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इस्माईल प्रथम
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जून 2015इस्माइल प्रथम Shah Ismail I Safavid, Behzad.jpg शाह इस्माइल प्रथम, कमालुद्दीन बेहज़ाद द्वारा चित्रकला। तोपकापी महल संग्रहालय, H.2169।Mahir Banu Thirteenth International Congress of Turkish Art: Proceedings Album H.2169 in the Topkapi Palace Museum Library (p.465-) 2009 Hungarian National Museum 978-963-7061-65-3 471, 476 https://books.google.com/books?id=LWtEAQAAIAAJ&pg=PA471 en Géza Dávid Ibolya Gerelyes The image is of Shah Ismail I, and the note at the bottom edge ('Kalem-i şikeste-i fakir Behzad') identifies the drawing as the copy of an original by BihzadAfyoncu Erhan Erhan Afyoncu Yavuz'un küpesi 2010 Yeditepe İstanbul 978-605-4052-35-6 https://books.google.com/books?id=r-pQAQAAIAAJ&pg=PA471 Şah Ismail (TSMK, nr. Hazine 2169, vr. 64b)Necipoğlu Gülru Word and Image: The Serial Portraits of Ottoman Sultans in Comparative Perspective 1 January 2000 52 https://www.academia.edu/42537068/Word_and_Image_The_Serial_Portraits_of_Ottoman_Sultans_in_Comparative_Perspective Copy of a seated portrait of Shah Isma'il I from a lost original, ascribed to Bihzad, undated, Istanbul, Topkapı Sarayı Müzesi, H. 2169, fol. 64v ईरान के शाह 22 दिसंबर 1501 – 23 मई 1524 अमीर ज़करियामहमूद जान दैलमीनज्म-ए-सानीअब्दुल बाक़ी यज़्दीमिर्ज़ा शाह हुसैनजलालुद्दीन मुहम्मद तबरेज़ी वज़ीर तहमास्प प्रथम 17 जुलाई 1487 अर्दाबील, अक़ क़ोयुनलू 1524 5 23 1487 7 17 y तबरेज़, सफ़वी ईरान ताजलू ख़ानमबहरोज़ा ख़ानम तहमास्प प्रथमसाम मिर्ज़ाअलक़ास मिर्ज़ाबहराम मिर्ज़ापरी ख़ान ख़ानममहीनबानो ख़ानम #संतान अन्य अबुल मुज़फ़्फ़र इस्माइल इब्न शेख़ हैदर इब्न शेख़ जुनैद शाह इस्माइल प्रथम सफ़वी शेख़ हैदर आलमशाह हलीमा बेगम शिया इस्लाम सफ़विया के 8वें शेख़
1494 23 मई 1524 अली मिर्ज़ा सफ़वी तहमास्प प्रथम शेख़ सफ़ी मक़बरा, अर्दाबील, ईरान 80px
इस्माइल प्रथम (fa اسماعیل یکم; 17 जुलाई 1487 – 23 मई 1524) ईरान के सफ़वी वंश का प्रथम शासक था जिसने ईरान पर शासन किया। उसके शाह बनने के समय वो सिर्फ़ 14 साल का था और उसे उसके विरोधियों के साथ किए क्रूर कृत्यों के लिए भी जाना जाता है। इसके पहले सफ़वी वंश उत्तर-पश्चिमी ईरान में एक सीमित संगठन था। १५०१ में इस्माइल ने तबरेज़ पर अधिकार कर लिया और ख़ुद को शाह घोषित कर दिया। उसके पिता शिया बने थे, हाँलांकि उसके पूर्वज सुन्नी और सूफ़ी थे। उसने शिया इस्लाम को पहली बार सैनिक और कठोर रूप दिया। उसके बाद से ईरान संपूर्ण रूप से शिया बन गया और आज तक है। उसने अपनी प्रजा पर प्रथम शिया इमाम अली, जिनको सुन्नी चौथे ख़लीफ़ा के रूप में मानते हैं, के पहले के तीन ख़लीफ़ाओं को गाली देने की प्रथा चलाई। हाँलांकि ईरान में शिया सहानूभूति सदियों से थी पर उसको ही ईरान को मुख्य रूप से शिया बनाने के श्रेय दिया जाता है क्योंकि उसी के शासन काल में शिया मुस्लिम सदियों के बाद पहली बार सामरिक रूप से सबल और स्थापित हो सके थे।
वो एक कवि भी था और उसको अज़रबैजानी भाषा के साहित्य में सम्माननीय स्थान मिला हुआ है। वो ख़ताई (पाप करने वाला) के नाम से लिखता था।
शासन
1501 में अपने पिता की मृत्यु के बाद, जब वो सिर्फ़ 14 साल का था उसने तबरेज़ पर अधिकार कर लिया। उसने शिया इस्लाम को राजधर्म बनाने का संकल्प लिया। तबरेज़ और पूर्वी अनातोलिया में उसके कई समर्थक बने। उज़्बेको के विद्रोह को दबाने के लिए वो उत्तर पूर्व की तरफ़ गया जहाँ मुहम्मद शायबानी को मारने के बाद उसके सर को उसने एक प्याले के रूप में बनाया। दो और विद्रोहियों को पकड़ने के बाद उनके शव को कबाब के रूप में भुनवा कर उसने अपने समर्थकों को उसे खान को कहा। अनातोलिया के पूर्व में अपने साम्राज्य में शिया इस्लाम का समर्थक देख उस्मानी तुर्कों ने इस्माइल के राज्य पर आक्रमण किया। चल्दिरान की लड़ाई में उसकी हार हुई जिसमें तुर्कों ने तोपों और बारूद का इस्तेमाल किया था। इसके बाद वो शराबी बन गया और 36 साल की आयु में उसकी मौत हो गई।
श्रेणी:सफ़वी वंश