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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

पिनव्हील मंदाकिनी

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thumb|right|250px|एम 101 संयुक्त अवरक्त, दृश्य और एक्स-रे छवियां पिनव्हील मंदाकिनी मेसियर 101, एम॰ 101 या एन जी सी 5457 आमने-सामने, वामावर्त घूमने वाली मध्यवर्ती कुंडलाकार मंदाकिनी है। यह पृथ्वी से लगभग 21 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर उरसा मेजर तारामंडल में स्थित है। 28 फरवरी 2006 को नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष संस्थान ने पिनव्हील मंदाकिनी की सबसे विस्तृत छवि जारी की। यह हबल अंतरिक्ष दूरबीन द्वारा खींचे गई प्रकाश के संवेदनशील अवधि और कुछ अतिरिक्त ज़मीनी तस्वीरों के संयोजन से बनी थी। उस समय इसे मंदाकिनी की अब तक की सबसे बड़ी और स्पष्ट छवि माना गया।https://hubblesite.org/contents/media/images/2006/10/1865-Image.html हबल अंतरिक्ष दूरबीन का सबसे बड़ा मंदाकिनी दृश्य जो एक नया परिभाषा प्रस्तुत करता है 28 फरवरी 2006 नासा 26 दिसंबर 2024 सन् 1781 ई॰ में फ्रांसीसी खगोलशास्त्री पियरे मेचेन ने इसकी खोजा की थी। संरचना एम 101 पिनव्हील मंदाकिनी एक विशाल कुंडलाकार आकाशगंगा है, जिसका फैलाव लगभग ढाई लाख (252,000) प्रकाश वर्ष तक है। आकार के दृष्टिकोण से ये मिल्की वे से लगभग तीन गुना बड़ी है, जिसका व्यास करीब 87,400 प्रकाश वर्ष है।गिरीबिन एस॰ पी॰ गिरीबिन जे॰ हेंडरी एम॰ ए॰ अगस्त 1998 आकाशगंगा का सापेक्ष आकार वेधशाला 118 201–208 1998Obs...118..201G अनुमान है कि इसमें लगभग एक अरब तारे मौजूद हैं। कॅमेटो जी॰ मॅनेंट जी॰ रोसाडो एम॰ मार्गारीटा रोसाडो amp 1979 आकाशगंगा एम॰ 101 का एक प्रकाशीय अध्ययन - गैस के गतिकी से द्रव्यमान मॉडल की व्युत्पत्ति खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी 72 73–81 1979A&A....72...73C इसका फैलावदार चक्र लगभग 100 अरब सौर द्रव्यमान के बराबर है, जबकि केंद्र का उभरा हुआ भाग लगभग 3 अरब सौर द्रव्यमान का है। अपने आकार, चमक और संरचना की दृष्टि से यह शृंखला मंदाकिनी से काफी मिलती-जुलती है। एम॰ 101 की विशेषता ये है कि इसके असंख्य एच॰ II क्षेत्र हैं। ये ऐसे क्षेत्र होते हैं जहाँ हाइड्रोजन गैस के विशाल बादल अपने ही गुरुत्वाकर्षण के कारण सिकुड़ते हैं और नए तारे के रूप में जन्म लेते हैं। इन नवजात, गर्म और उज्ज्वल तारों की तीव्र ऊर्जा से आसपास की गैसों आपस में मिल कर चमकदार निहारिकाएँ बनाती है। इसी क्षेत्र एम 101 में विशाल गर्म बुलबुलों का निर्माण करते हैं। सन् 1990 में किए गए एक अध्ययन में इस मंदाकिनी में 1,264 एच II क्षेत्रों की पहचान की गई थी, जिनमें से तीन—एनजीसी 5461, एनजीसी 5462, और एनजीसी 5471 प्रमुख हैं। इन्हें भी देखें मिल्की वे संदर्भ श्रेणी : खगोलशास्त्र