and 'Swadeshabhimani' B. Kalyani Amma 2008-11-24 26 सितंबर 1910 को, अखबार और प्रिंटिंग प्रेस को भारतीय शाही पुलिस द्वारा सील कर दिया गया और जब्त कर लिया गया। रामकृष्ण पिल्लई को गिरफ्तार कर लिया गया और ब्रिटिश राज के मद्रास प्रांत में त्रावणकोर से थिरुनेलवेली में निर्वासित कर दिया गया। http://keralawindow.net/imp_v.htm The criticism against the Diwan of Travancore that appeared in the daily irritated the authorities and eventually resulted in the confiscation of press during 1910 2008-11-20 14 फ़रवरी 2008 https://web.archive.org/web/20080214223246/http://www.keralawindow.net/imp_v.htm dead http://www.prd.kerala.gov.in/literacycriticmwesternifluence.htm Literary Criticism: Western Influence PRD, Kerala Government 2008-11-20 26 जून 2009 https://web.archive.org/web/20090626234854/http://www.prd.kerala.gov.in/literacycriticmwesternifluence.htm dead Constitutionalism in Travancore and Cochin Koshy M. J. Kerala Historical Society 1972 18, 19 In Quest of Kerala Nayar K. Balachandran Accent Publications 1974 65,160 "कई राष्ट्रवादियों और भारतीय समाचार पत्रों ने रामकृष्ण पिल्लई की गिरफ्तारी और निर्वासन तथा इस अखबार पर प्रतिबंध लगाने पर घोर प्रतिक्रिया व्यक्त की। हालांकि, राजा और ब्रिटिश सरकार का मुकाबला करना आसान नहीं था। फिर भी, १९२० के दशक के पहले भाग के आरम्भ में इस प्रतिबंधित अखबार को अनुभवी गांधीवादी और स्वतंत्रता सेनानी त्रावणकोर के के० कुमार की शक्तिशाली इच्छाशक्ति से पुनर्जीवित किया गया था। उन्होंने इस अखबार के पुनरुद्धार को रामकृष्ण पिल्लई को एक उचित श्रद्धांजलि के रूप में देखा। कुमार स्वयं इसके प्रबंधक और मुख्य-संपादक थे। उनके इस प्रयास में बैरिस्टर ए०के० पिल्लै के अलावा रामकृष्ण पिल्लई के करीबी सहयोगी और "परप्पुरम" और "उदयभानु" उपन्यासों के लेखक के० नारायण कुरुक्कल आदि ने सहायता की। रामकृष्ण पिल्लई की पत्नी, बी. कल्याणी अम्मा, पिल्लई के सहयोगी के. नारायण कुरुक्कल, आर. नारायण पणिक्कर और प्रसिद्ध राजनीतिक-पत्रकार रमन मेनन और के कुमार स्वयं पत्रिका के नियमित योगदानकर्ता थे। अखबार को 'स्वदेशाभिमानी' नाम से पुनर्जीवित किया गया था और इसका मुख्यालय उस इमारत में था जिसमें वर्तमान समय में थायकौड, तिरुवनंतपुरम में डीपीआई कार्यालय है। इन सबके बावजूद, सरकार ने बुद्धिमानी से चुप रहना ही बेहतर समझा। नये 'स्वदेशाभिमानी' को रामानन्द चट्टोपाध्याय की "मॉडर्न रिव्यू" के बाद फिर से तैयार किया गया था। इसने केरल के सामाजिक-राजनीतिक जीवन को बदलने वाली एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में अपनी विरासत को जारी रखा। के० कुमार के मन में रामकृष्ण पिल्लई के प्रति बहुत आदर था और उन्होंने पिल्लई के निर्वासन दिवस को "रामकृष्ण पिल्लै दिवस" (एमई से: 10-02-1098) के रूप में आयोजित करने और त्रिवेन्द्रम में उनकी प्रतिमा स्थापित करने में मुख्य भूमिका निभाई। उसके बाद लंबे समय तक त्रिवेन्द्रम में रामकृष्ण पिल्लै दिवस मनाया जाता रहा। ऐसा प्रतीत होता है कि स्वदेशाभिमानी का संपादन ए०के० पिल्लई (1932 तक) के पास चला गया, जिन्होंने के० कुमार की सहायता और समर्थन से "स्वरत" का संपादन भी किया।</br> (स्वदेशाभिमानी रामकृष्ण पिल्लई, विकिपीडिया से उद्धृत) भारत की स्वतन्त्रता के बाद 1957 में केरल सरकार ने प्रेस को मौलवी के परिवार और उनके बेटे अब्दुल कादर को लौटा दिया। 26 जनवरी 1968 को केरल के तत्कालीन मुख्यमंत्री ईएमएस नंबूदरीपाद ने मौलवी अब्दुल कादिर की मृत्यु के 36 वर्ष बाद एक सार्वजनिक बैठक में उनके कानूनी उत्तराधिकारियों को इसे प्रस्तुत किया। इन्हें भी देखें केरल में मीडिया स्वदेशाभिमानी रामकृष्ण पिल्लई वक्कोम मौलवी सन्दर्भ