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नेपाल अन्तरिम सरकार
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सितम्बर २०२५अन्तरिम सरकार संघीय लोकतान्त्रिक गणराज्य नेपाल सुशीला कार्की १२ सितम्बर २०२५ ई॰ / भाद्र शुक्ल द्वितीया, वि॰सं॰ २०८२ नेपाल के राष्ट्रपति आगामी आम चुनाव तक १२ सितम्बर २०२५ ई॰ / भाद्र शुक्ल द्वितीया, वि॰सं॰ २०८२ महामहिम सुशीला कार्की नेपाल की मन्त्रिपरिषद् Hon. Sushila Karki (profile).jpg
नेपाल की अन्तरिम सरकार, वर्ष २०२५ ई॰ / विक्रम संवत् २०८२ में उस जनविद्रोह के पश्चात् गठित की गई थी, जिसमें भ्रष्टाचार और पक्षपात के विरुद्ध पीढ़ी ज़ी द्वारा नेतृत्व किया गया था। इस जनआंदोलन के परिणामस्वरूप तत्कालीन प्रधानमंत्री के॰ पी॰ शर्मा ओली की सरकार का पतन हुआ। वर्तमान अन्तरिम सरकार का नेतृत्व सुशीला कार्की कर रही हैं।
पृष्ठभूमि
नेपाल में अन्तरिम शासन व्यवस्था का सर्वप्रमुख प्रयोग वर्ष २००६ ई॰ / वि॰सं॰ २०६३ की सफल क्रान्ति के पश्चात् प्रारम्भ हुआ, जिसने राजा ज्ञानेन्द्र के प्रत्यक्ष शासन का अन्त कर नेपाल की राजनीतिक प्रणाली में मूलभूत परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त किया। अप्रैल २००६ के जनआंदोलन की सफलता के बाद १५ जनवरी २००७ ई॰ / पौष शुक्ल अष्टमी, वि॰सं॰ २०६३ को पुरानी संसद को भंग कर ३३० सदस्यीय अन्तरिम संसद का गठन किया गया। यह संक्रमणकालीन शासन व्यवस्था की दीर्घ अवधि की शुरुआत थी, जो लगभग एक दशक तक चली।
अन्तरिम शासन की रूपरेखा को नेपाल के अन्तरिम संविधान २०६३ वि॰सं॰ (२००७ ई॰) द्वारा औपचारिक रूप प्रदान किया गया, जिसने संक्रमणकालीन शासन के लिए विधिक आधार सुनिश्चित किया। १ अप्रैल २००७ ई॰ / चैत्र शुक्ल नवमी, वि॰सं॰ २०६३ को आठ दलों की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार ने राजनीतिक सहमति से अन्तरिम मन्त्रिपरिषद् का गठन किया, जिसमें पाँच माओवादी मन्त्री भी सम्मिलित थे। यह समावेशी दृष्टिकोण शान्ति प्रक्रिया की आवश्यकताओं और पूर्व विद्रोही समूहों को मुख्यधारा की राजनीति में समाहित करने की आवश्यकता को दर्शाता है।
इन अन्तरिम सरकारों का प्रमुख उद्देश्य संविधान निर्माण हेतु संविधान सभा के निर्वाचन की निगरानी करना था। संसद ने एक अन्तरिम संविधान का प्रारूप तैयार किया और अप्रैल २००८ ई॰ / चैत्र–वैशाख, वि॰सं॰ २०६५ में संविधान सभा का निर्वाचन सम्पन्न हुआ। तथापि, संविधान निर्माण की प्रक्रिया अपेक्षा से अधिक जटिल सिद्ध हुई। पहली संविधान सभा संविधान के प्रमुख बिन्दुओं पर सहमति नहीं बना सकी। जब संविधान सभा मई २०१२ ई॰ / वैशाख–ज्येष्ठ, वि॰सं॰ २०६९ तक संविधान का मसौदा तैयार करने में असफल रही, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री बाबुराम भट्टराई ने संविधान सभा को भंग कर दिया।
इस संवैधानिक गतिरोध के कारण एक और अन्तरिम शासनकाल प्रारम्भ हुआ। कई महीनों की वार्ता के पश्चात् मार्च २०१३ ई॰ / फाल्गुन–चैत्र, वि॰सं॰ २०६९ में प्रमुख राजनीतिक दलों ने एक अन्तरिम व्यवस्था पर सहमति बनाई, जिसके फलस्वरूप नवम्बर २०१३ ई॰ / कार्तिक–मार्गशीर्ष, वि॰सं॰ २०७० में दूसरी संविधान सभा का निर्वाचन सम्पन्न हुआ।
वर्ष २०२५ ई॰ / वि॰सं॰ २०८२ में भ्रष्टाचार और पक्षपात के विरुद्ध युवाओं द्वारा संचालित व्यापक जनआंदोलन के पश्चात् नेपाल में नवीनतम अन्तरिम सरकार का गठन हुआ। देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने १२ सितम्बर २०२५ ई॰ / भाद्र शुक्ल द्वितीया, वि॰सं॰ २०८२ को शपथ ग्रहण की। यह सप्ताह राजनीतिक उथल-पुथल से परिपूर्ण रहा, जिसमें भ्रष्टाचार-विरोधी प्रदर्शन ने देश के नेतृत्व को अपदस्थ कर दिया।
डिस्कॉर्ड पर आयोजित एक ऑनलाइन मतदान के माध्यम से सुशीला कार्की को नामित किया गया, जिसके पश्चात् नेपाल के राष्ट्रपति ने उन्हें अन्तरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया। वे नेपाल की पहली महिला हैं जिन्होंने राष्ट्र की सरकार का नेतृत्व किया। वर्ष २०१६–२०१७ ई॰ / वि॰सं॰ २०७३–२०७४ में वे नेपाल की एकमात्र महिला मुख्य न्यायाधीश थीं और उस काल में सरकारी भ्रष्टाचार के विरुद्ध उनके रुख के लिए प्रसिद्ध थीं।
सन्दर्भ
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