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411 समाचार
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श्रेणी समाजवाद

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श्रेणी समाजवाद (Guild socialism) एक राजनैतिक आन्दोलन है जो उद्योगों पर श्रमिकों के नियंत्रण का पक्षधर है। इसका जन्म यूनाइटेड किंगडम में हुआ तथा बीसवीं शताब्दी के प्रथम चतुर्थांश में सर्वाधिक प्रभावशाली रहा। यह आन्दोलन सी डी एच कोल (G. D. H. Cole) से मजबूती से जुड़ा था और विलियम मोरिस के विचारों से प्रभावित था। परिचय श्रेणी समाजवाद श्रम समाजवाद और राज्य समाजवाद का समन्वय माना जा सकता है। श्रम समाजवादियों की तरह 'श्रेणी समाजवादियों' ने नौकरशाही और उद्योगों पर राज्य के नियंत्रण की भर्त्सना की तथा 'राज्य समाजवादियों' की तरह राजनीतिक संगठन और नियंत्रण के यंत्र के रूप में राज्य को आवश्यक माना। राज्य के उद्योगों के मालिक बने रहने में इन्हें कोई आपत्ति न थी परंतु उद्योगों का नियंत्रण और संचालन उन सभी उद्योग में लगे हुए शारीरिक और मानसिक श्रमिकों के श्रमसंघों द्वारा ही। श्रेणी समाजवाद सामाजिक स्वामित्व को स्वीकर करता है और औद्योगिक स्वायत्तता का समर्थन करता है। इस विचारधारा के अनुसार ऐसे राजनीतिक लोकतंत्र का कोई अर्थ नहीं जिसमें उद्योगों का नियंत्रण निरंकुशता के आधार पर होता है। राजनीतिशास्त्र के प्रसिद्ध विद्वान् श्री जी. डी. एच. कोल ने इसकी व्याख्या इस प्रकार की है : यह समाजवाद राज्य की आवश्यकता की स्वीकार करता है परंतु वह यह मानता है कि समाज के सुखदायी परिवर्तन के लिए यह आवश्यक है कि औद्योगिक शक्ति प्रधान रूप से मजदूरों के हाथ में हो। श्रेणी समाजवाद राजनीतिक तथा प्रशासकीय मामलों को औद्योगिक तथा आर्थिक मामलों से पृथक् रखने के पक्ष में है। राजनीतिक अधिकारियों तथा श्रमिक अधिकारियों के ऊपर एक ऐसी समिति की कल्पना की गई जिसमें दोनों के ही प्रतिनिधि हों। यही सम्मिलित समिति सभी विवादग्रस्त प्रश्नों पर अंतिम निर्णय देगी। इस विचारधारा के विरोधियों ने इस प्रकार राजनीति और आर्थिक मामलों का विभाजन असंभव माना है। अर्नेस्ट बारबर ने लिखा है राजनीतिक तथा औद्योगिक अधिकारों में विभाजन की वकालत करनेवाला कोई भी सिद्धांत इस सत्य के सामने कि वर्तमान युग के सभी कार्यकलाप एक दूसरे पर आश्रित हैं, ध्वस्त हो जाएगा।'' राज्य का क्या रूप हो, इस प्रश्न के उत्तर पर भी सभी श्रेणी समाजवादी एकमत नहीं थे। कुछ तो राज्यसत्ता के वर्तमान रूप के ही समर्थक थे और कुछ संघीय रूप के पोषक जिसमें श्रमिक संघ के, उपभोक्ता संघ के, स्थानीय स्वायत्त शासन के तथा अन्य दूसरे सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि हों। वास्तव में श्रेणी समाजवादियों का लक्ष्य था आर्थिक विकेंद्रीकरण तथा श्रम समस्याओं के समाधान द्वारा मध्यकालीन श्रेणियों की पुन: स्थापना। इतिहास श्रेणी समाजवाद का प्रारंभ १९वीं शताब्दी के मध्य से होता है। समाजवाद के इस रूप की कल्पना सर्वप्रथम रस्किन तथा कुछ अन्य क्रिश्चिन समाजवादियों ने की। केटेलर और काउंट डी. मन जैसे समाजसुधारकों ने भी इसका समर्थन किया। परंतु इसने अपना वास्तविक रूप २०वीं शताब्दी के प्रथम भाग में लिया। ए. जे. पेंटी ने 'श्रेणीप्रणाली की पुन: स्थापना' (रेस्टोरेशन ऑव दी गिल्ड सिस्टम) नामक पुस्तक प्रकाशित की। इस पुस्तक तथा ओरेज द्वारा संपादित 'नवयुग' (न्यू एज) पत्रिका ने इस आंदोलन की आवाज बुलंद की। प्रथम युद्ध प्रारंभ होने के पहले ही इस आंदोलन ने प्रौढ़ता प्राप्त की। वह काल श्रमिक अशांति का काल कहा जा सकता है। बेजोड़ हड़तालें हुईं। श्रमिकों में नवचेतना जाग्रत हुई। आर्थिक क्रांति के लिए श्रमिकों में नया जोश पैदा हुआ। श्रमिक वर्ग आयोगों में अपने महत्वपूर्ण स्थान को समझने लगा तथा अधिकार के प्रति जागरूक हो गया। महायुद्ध की अवधि में ही जी. डी. एच. कोल, डब्ल्यू. मेलोर, तथा रेकेट के प्रयास से इंग्लैंड में राष्ट्रीय श्रेणी संघ की स्थापना हुई। तत्कालीन श्रेणियों में ग्लासगो और लीड्ज की दर्जी श्रेणियों तथा लंदन के पियानों कर्मचारी श्रेणी का महत्वपूर्ण स्थान है। लंदन की 'राष्ट्रीय निर्माण श्रेणी' ने युद्धकाल में कई महत्वपूर्ण ठेके लिए तथा महत्व के कार्य किए। दलीय 'शाप स्टिवर्ड' आंदोलन के द्वारा श्रमिकों ने युद्ध उद्योग में नियंत्रण की माँग की। खदानों के राष्ट्रीयकरण की माँग करनेवाले खदक संघ ने अपना कार्यक्रम बदल दिया और खदानों के स्वामित्व तथा गणतंत्रत्रात्मक सिद्धांतों पर उसके नियंत्रण की माँग करना आरंभ किया। युद्धकाल में सरकार से भी इन श्रेणियों को सहायता मिलती रही। परंतु युद्ध के बाद १९२१ की मंदी इस आंदोलन के लिए घातक सिद्ध हुई। जब राष्ट्रीय निर्माण श्रेणी को सरकारी सहायता बंद हो गई तो वह श्रेणी समाप्त हो गई। 'शाप स्टिवर्ड' आंदोलन भी विच्छिन्न हो गया। सत्य तो यह है कि श्रेणी समाजवाद आंदोलन जन आंदोलन का रूप न ले सका और युद्ध की समाप्ति के कुछ ही वर्ष बाद यह आंदोलन ध्वस्त हो गया। आज यह केवल आर्थिक इतिहास का विषय भर रह गया है। बाहरी कड़ियाँ श्रेणी:समाजवाद