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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

बर्तोल्त ब्रेख्त

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Bertolt-Brecht.jpg बर्तोल्त ब्रेख्त यूगेन बर्थोल फ्रेडरिक ब्रेख्त yes 1898 2 10 औग्स्बुर्ग, बवारिया राज्य, जर्मन साम्राज्य yes 1956 8 14 1898 2 10 पूर्वी बर्लिन, पूर्वी जर्मनी जर्मन नाटककार, नाटक निर्देशक, कवि एपिक थियेटरनॉन एरिस्टोटेलियन ड्रामा Marianne Zoff (1922–27) Helene Weigel (1930–56) द थ्री पेन्नी ओपेरा लाइफ ऑफ गैलीलियो मदर करेज एण्ड हर चिल्ड्रेन द गुड पर्सन ऑफ शेजवान द कॉकेसियन चॉक सर्कल फ्रैंक बैन्होल्ज़र (1919–43) हने हेयॉब (1923–2009) स्तेफान ब्रेख्त (1924–2009) बारबरा ब्रेख्त (1930–2015) Unterschrift Bertolt Brecht (1898–1956).png बर्तोल्त ब्रेख्त बीसवीं सदी के एक प्रसिद्ध जर्मन कवि, नाटककार और नाट्य निर्देशक थे। द्वितीय विश्व-युद्ध के बाद ब्रेख्त ने अपनी पत्नी हेलेन विगेल के साथ मिलकर बर्लिन एन्सेंबल नाम से एक नाट्य मंडली का गठन किया और यूरोप के विभिन्न देशों में अपने नाटकों का प्रदर्शन किया।https://en.wikipedia.org/wiki/Bertolt_Brecht Bertolt Brecht wikipedia.org 2017-07-20 https://web.archive.org/web/20170720195058/https://en.wikipedia.org/wiki/Bertolt_Brecht 20 जुलाई 2017 live जीवन परिचय यूगेन बर्थोल फ्रेडरिक ब्रेख्त (बचपन का नाम) का जन्म जर्मनी के औग्स्बुर्ग में हुआ था। ब्रेख्त की मां एक धर्मपरायण प्रोटेस्टैंट थी जबकि उनके पिता कैथोलिक। उनके पिता एक स्थानीय पेपर मिल में काम करते थे, जिसमें तरक्की करते हुए वो कंपनी के निदेशक बने। उनकी प्रारंभिक शिक्षा उनके गृह कस्बे आग्सबुर्ग में हुई थी। 1917 में वह म्यूनिख विश्वविद्यालय में अध्ययन हेतु चले गये। यहाँ उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए चिकित्साशास्त्र को चुना। लेकिन उनका मन इसमें नहीं रमा। म्यूनिख विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान ही ब्रेख्त कविता तथा नाटक में दिलचस्पी लेने लगे थे। वहाँ के स्थानीय अखबारों में उनकी रचनायें प्रकाशित होने लगी थी। ब्रेख्त की उम्र महज 16 की थी जब पहला विश्व युद्ध शुरू हो गया। प्रथम विश्वयुद्ध के समय ही उन्हे सेना में जाने का अवसर मिला। उनको सेना के मैडिकल कोर में काम पर रखा गया। संयोगवश उनकी नियुक्ति उन्हीं के कस्बे आग्सबुर्ग में ही हो गई। सेना में सेवा की वजह से उनकी काव्य संवेदना पर युद्ध की विनाशकारी विभीषिका का गहरा असर पड़ा। नाट्य सिद्धांत ब्रेख्त ने अपनी रचनाओं के लिये जो विचाधारा चुनी वे उसके साथ आजीवन जुड़े रहे। उन्होंने नाटकों द्वारा मार्क्सवादी विचारधारा का प्रचार प्रसार करने के लिये ‘एपिक थियेटर’ नाम से नाट्य मंडली का गठन किया। हिंदी में एपिक थियेटर को लोक नाटक के रूप में जाना जाता है। ब्रेख्त ने पारंपरिक अरस्तू के नाट्य सिद्धांतों से सर्वथा भिन्न तथा मौलिक नाट्य सिद्धांत रचे। उनका तर्क था कि जो कुछ मंच पर घटित है उससे दर्शक एकात्म न हों। वे समझे कि जो कुछ दिखाया जा रहा है वह विगत की ही गाथा है। गौरतलब है कि ऐसा ही प्रभाव लोक गीतों को गाये जाने की कला करती है। रचनाएं बर्तोल्त ब्रेख्त की प्रमुख रचनाएं हैं : द थ्री पेन्नी ओपेरा लाइफ ऑफ गैलीलियो मदर करेज एण्ड हर चिल्ड्रेन (नीलाभ अश्क द्वारा हिन्दी में हिम्मत माई शीर्षक से अनुवाद)http://www.bbc.com/hindi/india/2016/07/160725_neelabh_ashk_pu अधूरी ज़िंदगी ही जी पाए नीलाभ bbc,com 2017-07-20 https://web.archive.org/web/20160728162102/http://www.bbc.com/hindi/india/2016/07/160725_neelabh_ashk_pu 28 जुलाई 2016 live द गुड पर्सन ऑफ शेजवान द कॉकेसियन चॉक सर्कल सन्दर्भ श्रेणी:जर्मन भाषा श्रेणी:जर्मन साहित्यकार श्रेणी:1898 में जन्मे लोग श्रेणी:१९५६ में निधन