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मुहम्मद अकबर
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मुहम्मद अकबर (१६५३-१७०४ ई.) औरंगजेब का चौथा पुत्र था और 'अकबर द्वितीय' के नाम से इतिहास में जाना जाता है। उसने अपने पिता औरंगजेब के विरुद्ध विद्रोह कर सम्राट बनने की कोशिश की जिसमें उसे सफलता नहीं मिली।
सन् १६७८ में पश्चिमोत्तर भारत के अंतर्गत जमरूद नामक स्थान पर जोधपुर के महाराजा यशवंत सिंह की मृत्यु हो गई। औरंगजेब ने तत्काल महाराजा के राज्य पर कब्जा किया और उनके बालक पुत्र अजीत सिंह को उसकी माँ के साथ शाही हरम में कैद कर लिया। स्वयं औरंगजेब अजमेर पहुँचा और जिजिया लागू कर दिया। इसी बीच दुर्गादास राठौर लड़-भिड़कर अजीत सिंह और महारानी को दिल्ली से निकाल लाया। उधर अपनी संशयालु प्रकृति के कारण औरंगजेब ने अकबर को चित्तौड़ की सूबेदारी से हटाकर मारवाड़ भेज दिया। इससे क्षुब्ध अकबर ने महाराणा जयसिंह और दुर्गादास से मिलकर स्वयं को मुगल सम्राट घोषित किया और मुगल साम्राज्य पर कब्जा करने के इरादे से अजमेर की तरफ बढ़ा। औरंगजेब तत्काल इस स्थिति में नहीं था कि वह अकबर की ७० हजार सेना से टक्कर ले सकता। अत उसने धोखाधड़ी भरा एक पत्र अकबर के नाम लिखा और योजनानुसार उसे राजपूतों के हाथों पड़ जाने दिया। पत्र पाकर राजपूत शंकित हो उठे और उन्होंने अकबर का साथ छोड़ दिया। विवश अकबर को युद्धविरत होना पड़ा। कुछ समय उपरांत पत्र का रहस्य खुल जाने पर दुर्गादास स्वयं अकबर से मिला और मई, १६८१ में सुरक्षित उसे दक्षिण भारत पहुँचा दिया, जहाँ वह एक वर्ष से अधिक शिवाजी के पुत्र संभाजीमहाराज (शंभुजी) के दरबार में रहा। पश्चात् अकबर फारस चला गया। वहाँ सन् १७०४ में उसकी मृत्यु हो गई।
बाहरी कड़ियाँ
Genealogy of Dilrus Bano
Family sketch
श्रेणी:मुगल राजकुमार