411 REFERENCE · Wikipedia
दिल्ली षड्यंत्र मामला
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
An assassination attempt on Lord Charles Hardinge.jpg लॉर्ड हार्डिंग पर हुए हमले का एक चित्र। १२ दिसम्बर 1912 चाँदनी चौक, दिल्ली India New Delhi#India दिल्ली में स्थिति 28.656 77.231 type:event inline,title दिल्ली-लाहौर षडयन्त्र रासबिहारी बोस बसन्त कुमार विश्वास १ १
दिल्ली षडयन्त्र मामला (अंग्रेजी: Delhi conspiracy case ), जिसे दिल्ली-लाहौर षडयन्त्र के नाम से भी जाना जाता है, 1912 में भारत के तत्कालीन वाइसराय लॉर्ड हार्डिंग की हत्या के लिए रचे गए एक षड्यन्त्र के सन्दर्भ में प्रयोग होता है, जब ब्रिटिश भारत की राजधानी के कलकत्ता से नई दिल्ली में स्थानान्तरित होने के अवसर पर वह दिल्ली aaya tha। रासबिहारी बोस को इस षड्यन्त्र का प्रणेता माना जाता है। लॉर्ड हार्डिंग पर 23 दिसम्बर 1912 को चाँदनी चौक में एक जुलूस के दौरान एक बम फेंका गया था, जिसमें वह बुरी तरह घायल हो गए थे।Delhi remembers Hardinge bomb case martyrs दिल्ली ने हार्डिंग बम प्रकरण के शहीदों को याद किया https://www.thehindu.com/news/cities/Delhi/delhi-remembers-hardinge-bomb-case-martyrs/article8574119.ece 11 अगस्त 2018 द हिन्दू 9 मई 2016 en-IN https://web.archive.org/web/20180126154854/http://www.thehindu.com/news/cities/Delhi/delhi-remembers-hardinge-bomb-case-martyrs/article8574119.ece 26 जनवरी 2018 live इस घटनाक्रम में हार्डिंग के महावत की मृत्यु हो गयी थी। इस अपराध के आरोप में बसन्त कुमार विश्वास, बाल मुकुन्द, अवध बिहारी व मास्टर अमीर चन्द को फाँसी की सजा दे दी गयी, जबकि रासबिहारी बोस गिरफ्तारी से बचते हुए जापान फरार हो गए थे, जोरावर सिंह बारहठ (केसरी सिंह बारहठ के छोटे भाई, राजस्थान) भी फरार हो गए थे और अमर दास वैरागी नाम परिवर्तन कर लिया।
पृष्ठभूमि
अंगूठाकार|left|रासबिहारी बोस, जिन्होंने इस पूरे हमले की योजना बनाई थी।
इस षड्यंत्र का प्रणेता रासबिहारी बोस को माना जाता है। देहरादून के वन अनुसंधान संस्थान में कुछ समय तक हेड क्लर्क के रूप में काम करने के दौरान ही बोस का परिचय क्रान्तिकारी जतिन मुखर्जी की अगुआई वाले युगान्तर नामक क्रान्तिकारी संगठन के अमरेन्द्र चटर्जी से हुआ, और वह बंगाल के क्रान्तिकारियों के साथ जुड़ गये थे। इसके कुछ समय बाद वह अरबिंदो घोष के राजनीतिक शिष्य रहे जतीन्द्रनाथ बनर्जी उर्फ निरालम्ब स्वामी के सम्पर्क में आने पर संयुक्त प्रान्त, (वर्तमान उत्तर प्रदेश) और पंजाब के प्रमुख आर्य समाजी क्रान्तिकारियों के भी निकट आये।
दिल्ली में जार्ज पंचम के १२ दिसंबर १९११ को होने वाले दिल्ली दरबार के बाद वायसराय लॉर्ड हार्डिंग की दिल्ली में सवारी निकाली जा रही थी। इस शोभायात्रा की सुरक्षा में अंग्रेज़ों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी थी। सादे कपड़ों में सीआईडी के कई आदमी यात्रा से हफ्तों पहले ही पूरी दिल्ली में फ़ैल गए थे।सरला १९९९ २७४ यात्रा वाले दिन भी सुरक्षा इंतज़ाम सख्त थे। दो सुपरिंटेंडेंट, दो डिप्टी-सुपरिंटेंडेंट, पांच सार्जेंट और ७५ हेड कांस्टेबल और ३४ माउंटेड कांस्टेबल सुरक्षा पंक्ति में लगे थे।सरला १९९९ २७४ इनके अतिरिक्त इलेवेंथ लैंसर्स की पूरी कम्पनी को भी तैनात किया गया था।सरला १९९९ २७४
बोस की योजना इसी शोभायात्रा में हार्डिंग पर बम फेंकने की थी।सशस्त्र क्रांति के योद्धासितंबर 2021 InternetArchiveBot |पत्रिका। कोलकाता अमरेन्द्र चटर्जी के एक शिष्य बसन्त कुमार विश्वास को बम फेंकने के लिए चुना गया, जो देहरादून में बोस का नौकर था।सरला १९९९ २७५ बालमुकुंद गुप्त, अवध बिहारी व मास्टर अमीर चंद ने भी इस हमले में सक्रिय रूप से भूमिका निभाई थी।
घटना
अंगूठाकार|चाँदनी चौक में ही जुलूस पर बम फेंका गया था
दिल्ली में जार्ज पंचम के १२ दिसंबर १९११ को होने वाले दिल्ली दरबार के बाद वायसराय लॉर्ड हार्डिंग की दिल्ली में सवारी निकाली जा रही थी।सरला १९९९ २७२ लार्ड हार्डिंग रत्नजड़ित पोशाक पहनकर एक हाथी पर बैठे हुए थे। उनके ठीक आगे उनकी पत्नी, लेडी हार्डिंग बैठी थी। हाथी चलाने वाले एक महावत के अतिरिक्त उस हाथी पर सबसे पीछे लार्ड हार्डिंग का एक अंगरक्षक भी सवार था। हज़ारों की संख्या में घोड़े, हाथी, तथा बन्दूकों और राइफलों से सुसज्जित कई सैनिक उनके इस काफिले का हिस्सा थे।सरला १९९९ २७२
जब यह काफिला चाँदनी चौक पहुंचा, तो वहां ये दृश्य देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कई महिलाएं चौक पर स्थित पंजाब नेशनल बैंक की छत से यह दृश्य देख रही थी। बसन्त कुमार विश्वास ने भी एक महिला का वेश धारण किया और इन्हीं महिलाओं की भीड़ में शामिल हो गया। उसने अपने आस-पास बैठी महिलाओं का ध्यान भटकाने के लिए लेडी हार्डिंग के मोतियों के हार की ओर उनका ध्यान आकृष्ट करवाया, और मौक़ा पाते ही वायसराय पर बम फेंक दिया।सरला १९९९ २७३ बम फटते ही वहां ज़ोरदार धमाका हुआ, और पूरा इलाका धुंए से भर गया। वाइसराय बेहोश होकर एक तरफ को जा गिरे।सरला १९९९ २७३ घबराकर भीड़ तितर-बितर हो गयी, और इसी का फायदा उठाकर विश्वाश वहां से बच निकले। पुलिस ने इलाके की घेराबन्दी कर कई लोगों के घरों की तलाशी भी ली, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ।सरला १९९९ २७३
हालाँकि, इस बात की पुष्टि काफी बाद में हुई कि विश्वास का निशाना चूक गया था। बम के छर्रे लगने की वजह से लॉर्ड हार्डिंग की पीठ, पैर और सिर पर काफी चोटें आयी थी।India Truly Loyal, Says Hardinge https://timesmachine.nytimes.com/timesmachine/1916/05/20/104675740.pdf New York Times 20 May 1916 उनके कंधों पर भी मांस फट गया था। लेकिन, घायल होने के बावजूद, वाइसराय जीवित बच गए थे, हालांकि इस हमले में उनका महावत मारा गया था। लेडी हार्डिंग भी सुरक्षित थी।
परिणाम
अंगूठाकार|घायल होने के बावजूद, वाइसराय हार्डिंग इस हमले में जीवित बच गए थे।
गिरफ्तारियां
बिस्वास पुलिस से बचकर बंगाल पहुँच गए थे। इसके बाद ब्रिटिश पुलिस रासबिहारी बोस के पीछे लग गयी और वह बचने के लिये रातों-रात रेलगाडी से देहरादून खिसक लिये,The other Bose https://www.telegraphindia.com/1150613/jsp/opinion/story_25354.jsp 10 अगस्त 2018 The Telegraph https://web.archive.org/web/20180810205352/https://www.telegraphindia.com/1150613/jsp/opinion/story_25354.jsp 10 अगस्त 2018 live और आफिस में इस तरह काम करने लगे मानो कुछ हुआ ही नहीं हो। अगले दिन उन्होंने देहरादून के नागरिकों की एक सभा बुलायी, जिसमें उन्होंने वायसराय पर हुए हमले की निन्दा भी की। इस प्रकार उन पर इस षडयन्त्र और काण्ड का प्रमुख सरगना होने का किंचितमात्र भी सन्देह किसी को न हुआ।क्रांतिकारियों के मार्गदर्शक थे रासबिहारी बोस https://web.archive.org/web/20180810143725/https://www.livehindustan.com/news/google/meribaat/216-216-92049.html 10 अगस्त 2018 । हिन्दुस्तान लाइव। २० जनवरी २०१०
२६ फ़रवरी १९१४ को अपने पैतृक गाँव परगाछा में अपने पिता की अंत्येष्टि करने आये बसंत को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।सरला १९९९ २७४ इसके बाद कलकत्ता के राजा बाजार इलाके में एक घर की तलाशी लेते हुए ब्रिटिश अधिकारियों को अन्य क्रांतिकारियों से संबंधित कुछ सुराग हाथ लगे। इन्हीं सुरागों के आधार पर मास्टर अमीर चंद, अवध बिहारी और भाई बालमुकुंद को भी गिरफ्तार कर लिया गया।सरला १९९९ २७५ कुल १३ लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। इन अभियुक्तों में से एक, दीनानाथ सरकारी गवाह बन गया था।जयपालन २००१ २३
मुकदमा
१६ मार्च १९१४ को मास्टर अमीर चंद, अवध बिहारी और बालमुकुंद गुप्त और सात अन्य लोगों पर दिल्ली की न्यायलय में देशद्रोह और ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ने का मुकदमा दायर किया गया। यह भी पाया गया कि १७ मई १९१३ को लाहौर में हुए एक अन्य बम हमला भी बसंत कुमार बिस्वास और उसके इन साथियों ने ही किया था।सरला १९९९ २७५ "दिल्ली षड्यंत्र केस" या "दिल्ली-लाहौर षड्यंत्र केस" नामक इस मुकदमे की सुनवाई २१ मई १९१४ को शुरू होकर १ सितम्बर १९१४ तक चली थी।सान्याल २०१४ ५६ ५ अक्टूबर १९१४ को न्यायलय ने इस मुक़दमे का फैसला सुनाया; सभी अभियुक्तों को काला पानी में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गयी थी।सरला १९९९ २७५
फैसले से नाखुश ब्रिटिश सरकार ने लाहौर हाईकोर्ट में अपील की और अंततः पंजाब के गवर्नर, सर माइकल ओ'ड्वायर के हस्तक्षेप के बाद इन सभी की सजाओं को फांसी में बदल दिया गया था।सरला १९९९ २७५ ८ मई १९१५ को दिल्ली में दिल्ली गेट से आगे स्थित वर्तमान खूनी दरवाजे के पास स्थित एक जेल में बाल मुकुंद, अवध बिहारी और मास्टर अमीर चंद को फांसी पर लटका दिया गया।8 मई को ब्रिटिश सरकार ने दी थी इन जांबाज युवाओं को फांसी https://naidunia.jagran.com/special-story-british-government-gives-death-penalty-to-these-brave-freedom-fighters-1709254 11 अगस्त 2018 Nai Dunia https://web.archive.org/web/20180811063202/https://naidunia.jagran.com/special-story-british-government-gives-death-penalty-to-these-brave-freedom-fighters-1709254 11 अगस्त 2018 dead ११ मई १९१५ को अम्बाला की सेंट्रल जेल में बसंत कुमार विश्वास को भी फांसी दे दी गयी।सरला १९९९ २७५1915: Basanta Kumar Biswas, bomber http://www.executedtoday.com/2015/05/11/1915-basanta-kumar-biswas-bomber/ ExecutedToday.com 11 अगस्त 2018 11 मई 2015 https://web.archive.org/web/20180811064902/http://www.executedtoday.com/2015/05/11/1915-basanta-kumar-biswas-bomber/ 11 अगस्त 2018 live रास बिहारी बोस, हालाँकि, पुलिस गिरफ़्तारी से बचते-बचाते घूमते रहे, और १९१६ में जापान पहुँचने में सफल हो गए थे।
प्रतिक्रियाएं
मुजफ्फरपुर में किंग्सफोर्ड पर बम हमले के बाद यह उस वर्ष का दूसरा बम हमला था।सरला १९९९ २७३ जब इस धमाके की खबर अमेरिका में लाला हरदयाल के पास पहुंची, तो वह भी इससे काफी खुश हुए। उन्होंने इसकी प्रशंशा करते हुए एक न्यूज़ बुलेटिन भी जारी किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था
"ये बम धमाका इस शाही दरबार को एक करारा जवाब है। अगर इस दरबार का आयोजन शाही इतिहास में एक स्मरणीय घटना है, तो फिर इस बम धमाके को भी क्रांतिकारी आंदोलन के इतिहास में स्वर्णाक्षरों से लिखा जायेगा। ऐसे दरबार होने दो, और ऐसे बम धमाके भी होते रहेंगे। घटनाओं का यह क्रम तब तक जारी रहेगा, जब तक कि धरती से दरबारों के आयोजन की ये व्यवस्था ही खत्म नहीं हो जाती है।"सरला १९९९ २७४
अंगूठाकार|मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज में सभी क्रांतिकारियों को समर्पित एक स्मारक उपस्थित है।
इस हमले ने ये स्पष्ट किया कि क्रान्तिकारी बंगाल, आसाम, बिहार और उड़ीसा के साथ साथ संयुक्त-प्रान्त, दिल्ली और पंजाब तक भी फैल चुके थे, हालांकि उन क्रांतिकारियों के केंद्र आज भी बंगाल ही था।सान्याल २०१४ ४७ इस हमले में प्रयोग हुआ बम भी बंगाल में ही बना था।सान्याल २०१४ ४७ ब्रिटिश सरकार भी अब पंजाब और बंगाल में पनप रहे इस क्रांतिकारी आन्दोलन को कुचलने का भरसक प्रयास करने लगी थी।
विरासत
दिल्ली में स्थित मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज में सभी क्रांतिकारियों को समर्पित एक स्मारक उपस्थित है।MAMC: A hospital where fourteen freedom fighters were hanged http://www.dnaindia.com/delhi/report-mamc-a-hospital-where-fourteen-freedom-fighters-were-hanged-2575515 11 अगस्त 2018 dna 15 जनवरी 2018 https://web.archive.org/web/20180811063738/http://www.dnaindia.com/delhi/report-mamc-a-hospital-where-fourteen-freedom-fighters-were-hanged-2575515 11 अगस्त 2018 live हम शहीदों को भूल गए https://www.nayaindia.com/reporter-diary/martyrs-tributes-master-amir-chand-bhai-bal-mukund-master-avadh-bihari-basant-kumar-biswas.html 11 अगस्त 2018 www.nayaindia.com https://web.archive.org/web/20180811065232/https://www.nayaindia.com/reporter-diary/martyrs-tributes-master-amir-chand-bhai-bal-mukund-master-avadh-bihari-basant-kumar-biswas.html 11 अगस्त 2018 dead
बाहरी कड़ियाँ
The revolutionary of Chandni Chowk The Hindu
Sourced fromजून 2020 InternetArchiveBot Hindustan Times, 19 August 2007
Indian National Congress
St Stephens College, notable alumni
सन्दर्भ
3
विस्तृत पठन
'सरला'
श्रीकृष्णन
Indian Revolutionaries 1757-1961 (Vol-2): A Comprehensive Study, 1757-1961
१९९९
प्रभात प्रकाशन
नई दिल्ली
9788187100171
https://books.google.co.in/books?id=lVx-yK6MhaQC
en
सरला १९९९
10 अगस्त 2018
https://web.archive.org/web/20180810205626/https://books.google.co.in/books?id=lVx-yK6MhaQC
10 अगस्त 2018
live
गुप्ता
अमित के
1997
Defying Death: Nationalist Revolutionism in India, 1897-1938.Social Scientist, Vol. 25, No. 9/10. (Sep. - Oct., 1997), pp. 3-27
सोशल साइंटिस्ट
0970-0293
en
हॉपकिर्क
पीटर
1997
Like Hidden Fire: The Plot to Bring Down the British Empire.
कोदंश ग्लोब
1-56836-127-0
en
जयपालन
एन॰
History of India
भारत का इतिहास
२००१
अटलांटिक
नई दिल्ली
9788171569175
https://books.google.co.in/books?id=-Z8OzIyGt0MC
१० अगस्त २०१८
en
जयपालन २००१
https://web.archive.org/web/20180811065133/https://books.google.co.in/books?id=-Z8OzIyGt0MC
11 अगस्त 2018
live
सान्याल
शुक्ल
Revolutionary Pamphlets, Propaganda and Political Culture in Colonial Bengal
औपनिवेशिक बंगाल में क्रांतिकारी पुस्तिकाएं, प्रचार और राजनीतिक संस्कृति
२०१४
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस
9781107065468
https://books.google.co.in/books?id=gIkaBQAAQBAJ
१० अगस्त २०१८
en
सान्याल २०१४
https://web.archive.org/web/20180810205128/https://books.google.co.in/books?id=gIkaBQAAQBAJ
10 अगस्त 2018
live
श्रेणी:षडयंत्र
श्रेणी:भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम
श्रेणी:दिल्ली का इतिहास