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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

आंग सान सू की

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ऑंन्ग सैन सू की Remise du Prix Sakharov à Aung San Suu Kyi Strasbourg 22 octobre 2013-18.jpg अध्यक्ष - नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी 18 नवंबर 2011 आंग श्वे महासचिव- नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी 27 सितम्बर 1988 18 नवम्बर 2011 नेता विपक्ष (म्यामांर की लोक सभा) थीन सीन 2 मई 2012 16 नवंबर 2015 साई ऐ पाओ हटे ऊ प्रतिनिधि सभा म्यामांर (बर्मा) (कवहमु टाउनशिप) 2 मई 2012 19-जून-1945 यांगून (रंगून), बर्मा नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी माइकल ऐरिस (1971–1999) अलेक्जेंडर ऐरिस लेडी श्री राम कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय, सेंट ह्यूग कॉलेज, ऑक्सफोर्ड (लंदन विश्वविद्यालय) थेरवाद (बौद्ध धर्म) जवाहर लाल नेहरू पुरस्कार, भगवान महावीर विश्व पुरस्कार Aung San Suu Kyi signature 2013.svg आंग सान सू की (जन्म : 19 जून, 1945) म्यांमार (बर्मा) की एक राजनेता, राजनयिक तथा लेखक हैं। वे बर्मा के राष्ट्रपिता आंग सान की पुत्री हैं जिनकी १९४७ में राजनीतिक हत्या कर दी गयी थी। सू की ने बर्मा में लोकतन्त्र की स्थापना के लिए लम्बा संघर्ष किया। १९ जून १९४५ को रंगून में जन्मी आंग सान लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई प्रधानमंत्री, प्रमुख विपक्षी नेता और म्यांमार की नेशनल लीग फार डेमोक्रेसी की नेता हैं। आंग सान को १९९० में राफ्तो पुरस्कार व विचारों की स्वतंत्रता के लिए सखारोव पुरस्कार से और १९९१ में नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया है। १९९२ में इन्हें अंतर्राष्ट्रीय सामंजस्य के लिए भारत सरकार द्वारा जवाहर लाल नेहरू पुरस्कार से सम्मानित किया गया। लोकतंत्र के लिए आंग सान के संघर्ष का प्रतीक बर्मा में पिछले २० वर्ष में कैद में बिताए गए १४ साल गवाह हैं। बर्मा की सैनिक सरकार ने उन्हें पिछले कई वर्षों से घर पर नजरबंद रखा हुआ था। इन्हें १३ नवम्बर २०१० को रिहा किया गया है। http://navbharattimes.indiatimes.com/thoughts-platform/focus/--/articleshow/6921100.cms संघर्ष के मायने बदलतीं 'आंग सान सू की' नवभारत टाइम्स 14 नवम्बर 2010, 02.14AM IST 7 जून 2013 https://web.archive.org/web/20140408122937/http://navbharattimes.indiatimes.com/thoughts-platform/focus/--/articleshow/6921100.cms 8 अप्रैल 2014 live निजी ज़िंदगी आंग सान सू १९ जून १९४५ को रंगून में पैदा हुईं थीं। इनके पिता आंग सान ने आधुनिक बर्मी सेना की स्थापना की थी और युनाइटेड किंगडम से १९४७ में बर्मा की स्वतंत्रता पर बातचीत की थी। इसी साल उनके प्रतिद्वंद्वियों ने उनकी हत्या कर दी। वह अपनी माँ, खिन कई और दो भाइयों आंग सान लिन और आंग सान ऊ के साथ रंगून में बड़ी हुई। नई बर्मी सरकार के गठन के बाद सू की की माँ खिन कई एक राजनीतिक शख्सियत के रूप में प्रसिद्ध हासिल की। उन्हें १९६० में भारत और नेपाल में बर्मा का राजदूत नियुक्त किया गया। अपनी मां के साथ रह रही आंग सान सू की ने लेडी श्रीराम कॉलेज, नई दिल्ली से १९६४ में राजनीति विज्ञान में स्नातक हुईं। सू की ने अपनी पढ़ाई सेंट ह्यूग कॉलेज, ऑक्सफोर्ड में जारी रखते हुए दर्शन शास्त्र, राजनीति शास्त्र और अर्थशास्त्र में १९६९ में डिग्री हासिल की। स्नातक करने के बाद वह न्यूयॉर्क शहर में परिवार के एक दोस्त के साथ रहते हुए संयुक्त राष्ट्र में तीन साल के लिए काम किया। १९७२ में आंग सान सू की ने तिब्बती संस्कृति के एक विद्वान और भूटान में रह रहे डॉ॰ माइकल ऐरिस से शादी की। अगले साल लंदन में उन्होंने अपने पहले बेटे, अलेक्जेंडर ऐरिस, को जन्म दिया। उनका दूसरा बेटा किम १९७७ में पैदा हुआ। इस के बाद उन्होंने लंदन विश्वविद्यालय के स्कूल ओरिएंटल और अफ्रीकन स्टडीज में से १९८५ में पीएच.डी. हासिल की। १९८८ में सू की बर्मा अपनी बीमार माँ की सेवाश्रु के लिए लौट आईं, लेकिन बाद में लोकतंत्र समर्थक आंदोलन का नेतृत्व अपने हाथ में ले लिया। १९९५ में क्रिसमस के दौरान माइकल की बर्मा में सू की आखिरी मुलाकात साबित हुई क्योंकि इसके बाद बर्मा सरकार ने माइकल को प्रवेश के लिए वीसा देने से इंकार कर दिया। १९९७ में माइकल को प्रोस्टेट कैंसर होना पाया गया, जिसका बाद में उपचार किया गया। इसके बाद अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र संघ और पोप जान पाल द्वितीय द्वारा अपील किए जाने के बावजूद बर्मी सरकार ने उन्हें वीसा देने से यह कहकर इंकार कर दिया की उनके देश में उनके इलाज के लिए माकूल सुविधाएं नहीं हैं। इसके एवज में सू की को देश छोड़ने की इजाजत दे दी गई, लेकिन सू की ने देश में पुनः प्रवेश पर पाबंदी लगाए जाने की आशंका के मद्देनजर बर्मा छोड़कर नहीं गईं। माइकल का उनके ५३ वें जन्मदिन पर देहांत हो गया। १९८९ में अपनी पत्नी की नजरबंदी के बाद से माइकल उनसे केवल पाँच बार मिले। सू की के बच्चे आज अपनी मां से अलग ब्रिटेन में रहते हैं। २ मई २००८ को चक्रवात नरगिस के बर्मा में आए कहर की वजह से सू की का घर जीर्णशीर्ण हालात में है, यहां तक रात में उन्हें बिजली के अभाव में मोमबत्ती जलाकर रहना पड़ रहा है। उनके घर की मरम्मत के लिए अगस्त २००९ में बर्मी सरकार ने घोषणा की। सन्दर्भ http://khabar.ndtv.com/news/show/aung-san-suu-kyi-makes-history-with-parliamentary-oath-20644 सू ची ने सांसद के रूप में शपथ ली एन॰डी॰टी॰वी॰ मई 2, 2012 04:42 PM IST 7 जून 2013 https://web.archive.org/web/20120604095633/http://khabar.ndtv.com/news/show/aung-san-suu-kyi-makes-history-with-parliamentary-oath-20644 4 जून 2012 dead </ref> बाहरी कड़ियाँ म्यांमार : आंग सान सू की से बदलाव की उम्मीदं श्रेणी:1945 में जन्मे लोग श्रेणी:जीवित लोग श्रेणी:म्यान्मार श्रेणी:बर्मा की राजनीति