Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

ऑपरेशन पोलो

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

हैदराबाद का विलय Hyderabad state from the Imperial Gazetteer of India, 1909.jpg 300px १९०९ में हैदराबाद रियासत (बिरार को छोड़कर) 13–18 सितम्बर, 1948 हैदराबाद रियासत 17 00 N 78 50 E type:country_source:kolossus-cawiki Decisive Indian victory Annexation of Hyderabad to Union of India None Dominion of India Hyderabad State Dominion of India Sardar PatelDominion of India Roy BucherDominion of India जयन्त नाथ चौधुरी Hyderabad State S.A. El EdroosHyderabad State Qasim Razvi 35,000 Indian Armed Forces 22,000 Hyderabad State Forcesest. 20,000 रजाकारJuly 2010 32 killedhttp://indianarmy.nic.in Official Indian army website complete Roll of Honor of Indian KIA Indianarmy.nic.in 2015-08-12 https://web.archive.org/web/20170626223336/https://indianarmy.nic.in/ 26 जून 2017 live Hyderabad State Forces: 807 killed unknown wounded1,647 POWsरजाकारों:1,373 killed 1,911 captured Sunderlal Committee: 30,000 – 40,000 civilians killed responsible observers: 200,000 civilians killedSmith 1950 46 thumb|right|200px|मेजर जनरल सैयद अहमद अल एदूर्स (दाएँ) मेजर जनरल जयन्त नाथ चौधुरी के सामने सिकन्दराबाद में आत्मसमर्पण करते हुए। ऑपरेशन पोलो सितम्बर 1948 को भारतीय सेना के गुप्त ऑपरेशन का नाम था जिसमें हैदराबाद के आखिरी निजाम को सत्ता से अपदस्थ कर दिया गया और हैदराबाद को भारत का हिस्सा बना लिया गया।https://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/nizam-writ-ran-after-police-action-till-1950-accession/articleshow/103486501.cms Nizam writ ran after police action till 1950 accession ध्यातव्य है कि भारत की स्वतंत्रता के बाद जब भारतीय संघ का गठन हो रहा था, हैदराबाद के निजाम ने भारत के बीच में होते हुए भी स्वतंत्र देश रहने की ही कवायत शुरू की थी। विभाजन के दौरान हैदराबाद भी उन शाही घरानो में से था जिन्हे पूर्ण आजादी दी गई थी हालाँकि 1948 में उनके पास दो ही विकल्प बचे थे भारत या पाकिस्तान में शामिल होना। ज्यादातर हिन्दू आबादी वाले राज्य के मुसलमान शासक और आखिरी निजाम ओस्मान अली खान ने आजाद रहने फैसला किया और अपने साधारण सेना के बल पर राज करने का फैसला किया। निजाम ने ज्यादातर मुस्लिम सैनिको वाली रजाकारों की सेना बनाई। भारत सरकार उत्सुकता से हैदराबाद की तरफ देख रही थी और सोच रही थी की हैदराबाद के निजाम खुद भारत संघ में सम्मिलित हो जायेंगे। लेकिन रजाकार सेना की दुर्दांतता के कारण सरदार पटेल ने हैदराबाद को जबरदस्ती कब्जाने का फैसला किया था। सरदार पटेल ने ये काम पुलिस के द्वारा किया जिसमे सिर्फ पांच दिन लगे रजाकारों की मुस्लिम सेना आसानी से हार गई। अभियान के दौरान व्यापक तौर पर जातिगत हिंसा हुई थी, अभियान समाप्ति के बाद नेहरू ने इसपे जाँच के लिए एक कमिटी बनाई थी जिसकी रिपोर्ट साल 2014 सार्वजनिक हुई। अर्थात रिपोर्ट को जारी ही नहीं किया गया था, रिपोर्ट बनाने के लिए सुन्दरलाल कमिटी बानी थी, रिपोर्ट के मुताबिक इस अभियान में 27 से 40 हजार जाने गई थी हालाँकि जानकार ये आंकड़ा दो लाख से भी ज्यादा बताते हैं। मुस्लिम लीग के नेता जिन्ना के प्रभाव में हैदराबाद के निजाम नवाब बहादुर जंग ने लोकतंत्र को नहीं माना था, नवाब ने काज़मी रज्मी को जो की एमआईएम ( मजलिसे एत्तहुड मुस्लिमीन) का प्रमुख लीडर था ने रजाकारों की सेना बनाई थी जो करीब दो लाख क तादात में थी। मुस्लिम आबादी बढ़ने के लिए उसने हैदराबाद में लूटपाट मचा दी थी, क्योंकि हिन्दू हैदराबाद को भारत में चाहते हे मीरपुर नौखालिया नरसंहार ( मुसलमानों ने किया हिन्दुओ पे) उनके जहाँ में थे। पांच हजार से ज्यादा हिन्दुओ को रजाकार मार चुके थे जो की आधिकारिक आंकड़े है। ऑस्ट्रेलिया की कंपनी भी उन्हें हथियार सप्लाई कर रही थी, तब पटेल ने तय किया की इस तरह तो हैदराबाद भारत के दिल में नासूर बन जायेगा और तब आर्मी ऑपरेशन पोलो को प्लान किया गया। कहा जाता है कि ऑपरेशन के बाद में हर जगह सेना ने मुसलमानों को शिनाख्त कर कर के मौत के घाट उत्तर दिया था। इसीलिए आज तक ये रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई चुनावो से पहले कांग्रेस ने साम्प्रदायिक फायदा उठाने के लिए शायद इसको बहार निकला था। हैदराबाद रियासत सन्दर्भ इन्हें भी देखिये भारत का राजनीतिक एकीकरण मीर उस्मान अली ख़ान श्रेणी:भारतीय सेना के ऑपरेशन श्रेणी:हैदराबाद