411 REFERENCE · Wikipedia
हिन्दू धर्म और सिख धर्म
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
right|thumb|300px|गुरु नानक के जन्म का चित्रण, जिसमें सभी देवी-देवता उनका अभिनन्दन करते हुए दिख रहे हैं।
हिन्दू धर्म और सिख धर्म दोनों मूलतः भारत की धरती से निकले धर्म हैं। हिन्दू धर्म एक अति प्राचीन (अनादि) धर्म है जो कई हजार वर्षों के विकास का मार्ग तय करके आया है। सिख धर्म की स्थापना १५वीं शताब्दी में गुरु नानक ने की। उस समय भारत पर मुगलों का शासन था। नानकदेव ने सारे हिंदू धामों की यात्रा की थी- जगन्नाथ पुरी, द्वारिका हो या रामेश्वरम। गुरुद्वारे भी सभी जगह हैं।
दोनों धर्मों में बहुत सी बातें और दर्शन समान हैं, जैसे कर्म, धर्म, मुक्ति, माया, संसार आदि। जब मुगल काल में शासकों के तलवार के बल से हिन्दुओं को जबरन मुसलमान बनाया जा रहा था, उस समय सिख धर्म उनके इस अत्याचार के विरोध में खड़ा हुआ। गुरु नानक पहले व्यक्ति थे जिन्होने बाबर के विरुद्ध आवाज उठायी थी। सिख धर्म अत्याचार के प्रतिकार, ईश्वर-भक्ति, और सबकी समानता का अनूठा संगम है। भारत में अंग्रेजों का शासन जड़ पकड़ने तक सिख धर्म को हिन्दू धर्म का अभिन्न अंग माना जाता था।How The British Divided Punjab Into Hindu And Sikh दसवें और अंतिम गुरु गोबिन्द सिंह कहते हैं कि "सकल जगत में खालसा पंथ गाजे, जगे धर्म हिंदू सकल भंड भाजे।" गुरु परम्परा में दसवें और अंतिम गुरु गोबिन्दसिंह इसे स्पष्ट करते हुए कहते हैं कि "सकल जगत में खालसा पंथ गाजे जगे धर्म हिंदू सकल भंड भाजे।"
गुरु ग्रंथ साहिब में भारत भर के 25 भक्त कवियों द्वारा लिखी गई बाणियां हैं, जिनमें से 15 गुरु नानक जी के समय के भक्तिमार्ग के कवियों की हैं।हिंदुओं-सिखों को बांटने की कोशिश
हिन्दू धर्म और सिख धर्म को जोड़नेवाली कड़ी खत्री है। सिख धर्म प्रचारक गुरू नानक लाहौर जिले के तलवंडी (ननकाना साहिब) के वेदी खत्री थे। उनके उत्तराधिकारी गुरू अंगद टिहुन खत्री थे। हिन्दू और सिक्ख खत्रियों का संबंध तो पूरी तरह रोटी-बेटी का रहा है। दोनो का खान-पान, विवाह संस्कार और अन्य प्रथाएं भी एक जैसी रही हैं। एक समय में खत्री परिवार में पैदा होनेवाला पहला बालक संस्कार करके सिख बनाया जाता था। अरदास और भोग हिन्दु खत्रियों में भी समान रूप से प्रचलित था।
हिंदू और सिख यूं जुड़े हैं जैसे नाखून और मांस
खुशवंत सिंह ने लिखा है, कि हिंदू और सिख यूं जुड़े हैं जैसे नाखून और मांस। सिखों को अलग कभी समझा नहीं गया। आज भी हिंदू-सिखों के बीच विवाह परंपरा तक कायम है। खुशवंत सिंह ने 1991 में, इलस्ट्रेटेड वीकली में लिखा था, "सिख धर्म हिंदू धर्म की एक शाखा है और केवल खालसा आस्था के बाहरी प्रतीकों द्वारा ही यह इससे अलग है। धर्मशास्त्र पूरी तरह से हिंदू है। गुरु अर्जुन द्वारा रचित गुरु ग्रंथ साहिब का लगभग नौवां भाग वास्तव में वेदान्त है, और उपनिषदों और गीता में आप जो कुछ भी पढ़ते हैं उसका सार है।" हिंदू और सिख यूं जुड़े हैं जैसे नाखून और मांस
सिख पंथ के उदासी और निर्मल अखाड़े तो दशनामी परंपरा में
सिखों में अनेक संप्रदाय हैं, जैसे उदासी, निर्मल, नानकपन्थी, खालसा, सहजधारी, नामधारी कूका, निरंकारी, और सरवरिया। उदासी संप्रदाय को गुरु नानक के पुत्र श्रीचंद महाराज ने चलाया था। उदासी और निर्मल संप्रदाय के अपने अखाड़े हैं और दशनामी अखाड़ा परंपरा में उनको विशिष्ट स्थान प्राप्त है। इनके अपनी संस्कृत पाठशालाएं होती हैं, जहां वेद और सनातन परंपरा के सभी ग्रंथ भी पढ़ाए जाते हैं। बौद्धों और जैनियों में अखाड़े नहीं होते और हिंदुओं के जो पारंपरिक रीति-रिवाज़ या व्रत अनुष्ठान हैं, वे भी उनके यहां नहीं होते। अलबत्ता मूर्तिपूजा का विधान है। सिखों में उदासीन पंथ को छोड़ कर और कहीं मूर्तिपूजा तो नहीं है, लेकिन मूर्तिपूजा का कोई निषेध भी नहीं है। इसलिए हिंदू सनातनी तीर्थों और मंदिरों में सिख खूब आते-जाते हैं।
परस्पर शादी विवाह और जातियां कनाडा में भी
कनाडा में सिखों और पंजाबी हिंदुओं की आबादी काफी है। दोनों में आपस में विवाह भी होते हैं। विवाह अधिकतर गुरुद्वारे में होते हैं, क्योंकि वहां अधिक ताम-झाम नहीं होता। इसके बाद दूल्हा या दुल्हन दोनों ही संप्रदायों की परंपराएं स्वीकार कर लेते हैं। ये विवाह कोई प्रेम विवाह ही नहीं बल्कि माता-पिता द्वारा नियोजित विवाह भी होती हैं. और ये सहज स्वीकार्य है। इसके बावजूद वहाँ भी भारत की तरह जट सिख अपनी ही जाति में विवाह करते हैं।
अंग्रेजी शासन के पहले हिन्दू और सिखों में कोई भेद नहीं था
1881 की ब्रिटिश पंजाब जनगणना में भी हिंदू और सिख के बीच कोई भेद नहीं था। 1881 की जनगणना में 80% से अधिक सिखों ने हिंदू होने की सूचना दी थी। स्मरणीय है कि जिस सरकार ने यह जनगणना की थी, वह हिंदुओं के प्रति काफी हद तक शत्रुतापूर्ण थी।
गुरु श्री तेग बहादुर जी का कथन
मेरा धर्म हिंदू है, और जो मुझे इतना प्रिय है उसे मैं कैसे त्याग सकता हूँ? केवल एक अज्ञानी ही इस धर्म को छोड़ेगा, जो आपको इस लोक और परलोक दोनों में लाभान्वित करता है। इस धर्म की रक्षा स्वयं भगवान करते हैं और इसे नष्ट नहीं किया जा सकता। श्री गुरु प्रताप सूरज ग्रंथ, अध्याय 12, पृष्ठ 467
जब गुरु तेग बहादुर ने कश्मीर के कई हिंदू ब्राह्मणों को शरण और सहायता प्रदान की, जिन्हें औरंगजेब द्वारा इस्लाम धर्म अपनाने के लिए बाध्य किया गया था, तो वे मुगल अधिकारियों के साथ टकराव में पड़ गए। गुरु ने हिंदुओं को निर्देश दिया कि वे सम्राट से कहें कि यदि गुरु इस्लाम धर्म अपना लेते हैं, तो वे इस्लाम स्वीकार कर लेंगे। फिर उन्होंने इस्लाम धर्म अपनाने का इरादा किए बिना हिंदुओं को औरंगजेब से बचाने के लिए दिल्ली की यात्रा की। औरंगजेब के आदेश पर, उन्हें रास्ते में ही हिरासत में ले लिया गया। उन्हें पाँच सिखों के साथ दिल्ली ले जाया गया और शहर के गढ़ में कैद कर दिया गया।
उन्हें औरंगजेब का धर्म परिवर्तन करने या कैद के दौरान यातना सहने का विकल्प दिया गया। जब औरंगजेब का धैर्य जवाब दे गया, तो उसने गुरु को आदेश दिया कि या तो वे इस्लाम धर्म अपना लें या कोई चमत्कार कर दिखाएँ। अगर तेग बहादुर उनकी बात मान लेते, तो बादशाह ने उन्हें भारी इनाम देने की घोषणा की थी; अगर ऐसा नहीं हुआ, तो गुरु को फाँसी दे दी जाए। गुरु ने दोनों सांसारिक सम्मानों को अस्वीकार कर दिया और बलपूर्वक कहा कि मुझे मृत्यु का भय नहीं है।गुरु तेग बहादुर वह दुर्लभ रत्न हैं, जो “हिंद की चादर” बन गए
इन्हें भी देखें
ख़ालसा
राष्ट्रीय सिख संगत
सनातन सिख
नानकपंथी
बौद्ध धर्म एवं हिन्दू धर्म
सिख धर्म और इस्लाम
बाहरी कड़ियाँ
सिख धर्म को हिन्दुओं से कोई खतरा नहीं (पंजाब केसरी ; मई २०१७)
हम क्यों भूल जाते हैं कि सिख हिन्दुओं से ही आए हैं? - तरलोचन सिंह अध्यक्ष, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग
सन्दर्भ
श्रेणी:तुलनात्मक धर्म