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411 समाचार
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पारिजात वृक्ष (किन्तूर)

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पारिजात वृक्ष, किन्तूरParijaat tree, Kintoor Parijat-tree-at-Kintoor-Barabanki-001.jpg पारिजात वृक्ष, किन्तूर India Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश में स्थान yes गोरखचिंच Adansonia digitata किन्तूर, बाराबंकी ज़िला, उत्तर प्रदेश, भारत 27.0035 N 81.4817 E inline, title पारिजात वृक्ष, किन्तूर 1208 से 1244 ईसवी के बीच (रेडियोकार्बन कालनिर्धारण द्वारा अनुमानित) thumb|पारिजात वृक्ष (बरौलिया) thumb|पारिजात वृक्ष (बरौलिया ) पारिजात वृक्ष (बरौलिया ) भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के बाराबंकी ज़िले के अंतर्गत बरौलिया ग्राम में स्थित एक गोरखचिंच का वृक्ष है। भारत सरकार द्वारा संरक्षित यह वृक्ष सांस्कृतिक और पौराणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। बरौलिया ग्राम से 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कुंतेश्वर महादेव मंदिर है, जिसको पांडवों की माता कुंती ने अज्ञातवास के समय स्थापित किया था । माता कुंती पारिजात के पुष्प से इस मंदिर में प्रतिदिन पूजन करती थी। ऐसी लोक मान्यता है कि इस वृक्ष के पुष्प के पूजन से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। महाभारत कालीन होने के कारण पारिजात वृक्ष का महत्व और बढ़ जाता हैhttps://barabanki.nic.in/tourist-place/parijaat/ Parijaat Tree | District Barabanki, Government of Uttar Pradesh | IndiaThe Baobabs: Pachycauls of Africa, Madagascar and Australia https://archive.org/details/baobabspachycaul00wick_929 limited Wickens Gerald E. Pat Lowe 2008 Springer Science+Business Media 978-1-4020-6430-2 61 भौगोलिक स्थिति ग्राम बरौलिया बाराबंकी जिला मुख्यालय से लगभग 38 किलोमीटर दूर पूर्व दिशा में स्थित है। इसी ग्राम में विश्व प्रसिद्ध पारिजात वृक्ष स्थित है। यह वृक्ष सरकार द्वारा संरक्षित है।http://barabanki.nic.in/places.htm संग्रहीत प्रति 21 अगस्त 2016 https://web.archive.org/web/20101218013351/http://barabanki.nic.in/places.htm 18 दिसंबर 2010 live पौराणिक महत्व माना जाता है कि किन्तूर गांव का नाम पाण्डवों की माता कुन्ती के नाम पर है। जब धृतराष्ट्र ने पाण्डु पुत्रों को अज्ञातवास दिया तो पांडवों ने अपनी माता कुन्ती के साथ यहां के वन में निवास किया था। इसी अवधि में ग्राम किन्तूर में कुंतेश्वर महादेव की स्थापना हुयी थी। भगवान शिव की पूजा करने के लिए माता कुंती ने स्वर्ग से पारिजात पुष्प लाये जाने की इच्छा जाहिर की। अपनी माता की इच्छानुसार अर्जुन ने स्वर्ग से इस वृक्ष को लेकर यहां स्थापित कर दिया दूसरी पौराणिक मान्यता यह है कि एक बार श्रीकृष्ण अपनी पटरानी रुक्मिणी के साथ व्रतोद्यापन समारोह में रैवतक पर्वत पर आ गए। उसी समय नारद अपने हाथ में पारिजात का पुष्प लिए हुए आए। नारद ने इस पुष्प को श्रीकृष्ण को भेंट कर दिया। श्रीकृष्ण ने इस पुष्प को रुक्मिणी को दे दिया और रुक्मिणी ने इसे अपने बालों के जूड़े में लगा लिया इस पर नारद ने प्रशंसा करते हुए कहा कि फूल को जूड़े में लगाने पर रुक्मिणी अपनी सौतों से हजार गुना सुन्दर लगने लगी हैं। पास में खडी हुयी सत्यभामा की दासियों ने इसकी सूचना सत्यभामा को दे दी। श्री कृष्ण जब द्वारिका में सत्यभामा के महल में पहुंचे तो सत्यभामा ने पारिजात वृक्ष लाने के लिए हठ किया। सत्यभामा को प्रसन्न करने के लिए स्वर्ग में स्थित पारिजात को लाने के लिए देवराज इंद्र पर आक्रमण कर पारिजात वृक्ष को पृथ्वी पर द्वारिका ले आये और वहाँ से अर्जुन ने इस पारिजात को बरौलिया (किंतूर के पास) में स्थापित कर दिया।http://shabd-braham.com/ShabdB/archive/v1i2/sbd-V1-i2-sn4.pdf संग्रहीत प्रति 21 अगस्त 2016 https://web.archive.org/web/20160305131704/http://shabd-braham.com/ShabdB/archive/v1i2/sbd-V1-i2-sn4.pdf 5 मार्च 2016 live विशेषताएँ लोकमत इस वृक्ष की आयु लगभग 1000 वर्ष मानता है। सन् 2019 में हुए रेडियोकार्बन कालनिर्धारण में इसकी आयु तब 793±37 वर्ष मापी गई। इसके तने का परिमाप 50 फ़ीट और ऊंचाई लगभग 45 फ़ीट होगी। गोरखचिंच (बाओबाब) जाति के वृक्ष केवल अफ्रीका के कुछ भागों में ही उगते हैं, इसलिए इस वृक्ष की यहाँ उपस्थिति एक रहस्य है। पुष्प इसका पुष्प श्वेत रंग का और सूखने पर सुनहरे रंग का हो जाता है। इस वृक्ष में पुष्प बहुत ही कम संख्या में और कभी-कभी ही गंगा दशहरा (जून के माह) के अवसर पर लगते हैं। पुष्प सदैव रात्रि में ही पुष्पित होते हैं और प्रातः काल मुरझा जाते हैं। रात्रि के समय पुष्प पुष्पित होने पर इसकी सुगंध दूर-दूर तक फैल जाती है। इन्हें ही देखें गोरखचिंच (अफ्रीकी बाओबाब) किन्तूर बाराबंकी ज़िला सन्दर्भ श्रेणी:विशिष्ट गोरक्षी वृक्ष श्रेणी:हिन्दू धर्म में पवित्र वृक्ष श्रेणी:बाराबंकी ज़िला श्रेणी:उत्तर प्रदेश के दर्शनीय स्थल