411 REFERENCE · Wikipedia
दशरथ मौर्य
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
दशरथ मौर्य𑀤𑀲𑀭𑀳 𑀫𑁄𑀭𑀻𑀬 252 ई.पू. 224 ई.पू. दसरथ मौर्य का साम्राज्य 252 224 ई.पू. मौर्य राजवंश बौद्ध धर्म सम्प्रति देवानंप्रियचक्रवर्ती पाटलिपुत्र, मौर्य साम्राज्य पाटलिपुत्र, मौर्य साम्राज्य चौथा मौर्य सम्राट
दशरथ मौर्य (pra 𑀤𑀲𑀭𑀳 𑀫𑁄𑀭𑀻𑀬; 252 224 ई.पू.) मौर्य साम्राज्य के चौथे सम्राट थे। वो सम्राट अशोक के पौत्र थे।आषा विष्णु; Material Life of Northern India: Based on an Archaeological Study, 3rd Century B.C. to 1st Century B.C. मित्तल पब्लिकेशन्स, 1993, ISBN 978-8170994107. पृष्ठ 3.इसने आजीवक संप्रदाय के अनुयायियों को नागार्जुन गुफा प्रदान की थी।इन पहाड़ियों की गुहाओं पर उत्कीर्ण अभिलेखों को पढ़ने से ज्ञात होता हैं कि अपने दादा सम्राट अशोक की भाँति दशरथ भी बौद्ध अनुयायी होने कर कारण देवताओं का प्रिय अर्थात देवानाम्प्रिय नामक नाम से जाना जाता था।http://archive.org/details/sanskrit-hindi-sahitya-27 Sanskrit Hindi Sahitya -27 Sarvahitkari 2021-05-17
शासन व्यवस्था
दशरथ के समय में भी मागध साम्राज्य का पतन जारी रहा। इनके अंधे हो जाने और काम दूरदर्शी होने के दक्षिणपथ मौर्य शासन व्यवस्था से अलग हो गए।http://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.490076 Bhaarat Kaa Praachiin Itihaas Vidyaln’kaar Satyaketu 1953
न्याय व्यवस्था
चोरी डकैती व लूट के मामले , मानहानि, कुबचन, मार-पीट सम्बन्धी मामले भी धर्मस्थीय न्यायालय में लाए जाते थे। जिन्हें वाक पारुष या दण्ड पारुष कहा जाता है। जनपद न्यायाधीश को रज्जुक कहा जाता था और व्यावहारिक महामात्र को नगर न्यायधीश कहा जाता था।उस समय सबसे निचले स्तर पर ग्राम न्यायालय था जहां ग्राम के बूढ़े और अन्य ग्रामीण फैसला करते थे। 'द्रोण-मुख' एवं संग्रहण स्थानीय तथा जनपद स्तर के न्यायालय होते थे।https://www.hindwi.org/hindi-dictionary/meaning-of-drona-mukh द्रोण-मुख के हिंदी अर्थ द्रोण-मुख meaning in Hindi हिन्दवी Hindwi hi 2023-07-27 द्रोण न्यायालय के अधीन 400 ग्राम होते थे। |https://sikshadiksha.in/murya-samrajya-nayay-and-aarthik-prasashan/2021/ मौर्य साम्राज्य 323- 184 ईसा पूर्व/न्याय प्रशासन तथा आर्थिक प्रशासन – SikshaDiksha sikshadiksha.in 2023-07-27 27 जुलाई 2023 https://web.archive.org/web/20230727102157/https://sikshadiksha.in/murya-samrajya-nayay-and-aarthik-prasashan/2021/ dead
धर्मस्थीय न्यायालयों के अंतर्गत न्याय धर्मशास्त्र में दक्ष तीन धर्मरथ या व्यावहारिक एवं अमात्य मिलकर न्याय किया करते थे। इनका रूप एक प्रकार से दीवानी अदालतों की तरह होता था।“कण्टक शोधन' न्यायालयों के अंतर्गत तीन प्रवेष्टि एवं तीन अमात्य मिलकर न्याय करते थे। उनके न्याय का विषय राज्य एवं व्यक्ति के बीच का विवाद होता था। इसका रूप एक तरह से फौजदारी आदालतों जैसा होता था।https://books.google.com/books?id=shm4DQAAQBAJ&newbks=0&printsec=frontcover&pg=PA54&dq=%E0%A4%95%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%95-%E0%A4%B6%E0%A5%8B%E0%A4%A7%E0%A4%A8+%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF&hl=en Political Science eBook: Latest Edition Sharma Dr Harishchandra 2016-12-15 SBPD Publications 978-93-84223-71-7 hi
कला और साहित्य
उस काल में मौर्यों ने वास्तुकला में उल्लेखनीय योगदान दिया और व्यापक पैमाने पर पत्थर की चिनाई की शुरुआत की।https://www.indianhistorys.com/%E0%A4%AE%E0%A5%8C%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A4%AD%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95/ मौर्य कालीन सभ्यता संस्कृति 2020-04-19 INDIANHISTORYS.COM en-US 2023-08-28 28 अगस्त 2023 https://web.archive.org/web/20230828024619/https://www.indianhistorys.com/%E0%A4%AE%E0%A5%8C%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A4%AD%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95/ dead
सामाजिक व्यवस्था
दशरथ मौर्य के काल तक समाज में वर्ण व्यवस्था का प्रचलन बढ़ने लगा था । ६ वर्गीय समाज ४ वर्गीय समाज बनने की ओर बढ़ रहा था।https://edurev.in/t/95301/%E0%A4%AE%E0%A5%8C%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B0%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0 मौर्य काल - प्राचीन भारत की सामाजिक संरचना में परिवर्तन, इतिहास, यूपीएससी, आईएएस इतिहास (History) for UPSC CSE in Hindi PDF Download 2017-11-08 EDUREV.IN en 2023-08-28
आर्थिक स्थिति
करों को कम करने से सामान्य जन की आर्थिक स्थिति में सुधार हुवा किन्तु राजकीय कोष पर इसका बुरा असर पड़ा।
thumb| दसरथ मौर्य का सिक्के
हिन्दू पुराणों में दशरथ मौर्य
हिन्दू पुराणों में भी दशरथ मौर्य का वर्णन है :
ततश्च नव चैतान्नन्दान् कौटिल्यो ब्राह्मणस्स- मुद्धरिष्यति ॥२६॥
तेषामभावे मौर्याः पृथिवीं भोक्ष्यन्ति ॥२७॥
कौटिल्य एव चन्द्रगुप्तमुत्पन्नं राज्येऽभिषेक्ष्यति ॥२८॥
तस्यापि पुत्रो बिन्दुसारो भविष्यति ॥२९॥
तस्याप्यशोकवर्द्धनस्ततस्सुयशास्ततश्च दशरथ- स्ततश्च संयुतस्ततश्शालिशूकस्तस्मात्सोमशर्मा तस्यापि सोमशर्मणश्शतधन्वा ॥३०॥
तस्यापि बृहद्रथनामाभविता ॥३१॥
एवमेते मौर्या दश भूपतयो भविष्यन्ति अब्दशतं सप्तत्रिंशदुत्तरम् ॥३२॥
(विष्णु पुराण: अंश 4 : अध्याय 24)http://archive.org/details/vishnu-puran-gita-press_202211 304 Vishnu Puran Gita Press Maharshi Veda vyasa 2022-11-28
अनुवाद : तदनन्तर इन नवो नन्दोको कौटिल्य नामक एक ब्राह्मण नष्ट करेगा, उनका अन्त होने पर मौर्य नृपतिगण पूर्ण पृथिवी पर राज करेंगे। कौटिल्य चन्द्रगुप्त को राज्याभिषिक्त करेगा ।।२६-२८।। चंद्रगुप्त का पुत्र बिन्दुसार, बिन्दुसार का अशोकवर्धन, अशोकवर्धन का सुयश, सुयश का दशरथ, दशरथ का संयुत, संयुत का शालिशूक, शालिशूक का सोमशर्मा, सोमशर्मा का शतधन्वा तथा शतधन्वा का पुत्र बृहद्रथ होगा। इस प्रकार एक सौ तिहत्तर वर्षतक ये दस मौर्यवंशी राजा राज्य करेगे ॥ २९-३२॥
राजा दशरथोऽष्टौ तु तस्य पुत्रो भविष्यति ।
भविता नव वर्षाणि तस्य पुत्रश्च सप्ततिः ॥
इत्येते दश मौर्यास्तु ये भोक्ष्यन्ति वसुंधराम्।(मत्स्य पुराण : अध्याय 272 : श्लोक 25)https://getwisdom.in/index.php?flg=N&pmd=W&mdi=L&thm=2&vip=puran&puran=16+Matsya&sec=1&pn=1026&chap=272&act=next&cod=fish&bn1=chap&bn=page Matsya Purana : Chapter 272 Gita Press getwisom.in
अनुवाद : उसका पुत्र दशरथ होगा, जो आठ वर्षों तक राज्य करेगा। तदनन्तर उसका पुत्र उन्नासी वर्षों तक राज्य करेगा। ये दस मौर्यवंशीय राजा एक सौ सैंतीस वर्षों तक पृथ्वी पर शासन करेंगे।
सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य
नागार्जुनी पहाड़ी पर 3 गुफाएँ हैं इन गुफाओं का निर्माण अशोक के पौत्र दशरथ मौर्य ने आजीविकों के लिए करवाया - वहियक गुफा, गोपिका गुफा, वडथिका गुफा, इन तीनों गुफाओं को दशरथ ने आजीवकों को दान दिया था। “लोमश ऋषि गुफा” का निर्माण दशरथ ने करवाया था । लोमेश ऋषि गुफा का प्रवेश द्वारा उत्कीर्ण शिल्प से अलंकृत है।
वहियक गुफालेख : मूलपाठhttp://archive.org/details/ZTTk_prachin-bharatiya-abhilekh-sangrah-vol-1-trans-and-compiled-by-shri-ram-goyal-ra Prachin Bharatiya Abhilekh Sangrah Vol 1 Trans And Compiled By Shri Ram Goyal Rajasthan Hindi Granth Academy, Jaipur Rajasthan Hindi Granth Academy Jaipur
thumb|वहियक गुफालेख
वहियक कुभा दषलथेन देवानांपियेना
आनन्तलियं अभिषितेना आजीवकेहि
भदन्तेहि वाष-निषिदियाये निषिठे
आ-चन्दम-षूलियं
हिन्दी अनुवाद - वहियक गुफा देवताओं के प्रिय दशरथ ने अभिषिक्त होने के तत्काल बाद आनन्तर्य, बिना अन्तर आजीवक भिक्षुओं के निषिद्धवास ( वर्षाकाल में जब भिक्षु बाहर नहीं जा सकते थे ) के लिए बनवाया। जब तक सूर्य-चन्द्र रहें।
गोपिका गुफालेख : मूलपाठhttp://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.424139 Ashok Ke Abhilek Ac 4603 Digital Library Of India Cdac Noida 1962
thumb|गोपिका गुफालेख
गोपिका कुभा दषलथेना देवानंपि-
येना आनन्तलियं अभिषितेना आजी-
विकेहि भदन्तेहि वात-निषिदियाये
निसिठा आ-चन्दम-षूलियं
हिन्दी अनुवाद - गोपिका गुहा देवताओं के प्रिय दशरथ ने अभिषेक होने के बाद ही आजीवक भदन्त भिक्षुओं के निषिद्ध-वास के लिए बनवाया। जब तक चन्द्र-सूर्य रहें।
वडथिका गुफालेख : मूलपाठhttp://archive.org/details/dli.calcutta.10654 Select inscriptions bearing on Indian History and civilization Dines Chandra Sircar M. A. 1942
thumb|वडथिका गुफालेख
वडथिका कुभा दषलथेना देवानं-
पियेना आनन्तलियं अभिषेतना [आ]
[जी] विकेहि भदन्तेहि वा[ष-निषि] दियाये
निषिठा आ चन्दम-षूलियं
हिन्दी अनुवाद - वडथिका गुहा देवताओं के प्रिय दशरथ ने अभिषेक होने के बाद ही आजीवक भिक्षुओं के निषिद्धवास के लिए बनवाया। जब तक चन्द्र-सूर्य रहें।
इन्हें भी देखें
बराबर गुफाएँ
Maurya Empire Infobox background-color:#E68A00 मौर्य साम्राज्य y font-weight:bold;border-right:1px #fefefe solid font-weight:bold;border-left:1px #fefefe solid 150px 115px font-weight:bold;border-right:1px #fefefe solid font-weight:bold;border-left:1px #fefefe solid background-color:#FFB84D सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य (322 ईसा पूर्व – 297 ईसा पूर्व) background-color:#FF9900 सम्राट बिन्दुसार मौर्य (297 ईसा पूर्व – 273 ईसा पूर्व) background-color:#FFB84D सम्राट अशोक महान (268 ईसा पूर्व – 232 ईसा पूर्व) background-color:#FF9900 सम्राट दशरथ मौर्य (232 ईसा पूर्व – 224 ईसा पूर्व) background-color:#FFB84D सम्राट सम्प्रति मौर्य (224 ईसा पूर्व – 215 ईसा पूर्व) background-color:#FF9900 सम्राट शालिसुक मौर्य (215 ईसा पूर्व – 202 ईसा पूर्व) background-color:#FFB84D सम्राट देववर्मन मौर्य (202 ईसा पूर्व – 195 ईसा पूर्व) background-color:#FF9900 सम्राट शतधन्वन मौर्य (195 ईसा पूर्व – 187 ईसा पूर्व) background-color:#FFB84D सम्राट बृहद्रथ मौर्य (187 ईसा पूर्व – 185 ईसा पूर्व)
श्रेणी:भारत के सांचे
सन्दर्भ
मौर्य राजवंश
अशोक
मौर्य साम्राज्य 232–224 ई॰पू॰
सम्प्रति
श्रेणी:मौर्य काल