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मुहम्मद बेय अबू अल-धहब
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मुहम्मद बेय अबू अल-धहब (अरबी: محمد بك أبو الدهب; जन्म: 1735 – निधन: 1775) अठारहवीं शताब्दी के दौरान मिस्र के एक मामलुक अमीर (Emir) और शासक थे। उस्मानी साम्राज्य (Ottoman Empire) के शासनकाल के दौरान उन्होंने मिस्र के 'शेख अल-बलाद' का पद ग्रहण किया। ऐतिहासिक रूप से उन्हें अली बेय अल-कबीर के प्रमुख सैन्य कमांडर के रूप में उनके अभियानों और बाद में उसी अली बेय के विरुद्ध किए गए उनके विद्रोह के लिए जाना जाता है।
== प्रारंभिक जीवन और उपाधि ==
मुहम्मद बेय के जन्म स्थान और उनके शुरुआती जीवन के विस्तृत ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। तत्कालीन मामलुक प्रणाली के अनुसार, उन्हें काकेशस क्षेत्र से एक दास (मामलुक) के रूप में मिस्र लाया गया था। मिस्र के तत्कालीन शासक अली बेय अल-कबीर ने उन्हें खरीदा और सैन्य प्रशिक्षण दिया। समय के साथ वे अली बेय के प्रमुख सेनापतियों में से एक बन गए।
जब अली बेय ने उन्हें राज्य में 'अमीर' (कमांडर) के पद पर नियुक्त किया, तो इस नियुक्ति के अवसर पर मुहम्मद बेय ने काहिरा के निवासियों के बीच सोने के सिक्के वितरित किए। सोने के सिक्के बांटने के इस कार्य के कारण ही स्थानीय लोगों और इतिहासकारों के बीच उन्हें अबू अल-धहब (Abu al-Dhahab) नाम दिया गया, जिसका अरबी में अर्थ 'सोने वाला' (Father of Gold) होता है।
== सैन्य अभियान ==
अबू अल-धहब ने अली बेय अल-कबीर के आदेश पर कई सैन्य अभियानों का नेतृत्व किया। 1770 में, अली बेय ने उस्मानी साम्राज्य से मिस्र की स्वायत्तता स्थापित करने का प्रयास किया। इस योजना के तहत अबू अल-धहब को हेजाज़ (वर्तमान मक्का क्षेत्र) पर नियंत्रण करने के लिए भेजा गया। इस अभियान में उन्होंने उस्मानी नियंत्रण को हटाकर मक्का में अली बेय का अधिकार स्थापित किया।
1771 में अली बेय ने उस्मानी साम्राज्य के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की और अबू अल-धहब को सीरिया और फिलिस्तीन क्षेत्र की ओर भेजा। इस अभियान में, अबू अल-धहब ने गैलिली के स्थानीय शासक ज़हीर अल-उमर के साथ गठबंधन किया और उस्मानी सेनाओं से संघर्ष करते हुए दमिश्क पर अधिकार कर लिया।
== अली बेय के विरुद्ध विद्रोह ==
दमिश्क पर अधिकार करने के पश्चात्, अबू अल-धहब ने अपने सैन्य अभियान को आगे बढ़ाने से रोक दिया और अपनी सेना के साथ वापस मिस्र लौट गए। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, उस्मानी साम्राज्य के अधिकारियों ने कूटनीतिक रूप से अबू अल-धहब से संपर्क किया था और उन्हें मिस्र के शासक का पद देने का प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव के बाद वे अली बेय अल-कबीर के खिलाफ हो गए।
मिस्र लौटने के बाद उन्होंने अली बेय अल-कबीर के खिलाफ सैन्य विद्रोह कर दिया। 1772 में दोनों गुटों के बीच संघर्ष हुआ, जिसमें अबू अल-धहब की सेना ने अली बेय को मिस्र छोड़ने पर मजबूर कर दिया। अली बेय ने फिलिस्तीन में शरण ली। 1773 में सालिहिया के युद्ध में अबू अल-धहब ने अली बेय की सेना को पराजित किया। इस संघर्ष में घायल होने के कारण अली बेय को बंदी बना लिया गया और बाद में उनकी मृत्यु हो गई।
== शासक के रूप में कार्यकाल ==
अली बेय की मृत्यु के बाद, अबू अल-धहब मिस्र के शासक और 'शेख अल-बलाद' बने। सत्ता में आने के बाद उन्होंने उस्मानी सुल्तान के प्रति अपनी वफादारी व्यक्त की और मिस्र को फिर से उस्मानी साम्राज्य के नियंत्रण में ला दिया।
1775 में उस्मानी सुल्तान ने अबू अल-धहब को फिलिस्तीन में ज़हीर अल-उमर के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने का आदेश दिया। अबू अल-धहब ने सेना के साथ फिलिस्तीन की ओर प्रस्थान किया। उन्होंने याफ़ा शहर को घेरकर उस पर कब्ज़ा किया, जहाँ संघर्ष के दौरान कई लोगों की मृत्यु हुई। इसके बाद उनकी सेना ने एकड़ (Acre) शहर पर नियंत्रण स्थापित किया, जिसके कारण ज़हीर अल-उमर को वहाँ से हटना पड़ा।
== मृत्यु और स्थापत्य योगदान ==
एकड़ शहर में प्रवेश करने के कुछ दिनों बाद ही, 1775 में अबू अल-धहब बीमार पड़ गए और उनकी मृत्यु हो गई। तत्कालीन स्रोतों में उनकी मृत्यु का कारण प्लेग या तीव्र बुखार बताया गया है। उनके निधन के बाद उनकी सेना मिस्र लौट गई।
अबू अल-धहब का नाम मिस्र के इस्लामी स्थापत्य इतिहास में भी दर्ज है। 1774 में, उन्होंने काहिरा में अल-अजहर मस्जिद के निकट एक बड़ी मस्जिद का निर्माण करवाया था, जिसे आज 'मुहम्मद बेय अबू अल-धहब मस्जिद' के नाम से जाना जाता है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने इस मस्जिद के रखरखाव और इस्लामी शिक्षा के लिए एक वक्फ (Waqf) की स्थापना भी की थी। उनके द्वारा स्थापित यह संरचना आज भी काहिरा में मामलुक वास्तुकला के रूप में मौजूद है।
== सन्दर्भ ==
== विस्तृत पठन ==
al-Ǧabartī, Abdarraḥmān (1989). Bonaparte in Ägypten - Aus den Chroniken von ʿAbdarraḥmān al-Ǧabartī. Translated by Hottinger, Arnold. Munich: Piper. pp. 46–58, 332.
Bidwell, Robin Leonard (1998). Dictionary of Modern Arab History. London/New York: Keegan Paul. pp. 24–25.
Crecelius, Daniel (1978). "The Waqf of Muhammad Bey Abu al-Dhabab". Journal of the American Research Center in Egypt. 15: 83–105. डीओआई:10.2307/40000133. जेस्टोर 40000133.
Crecelius, Daniel (1981). The Roots of Modern Egypt: A Study of the Regimes of 'Ali Bey al-Kebir and Muhammad Bey Abu al-Dhabab, 1760–1775. Studies in Middle Eastern History, Vol. 6. Chicago: Bibliotheca Islamica. ISBN 978-0882970295.
Goldschmidt, Arthur; Johnston, Robert (2013). Historical Dictionary of Egypt (PDF). African Historical Dictionaries, Vol. 89. Lanham, Maryland: Scarecrow. p. 30. ISBN 978-0-8108-4856-6.
== बाहरी कड़ियाँ ==
विकिडाटा पर मुहम्मद बेय अबू अल-धहब