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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

मिहिर भोज

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सितंबर 2021 सितंबर 2021 आदिवाराह 6वें गुर्जर-प्रतिहार राजा रामभद्र महेन्द्रपाल प्रथम महेन्द्रपाल प्रथम 885 नर्मदा नदी 836 885 CE रामभद्र मिहिर भोज (अनु. अनुमानतः 836 ई. - 885 ई.), अथवा प्रथम भोज, गुर्जर-प्रतिहार राजवंश के राजा थेत्रिपाठी 321 2014त्रिपाठी 237 1989 जिन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी हिस्से में लगभग 49 वर्षों तक शासन किया और इनकी राजधानी कन्नौज (वर्तमान में उत्तर प्रदेश में) थी। इनके राज्य का विस्तार नर्मदा के उत्तर में और हिमालय की तराई तक, पूर्व में वर्तमान बंगाल की सीमा तक माना जाता है। भोज को प्रतिहार वंश का सबसे महान शासक माना जाता है और अरब आक्रमणों को रोकने में इनकी प्रमुख भूमिका रही थी। स्वयं एक अरब इतिहासकार के मुताबिक़ इनकी अश्वसेना उस समय की सर्वाधिक प्रबल सेना थी। इनके पूर्ववर्ती राजा इनके पिता रामभद्र थे। इनके काल के सिक्कों पर आदिवाराह की उपाधि मिलती है, जिससे यह अनुमान लगाया जाता है कि ये विष्णु के उपासक थे। इनके बाद इनके पुत्र प्रथम महेंद्रपाल राजा बने। नाम एवं उपाधि मिहिर भोज का सबसे आम नाम भोज है।सतीश चन्द्र 2007 16 इसी नाम के अन्य राजाओं से विभेदित करने के लिए उसे प्रथम भोज (भोज I) कहा जाता है। इतिहासकार सतीशचंद्र के मुताबिक़ उसे उज्जैन के शासक "भोज परमार से भिन्न दिखाने के लिए कभी-कभी मिहिर भोज भी कहा जाता है।"सतीश चन्द्र 2007 15-17 हालाँकि, रमा शंकर त्रिपाठी ग्वालियर से प्राप्त अभिलेख के हवाले से लिखते हैं कि इस इसमें में उसका प्रथम नाम (अभिधान) "मिहिर" लिखा गया हैत्रिपाठी 237 1989 जो सूर्य का पर्यायवाची शब्द है। उपाधि के बारे में सतीश चन्द्र का कथन है कि "भोज विष्णुभक्त था और उसने 'आदि वाराह' की उपाधि धारण की जो कि उसके कुछ सिक्कों पर भी अंकित मिलती है"।सतीश चन्द्र 2007 16 शासनकाल 3 400 center left Gate of Teki Mandir, Gwalior Fort.jpg ग्वालियर किले के समीप तेली का मंदिर में स्थित मूर्तियाँ Sculptures near Teli Mandir, Gwalior Fort.jpg ग्वालियर किले के समीप तेली का मंदिर में स्थित मूर्तियाँ Teli ka mandir fort Gwalior - panoramio - Gyanendrasinghchauha… (1).jpg तेली का मंदिर जिसे मिहिर भोज द्वारा बनवाया गया माना जाता है।के. डी. वाजपेयी 31 2006 भोज का शासनकाल भारतीय इतिहास के मध्यकाल का वह दौर है जिसे "तीन साम्राज्यों के युग" के नाम से जाना जाता है। यह वह काल था जब पश्चिम-उत्तर भारत (इसमें वर्तमान पाकिस्तान के भी हिस्से शामिल हैं) क्षेत्र में गुर्जर-प्रतिहारों का वर्चस्व था, पूर्वी भारत पर बंगाल के पाल राजाओं का आधिपत्य था और दक्कन में राष्ट्रकूट राजा प्रभावशाली थे। इन तीनों राज्यक्षेत्रों के आपसी टकराव का बिंदु कन्नौज पर शासन था। इतिहासकार इसे कन्नौज त्रिकोण के नाम से भी बुलाते हैं। भोज के आरंभिक समय में कन्नौज प्रतिहारों के आधिपत्य में नहीं था। अतः भोज के वास्तविक शासनकाल की शुरूआत उसकी कन्नौज विजय से माना जाता है जो 836 ईसवी में हुई। इसके पश्चात उसने 885 ईसवी तक (49 साल) यहाँ राज्य किया। एक इतिहासकार के अनुसार भोज ने अपने पिता रामभद्र की हत्या करने के बाद नेतृत्व अपने हाथ में लियाडेविडसन 2004 और इसके उपरांत अपने राज्य के वो इलाके पहले हस्तगत करके सुदृढ़ किये जो उस समय उनके हाथ से निकल गये थे या जिनपर नियंत्रण कमजोर हो चुका था। इसके उपरान्त उसने कन्नौज पर आधिपत्य स्थापित किया और दक्षिण की ओर राज्य का विस्तार करना चाहा। दक्षिण विजय राष्ट्रकूट शासकों द्वारा विफल कर दी गयी और उसके पश्चात भोज ने पूर्व की ओर विस्तार करना चाहा जिसे बंगाल के पाल शासक देवपाल ने रोक दिया। हालिया विवाद मिहिर भोज को लेकर हाल में कई विवादित घटनायें घटित हुई हैं जिनमें इनके गुर्जर होने अथवा राजपूत होने को लेकर कई जगहों पर विवाद का मुद्दा बनाया गया है। जहाँ गुर्जर समुदाय के लोगों का दावा है कि मिहिर भोज गुर्जर थे वहीं राजपूत समुदाय के लोग यह दावा करते हैं कि ये राजपूत क्षत्रिय थे और गुर्जर नाम केवल गुर्जरादेश के, एक क्षेत्र के नाम, के कारण प्रयोग किया जाता है। उपरोक्त दोनों ही दावों को लेकर अलग-अलग इतिहासकारों के मतों का प्रमाण हाल में उद्धृत किया गया है।सम्राट मिहिरभोज कौन हैं, जिन्हें लेकर आमने-सामने हैं राजपूत और गुर्जर? https://www.bbc.com/hindi/india-58654777 23 सितम्बर 2021 BBC News हिंदी hi और वर्तमान में यह दोनों समुदायों के बीच एक कटु संघर्ष का मुद्दा बना हुआ है।सिद्धार्थ राय गुर्जर बनाम राजपूत: राजा मिहिर भोज मूर्ति अनावरण समारोह में मंच पर विधायक के साथ धक्कामुक्की https://www.jansatta.com/national/uttar-pradesh-after-yogi-adityanath-ignoration-youth-protested-against-mihir-bhoj-statue-for-hiding-word-gurjar/1836868/ 23 सितम्बर 2021 जनसत्ता 23 सितम्बर 2021 संदर्भ स्रोत ग्रंथ त्रिपाठी राम शरण 2014 History of Ancient India प्राचीन भारत का इतिहास https://books.google.co.in/books?id=HjwvEAAAQBAJ&newbks=1&newbks_redir=0&lpg=PA321&dq=Mihira%20Bhoja&pg=PA321#v=onepage&q=Mihira%20Bhoja&f=false en नई दिल्ली मोतीलाल बनारसीदास त्रिपाठी आर. एस. 1989 History of Kanauj: To the Moslem Conquest https://books.google.co.in/books?id=2Tnh2QjGhMQC&newbks=1&newbks_redir=0&lpg=PA237&dq=Mihira%20Bhoja&pg=PA237#v=onepage&q=Mihira%20Bhoja&f=false en मोतीलाल बनारसीदास डेविडसन आर. एम. 2004 Indian Esoteric Buddhism: Social History of the Tantric Movement https://books.google.co.in/books?id=n_VquVQvnBwC&newbks=1&newbks_redir=0&lpg=PA55&dq=Mihira%20Bhoja&pg=PA55#v=onepage&q=Mihira%20Bhoja&f=false en मोतीलाल बनारसीदास 9788120819917 के. डी. वाजपेयी History of Gopachala https://books.google.com/books?id=Q3KcwLKuRnYC&pg=PA31 2006 भारतीय ज्ञानपीठ 978-81-263-1155-2 श्रेणी:भारतीय सम्राट श्रेणी:गुर्जर-प्रतिहार राजवंश